NK Pandey
NK Pandey Feb 13, 2019

NK Pandey Hath Ke Darshan Karana Prati Din Vadik Mantra Ke Sath

NK Pandey
Hath Ke Darshan Karana Prati Din
Vadik Mantra Ke Sath

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कामेंट्स

Manju Pathak Feb 15, 2019
🌹🌹आपका स्वागत धन्यवाद आभार 🌻🙏आपके परिवार पर श्री लक्ष्मी नारायण का स्नेह एवं कृपा बनी रहे 💐💐सुप्रभातम 🎉🎉🎉शहीदों को श्रद्धांजलि

sita Feb 15, 2019
Jai Mata Di sat sat Naman Veer shahido ko Mata Rani Unki Aatma ko Shanti De🙏🙏🌹

Anjana Gupta Feb 15, 2019
om shanti om 🙏 desh ke veer sheed avano ko mera sat sat naman bhai ji 🙏🙏 jai hind jai bharat jai hind ki sena ji 🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳

Anita Mittal Feb 15, 2019
जय श्री कृष्णा जी कान्हाजी का आशीर्वाद व स्नेह आपके साथ बना रहे जी

Neeru Miglani Feb 15, 2019
💐💐💐💐💐💐💐 जो देश के लिए शहीद हुए उनको मेरा सलाम है अपने खून से इस जमीं को सींचा उन बहादुरों को सलाम है 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 #शहीदों_को_नमन

Vishnu mishra Feb 15, 2019
🌱🌷🌱jai hind jai Bharat Banda mataram 🙏🙏⚘⚘

Alka Devgan Feb 15, 2019
veer jawano ko sat sat naman 🙏 Bagwan unki aatma ko shanti de n unke parivar ko iss dukh ko sahne ki shakti dein 🙏 Jai Hind 🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳

Mohan mira nigam1951 Feb 15, 2019
jay shriRam jay shriRam jay shriRam jay shriRam hanuman ji shriRam jay Jay.mata.ki Har Har mahadev om.sai.ñath jay shriBholay.baba.ki om.sai.ñath

Malkhan Singh Feb 15, 2019
*🇮🇳🙏वन्देमातरम🙏🇮🇳* *फोन उठाने से भी डर रही है हर वो माँ आज * *जिसका बेटा जम्मू_कश्मीर में तैनात है * *सादर_श्रद्धाजंलि *जय हिंद* जम्मू कश्मीर के पुलवामा मे हुए आतंकी हमले में शहीद CRPF के जवानों को हम तभावभीनी अश्रुपूरित श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं व घायलों के शिध्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं *🇮🇳🌹🙏वन्देमातरम🙏🌹🇮🇳*

Malkhan Singh Feb 15, 2019
सुख भरपूर गया, मांग का सिंदूर गया , नन्हे नौनिहालों की लंगोटियाँ चली गयीं .. बाप की दवाई गयी , भाई की पढ़ाई गयी , छोटी छोटी बेटियों की चोटियाँ चली गयीं... ऐसा विस्फोट हुआ , जिस्म का पता ही नहीं, पूरे जिस्म की ही, बोटियाँ चली गयीं . कुछ के लिये तो बस 44 आदमी मरे हैं साहब, किन्तु उनके घर की तो .. *रोटियाँ चली गयीं ...* *शहीदों को नमन 💐💐💐* 🇮🇳🙏जय माँ भारती🙏🇮🇳

K K MORi Feb 15, 2019
. JAY HIND BHARAT Maa ke veer sheed javano ko sat sat naman🙏

Vishnu mishra Feb 15, 2019
🌱🌷🌱jai mata di 🌱🌷🌱sat sat naman jai hind jai Bharat Banda mataram 🙏🙏⚘⚘

Malkhan Singh Feb 15, 2019
*जम्मू-कश्मीर के पुलवामा मे हुए आतंकी हमले ने मन को झंझोर कर रख दिया है....* *देश के बहादुर शहीद जवानों को* *🇮🇳🙏शत्-शत् नमन्🙏🇮🇳*

