Heed Herbals Bageshwar
Heed Herbals Bageshwar Mar 25, 2019

🌿 *आयुर्वेदिक डॉक्टरो को जोलाछाप कहने वालो इस मेसेज को ध़्यान से पढ़े आैर जाने आखिर कोन है जोलाछाप ?* 🌿 ➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖ ❇ हंमेशा से ही ऐलोपैथी विग्यान आयुर्वेद को आधारहीन ऐवं कीसी कामका नही कहकर आयुर्वेदिक डॉक्टरो की बेइज्जती करतां आयां है लेकिन सब पैथी का बाप तो आयुर्वेद ही है | आैर अगर आयुर्वेद नही होतां तो आज ऐलोपैथी भी नही होतां यह बात हमारे इस मेसेज को पुरां पढ़कर आप भी जान जायेंगे | ❇ *ऐलोपैथी मे उपयोग होने वाली महत्वपुर्ण दवाइयां जो निचे दी गइ है वह "आयुर्वेदिक प्लान्ट" से बनती है निचे का मेसेज पुरां पढ़िये आैर जाने केसे ऐलोपैथी वाले आयुर्वेदिक आैषधि को लेटिन नाम देकर अपनी चिकित्सा पैथी कहलाते है |* 1) Tinacardin - यह दवाइ गीलोय के सत्व से बनती है | 2) Curcumin- यह दवाइ आयुर्वेदिक आैषधि हल्दी सत्व से बनती है | 3) Coral - यह दवाइ प्रवाल पिष्टी से बनने वाली दवाइ है | 4) Hyprobromide - यह दवाइ खुरासानी अजवाइन का ऐक्ट्रेक्ट है | 5) Quinone - यह दवाइ कुनैन की जड से तैयार होती है | 6) Pentaprazole - यह दवाइ खाने सा सोडा से तैयार होती है | 7) Pramhexin -यह ऐलोपैथी दवाइ वासा सत्व से बनती है | 8) Revocin - यह दवाइ सर्पगंधा के ऐक्ट्रेक्ट से बनी होती है | 9) Ginseng - यह चाइनां जिनसेंग नामक आैषधि से बनती है | 10) Diclpfenac- यह दवाइ अफिण से बनाइ जाती है | 11) Colcicine - यह दवाइ सुरंजन नामक आैषधी से बनती है | 12) Taxol - यह द्रोणपुष्पी के ऐक्ट्रेक्ट से बनाइ जाती है | 13) Atropine - यह धतुरपञ से बनने वाली ऐलोपैथी दवाइ है | 14 ) Eno - इनो १००% आयुर्वेदिक आैषधी से बनाइ जाती है | ❇ *उपर दी गइ ऐलोपैथी दवाइयो मे १०० % आयुर्वेदिक आैषधी को लेकर इसका ऐक्ट्रेक्ट निकालकर या तो उसका सत्व निकालकर लेटिन नाम देकर अंग्रेजी दवाइयो का नाम देकर मार्केट मे खुब बिक रही है आैर लोग इसको खुब खा भी रहे हे |* यह जानकारी सभी लोगो तक शेयर करें जो आयुर्वेद को जोलाछार समजते है | *राजिव दिक्षित जी अमर रहो* *स्वदेशी अपनाये, देश बचाये |* 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰

+1 प्रतिक्रिया 3 कॉमेंट्स • 14 शेयर

कामेंट्स

स्वस्थ दिल के लिए घरेलू उपचार भागदौड़ भरी जिंदगी और बेपरवाह जीवनशैली हमारे दिल को तेजी से बीमार बना रही है। दिल के मरीजों की इस तादाद में युवाओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है। बीमार दिल अपने साथ कई बीमारियां लेकर आता है। जरा सा काम करने के बाद सांस फूलना, सीढियां चढते वक्त दम भरना और अक्सर छोटे-छोटे काम में पसीना आना बीमार होते दिल की ओर इशारा करते हैं। लेकिन, दिल को दुरुस्त रखने के लिए हमें कहीं बाहर जाने की जरूरत नहीं। इसके लिए कई घरेलू उपाय ही अपनाए जा सकते हैं। आइए जानते हैं उन्हीं उपायों के बारे में- शहद दिल को मजबूत बनाता है। कमजोर दिल वाले एक चम्मच शहद का सेवन रोज करें तो उन्हें फायदा होगा। आप लोग भी शहद का एक चम्मच रोज ले सकते हैं, इससे वे दिल की बीमारियों से बचे रहेंगे। छोटी इलायची और पीपरामूल का चूर्ण घी के साथ सेवन करने से दिल मजबूत और स्वस्थ रहता है। दिल को मजबूत बनाने के लिए गुड को देसी घी में मिलाकर खाने से भी फायदा होता है। लौकी उबालकर उसमें धनिया, जीरा व हल्दी का चूर्ण तथा हरा धनिया डालकर कुछ देर पकाकर खाइए। इससे दिल को शक्ति मिलती है। अलसी के पत्ते और सूखे धनिए का क्वाथ बनाकर पीने से ह्रदय की दुर्बलता मिट जाती है। गाजर के रस को शहद में मिलाकर पीने से निम्न ब्लड प्रेशर की समस्या नहीं होती है और दिल मजबूत होता है। हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से निजात पाने के लिए सिर्फ गाजर का रस पीना चाहिए। इससे रक्तचाप संतुलित हो जाता है। सर्पगंधा को कूटकर रख लीजिए। इस पाउडर को सुबह-शाम 2-2 ग्राम खाने से बढ़ा हुआ रक्तचाप सामान्य हो जाता है। प्रतिदिन लहसुन की कच्ची कली छीलकर खाने से कुछ दिनों में ही रक्तचाप सामान्य हो जाता है और दिल मजबूत होता है। अनार के रस को मिश्री में मिलाकर हर रोज सुबह-शाम पीने से दिल मजबूत होता है। खाने में अलसी का प्रयोग करने से दिल मजबूत होता है। अलसी में ओमेगा-3 फैटी एसिड भरपूर मात्रा में होता है जो दिल को बीमारियों से बचाता है। सेब का जूस और आंवले का मुरब्बा खाने से दिल मजबूत होता है और दिल अच्छे से काम करता है। बादाम खाने से दिल स्वास्थ रहता है। बादाम में विटामिन और फाइबर होता है।

+9 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 21 शेयर
komal dagar Apr 18, 2019

+2 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 9 शेयर
Devendra Angira Apr 18, 2019

