मायमंदिर फ़्री कुंडली
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netaji
netaji Jun 12, 2019

आप सभी से निवेदन है कि इस वीडियो को आगे जरूर शेयर करें――――――अरे भाई आप तो देख लिए अब तो शेयर कर दो आपकी इमेज डाऊन नहीं होगी plz..

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sonali jangle Jul 15, 2019

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आध्यात्मिक दर्शन। प्राण साधना 10 साथियो ( इडा) चन्द्रस्वर के समय और कोन कोन से कार्य किये जाते हैं। काल का ज्ञान, यज्ञोपवीत का धारण करना, वेदों का अध्ययन करना, पशुओं को घर में लाना, कठिन रोगों की चिकित्सा करना तथा मालिक को बुलाना आदि कार्य इडा नाडी में शुभ होतें है। हाथी-घोडो पर चढना, धनुर्विद्या का अध्ययन, हाथी-घोडो को घर में बाधना, दुसरो का उपकार करना सम्पत्ति का संग्रह करना आदि कार्य इडा नाडी में सफल होते हैं। गायन करना, बाजा बजाना, नाचना, नाट्यशास्त्र का विचार करना, गाँव शहर में प्रवेश करना, तिलक लगाना, खेत खरीदना आदि के लिए इडा नाडी शुभ है। दुख:, शोक, ज्वर, मूर्छा आदि के निवारण में स्वजन तथा मालिक के सम्बन्ध में और अन्न, लकड़ी, आदि के संग्रह में इडा नाडी शुभ है। स्त्रियों के दन्त आभूषणों को लगाने में, वृष्टि के आगमन में, गुरु के पूजन में एवं विष के उतारने में इडा नाडी शुभ है। योगाभ्यास आदि कार्य इडा नाडी में सिद्धि प्राप्त कराते हैं। किन्तु इडा नाडी में यदि तेज( अग्नि), वायु और आकाश तत्त्व उदित हों तो उक्त कार्य नहीं करने चाहिएं (इडा नाडी के पृथ्वी और जल तत्त्व उदित रहने पर ही उक्त कार्य सिद्ध होते है) साथियों तत्त्वों का ज्ञान, ये शरीर में केसै उदित होतें है इनकी पहचान केसै हो एक तत्त्व का प्रभाव कितने समय तक रहता है। और क्या फल देता है इसे आगे की पोस्टों में प्रकाशित करैगें। धन्यवाद जी शिवचरण परमार भुलवाना

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vinodkumar mahajan Jul 15, 2019

गुलाम, बना दिया...!!! ------------------------------- कथा है, आटपाट नगरी की। एक आदमी की, जिसके माँ बाप उसके बचपन में ही मर गए थे। गरीबी,सामाजिक मानसिक उत्पीड़न ने उसे मनोरूग्ण बना दिया। नियती भी बडी विचित्र होती है।कैसे कैसे खेल खेलती है,और रंग दिखाती है,किसी को कुछ पता भी नही लगने देती है। ठीक इसी प्रकार से नियती ने उस , " विकृत इंन्सान ",को भी बडा किया। हुवा युं की, जिसपर बचपन में भयंकर आघात हो गये थे,उसने , संपूर्ण मानव जाती का, प्रतिशोध, लेने की ठान ली। और होता ऐसा गया की, उस विकृत ने, समस्त मानव जाती का, प्रतिशोध लेना आरंभ किया। हर एक मानव को, उसने, " गुलाम ",बनाकर, " घुटनों के बल पर " झुकाना, मजबूर किया। हर एक की, " पूंछ ",काटनेपर मजबूर किया। चोरी,डकैती,दुसरों की जमीनों को हडपना, सच्चे,अच्छे, ईमानदार लोगों पर प्रहार करना, अनैतिकता, सभी की बर्बादी...कुछ ऐसा ही सिखाया। सभी को सैतान, हैवान, राक्षसों भी बडा भयंकर राक्षस बनाने की निती आरंभ की। और..... जो नही झुकता,गुलाम नही बनता, उसका सर कलम का ऐलान। दिन ब दिन यह सिलसिला बढता गया।अक्राल विक्राल हो गया।हाहाकार मच गया। भगवान भी, चिंतित हो गया, क्रोधित भी हो गया। और एक दिन... भगवान ने.. भयंकर उपद्रवी,हाहाकारी, राक्षसी सिध्दांतों का, सर्वनाश, किया। काल्पनिक कथा, समाप्त। हरी ओम। ------------------------------- विनोदकुमार महाजन, अंतरराष्ट्रीय पत्रकार।

