nandkishor
nandkishor Jun 3, 2018

नहीं चाहिए दिल दुखाना किसी का

https://youtu.be/hUVZGZ6d3Bk

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Ansouya M 🍁 May 15, 2021

🙏🙏श्री गणेशाय नमः 🌹🙏🌹🙏 🙏🙏🙏🙏🙏जय श्री राधे कृष्ण 🙏🙏🕉 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏शुभ संध्या आप सभी को जी 🙏🙏🙏🙏🌿इंसान बहरा नहीं लेकिन सुनता भी नहीं🌿 किसी सज्जन ने कहा कि सच्चे गुरु एक ही बात को हर बार दोहराते हैं। बार-बार स्वांस और शांति-शांति दोहराते रहते हैं तो बोरिंग होने लगती है। एक बार सुन लिया काफी है। इसका बहुत ही सुंदर उत्तर इस प्रकार है। सच्चे गुरु परलोक और शास्त्र की बातें नहीं करते। वे इतना ही बताते हैं जो करना बहुत जरूरी है। ज्यादा व्यर्थ की विस्तार की बातें बताने से मनुष्य भटक जाता है। इन्हीं विस्तार की बातों से मनुष्य बहुत पहले से ही भटका हुआ है। सच्चे गुरु स्वांसों के सत्य ज्ञान की थोड़ी सी ही क्रिया देते हैं। स्वांस ही जीवन का आधार है। अगर स्वांसों के होते इंसान क्रियाओं का अभ्यास कर ले तो उस क्रिया में इतनी बड़ी आग है जो अंधकार को जला डालती है। क्रिया की आग से मनुष्य के भीतर का शांति रूपी स्वर्ण निखर कर बाहर आ जाता है। सच्चे गुरु सार्थक को ही बार-बार दोहराते हैं ताकि सतत चोट पड़ती रहे। इंसान की तंद्रा ऐसी है कि बार-बार दोहराने पर भी सुन ले तो वह भी आश्चर्य है। सच्चे गुरु जानते हैं कि तुम बहरे नहीं हो लेकिन सुनते भी नहीं हो। तुम सोये हुए भी नहीं हो। इंसान अगर सोया हुआ होता तो जगाना आसान था। लेकिन इंसान जागे हुए सोने का ढोंग करता है और जागते हुए भी उठना नहीं चाहता। इंसान सुनता हुआ मालुम पड़ता है और सुनता भी नहीं है। इसलिए सच्चे गुरु बार-बार स्वांस और शांति-शांति दोहराते हैं। उनकी सारी आकांक्षा मनुष्य केंद्रित है। सबके उपर मनुष्य का सत्य है और जीवन का आधार स्वांस है। जिसने स्वयं के सत्य को साक्षी भाव से जान लिया, उसे कुंजी मिल गई। फिर पूर्ण सत्य और शांति का द्वार उसके लिए खुला है। इसलिए सच्चे गुरु बार-बार दोहराते हैं ताकि तुम इसे सुनकर मन की स्मृति में संगृहीत न कर सको बल्कि हृदय की गहराई में ले जाकर अपने जीवन के आचरण में उतार सको। अगर सच्चे गुरु के वचनों को क्रियाओं के अभ्यास से जीवन की शैली बना लो तो तुम पाओगे कि तुम्हारे भीतर शांति का उभरना शुरू हो गया। तब ऐसी घटना घटती है, जो संसार के नियमों, शब्दों, समय के पार है। गुलाब, चमेली, चंदन की सुगंध वायु की विपरीत दिशा में नहीं जाती। लेकिन जिसके भीतर शांति का फूल खिल गया उसकी सुगंध विपरीत दिशा में भी जाती है और सभी दिशाओं में फैल जाती है। तुम्हारे हृदय के भीतर अनहद नाद की जो वीणा सोई पड़ी है उसके स्वांस रूपी तारों को अभ्यास से छेड़ो और उसे प्रगट हो जाने दो। प्रत्येक व्यक्ति अपने भीतर शांति को लेकर चल रहा है। जब तक उसका फूल न खिले, तब तक बेचैनी रहेगी, अशांति रहेगी, दुख रहेगा। शांति का फूल खिल जाए, वही परम आनंद है, वही मोक्ष है और वही सच्चिदानंद है। 🙏🙏🙏जय सच्चिदानंद जी🙏🙏

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Gajendrasingh kaviya May 15, 2021

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Ravi Kumar Taneja May 15, 2021

