सुरेश
सुरेश Apr 17, 2019

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shuchi singhal May 22, 2019

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nitu molri May 21, 2019

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nitu molri May 21, 2019

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Yashi Jamadagni May 22, 2019

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Ruhi Jis May 21, 2019

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Amit Kumar May 21, 2019

🌹गीता,अध्याय,12, भक्तियोग,3,4,5,🌹 🌹ये त्वक्षरमनिर्देश्यमव्यक्तं पर्युपासते। सर्वत्रगमचिन्त्यं च कूटस्थमचलं ध्रुवम्‌ ॥ सन्नियम्येन्द्रियग्रामं सर्वत्र समबुद्धयः । ते प्राप्नुवन्ति मामेव सर्वभूतहिते रताः ॥ भावार्थ : परन्तु जो पुरुष इन्द्रियों के समुदाय को भली प्रकार वश में करके मन-बुद्धि से परे, सर्वव्यापी, अकथनीय स्वरूप और सदा एकरस रहने वाले, नित्य, अचल, निराकार, अविनाशी, सच्चिदानन्दघन ब्रह्म को निरन्तर एकीभाव से ध्यान करते हुए भजते हैं, वे सम्पूर्ण भूतों के हित में रत और सबमें समान भाववाले योगी मुझको ही प्राप्त होते हैं॥3-4॥ क्लेशोऽधिकतरस्तेषामव्यक्तासक्तचेतसाम्‌ । अव्यक्ता हि गतिर्दुःखं देहवद्भिरवाप्यते ॥ भावार्थ : उन सच्चिदानन्दघन निराकार ब्रह्म में आसक्त चित्तवाले पुरुषों के साधन में परिश्रम विशेष है क्योंकि देहाभिमानियों द्वारा अव्यक्तविषयक गति दुःखपूर्वक प्राप्त की जाती है॥5॥🌹 🌹🌹देखोभाई, श्री कृष्ण पहले तो भक्ति मार्ग अर्थात सगुण उपाशक को श्रेष्ठ कहा,क्योकि भक्ति मार्ग सहज है कोई भी इस मार्ग से चल सकता है ,चाहे वह पढ़ा लिखा हो या अनपढ़ हो छोटा हो बड़ा भक्ति का मार्ग भवसागर पर करने के लिए एक पुल की तरह है ,जैसे सागर को पार करना हो तो जिसके क्षमता हो तो उड़कर चला जाये ,या फिर तैर कर चला जाये ,पर ये दोनों ही मार्ग कठिन है, इसलिए तीसरा मार्ग पुल का है भक्ति का है जो सहज है, रामकथा में सुंदर प्रसंग सेतुबंध का आता है जब प्रभु राम समुद्र के ऊपर नल निलो के द्वारा बाहर भालुओं के द्वारा समुद्र में सेतु बनाते है ,और जब सेतु तैयार हो जाता है और उसके ऊपर से सेना निकलती है तो बहुत भीड़ हो जाती है तो कुछ लोग आकाशमार्ग से जाते हैं और कुछ लोग समुद्र के जलचर प्राणी जो प्रभु श्री राम को देखने के लिए ऊपर आ गए थे उनके उपरसे निकल कर जा रहे हैं और जो दोनों मार्ग का अनुशरण नही कर सकते थे वे सेतु के ऊपर से निकले ,अर्थात ,प्रभु श्री राम ने जानकी रूपी भक्ति को पाने के लिए तीन मार्ग प्रशस्त किये पहला ,आकाश मार्ग,यह कठिन मार्ग है जो सब कोई इस पर नही चल सकते,,ज्ञान,, मार्ग,दूसरा है जल में तैरकर ,यह भी सब के बस की बात नही ,,कर्म,, मार्ग है, और तीसरा है, सेतु के ऊपर से जो सहज और सरल जिसमे एक चींटी भी चाहे तो चलकर पार हो सकती है, श्री कृष्ण ने वही कहा कि सबसे पहले तो भक्ति के मार्ग को श्रेष्ठ कहा जसमे सभी चल सकते है,फिर ज्ञान के मार्ग को कहते हैं लेकिन ज्ञान मार्ग सबके लिए सहज नही है ,नाना प्रकार की योनियों में भटकती हुई आत्मा शरीर के साथ इतना अकात्मियता, देहाध्यास, बना लेती है की ,सूक्ष्म का चिंतन कठिन होता है ,मगर जो ब्यक्ति या जो साधक परमात्मा के सर्वव्यापी स्वरूप जो मन बुद्धि से परे है, जो सर्व व्यापी है, जिसे शव्दों से कहा नही जा सकता है जो नित्य है सत्य है निराकार सर्वत्र व्याप्त है, ऐसे परमात्मा को जो साधक अपनी इंद्रियों को और मन को अपने बस में करके ,एकाग्रचित्त होकर ध्यान करते और भजन करते हैं ,वे ज्ञान मार्गी साधक भी परमात्मा को प्रिय होते हैं, बात सिर्फ इतनी है कि यह साधना थोड़ा कठिन होती है इसलिए यह सभी नही कर पाते,🌹 🌹जै श्री कृष्ण🌹 🌹विनेश्वरानंद🌹🌹

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dheeraj patel May 21, 2019

🌹जय श्री राधे🎎कृष्णा जी🌹 ★★संगत का असर★★ एक भंवरे की मित्रता एक गोबरी (गोबर मे रहने वाले) कीड़े से थी एक दिन कीडे़ ने भंवरे से कहाँ भाई तुम मेरे सबसे अच्छे मित्र हो इसलिये मेरे यहाँ भोजन पर आओ भंवरा भोजन खाने पहुँचा बाद में ★भंवरा सोच मे पड़ गया कि मैंने बुरे का संग किया इसलिये मुझे गोबर खाना पडा़★ अब भंवरे ने कीडे़ को अपने यहाँ आने का निमंत्रण दिया कि तुम कल मेरे यहाँ आओ अगले दिन कीडा़ भंवरे के यहाँ पहुँचा भंवरे भंवरे ने कीड़े को उठाकर गुलाब के फूल में बिठा दिया, कीड़े ने परागरस पिया मित्र का धन्यवाद कर ही रहा था की, पास के मन्दिर का पुजारी आया और फूल तोड़ कर ले गया,और बिहारी जी के चरणों मे चढा़ दिया कीडे़ को ठाकीर जी के दर्शन हुये, चरणों मे बैठने का सौभाग्य भी मिला, संध्या में पुजारी ने सारे फूल इक्कठा किये, और गंगा जी में छोड़ दिये कीडा़ अपने भाग्य पर हैरान था,इतने में भंवरा उड़ता हुआ कीड़े के पास आया और पूछा मित्र क्या हाल है, कीडे़ ने कहाँ भाई जन्म-जन्म से मुक्ति हो गई ★ये सब अच्छी संगत का फल है★ ★संगत से गुण ऊपजे★ ★संगत से गुण जाये★ ★लोहा लगा जहाज में★ ★पानी में उतराय★ कोई भी नही जानता कि हम इस जीवन के सफर में एक -दुसरे से क्यों मिलते है सब के साथ रक्त संबंध नही हो सकते परन्तु ईश्वर हमें कुछ लोगों के साथ मिलाकर अद्भुत रिश्तो को हमेंशा संजोकर रखना चाहिये🙏🌹 🌹🌹जय श्री राधेकृष्णा जी🌹🌹 🌹🌹🌹🎎🎎🌹🌹🌹

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