Anuradha Tiwari Mar 25, 2019

पवित्र शंख के जानिए 12 चमत्कारिक रहस्य!!!!!!!!! क्या शंख हमारे सभी प्रकार के कष्ट दूर कर सकता है? भूत-प्रेत और राक्षस भगा सकता है? क्या शंख में ऐसी शक्ति है कि वह हमें धनवान बना सकता है? क्या शंख हमें शक्तिशाली व्यक्ति बना सकता है? पुराण कहते हैं कि सिर्फ एकमात्र शंख से यह संभव है। शंख की उत्पत्ति भी समुद्र मंथन के दौरान हुई थी। शिव को छोड़कर सभी देवताओं पर शंख से जल अर्पित किया जा सकता है। शिव ने शंखचूड़ नामक दैत्य का वध किया था अत: शंख का जल शिव को निषेध बताया गया है। शंख के नाम से कई बातें विख्यात है जैसे योग में शंख प्रक्षालन और शंख मुद्रा होती है, तो आयुर्वेद में शंख पुष्पी और शंख भस्म का प्रयोग किया जाता है। प्राचीनकाल में शंक लिपि भी हुआ करती थी। विज्ञान के अनुसार शंख समुद्र में पाए जाने वाले एक प्रकार के घोंघे का खोल है जिसे वह अपनी सुरक्षा के लिए बनाता है। शंख से वास्तुदोष ही दूर नहीं होता इससे आरोग्य वृद्धि, आयुष्य प्राप्ति, लक्ष्मी प्राप्ति, पुत्र प्राप्ति, पितृ-दोष शांति, विवाह आदि की रुकावट भी दूर होती है। इसके अलावा शंख कई चमत्कारिक लाभ के लिए भी जाना जाता है। उच्च श्रेणी के श्रेष्ठ शंख कैलाश मानसरोवर, मालद्वीप, लक्षद्वीप, कोरामंडल द्वीप समूह, श्रीलंका एवं भारत में पाये जाते हैं। त्वं पुरा सागरोत्पन्नो विष्णुना विधृत: करे। नमित: सर्वदेवैश्य पाञ्चजन्य नमो स्तुते।। वर्तमान समय में शंख का प्रयोग प्राय: पूजा-पाठ में किया जाता है। अत: पूजारंभ में शंखमुद्रा से शंख की प्रार्थना की जाती है। शंख को हिन्दू धर्म में महत्वपूर्ण और पवित्र माना गया माना गया है। शंख कई प्रकार के होते हैं। शंख के चमत्का‍रों और रहस्य के बारे में पुराणों में विस्तार से लिखा गया है। आओ जानते हैं शंख और शंख ध्वनि के 12 रहस्य.. पहला रहस्य,शंख के प्रकार : - शंख के प्रमुख 3 प्रकार होते हैं:- दक्षिणावृत्ति शंख, मध्यावृत्ति शंख तथा वामावृत्ति शंख। इन शंखों के कई उप प्रकार होते हैं। शंखों की शक्ति का वर्णन महाभारत और पुराणों में मिलता है। यह प्रकार इस तरह भी है- वामावर्ती, दक्षिणावर्ती तथा गणेश शंख। शंख के अन्य प्रकार : - लक्ष्मी शंख, गोमुखी शंख, कामधेनु शंख, विष्णु शंख, देव शंख, चक्र शंख, पौंड्र शंख, सुघोष शंख, गरूड़ शंख, मणिपुष्पक शंख, राक्षस शंख, शनि शंख, राहु शंख, केतु शंख, शेषनाग शंख, कच्छप शंख, गोमुखी शंख, पांचजन्य शंख, अन्नपूर्णा शंख, मोती शंख, हीरा शंख, शेर शंख आदि प्रकार के होते हैं। दूसरा रहस्य!!!!!! द्विधासदक्षिणावर्तिर्वामावत्तिर्स्तुभेदत: दक्षिणावर्तशंकरवस्तु पुण्ययोगादवाप्यते यद्गृहे तिष्ठति सोवै लक्ष्म्याभाजनं भवेत् अर्थात् शंख दो प्रकार के होते हैं:- दक्षिणावर्ती एवं वामावर्ती। लेकिन एक तीसरे प्रकार का भी शंख पाया जाता है जिसे मध्यावर्ती या गणेश शंख कहा गया है। * दक्षिणावर्ती शंख पुण्य के ही योग से प्राप्त होता है। यह शंख जिस घर में रहता है, वहां लक्ष्मी की वृद्धि होती है। इसका प्रयोग अर्घ्य आदि देने के लिए