" एलर्जी " एक आम शब्द , जिसका प्रयोग हम कभी ' किसी ख़ास व्यक्ति से मुझे एलर्जी है ' के रूप में करते हैं. ऐसे ही हमारा शरीर भी ख़ास रसायन उद्दीपकों के प्रति अपनी असहज प्रतिक्रया को ' एलर्जी ' के रूप में दर्शाता है. बारिश के बाद आयी धूप तो ऐसे रोगियों क़ी स्थिति को और भी दूभर कर देती है. ऐसे लोगों को अक्सर अपने चेहरे पर रूमाल लगाए देखा जा सकता है. क्या करें छींक के मारे बुरा हाल जो हो जाता है. हालांकि एलर्जी के कारणों को जानना कठिन होता है , परन्तु कुछ आयुर्वेदिक उपाय इसे दूर करने में कारगर हो सकते हैं. आप इन्हें अपनाएं और एलर्जी से निजात पाएं ! • नीम चढी गिलोय के डंठल को छोटे टुकड़ों में काटकर इसका रस हरिद्रा खंड चूर्ण के साथ 1.5 से तीन ग्राम नियमित प्रयोग पुरानी से पुरानी एलर्जी में रामबाण औषधि है. • गुनगुने निम्बू पानी का प्रातःकाल नियमित प्रयोग शरीर सें विटामिन - सी की मात्रा की पूर्ति कर एलर्जी के कारण होने वाले नजला - जुखाम जैसे लक्षणों को दूर करता है. • अदरख , काली मिर्च , तुलसी के चार पत्ते , लौंग एवं मिश्री को मिलाकर बनायी गयी ' हर्बल चाय ' एलर्जी से निजात दिलाती है. • बरसात के मौसम में होनेवाले विषाणु ( वायरस ) संक्रमण के कारण ' फ्लू ' जनित लक्षणों को नियमित ताजे चार नीम के पत्तों को चबा कर दूर किया जा सकता है. • आयुर्वेदिक दवाई ' सितोपलादि चूर्ण ' एलर्जी के रोगियों में चमत्कारिक प्रभाव दर्शाती है. • नमक पानी से ' कुंजल क्रिया ' एवं ' नेती क्रिया " कफ दोष को बाहर निकालकर पुराने से पुराने एलर्जी को दूर कने में मददगार होती है. • पंचकर्म की प्रक्रिया ' नस्य ' का चिकित्सक के परामर्श से प्रयोग ' एलर्जी ' से बचाव ही नहीं इसकी सफल चिकित्सा है. • प्राणायाम में ' कपालभाती ' का नियमित प्रयोग एलर्जी से मुक्ति का सरल उपाय है. कुछ सावधानियां जिन्हें अपनाकर आप एलर्जी से खुद को दूर रख सकते हैं : - • धूल , धुआं एवं फूलों के परागकण आदि के संपर्क से बचाव. • अत्यधिक ठंडी एवं गर्म चीजों के सेवन से बचना. • कुछ आधुनिक दवाओं जैसे : एस्पिरीन , निमासूलाइड आदि का सेवन सावधानी से करना. • खटाई एवं अचार के नियमित सेवन से बचना. हल्दी से बनी आयुर्वेदिक औषधि ' हरिद्रा खंड ' के सेवन से शीतपित्त , खुजली , एलर्जी , और चर्म रोग नष्ट होकर देह में सुन्दरता आ जाती हे | बाज़ार में यह ओषधि सूखे चूर्ण के रूप में मिलती हे | इसे खाने के लिए मीठे दूध का प्रयोग अच्छा होता हे | परन्तु शास्त्र विधि में इसको निम्न प्रकार से घर पर बना कर खाया जाये तो अधिक गुणकारी रहता हे | बाज़ार में इस विधि से बना कर चूँकि अधिक दिन तक नहीं रखा जा सकता , इसलिए नहीं मिलता हे | घर पर बनी इस विधि बना हरिद्रा खंड अधिक गुणकारी और स्वादिष्ट होता हे | मेरा अनुभव हे की कई सालो से चलती आ रही एलर्जी , या स्किन में अचानक उठाने वाले चकत्ते , खुजली इसके दो तीन माह के सेवन से हमेशा के लिए ठीक हो जाती हे | इस प्रकार के रोगियों को यह बनवा कर जरुर खाना चाहिए | और अपने मित्रो कोभी बताना चाहिए | यह हानि रहित निरापद बच्चे बूढ़े सभी को खा सकने योग्य हे | जो नहीं बना सकते वे या शुगर के मरीज , कुछ कम गुणकारी , चूर्ण रूप में जो की बाज़ार में उपलब्ध हे का सेवन कर सकते हे | हरिद्रा खंड निर्माण विधि सामग्री - हरिद्रा -320 ग्राम , गाय का घी - 240 ग्राम , दूध - 5 किलो , शक्कर -2 किलो | सोंठ , कालीमिर्च , पीपल , तेजपत्र , छोटी इलायची , दालचीनी , वायविडंग , निशोथ , हरड , बहेड़ा , आंवले , नागकेशर , नागरमोथा , और लोह भस्म , प्रत्येक 40-40 ग्राम ( यह सभी आयुर्वेदिक औषधि विक्रेताओ से मिल जाएँगी ) | आप यदि अधिक नहीं बनाना चाहते तो हर वस्तु अनुपात रूप से कम की जा सकती हे | ( यदि हल्दी ताजी मिल सके तो 1 किलो 250 ग्राम लेकर छीलकर मिक्सर पीस कर काम में लें | ) बनाने की विधि - हल्दी को दूध में मिलाकार खोया या मावा बनाये , इस खोये को घी डालकर धीमी आंच पर भूने , भुनने के बाद इसमें शक्कर मिलाये | सक्कर गलने पर शेष औषधियों का कपड छान बारीक़ चूर्ण मिला देवे | अच्छी तरह से पाक जाने पर चक्की या लड्डू बना लें | सेवन की मात्रा - 20-25 ग्राम दो बार दूध के साथ | ( बाज़ार में मिलने वाला हरिद्रखंड चूर्ण के रूप में मिलता हे इसमें घी और दूध नहीं होता शकर कम या नहीं होती अत : खाने की मात्रा भी कम 3 से 5 ग्राम दो बार रहेगी | ) https://play.google.com/store/apps/details?id=com.tuneonn.Ayurveda

