जय श्री शनि देव

जय श्री शनि देव

आज शनिश्चरी अमावस्या है , और उज्जैन में बहुत पारंपरीक विधी से मनाया जाता है , यहां दूर-दूर से भक्त आते हैं शनि पीड़ा से मुक्ति के लिए
मध्य प्रदेश की धार्मिक राजधानी उज्जैन को मंदिरों की नगरी भी कहा जाता है। यहां अनेक विश्व प्रसिद्ध मंदिर है, जिनमें से ज्योतिर्लिंग भगवान महाकालेश्वर का मंदिर सबसे प्रमुख है। नगर से थोड़ी दूर सांवेर रोड पर प्राचीन शनि मंदिर भी यहां का प्रमुख दर्शनीय स्थल है। ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य ने करवाया था।
इस मंदिर की खास बात यह है कि यहां शनि देव के साथ-साथ अन्य नवग्रह भी विराजमान हैं इसलिए इसे नवग्रह मंदिर भी कहा जाता है। यहां दूर-दूर से शनि भक्त तथा शनि प्रकोप से प्रभावित लोग दर्शन करने आते हैं और शनि देव की स्तुति करते हैं। यह मंदिर शिप्रा नदी के तट पर स्थित है, जिसे त्रिवेणी संगम भी कहा जाता है।यहां से शिप्रा नदी का नजारा बहुत ही सुंदर दिखाई देता है।प्रत्येक शनिवार को यहां श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। शनिश्चरी अमावस्या पर तो यहां दर्शनार्थियों का सैलाब उमड़ पड़ता है, जिसके कारण प्रशासन को यहां अतिरिक्त व्यवस्थाएं करनी पड़ती है। हजारों श्रद्धालु लंबी कतारों में लगाकर शनि देव के दर्शन करते हैं।
कैसे पहुंचें-
भारत के किसी भी कोने से इंदौर पहुंचकर आसानी से सड़क या रेलमार्ग द्वारा उज्जैन पहुंचा जा सकता है।