विशेषत: होता है। * वामवर्ती शंख का पेट बाईं ओर खुला होता है। इसके बजाने के लिए एक छिद्र होता है। इसकी ध्वनि से रोगोत्पादक कीटाणु कमजोर पड़ जाते हैं। * दक्षिणावर्ती शंख के प्रकार : दक्षिणावर्ती शंख दो प्रकार के होते हैं नर और मादा। जिसकी परत मोटी हो और भारी हो वह नर और जिसकी परत पतली हो और हल्का हो, वह मादा शंख होता है। * दक्षिणावर्ती शंख पूजा : - दक्षिणावर्ती शंख की स्थापना यज्ञोपवीत पर करनी चाहिए। शंख का पूजन केसर युक्त चंदन से करें। प्रतिदिन नित्य क्रिया से निवृत्त होकर शंख की धूप-दीप-नैवेद्य-पुष्प से पूजा करें और तुलसी दल चढ़ाएं। प्रथम प्रहर में पूजन करने से मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। द्वितीय प्रहर में पूजन करने से धन- सम्पत्ति में वृद्धि होती है। तृतीय प्रहर में पूजन करने से यश व कीर्ति में वृद्धि होती है। चतुर्थ प्रहर में पूजन करने से संतान प्राप्ति होती है। प्रतिदिन पूजन के बाद 108 बार या श्रद्धा के अनुसार मंत्र का जप करें। तीसरा रहस्य, विविध नाम : - शंख, समुद्रज, कंबु, सुनाद, पावनध्वनि, कंबु, कंबोज, अब्ज, त्रिरेख, जलज, अर्णोभव, महानाद, मुखर, दीर्घनाद, बहुनाद, हरिप्रिय, सुरचर, जलोद्भव, विष्णुप्रिय, धवल, स्त्रीविभूषण, पांचजन्य, अर्णवभव आदि। चौथा रहस्य, महाभारत यौद्धाओं के पास शंख : - महाभारत में लगभग सभी यौद्धाओं के पास शंख होते थे। उनमें से कुछ यौद्धाओं के पास तो चमत्कारिक शंख होते थे। जैसे भगवान कृष्ण के पास पाञ्चजन्य शंख था जिसकी ध्वनि कई किलोमीटर तक पहुंच जाती थी। पाञ्चजन्यं हृषीकेशो देवदत्तं धनञ्जय:। पौण्ड्रं दध्मौ महाशंखं भीमकर्मा वृकोदर:।। -महाभारत अर्जुन के पास देवदत्त, युधिष्ठिर के पास अनंतविजय, भीष्म के पास पोंड्रिक, नकुल के पास सुघोष, सहदेव के पास मणिपुष्पक था। सभी के शंखों का महत्व और शक्ति अलग-अलग थी। कई देवी देवतागण शंख को अस्त्र रूप में धारण किए हुए हैं। महाभारत में युद्धारंभ की घोषणा और उत्साहवर्धन हेतु शंख नाद किया गया था। अथर्ववेद के अनुसार, शंख से राक्षसों का नाश होता है- शंखेन हत्वा रक्षांसि। भागवत पुराण में भी शंख का उल्लेख हुआ है। यजुर्वेद के अनुसार युद्ध में शत्रुओं का हृदय दहलाने के लिए शंख फूंकने वाला व्यक्ति अपिक्षित है। अद्भुत शौर्य और शक्ति का संबल शंखनाद से होने के कारण ही योद्धाओं द्वारा इसका प्रयोग किया जाता था। श्रीकृष्ण का ‘पांचजन्य’ नामक शंख तो अद्भुत और अनूठा था, जो महाभारत में विजय का प्रतीक बना। पांचवां रहस्य, नादब्रह्म : - शंख को नादब्रह्म और दिव्य मंत्र की संज्ञा दी गई है। शंख की ध्वनि को ॐ की ध्वनि के समकक्ष माना गया है। शंखनाद से आपके आसपास की नकारात्मक ऊर्जा का नाश तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। शंख से निकलने वाली ध्वनि जहां तक जाती है वहां तक बीमारियों के कीटाणुओं का नाश हो जाता है। छठा रहस्य, धन प्राप्ति में सहायक शंख : - शंख समुद्र मंथन के समय प्राप्त चौदह अनमोल रत्नों में से एक है। लक्ष्मी के साथ उत्पन्न होने के कारण इसे लक्ष्मी भ्राता भी कहा जाता है। यही कारण है कि जिस घर में शंख होता है वहां लक्ष्मी का वास होता है। *यदि मोती शंख को कारखाने में स्था‍पित किया जाए तो कारखाने में तेजी से आर्थिक उन्नति होती है। यदि व्यापार में घाटा हो रहा है, दुकान से आय नहीं हो रही हो तो एक मोती शंख दुकान के गल्ले में रखा जाए तो इससे व्यापार में वृद्धि होती है। *यदि मोती शंख को मंत्र सिद्ध व प्राण-प्रतिष्ठा पूजा कर स्थापित किया जाए तो उसमें जल भरकर लक्ष्मी के चित्र के साथ रखा जाए तो लक्ष्मी प्रसन्न होती है और आर्थिक उन्नति होती है। *मोती शंख को घर में स्थापित कर रोज 'ॐ श्री महालक्ष्मै नम:' 11 बार बोलकर 1-1 चावल का दाना शंख में भरते रहें। इस प्रकार 11 दिन तक प्रयोग करें। यह प्रयोग करने से आर्थिक तंगी समाप्त हो जाती है। इसी तरह प्रत्येक शंख से अलग अलग लाभ प्रा‍प्त किए जा सकते हैं। सातवां रहस्य, शंख पूजन का लाभ : - शंख सूर्य व चंद्र के समान देवस्वरूप है जिसके मध्य में वरुण, पृष्ठ में ब्रह्मा तथा अग्र में गंगा और सरस्वती नदियों का वास है। तीर्थाटन से जो लाभ मिलता है, वही लाभ शंख के दर्शन और पूजन से मिलता है। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, शंख चंद्रमा और सूर्य के समान ही देवस्वरूप है। इसके मध्य में वरुण, पृष्ठ भाग में ब्रह्मा और अग्र भाग में गंगा और सरस्वती का निवास है। शंख से शिवलिंग, कृष्ण या लक्ष्मी विग्रह पर जल या पंचामृत अभिषेक करने पर देवता प्रसन्न होते हैं। आठवां रहस्य,स्वास्थ्य में लाभदायक शंख : - शंखनाद से सकारात्मक ऊर्जा का सर्जन होता है जिससे आत्मबल में वृद्धि होती है। शंख में प्राकृतिक कैल्शियम, गंधक और फास्फोरस की भरपूर मात्रा होती है। प्रतिदिन शंख फूंकने वाले को गले और फेफड़ों के रोग नहीं होते। शंख बजाने से चेहरे, श्वसन तंत्र, श्रवण तंत्र तथा फेफड़ों का व्यायाम होता है। शंख वादन से स्मरण शक्ति बढ़ती है। शंख से मुख के तमाम रोगों का नाश होता है। गोरक्षा संहिता, विश्वामित्र संहिता, पुलस्त्य संहिता आदि ग्रंथों में दक्षिणावर्ती शंख को आयुर्वद्धक और समृद्धि दायक कहा गया है। पेट में दर्द रहता हो, आंतों में सूजन हो अल्सर या घाव हो तो दक्षिणावर्ती शंख में रात में जल भरकर रख दिया जाए और सुबह उठकर खाली पेट उस जल को पिया जाए तो पेट के रोग जल्दी समाप्त हो जाते हैं। नेत्र रोगों में भी यह लाभदायक है। यही नहीं, कालसर्प योग में भी यह रामबाण का काम करता है। नौवां रहस्य, सबसे बड़ा शंख : - विश्व का सबसे बड़ा शंख केरल राज्य के गुरुवयूर के श्रीकृष्ण मंदिर में सुशोभित है, जिसकी लंबाई लगभग आधा मीटर है तथा वजन दो किलोग्राम है। दसवां रहस्य, श्रेष्ठ शंख के लक्षण:- शंखस्तुविमल: श्रेष्ठश्चन्द्रकांतिसमप्रभ: अशुद्धोगुणदोषैवशुद्धस्तु सुगुणप्रद: अर्थात् निर्मल व चन्द्रमा की कांति के समानवाला शंख श्रेष्ठ होता है जबकि अशुद्ध अर्थात् मग्न शंख गुणदायक नहीं होता। गुणोंवाला शंख ही प्रयोग में लाना चाहिए। क्षीरसागर में शयन करने वाले सृष्टि के पालनकर्ता भगवान विष्णु के एक हाथ में