+3 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 3 शेयर

+183 प्रतिक्रिया 193 कॉमेंट्स • 70 शेयर
Vijay Yadav Apr 18, 2019

+11 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 36 शेयर
Swami Lokeshanand Apr 18, 2019

इधर भरतजी ननिहाल में हैं, उधर अयोध्या में सुमंत्र जी भगवान को वन पहुँचाकर वापिस लौटे। संध्या हो रही है, हल्का प्रकाश है, सुमंत्र जी नगर के बाहर ही रुक गए। जीवनधन लूट गया, अब क्या मुंह लेकर नगर में प्रवेश करूं? अयोध्यावासी बाट देखते होंगे। महाराज पूछेंगे तो क्या उत्तर दूंगा? अभी नगर में प्रवेश करना ठीक नहीं, रात्रि हो जाने पर ही चलूँगा। अयोध्या में आज पूर्ण अमावस हो गई है। रघुकुल का सूर्य दशरथजी अस्त होने को ही है, चन्द्र रामचन्द्रजी भी नहीं हैं, प्रकाश कैसे हो? सामान्यतः पूर्णिमा चौदह दिन बाद होती है, पर अब तो पूर्णिमा चौदह वर्ष बाद भगवान के आने पर ही होगी। दशरथजी कौशल्याजी के महल में हैं, जानते हैं कि राम लौटने वालों में से नहीं, पर शायद!!! उम्मीद की किरण अभी मरी नहीं। सुमंत्रजी आए, कौशल्याजी ने देखकर भी नहीं देखा, जो होना था हो चुका, अब देखना क्या रहा? दशरथजी की दृष्टि में एक प्रश्न है, उत्तर सुमंत्रजी की झुकी गर्दन ने दे दिया। महाराज पथरा गए। बोले- "कौशल्या देखो वे दोनों आ गए" -कौन आ गए महाराज ? कोई नहीं आया। -तुम देखती नहीं हो, वे आ रहे हैं। इतने में वशिष्ठजी भी पहुँच गए। -गुरुजी, कौशल्या तो अंधी हो गई है, आप तो देख रहे हैं, वे दोनों आ गए। -आप किन दो की बात कर रहे हैं, महाराज? -गुरुजी ये दोनों तपस्वी आ गए, मुझे लेने आए हैं, ये श्रवण के मातापिता आ गए। महाराज ने आँखें बंद की, लगे राम राम करने और वह शरीर शांत हो गया। विचार करें, ये चक्रवर्ती नरेश थे, इन्द्र इनके लिए आधा सिंहासन खाली करता था, इनके पास विद्वानों की सभा थी, बड़े बड़े कर्मकाण्डी थे। इनसे जीवन में एकबार कभी भूल हुई थी, इनके हाथों श्रवणकुमार मारा गया था, इतना समय बीत गया, उस कर्म के फल से बचने का कोई उपाय होता तो कर न लेते? यह जो आप दिन रात, उपाय उपाय करते, दरवाजे दरवाजे माथा पटकते फिरते हैं, आप समझते क्यों नहीं? आप को बुद्धि कब आएगी? अब विडियो देखें- दशरथ जी का देह त्याग https://youtu.be/qO3KqNYTVCU

+14 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 6 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB