B K Patel
B K Patel Oct 1, 2020

जय माता महालक्ष्मी नमो नमः 🙏 ✍️ अपनों का साथ बहुत.. आवश्यक है, सुख हो तो बढ़ जाता है और दुःख हो, तो बट जाता है.....!! शुभ प्रभात स्नेह वंदन भाई और बहेनो धन्यवाद जय माता दी 🌹🙏🙏👌👌👍👍🕉️🌄

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कामेंट्स

dayaram birla Oct 2, 2020
Jay mata Di shubh prabhat g pratah vandan 🌹🙏🌹

Hemant Kasta Oct 2, 2020
Shree Laxmi Matay Namah, Shree Durga Matay Namah, Shree Amba Matay Namah, Beautiful Post, Anmol Massage, Bhakti Vandana, Dhanywad Brother Ji Namaskar, Subahka Ram Ram, Aap Aur Aapka Parivar Har Din Har Pal Khushiyo Se Bhara Rahe, Suprabhat

प्रवीण चौहान Oct 2, 2020
🇮🇳 जय हिन्द 🇮🇳 🇮🇳 वंदे मातरम 🇮🇳 🌺🌺🌺🌷🌷🙏🏻 🌺 महात्मा गांधी जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं 🌺 🇮🇳🇮🇳🥀🥀 🙏🏻🙏🏻🥀🥀 🇮🇳🇮🇳🌺 🇮🇳💥🏹 जय श्री राम 🏹💥🇮🇳 🌻🌻 माँ भवानी के भक्ति मय दिन शुक्रवार का आपको स्नेहिल वंदन 🌻🌻 ⚘⚘ आपका दिन शुभ एवं मंगलमय रहे 🧡🧡 जय संतोषी माता 🧡🧡 ❤❤ जय महालक्ष्मी माता ❤❤ 💛💛 जय श्री राधे कृष्ण 💛💛 सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके  शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तुते  अर्थ:  शुभ कार्यों में सर्वाधिक शुभ करने वाली मंगलदायिनी, (भक्त के) सभी पुरुषार्थ (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष) साधने वाली तथा उसे शरण देने वाली, गौर वर्ण तथा तीन नेत्रों वाली हे नारायणी! आपको हमारा नमन। 🌷🔱🌷 जय माता दी 🌷🔱🌷

Vinod Agrawal Oct 2, 2020
🙏🌹जय माता दी जय माँ महालक्ष्मी जी 🌹🙏

Sushil Kumar Sharma 🙏🙏🌹🌹 Oct 2, 2020
Good Morning ji 🙏🙏 Jay Mata di 🙏🙏🌹🌹🌹 Mata Rani ji Ki Kripa Dristi Aap Our Aapke Priwar Per Hamesha Sada Bhni Rahe ji 🙏🙏🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹.

Renu Singh Oct 2, 2020
Jai Mata Di Bhai ji 🙏🌹 Mata Rani ki kripa Aap aur Aàpke Pariwar pr hamesha Bni rhe Aàpka Din Shubh V Mangalmay ho Bhai Ji 🙏🌹

Ramesh Soni.33 Oct 2, 2020
🌹Om Ganeshaya namah 🚩Om Namah Shivay 🏳🏳🏳🌼Jay Shri Ram 🚩🚩🌹🌹🌹Jay Shri Radha Krishna ki Jay 🌹Jay Bajrangbali ki Jay🌹🚩🚩🚩🙏🙏🌹🌹🌹🌹

Brajesh Sharma Oct 2, 2020
प्रेम से बोलो "जय माता दी"

ಗಿರಿಜಾ ನೂಯಿ Oct 2, 2020
🙏🙏 Good Evening Ji🌹🌹 🚩🚩Jai Mata Di Ji🙏🙏 Super Video Song Ji👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌 Mahatma Gandhi & Lal Bahadur Shashtri Jayanthi Ki Hardik Shubhakamnayein Ji🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 Have a blessed Friday, Mata Di ji bless you & your family always be happy, healthy & wealthy dear brother ji🙏🙏🙏🙏🌷🌷🌷🌷🌸🌸🌸🌸💐💐💐💐🏵️🏵️🏵️🏵️

🔱🛕काशी विश्वनाथ धाम🛕🔱 Oct 2, 2020
🚩👣🌺 जय माता दी 🌺👣🚩 🥀🙏 नमस्ते भाई🙏🥀 🙏आपको सपरिवार राष्ट्र पिता महात्मा गांधी जी और देश के दूसरे प्रधान मंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं ✍️ 🎭आप और आपके पूरे परिवार पर माता रानी और श्री प्रभु हरि विष्णु जी की आशिर्वाद हमेशा बनी रहे🌹 🌈आपका दिन शुभऔर मंगलमय हो जी 🌈

Narayan Tiwari Oct 2, 2020
ऊँ ह्रीं महालक्ष्म्यै नमः🚩 जय मांई की कलिकाल में लक्ष्मी मांई की साधना से हम समस्त प्रकार की विपत्तियों से पूर्णता के साथ विजय प्राप्त कर सकते हैं! माँई का आपको आशीष प्राप्त हो। माँई से ऐसी प्रार्थना हैं!

Vijay Pandey Oct 2, 2020
🌷🌷🚩 जय माता दी ‌🚩🌷🌷 शुभ रात्रि की शुभ मंगल कामनाएं जी मां भगवती जी का आशीर्वाद आप और आपके घर में सुख शांति समृद्धि और आरोग्यता हमेशा बनी रहे, आप और आपका परिवार सदा स्वस्थ एवं सुखी रहे ‌🌷🙌👌👌☑️👍

Vinay Mishra Oct 2, 2020
जय माता दी माता रानी की कृपा हमेशा और आपके परिवार पर बनी रहे शुभ रात्रि वंदन जी 🥀💥🙏

devilakshmi Oct 18, 2020

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🎎अथ श्री दुर्गा सप्तशती🎎 🚩🌺🦁 जय माता दी 🦁🌺🚩 ✍️ अध्याय :- आठवां ✍️ 🌹 रक्तबीज वध 🌹 🎎 महर्षि मेघा ने कहा- चण्ड और मुण्ड नामक असुरों के मारे जाने से और बहुत सी सेना का नष्ट हो जाने से असुरों के राजा, प्रतापी शुम्भ ने क्रोध युक्त होकर अपनी सम्पूर्ण सेना को युद्ध के लिए तैयार होने की आज्ञा दी । उसने कहा- अब उदायुध नामक छियासी असुर सेनापति अपनी सेनाओं के साथ युद्ध के लिए जाये और कम्बू नामक चौरासी सेनापति भी युद्ध के लिए जाये और कोटि वीर्य नामक पचास सेनापति और धौम्रकुल नाम के सौ सेनापति प्रस्थान करें, कालक, दोह्र्द, मोर्य और कालकेय यह दैत्य भी मेरी आज्ञा से सजाकर युद्ध के लिए कूँच करें, भयानक शासन करने वाला असुरों का स्वामी शुम्भ इस प्रकार आज्ञा देकर बहुत बड़ी सेना के साथ युद्ध के लिए चला। उसका सेना को अपनी ओर आता देखकर चण्डिका ने अपनी धनुष की टंकोर से पृथ्वी और आकाश के बीच का भाग गूंजा दिया। हे राजन ! इसके पश्चात देवी के सिंह ने दहाडनय दैत्यों के नाश के लिए और देवताओं के हित के लिए ब्रम्हा, शिव, कार्तिकेय, विष्णु तथा इंद्र आदि देवों शक्तियां जो अत्यंत पराक्रम और से सम्पन थीं, उनके शरीर से निकल कर उसी रूप में चण्डिका देवी पास गई। जिस देवता का जैसा रूप था, जैसे आभूषण थे और जैसा वाहन था, वैसा ही रूप, आभूषण और वाहन लेकर, उन देवताओं की शक्तिया दैत्यों से युद्ध करने के लिए आई। 🎎वृषभ पर सवार होकर, हाथ में त्रिशूल लेकर, महानाग का कंकण पहन कर और चंद्ररेखा से भूषित होकर भगवान शंकर की शक्ति रसिंह भी आई, उसकी गर्दन के झटकों से आकाश के तारे टूट पड़ते थे और इसी प्रकार देवराज इंद्र की शक्ति ऐन्द्री भी ऐरावत के ऊपर सवार होकर आई, पश्चात इन देवशक्तियों से घिरे हुए भगवान शंकर ने चंडिका से कहा- मेरी प्रसन्नता के लिए तुम शीघ्र ही इन असुरों को मारो। इसके पश्चात देवी के शरीर में से अत्यंत उग्र रूप वाली और सैकड़ों गीदड़ियों के समान आवाज़ करने वाली चंडिका शक्ति प्रकट हुई, उस अपराजिता देवी ने धूमिल जटा वाले भगवन शंकर जी से कहा- हे प्रभो! आप मेरी ओर से दूत बनकर शुम्भ और निशुम्भ के पास जाइये और उन अत्यंत गर्वीले दैत्यों से कहिये तथा उनके अतिरिक्त और भी जो दैत्य वहाँ युद्ध के लिए उपस्थित हों, उनसे भी कहिये- जो तुम्हें अपने जीवित रहने की इच्छा हो तो त्रिलोकी का राज्य इंद्र को दे दो, देवताओं को उनका यज्ञ भाग मिलना आरंभ हो जाय और तुम पाताल को लौटे जाओ, किन्तु यदि बल के गर्व से तुम्हारी लड़ने की इच्छा हो तो फिर आ जाओ, तुम्हारे माँस से मेरी, योगिनियां तृप्त होगीं, चूँकि उस देवी ने भगवान शंकर को दूत के कार्य में नियुक्त किया था, इसलिए वह संसार में शिवदूती के नाम से विख्यात हुई। भगवान शंकर से देवी का सन्देश पाकर उन दैत्यों के क्जिस तरफ दौड़ती थी, उसी तरफ अपने कमण्डलु का जल छिड़क कर दैत्यों के वीर्य व बल को नष्ट कर देती थी और इसी प्रकार माहेश्वरी त्रिशूल से, वैष्णवी चक्र से और अत्यंत कोपवाली कौमारी शक्ति द्वारा असुरों को मार रही थी और ऐन्द्री के बाजु के प्रहार से सैकड़ों दैत्य रक्त की नदियाँ बहाते हुए पृथवी पर सो गए । 