शंख अत्यधिक पावन माना जाता है। इसका प्रयोग धार्मिक अनुष्ठानों में विशेष रूप से किया जाता है। ग्यारहवां रहस्य,शंख से वास्तु दोष का निदान : - शंख से वास्तु दोष भी मिटाया जा सकता है। शंख को किसी भी दिन लाकर पूजा स्थान पर पवित्र करके रख लें और प्रतिदिन शुभ मुहूर्त में इसकी धूप-दीप से पूजा की जाए तो घर में वास्तु दोष का प्रभाव कम हो जाता है। शंख में गाय का दूध रखकर इसका छिड़काव घर में किया जाए तो इससे भी सकारात्मक उर्जा का संचार होता है। जानिए किस शंख से ‍मिलता कौन सा लाभ????? *गणेश शंख: - इस शंख की आकृति भगवान श्रीगणेश की तरह ही होती है। यह शंख दरिद्रता नाशक और धन प्राप्ति का कारक है। *अन्नपूर्णा शंख : - अन्नपूर्णा शंख का उपयोग घर में सुख-शान्ति और श्री समृद्धि के लिए अत्यन्त उपयोगी है। गृहस्थ जीवन यापन करने वालों को प्रतिदिन इसके दर्शन करने चाहिए। *कामधेनु शंख : - कामधेनु शंख का उपयोग तर्क शक्ति को और प्रबल करने के लिए किया जाता है। इस शंख की पूजा-अर्चना करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। *मोती शंख : - इस शंख का उपयोग घर में सुख और शांति के लिए किया जाता है। मोती शंख हृदय रोग नाशक भी है। मोती शंख की स्थापना पूजा घर में सफेद कपड़े पर करें और प्रतिदिन पूजन करें, लाभ मिलेगा। ऐरावत शंख : - ऐरावत शंख का उपयोग मनचाही साधना सिद्ध को पूर्ण करने के लिए, शरीर की सही बनावट देने तथा रूप रंग को और निखारने के लिए किया जाता है। प्रतिदिन इस शंख में जल डाल कर उसे ग्रहण करना चाहिए। शंख में जल प्रतिदिन 24 - 28 घण्टे तक रहे और फिर उस जल को ग्रहण करें, तो चेहरा कांतिमय होने लगता है। *विष्णु शंख : - इस शंख का उपयोग लगातार प्रगति के लिए और असाध्य रोगों में शिथिलता के लिए किया जाता है। इसे घर में रखने भर से घर रोगमुक्त हो जाता है। *पौण्ड्र शंख : - पौण्ड्र शंख का उपयोग मनोबल बढ़ाने के लिए किया जाता है। इसका उपयोग विद्यार्थियों के लिए उत्तम है। इसे विद्यार्थियों को अध्ययन कक्ष में पूर्व की ओर रखना चाहिए। *मणि पुष्पक शंख : - मणि पुष्पक शंख की पूजा-अर्चना से यश कीर्ति, मान-सम्मान प्राप्त होता है। उच्च पद की प्राप्ति के लिए भी इसका पूजन उत्तम है। *देवदत्त शंख : - इसका उपयोग दुर्भाग्य नाशक माना गया है। इस शंख का उपयोग न्याय क्षेत्र में विजय दिलवाता है। इस शंख को शक्ति का प्रतीक माना गया है। न्यायिक क्षेत्र से जुड़े लोग इसकी पूजा कर लाभ प्राप्त कर सकते हैं। *दक्षिणावर्ती शंख : - इस शंख को दक्षिणावर्ती इसलिए कहा जाता है क्योंकि जहां सभी शंखों का पेट बाईं ओर खुलता है वहीं इसका पेट विपरीत दाईं और खुलता है। इस शंख को देव स्वरूप माना गया है। दक्षिणावर्ती शंख के पूजन से खुशहाली आती है और लक्ष्मी प्राप्ति के साथ-साथ सम्पत्ति भी बढ़ती है। इस शंख की उपस्थिति ही कई रोगों का नाश कर देती है। दक्षिणावर्ती शंख पेट के रोग में भी बहुत लाभदायक है। विशेष कार्य में जाने से पहले दक्षिणावर्ती शंख के दर्शन करने भर से उस काम के सफल होने की संभावना बढ़ जाती है

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Shiva Gaur Mar 25, 2019

|| श्री हरि: || भगवान् का स्मरण करो; उनके सामने कातरभाव से रोओ, प्रार्थना करो – ‘भगवन ! मैंने हजारों अपराध किये हैं और अब भी कर रहा हूँ | मधुसूदन ! मुझे अपना खरीदा हुआ गुलाम समझकर मेरे अपराधों को क्षमा करो | प्रभो ! मुझे पवित्र बनाकर अपने परमधाम की राह पर ले आना तुम्हारी कृपा का ही काम है | मैं तो डूबा जा रहा हूँ अघ-सागर में, भटक रहा हूँ भयानक भवारन्य में ! बचाओ – मेरे स्वामी ! बचाओ !’ अभिमान छोड़कर जो सच्ची प्रार्थना करता है, उसकी प्रार्थना भगवान् उसी क्षण सुनते हैं | पर मनुष्य प्रार्थना के समय भी दम्भ करता है | वह अपने अपराधों और दोषों के लिये कभी दुखी होता ही नहीं, उन्हें देखता ही नहीं, फिर कपटभरी प्रार्थना पर भगवान् भला कैसे रीझें | ---- *श्रध्देय भाई हनुमानप्रसाद पोद्दार जी* !!!!!!!!!! श्री राधे !!!!!!!!!!!

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vinodkumar mahajan Mar 25, 2019

श्रीकृष्ण की प्रथम पत्नी रुक्मिणी जी की कथा 💐💐💐🍃🍃🍃💐💐💐🍃🍃🍃💐💐💐🍃🍃🍃💐💐💐 कुंडिनपुर के राजा भीष्मक की बेटी रूक्मिणी जी माता लक्ष्मी का अवतार थीं। उनका जन्म भी श्रीकृष्ण की पत्नी बनने के लिए हुए था। लेकिन उनके भाई रुक्मी ने उनका विवाह शिशुपाल से तय कर दिया। रुक्मिणी जी ने भगवान को संदेशा भेजा कि अगर लेने नहीं आए तो ये शरीर नष्ट कर लूंगी। * *उधर शिशुपाल अपनी सेना के साथ विवाह के लिए प्रस्थान कर चुका था। रुक्मिणी जी ने मां गौरी के पूजन के लिए राज्य के बाहर स्थित मंदिर पहुंचीं। जहां सुरक्षा का भारी इंतजाम था। लेकिन उसे भेदकर श्रीकृष्ण वहां पहुंच गये। रुक्मिणी जी ने माता के पूजन के बाद उनका आशीर्वाद हासिल करके प्रभु के गले में वरमाला डाल दी, प्रभु ने रूक्मिणीजी को रथ में बैठाकर स्वयं श्रीकृष्ण रथ को चलाने लगे कि घोड़े हवा से बात करने लगे। * *रुक्मिणी जी की सुरक्षा में लगी टुकड़ी में से एक सैनिक बोला- रथ की ध्वजा पर गरूडजी बैठे हैं, रथ तो गरूडजी की तरह उड़ता होगा? पता नहीं कहाँ से आया था? कितना सुंदर है, श्याम वर्ण की कांति है। मुस्कराता कितना सुंदर है? हार कितना बढ़िया है, पीताम्बर कितनी सुंदर, हम निहाल हो गये, हम धन्य हो गये, दर्शन दे गया, अपना बना गया और भगवान् के रथ ने तो हवा से बात की, सैनिकों ने कहा- भैया बहुत आनन्द आ गया दर्शन करके, एक सैनिक मुस्करा कर बोला- वो सब तो ठीक है लेकिन रूक्मिणीजी कहाँ है? बोले, रूक्मिणीजी भीतर मंदिर में बैठी है, पूजा कर रही हैं। मन्दिर में देखा तो रूक्मिणीजी नहीं है, अरे भाई रूक्मिणीजी कहाँ है? मुझे