🌹🌹 *परिवार दिवस की शुभकामनाएं*🌹🌹 🌼 *एक अच्छी सुबह,* *एक अच्छी उम्मीद,* *सब अच्छा होगा*🌼 🌲 *जीवन में थोड़ा सा भय भी ज़रुरी है* *मौत का भय जीवन की रक्षा करता है*🌲 🌲 *बीमारी का भय स्वास्थ्य की रक्षा करता है*🌲 🌲 *गलती का भय सही राह दिखता है*🌲 🌲 *दुःख का भय नेकी के रास्ते बनाये रखता है*🌲 🌲 *पैसा सिर्फ लाइफस्टाइल बदल सकता है* *दिमाग,नियत और किस्मत नहीं*🌲 🌲 *जिस आदमी के पास एक चेहरा है,* *उस आदमी को तनाव नहीं होता है*🌲 *🌼तनाव चेहरों को बदलने से होता है* *इसलिए जो बदला जा सके उसे बदलो,*🌼 🏹 *जो बदला ना जा सके उसे स्वीकारों,* *और जो स्वीकारा ना जा सके* *उससे दूर हो जाओ* *लेकिन स्वयं को खुश रखो*🏹 🕉 *डर* से बड़ा कोई *वायरस* नहीं,, और *हिम्मत* से बड़ी कोई *वैक्सीन* नहीं...🕉 🌹 *स्वस्थ रहें,मस्त रहे, आनंदित रहे,खुश रहे,सुखी रहे, एवं मजे करें 🌹 *🕉 *सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया!*🤲 *सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित् दुःख भाग् भवेत्!!🤲*🕉 🕉सभी सुखी होवें, सभी रोगमुक्त रहें, सभी मंगलमय के साक्षी बनें और किसी को भी दुःख का भागी न बनना पड़े।🕉 *जय बजरंग बली* आप सबकी हिफाजत करना,जान किसी की भी हो सबको सलामत रखना🕉🦚🦢🙏🌼🙏🦢🦚🕉

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Ramesh Kumar Shiwani May 15, 2021

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mamta kushwah May 15, 2021

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Manoj manu May 15, 2021

🚩🔔🏵जय श्री राम जी राधे राधे जी 🌿🏵🙏 🌹🌹ईश्वर कहाँ मिलेंगे आईये जानते हैं श्री राम चरित। मानस ज्ञान से ,बाबा श्री तुलसी दास जी :- 🌹🌹जाके हृदयँ भगति जसि प्रीती। प्रभु तहँ प्रगट सदा तेहिं रीती॥ 🌹🌹तेहिं समाज गिरिजा मैं रहेऊँ। अवसर पाइ बचन एक कहेउँ॥ भावार्थ:-जिसके हृदय में जैसी भक्ति और प्रीति होती है, प्रभु वहाँ (उसके लिए) सदा उसी रीति से प्रकट होते हैं। हे पार्वती! उस समाज में मैं भी था। अवसर पाकर मैंने एक बात कही-॥ 🌹🌹हरि ब्यापक सर्बत्र समाना। प्रेम तें प्रगट होहिं मैं जाना॥ 🌹🌹देस काल दिसि बिदिसिहु माहीं। कहहु सो कहाँ जहाँ प्रभु नाहीं॥ भावार्थ:-मैं तो यह जानता हूँ कि भगवान सब जगह समान रूप से व्यापक हैं, प्रेम से वे प्रकट हो जाते हैं, देश, काल, दिशा, विदिशा में बताओ, ऐसी जगह कहाँ है, जहाँ प्रभु न हों॥ 🌹🌹अग जगमय सब रहित बिरागी। प्रेम तें प्रभु प्रगटइ जिमि आगी॥ 🌹🌹मोर बचन सब के मन माना। साधु-साधु करि ब्रह्म बखाना॥ भावार्थ:-वे चराचरमय (चराचर में व्याप्त) होते हुए ही सबसे रहित हैं और विरक्त हैं (उनकी कहीं आसक्ति नहीं है), वे प्रेम से प्रकट होते हैं, जैसे अग्नि। (अग्नि अव्यक्त रूप से सर्वत्र व्याप्त है, परन्तु जहाँ उसके लिए अरणिमन्थनादि साधन किए जाते हैं, वहाँ वह प्रकट होती है। इसी प्रकार सर्वत्र व्याप्त भगवान भी प्रेम से प्रकट होते हैं।) मेरी बात सबको प्रिय लगी। ब्रह्माजी ने 'साधु-साधु' कहकर बड़ाई की॥ 🌺🌿प्रभु श्री राम जी सभी का सदा कल्याण करें सदा मंगल प्रदान करें जय श्री राम जी 🌿🌹🌿🌹🌿🙏

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