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कामेंट्स

vineeta tripathi Aug 7, 2020

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*पत्नी वामांगी क्यों कहलाती है? 〰️〰️🔸〰️🔸〰️🔸〰️〰️ *शास्त्रों में पत्नी को वामांगी कहा गया है, जिसका अर्थ होता है बाएं अंग का अधिकारी। इसलिए पुरुष के शरीर का बायां हिस्सा स्त्री का माना जाता है। *इसका कारण यह है कि भगवान शिव के बाएं अंग से स्त्री की उत्पत्ति हुई है जिसका प्रतीक है शिव का अर्धनारीश्वर शरीर। यही कारण है कि हस्तरेखा विज्ञान की कुछ पुस्तकों में पुरुष के दाएं हाथ से पुरुष की और बाएं हाथ से स्त्री की स्थिति देखने की बात कही गयी है। *शास्त्रों में कहा गया है कि स्त्री पुरुष की वामांगी होती है इसलिए सोते समय और सभा में, सिंदूरदान, द्विरागमन, आशीर्वाद ग्रहण करते समय और भोजन के समय स्त्री पति के बायीं ओर रहना चाहिए। इससे शुभ फल की प्राप्ति होती। *वामांगी होने के बावजूद भी कुछ कामों में स्त्री को दायीं ओर रहने के बात शास्त्र कहता है। शास्त्रों में बताया गया है कि कन्यादान, विवाह, यज्ञकर्म, जातकर्म, नामकरण और अन्न प्राशन के समय पत्नी को पति के दायीं ओर बैठना चाहिए। *पत्नी के पति के दाएं या बाएं बैठने संबंधी इस मान्यता के पीछे तर्क यह है कि जो कर्म संसारिक होते हैं उसमें पत्नी पति के बायीं ओर बैठती है। क्योंकि यह कर्म स्त्री प्रधान कर्म माने जाते हैं। *यज्ञ, कन्यादान, विवाह यह सभी काम पारलौकिक माने जाते हैं और इन्हें पुरुष प्रधान माना गया है। इसलिए इन कर्मों में पत्नी के दायीं ओर बैठने के नियम हैं। *क्या आप जानते हैं????? *सनातन धर्म में पत्नी को पति की वामांगी कहा गया है, यानी कि पति के शरीर का बांया हिस्सा, इसके अलावा पत्नी को पति की अर्द्धांगिनी भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है पत्नी, पति के शरीर का आधा अंग होती है, दोनों शब्दों का सार एक ही है, जिसके अनुसार पत्नी के बिना पति अधूरा है। *पत्नी ही पति के जीवन को पूरा करती है, उसे खुशहाली प्रदान करती है, उसके परिवार का ख्याल रखती है, और उसे वह सभी सुख प्रदान करती है जिसके वह योग्य है, पति-पत्नी का रिश्ता दुनिया भर में बेहद महत्वपूर्ण बताया गया है, चाहे सोसाइटी कैसी भी हो, लोग कितने ही मॉर्डर्न क्यों ना हो जायें, लेकिन पति-पत्नी के रिश्ते का रूप वही रहता है, प्यार और आपसी समझ से बना हुआ। *हिन्दू धर्म के प्रसिद्ध ग्रंथ महाभारत में भी पति-पत्नी के महत्वपूर्ण रिश्ते के बारे में काफी कुछ कहा गया है, भीष्म पितामह ने कहा था कि पत्नी को सदैव प्रसन्न रखना चाहिये, क्योंकि, उसी से वंश की वृद्धि होती है, वह घर की लक्ष्मी है और यदि लक्ष्मी प्रसन्न होगी तभी घर में खुशियां आयेगी, इसके अलावा भी अनेक धार्मिक ग्रंथों में पत्नी के गुणों के बारे में विस्तारपूर्वक बताया गया है। *आज हम आपको गरूड पुराण, जिसे लोक प्रचलित भाषा में गृहस्थों के कल्याण की पुराण भी कहा गया है, उसमें उल्लिखित पत्नी के कुछ गुणों की संक्षिप्त व्याख्या करेंगे, गरुण पुराण में पत्नी के जिन गुणों के बारे में बताया गया है, उसके अनुसार जिस व्यक्ति की पत्नी में ये गुण हों, उसे स्वयं को भाग्यशाली समझना चाहिये, कहते हैं पत्नी के सुख के मामले में देवराज इंद्र अति भाग्यशाली थे, इसलिये गरुण पुराण के तथ्य यही कहते हैं। *सा भार्या या गृहे दक्षा सा भार्या या प्रियंवदा। *सा भार्या या पतिप्राणा सा भार्या या पतिव्रता।। *गरुण पुराण में पत्नी के गुणों को समझने वाला एक श्लोक मिलता है, यानी जो पत्नी गृहकार्य में दक्ष है, जो प्रियवादिनी है, जिसके पति ही प्राण हैं और जो पतिपरायणा है, वास्तव में वही पत्नी है, गृह कार्य में दक्ष से तात्पर्य है वह पत्नी जो घर के काम काज संभालने वाली हो, घर के सदस्यों का आदर-सम्मान करती हो, बड़े से लेकर छोटों का भी ख्याल रखती हो। *जो पत्नी घर के सभी कार्य जैसे- भोजन बनाना, साफ-सफाई करना, घर को सजाना, कपड़े-बर्तन आदि साफ करना, यह कार्य करती हो वह एक गुणी पत्नी कहलाती है, इसके अलावा बच्चों की जिम्मेदारी ठीक से निभाना, घर आये अतिथियों का मान-सम्मान करना, कम संसाधनों में भी गृहस्थी को अच्छे से चलाने वाली पत्नी गरुण पुराण के अनुसार गुणी कहलाती है, ऐसी पत्नी हमेशा