क्या मालूम कहाँ है? अब तो एक सैनिक दूसरे सैनिक से पूछ रहा है, रूक्मिणीजी कहाँ है? मुझे क्या मालुम कहाँ है? एक सैनिक मुस्करा कर बोला- मैं बताऊँ कहा है रूक्मिणीजी? सभी बोले बताओं, बोला- ले तो गया, एक सैनिक ने कहा- हम दस हजार सैनिकों के बीच से रूक्मिणीजी को ले गया तुमने रोका क्यों नहीं? एक बोला- मैं तो मुकुट देखने में लगा था, मुझे क्या मालुम कब ले गया? अब एक-दूसरे को आपस में बोल रहे हैं, तुमने क्यों नहीं रोका - तुमने क्यों नहीं रोका? कोई कहता है मैं पीताम्बर देखने में लगा था तो कोई कहता है मैं तो मुखारविन्द देखने में लगा था, एक ने कहा मुझे मालूम तो था ले जा रहा है, सबने कहा कि बताया क्यों नहीं? उसने कहा- मैंने देखा उन दोनों की जोड़ी ठीक जमी है पहले ले जाने दो, बाद में ही बताऊँगा। भगवान् ने सबको भ्रमित कर दिया, रूक्मिणीजी के बड़े भाई रुक्मी आये, रूक्मिणी को वहां नहीं देखकर सैनिकों से पूछा- रूक्मिणी कहाँ गयी? सैनिकों ने कहा- महाराज, वो साँवला-सलौना आया और ले गया, तुम दस हजार सैनिकों के बीच में से कैसे ले गया? सैनिक बोले- एक बार तो हम उसे मारने दौड़े थे पर वो हँस गया और हँसने के बाद क्या हुआ? ये तो जाने के बाद ही पता चला। रुक्मी ने श्रीकृष्ण का पीछा किया, भगवान ने उसको पकड़कर आधी दाढ़ी और आधी मूँछ मुंड दी, रथ के चक्का में बाँध दिया, बलरामजी ने आकर छुड़ाया, रूक्मिणीजी ने कहा प्रभु मेरे भाई को मारना नहीं, आप जो मिले इसकी पत्नी व मेरी भाभी की प्रेरणा से ही मिले। मैं उसे विधवा नहीं देखना चाहती। उधर भीष्मक राजा ने आकर रूक्मी से कहा- बेटा मेरी पुत्री जब डेढ़ वर्ष की थी तो मेरे घर संत नारदजी पधारे थे। * *नारदजी ने हमसे कहा था कि रूक्मिणी साधारण नारी नहीं है, साक्षात् लक्ष्मी है, और लक्ष्मी का विवाह नारायण के अलावा किसी से नहीं होता, इसलिये मन की मलिनता को मिटाओ पुत्र और ये सुन्दर विवाह मुझे अपने हाथों से कन्या दान के रूप में करने दो, भीष्मक के पुत्र ने बात मानी, रूक्मणीजी को लाये, कुंकुम् पत्रिका द्वारिका भेजी, बारात लेकर मेरे प्रभु द्वारिकाधीश पधारे। बारात का स्वागत किया गया, कृष्ण के सभी मित्र भी साथ में पधारें बड़े धूमधाम से विवाह सम्पन्न हुआ, शांडिल्य मुनि वेद मंत्रोच्चार कर रहे हैं, सबके मन में बड़ा आनन्द हुआ, द्वारिका वासियों ने खूब प्रेम से मंगल गीत गायें, विवाह में बड़े-बड़े ज्ञानी संत-महात्मा पधारें, विवाह में कुण्डिनपुर वासियों को युगल छवि के दर्शन करके मन में बहुत आनन्द हुआ , लक्ष्मी स्वरूपिणी रूक्मिणीजी को बहुत अच्छा लगा, गोविन्द रूपी वर प्राप्त करके वो गद् गद् हो गयीं। 💐💐🍃🍃जय श्री कृष्ण🍃🍃💐💐