🦁वाराही ने कितने ही राक्षसों को अपनी थूथन द्वारा मृत्यु के घाट उतार दिया, दाढ़ों के अग्रभाग से कितने ही राक्षसों की छाती को चीर डाला और चक्र की चोट से कितनों ही को विदर्ण करके धरती पर डाल दिया । बड़े -२ राक्षसों को नारसिंही अपने नखों से विदर्ण करके भक्षण रही थी, शिवदूती के प्रचंड अट्टहास से कितने ही दैत्य भयभीत होकर पृथ्वी पर गिर पड़े और उनके गिरते ही वह उनको भक्षण कर गई। इस तरह क्रोध में भरे हुए मातृगणों द्वारा नाना प्रकार के उपायों से बड़े-बड़े असुरों को मरते हुए देखकर राक्षसी सेना भाग खड़ी हुई और उनको इस प्रकार भागता देखकर रक्तबीज नामक महा पराक्रमी राक्षस क्रोध में भरकर युद्ध के लिए आगे बढ़ा। उसके शरीर से रक्त की बूँदें पृथ्वी पर जिसे ही गिरती थीं तुरन्त वैसे ही शरीर वाला तथा वैसा ही बलवान दैत्य पृथ्वी से उत्पन्न हो जाता था। रक्तबीज गदा हाथ में लेकर इंद्री के साथ युद्ध करने लगा, जब इंद्रिशाक्ति ने अपने वज्र से उसको मारा तो घायल होने के कारण उसके शरीर से बहुत सा रक्त बहने लगा और उनकी प्रत्येक बूँद से उसके सामन ही बलवान तथा महा पराक्रमी अनेकों दैत्य भयंकर रूप से प्रकट हो गए, वह सब के सब दैत्य बीज के सामान ही बलवान तेज वाले थे, वह भी भयंकर अस्त्र-शस्त्र लेकर देवियो के साथ लड़ने लगे| जब इंद्री के वज्र प्रहार से उनके मस्तक पर चोट लगी और रक्त बहने लगा तो उसमे से हज़ारों हो पुरुष उत्पन्न हो गए| वैष्णवी ने चक्र से और इंद्री ने गदा से रक्तबीज को चोट पहुचाई और वैष्णवी के चक्र से घायल होने पर उनके शरीर से जो रक्त बहा, उससे हजारों महा आसुर उत्पन्न हुए, जिनके द्वारा यह सम्पूर्ण जगत व्याप्त हो गया, कौमारी ने शक्ति, से वाराही ने खड्ग से अरु माहेश्वरी ने त्रिशूल से उसको घायल किया| इस प्रकार क्रोध में भरकर उस महादैत्य से सब मातृ शकितयों पर पृथक-पृथक गदा से प्रहार किया, और माताओं ने शक्ति तथा शूल इत्यादि से उसको जो बार-बार घायल किया, उससे सैकड़ों महादैत्य उत्पन्न हुए और इस प्रकार उस रक्तबीज के रुधिर से उत्पन्न हुए असुरों से सम्पूर्ण जगत व्याप्त हो गया जिससे देवताओं को भय हुआ, देवताओं को भयभीत देखर चंडिका ने काली से कहा- हे चामुण्डे ! अपने मुख को बड़ा करो और मेरे शास्त्र घात से उतपन्न हुए रक्त बिंदुओं तथा रक्त बिंदुओं से उत्पन्न हुए महा- असुरों को तुम अपने इस मुख से भक्षण करती जाओ| 🦁इस प्रकार रक्त बिंदुओं से उत्पन्न हुए महादैत्यों को भक्षण करती हुई तुम रण भूमि में विचरो| इस प्रकार रक्त कम होने से यह दैत्य नष्ट हो जावेगे, तुम्हारे भक्षण करने के कारण अन्य दैत्य उत्पन्न नहीं होगें| काली से इस प्रकार कहकर चंडिका देवी ने रक्तबीज पर अपने त्रिशूल किया और काली देवी ने अपने मुख में उसका रक्त ले लिया, तब उसने गदा से चंडिका पर प्रहार किया, प्रहार से चंडिका को तनिक भी कष्ट न हुआ, किन्तु रक्तबीज के शरीर से बहुत सा रक्त बहने लगा, लेकिन उसके गिरने के साथ ही काली ने उसको अपने मुख में ले लिया| काली के मुख में उस रक्त से जो असुर उतपन्न हुए, उनको उसने भक्षण कर लिया और रक्त को पीती गई, तदन्तर देवी ने रक्तबीज को जिसका की खून काली ने पिया था, चंडिका दैत्य को वज्र,बाण, खंडग और ऋष्टि इत्यादि से मार डाला| हे राजन ! अनेक प्रकार के शस्त्रों से मारा हुआ और खून से वंचित वह महादैत्य रक्तबीज पृथ्वी पर गिर पड़ा| हे राजन ! उसके गिरने से देवता अत्यंत प्रसन्न हुए और माताएं उन असुरों का रक्त पिने के पश्चात उद्धत हो कर नृत्य करने लगी| *दुर्गा सप्तशती का आठवां अध्याय समाप्त* 🚩👣🦁जय माता दी 🦁👣🚩 🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯

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