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Purav Jul 15, 2019

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DEEPAK BHATIA Jul 15, 2019

_*"आखिर यह भी तो नहीं रहेगा।"*_ _एक फकीर अरब में हज के लिए पैदल निकला। रात हो जाने पर एक गांव में शाकिर नामक व्यक्ति के दरवाजे पर रूका। शाकिर ने फकीर की खूब सेवा किया। दूसरे दिन शाकिर ने बहुत सारे उपहार दे कर विदा किया। फकीर ने दुआ किया -"खुदा करे तू दिनों दिन बढता ही रहे।"_ _सुन कर शाकिर हंस पड़ा और कहा -"अरे फकीर! जो है यह भी नहीं रहने वाला है"। यह सुनकर फकीर चला गया ।_ _दो वर्ष बाद फकीर फिर शाकिर के घर गया और देखा कि शाकिर का सारा वैभव समाप्त हो गया है। पता चला कि शाकिर अब बगल के गांव में एक जमींदार के वहाँ नौकरी करता है। फकीर शाकिर से मिलने गया। शाकिर ने अभाव मे भी फकीर का स्वागत किया। झोपड़ी में फटी चटाई पर बिठाया। खाने के लिए सूखी रोटी दिया।_ _दूसरे दिन जाते समय फकीर की आखों में आँसू थे। फकीर कहने लगा "अल्लाह ये तूने क्या क्रिया?"_ _शाकिर पुनः हंस पड़ा और बोला -"फकीर तू क्यों दुखी हो रहा है? महापुरुषों ने कहा है - "खुदा इन्सान को जिस हाल मे रखे खुदा को धन्यावाद दे कर खुश रहना चाहिए। समय सदा बदलता रहता है" और सुनो यह भी नहीं रहने वाला है"।_ _फकीर सोचने लगा -"मैं तो केवल भेष से फकीर हूँ सच्चा फकीर तो शाकिर तू ही है।"_ _दो वर्ष बाद फकीर फिर यात्रा पर निकला और शाकिर से मिला तो देख कर हैरान रह गया कि शाकिर तो अब जमींदारों का जमींदार बन गया है। मालूम हुआ कि जमींदार जिसके वहा शाकिर नौकरी करता था वह संतान विहीन था मरते समय अपनी सारी जायदाद शाकिर को दे गया।_ _फकीर ने शाकिर से कहा - "अच्छा हुआ वो जमाना गुजर गया।_ _अल्लाह करे अब तू ऐसा ही बना रहे।"_ _यह सुनकर शाकिर फिर हंस पड़ा और कहने लगा - "फकीर! अभी भी तेरी नादानी बनी हुई है"।_ _फकीर ने पूछा क्या यह भी नहीं रहने वाला है? शाकिर ने उत्तर दिया "या तो यह चला जाएगा या फिर इसको अपना मानने वाला ही चला जाएगा। कुछ भी रहने वाला नहीं है। और अगर शाश्वत कुछ है तो वह हैं परमात्मा और इसका अंश आत्मा।" फकीर चला गया ।_ _डेढ साल बाद लौटता है तो देखता है कि शाकिर का महल तो है किन्तु कबूतर उसमें गुटरगू कर रहे हैं। शाकिर कब्रिस्तान में सो रहा है। बेटियां अपने-अपने घर चली गई है। बूढ़ी पत्नी कोने में पड़ी है।_ _"कह रहा है आसमां यह समा कुछ भी नहीं।_ _रो रही है शबनमे नौरंगे जहाँ कुछ भी नहीं।_ _जिनके महलों मे हजारो रंग के जलते थे फानूस।_ _झाड उनके कब्र पर बाकी निशा कुछ भी नहीं।"_ _फकीर सोचता है - "अरे इन्सान ! तू किस बात का अभिमान करता है? क्यों इतराता है? यहाँ कुछ भी टिकने वाला नहीं है दुःख या सुख कुछ भी सदा नहीं रहता।"_ _तू सोचता है - "पड़ोसी मुसीबत में है और मैं मौज मे हूँ। लेकिन सुन न मौज रहेगी और न ही मुसीबत। सदा तो उसको जानने वाला ही रहेगा।_ _"सच्चे इन्सान है वे जो हर हाल में खुश रहते हैं।_ _मिल गया माल तो उस माल मे खुश रहते हैं।_ _हो गये बेहाल तो उस हाल में खुश रहते है।"_ _धन्य है शाकिर तेरा सत्संग और धन्य हैं तुम्हारे सद्गुरु। मैं तो झूठा फकीर हुँ। असली फकीर तो तेरी जिन्दगी है।_ _अब मैं तेरी कब्र देखना चाहता हूँ। कुछ फूल चढ़ा कर दुआ तो मांग लूँ।_ _*फकीर कब्र पर जाता है तो देखता है कि शाकिर ने अपनी कब्र पर लिखवा रखा है- आखिर यह भी तो नहीं रहेगा।*_ _|| 🙏स्नेह वन्दन ||_

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