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जयश्री Mar 25, 2019

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Shashikant Shriwas Mar 25, 2019

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*कृपया प्रश्नों के उत्तर कमेंट्स में दें* आज का श्लोक : श्रीमद्भगवद्गीता यथारूप -- ११.२२-२५ अध्याय ११ : विराट रूप . . रुद्रादित्या वसवो ये च साध्या विश्र्वऽश्र्विनौ मरुतश्र्चोष्मपाश्र्च | गन्धर्वयक्षासुरसिद्धसङघा वीक्षन्ते त्वां विस्मिताश्र्चैव सर्वे || २२ || . रूपं महत्ते बहुवक्त्रनेत्रं महाबाहो बहुबाहूरूपादम् | बहूदरं बहुदंष्ट्राकरालं दृष्ट्वा लोकाः प्रव्यथितास्तथाहम् || २३ || . नभःस्पृशं दीप्तमनेकवर्णं व्यात्ताननं दीप्तविशालनेत्रम् | दृष्ट्वा हि त्वां प्रव्यथितान्तरात्मा धृतिं न विन्दामि शमं च विष्णो || २४ || . दंष्ट्राकरालानि च ते मुखानि दृष्ट्वैव कालानलसन्निभानि | दिशो न जाने न लभे च शर्म प्रसीद देवेश जगन्निवास || २५ || . रूद्र– शिव का रूप; आदित्याः– आदित्यगण; वसवः– सारेवसु; ये– जो; च– तथा; साध्याः– साध्य; विश्र्वे– विश्र्वेदेवता; अश्र्विनौ–अश्र्विनीकुमार; मरुतः– मरुद्गण; च– तथा; उष्ण-पाः– पितर; च– तथा; गन्धर्व–गन्धर्व; यक्ष– यक्ष; असुर– असुर; सिद्ध– तथा सिद्ध देवताओं के; सङ्घाः– समूह;वीक्षन्ते– देख रहे हैं; त्वाम्– आपको;विस्मिताः– आश्चर्यचकित होकर; च– भी;एव– निश्चय ही; सर्वे– सब | . रूपम्– रूप; महत्– विशाल; ते– आपका;बहु– अनेक; वक्त्र– मुख; नेत्रम्– तथा आँखें; महा-बाहों – हे बलिष्ट भुजाओं वाले; बहु– अनेक; बाहु– भुजाएँ; उरु– जाँघें; पादम्– तथा पाँव; बहु-उदरम्– अनेक पेट; बहु-दंष्ट्रा– अनेक दाँत; करालम्– भयानक ; दृष्ट्वा– देखकर; लोकाः– सारे लोक; प्रव्यथिताः– विचलित; तथा– उसी प्रकार; अहम्– मैं | . नभः-स्पृशम्– आकाश छूता हुआ; दीप्तम्– ज्योर्तिमय; अनेक– कई; वर्णम्– रंग; व्याक्त– खुले हुए; आननम्– मुख; दीप्त– प्रदीप्त; विशाल– बड़ी-बड़ी; नेत्रम्– आँखें; दृष्ट्वा– देखकर; हि– निश्चय ही; त्वाम्– आपको; प्रव्यथितः– विचलित, भयभीत; अन्तः– भीतर; आत्मा– आत्मा; धृतिम्– दृढ़ता या धैर्य को; न– नहीं; विन्दामि– प्राप्त हूँ; शमम्– मानसिक शान्ति को; च– भी; विष्णो– हे विष्णु | . दंष्ट्रा– दाँत; करालानि– विकराल; च– भी; ते - आपके; मुखानि– मुखों को; दृष्ट्वा– देखकर; एव– इस प्रकार; काल-अनल– प्रलय की; सन्नि-भानि– मानो; दिशः– दिशाएँ;न– नहीं;जाने– जानता हूँ; न– नहीं; लभे– प्राप्त करता हूँ; च– तथा; शर्म– आनन्द; प्रसीद– प्रसन्न हों; देव-ईश– हे देवताओं के स्वामी; जगत्-निवास– हे समस्त जगतों के आश्रय | . शिव के विविध रूप, आदित्यगण, वसु, साध्य, विश्र्वेदेव, दोनोंअश्र्विनीकुमार, मरुद्गण, पितृगण, गन्धर्व, यक्ष, असुर तथा सिद्धदेव सभी आपकोआश्चर्यपूर्वक देख रहे हैं | . हे महाबाहु! आपके इस अनेक मुख, नेत्र, बाहु,जांघ, पाँव, पेट तथा भयानक दाँतों वाले विराट रूप को देखकर देवतागण सहित सभी लोक अत्यन्तविचलित हैं और उन्हीं की तरह मैं भी हूँ | . हे सर्वव्यापी विष्णु!नाना ज्योर्तिमय रंगोंसे युक्त आपको आकाश का स्पर्श करते, मुख फैलाये तथा बड़ी-बड़ी चमकती आँखें निकाले देखकर भय से मेरा मन विचलित है | मैं न तो धैर्य धारण कर पा रहा हूँ, न मानसिक संतुलन ही पा रहा हूँ | . हे देवेश! हे जगन्निवास! आप मुझ पर प्रसन्न हों ! मैं इस प्रकार से आपके प्रल्याग्नि स्वरूप मुखों को तथा विकराल दाँतों को देखकर अपना सन्तुलन नहीं रख पा रहा | मैं सब ओर से मोहग्रस्त हो रहा हूँ | . प्रश्न १ : विश्र्वरूप को देखने के पश्चात् अर्जुन भगवान् श्रीकृष्ण के समक्ष किस प्रकार अपनी मानसिक स्थिति का चित्रण प्रकट कर रहे है ?

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