Radha krishna
Radha krishna Aug 26, 2017

यहां भगवान गणेश से मिलने खुद भोलेनाथ आए थे

यहां भगवान गणेश से मिलने खुद भोलेनाथ आए थे

#गणेशजी #महादेव
यहां भगवान गणेश से मिलने खुद भोलेनाथ आए थे, पूरी होती है हर मनोकामना
भगवान मयूरेश्वर का यह मंदिर पुणे से तकरीबन 80 किलोमीटर दूर मोरगावं में स्थित है।

मयूरेश्वर अष्टविनायक मंदिर

मयूरेश्वर मंदिर पर हर साल लाखों की संख्या में गणेश भगवान के दर्शन के लिए भक्त आते है। मोरगावं भगवान गणेश जी के पूजा व् आस्था का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। मयूरेश्वर अष्टविनायक मंदिर की वास्तुकला अपने आप में अनोखी है। इस मंदिर की बनावट मुगल वास्तुकला को दर्शाता है। इस मंदिर के चारो कोनो में मीनार है और बड़े बड़े भीमाकय पत्थरो की दीवार से चार दरवाजे भी हैं जिनके पीछे मान्यता है की यह दरवाजे सतयुग,द्वापर ,त्रेता और कलयुग के प्रतीक है।

भगावान मयूरेश्वर से जुड़ी रोचक कहानी

श्री मयूरेश्वर की यह मूर्ति पहले छोटी थी। लेकिन यहां आने वाले सैकड़ो साल से आने भक्तो द्वारा इस मूर्ति पर सिंदूर लगाने इस पवित्र मूर्ति की आकार अपने आप बढ़ गई। यहां यह भी मान्यता है की इस मूर्ति को पवित्र करने के लिए खुद ब्रम्हलोक से ब्रम्हदेव खुद दो बार धरती पर आये थे। यही नही इस मंदिर के बारे में यह भी मान्यता है की ब्रम्हा ने हर काल में भगवान गणेश के प्रकट होने का आशीर्वाद दिया था। जिसमे भगवान मयूरेश्वर का अवतार त्रेता युग में हुआ था। इस युग में दानवो के वध के बाद भगवान गणेश मोरश्वर में रहने लगे जिसके कारण इन्हे मयूरेश्वर नाम से भक्त पुकारने लगे।

यहां गणेश भगवान से मिलने खुद शिव खुद आये थे

इस मंदिर में प्रांगण में आते ही आप को नंदी महाराज के दर्शन होंगे। अमूमन ऐसा देखा गया है की भगवान शिव के मंदिर के बाहर नंदी महराज विराजते है लेकिन इस मंदिर में आपको नंदी खुद मिलेंगे। कहा जाता है की इस मंदिर में शिव भगवान और नंदी ने एक दिन विश्राम किया था जब दूसरे दिन चलने की बारी आयी तो उन्होंने जाने से मन कर दिया।

ऐसी मान्यता है की अगर आप अष्टविनायक के दर्शन पर जाते हैं और मयूरेश्वर गणेश का दर्शन नही करते है तो आप की मनोकामना अधूरी मानी जायेगी। हर साल गणेश चतुर्थी पर लाखो की संख्या में भक्त अपने लाडले मयूरेश्वर भगवान का दर्शन करने के लिए यहां पर बड़ी आस्था के साथ आते है और मुरादे पूरी होने भगवान गणेश की सबसे पसंदीदा लड्डू या मोदक का भोग लगाते हैं। शायद यही कारण है की जब भक्त खुद को असहाय महसूस करते है तो चले आते है इस सर्व मनोकाना पूरक मयूरेश्वर भगवान की शरण में।

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Mamta Sharma Mar 27, 2020

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Lakhi Jhunjhunwala Mar 27, 2020

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Mamta Sharma Mar 27, 2020

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Mamta Sharma Mar 27, 2020

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