ही अपने पति की प्रिय होती है। *प्रियवादिनी से तात्पर्य है मीठा बोलने वाली पत्नी, आज के जमाने में जहां स्वतंत्र स्वभाव और तेज-तरार बोलने वाली पत्नियां भी है, जो नहीं जानती कि किस समय किस से कैसे बात करनी चाहियें, इसलिए गरुण पुराण में दिए गए निर्देशों के अनुसार अपने पति से सदैव संयमित भाषा में बात करने वाली, धीरे-धीरे व प्रेमपूर्वक बोलने वाली पत्नी ही गुणी पत्नी होती है। *पत्नी द्वारा इस प्रकार से बात करने पर पति भी उसकी बात को ध्यान से सुनता है, व उसके इच्छाओं को पूरा करने की कोशिश करता है, परंतु केवल पति ही नहीं, घर के अन्य सभी सदस्यों या फिर परिवार से जुड़े सभी लोगों से भी संयम से बात करने वाली स्त्री एक गुणी पत्नी कहलाती है, ऐसी स्त्री जिस घर में हो वहां कलह और दुर्भाग्य कबीनहीं आता। *पतिपरायणा यानी पति की हर बात मानने वाली पत्नी भी गरुण पुराण के अनुसार एक गुणी पत्नी होती है, जो पत्नी अपने पति को ही सब कुछ मानती हो, उसे देवता के समान मानती हो तथा कभी भी अपने पति के बारे में बुरा ना सोचती हो वह पत्नी गुणी है, विवाह के बाद एक स्त्री ना केवल एक पुरुष की पत्नी बनकर नये घर में प्रवेश करती है, वरन् वह उस नये घर की बहु भी कहलाती है, उस घर के लोगों और संस्कारों से उसका एक गहरा रिश्ता बन जाता है। *इसलिए शादी के बाद नए लोगों से जुड़े रीति-रिवाज को स्वीकारना ही स्त्री की जिम्मेदारी है, इसके अलावा एक पत्नी को एक विशेष प्रकार के धर्म का भी पालन करना होता है, विवाह के पश्चात उसका सबसे पहला धर्म होता है कि वह अपने पति व परिवार के हित में सोचे, व ऐसा कोई काम न करे जिससे पति या परिवार का अहित हो। *गरुण पुराण के अनुसार जो पत्नी प्रतिदिन स्नान कर पति के लिए सजती-संवरती है, कम बोलती है, तथा सभी मंगल चिह्नों से युक्त है, जो निरंतर अपने धर्म का पालन करती है तथा अपने पति का ही हीत सोचती है, उसे ही सच्चे अर्थों में पत्नी मानना चाहियें, जिसकी पत्नी में यह सभी गुण हों, उसे स्वयं को देवराज इंद्र ही समझना चाहियें। *जय श्री राधेकृष्णा*🙏🌷 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️ 🍁🏯🌺👏🕉️👏🌺🏯🍁 🌞~*आज का हिन्दू पंचांग*~🌞 🚩✊जय हिंदुत्व✊🚩 🌈 *दिनांक 08 अगस्त 2020* 🌈 *दिन - शनिवार* 🌈 *विक्रम संवत - 2077 (गुजरात - 2076)* 🌈 *शक संवत - 1942* 🌈 *अयन - दक्षिणायन* 🌈 *ऋतु - वर्षा* 🌈 *मास - भाद्रपद (गुजरात एवं महाराष्ट्र अनुसार - श्रावण)* 🌈 *पक्ष - कृष्ण* 🌈 *तिथि - पंचमी 08 अगस्त प्रातः 04:18 तक तत्पश्चात षष्ठी* 🌈 *नक्षत्र - उत्तर भाद्रपद शाम 04:12 तक तत्पश्चात रेवती* 🌈 *योग - धृति पूर्ण रात्रि तक* 🌈 *राहुकाल - सुबह 09:18 से सुबह 10:55 तक* 🌈 *सूर्योदय - 06:15* 🌈 *सूर्यास्त - 19:12* 🌈 *दिशाशूल - पूर्व दिशा में* 🌈 *व्रत पर्व विवरण - नाग पंचमी (राजस्थान की परम्परा के अनुसार), रक्षा पंचमी (ओड़िशा)* ✨ *विशेष - पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)* ✨ *ब्रह्म पुराण' के 118 वें अध्याय में शनिदेव कहते हैं- 'मेरे दिन अर्थात् शनिवार को जो मनुष्य नियमित रूप से पीपल के वृक्ष का स्पर्श करेंगे, उनके सब कार्य सिद्ध होंगे तथा मुझसे उनको कोई पीड़ा नहीं होगी। जो शनिवार को प्रातःकाल उठकर पीपल के वृक्ष का स्पर्श करेंगे, उन्हें ग्रहजन्य पीड़ा नहीं होगी।' (ब्रह्म पुराण')* ✨ *शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष का दोनों हाथों से स्पर्श करते हुए 'ॐ नमः शिवाय।' का 108 बार जप करने से दुःख, कठिनाई एवं ग्रहदोषों का प्रभाव शांत हो जाता है। (ब्रह्म पुराण')* ✨ *हर शनिवार को पीपल की जड़ में जल चढ़ाने और दीपक जलाने से अनेक प्रकार के कष्टों का निवारण होता है ।(पद्म पुराण)* 🌞~*आज का हिन्दू पंचांग*~🌞 🚩✊जय हिंदुत्व✊🚩 🌻 *जवानी में बाल सफ़ेद हो गए हो तो* 🌻 👦🏼 *जवानी में जिनके बाल सफ़ेद हो जाते हैं उनको चाहिए कि कोरा आवंले का पाऊडर ( मिश्री मिला हुआ नहीं ) ..अपना पानी पीने का जो घड़ा हो..छोटा सा वो अलग रखें उसमें एक चम्मच पाऊडर डाल दें ..जब भी प्यास लगे वो ही पानी पियें ..तो जवानी या बचपन में जिनके बाल सफ़ेद हो जाते हैं ..वो फिर से अपना रंग दिखायेंगे |* 🌞~*आज का हिन्दू पंचांग*~🌞 🚩✊जय हिंदुत्व✊🚩 🌻*अनिद्रा*🌻 ⏭️ *अनिद्रा के चार कारण हैं -* 1⃣🍁 *कफ की कमी* 2⃣🍁 *दूसरे का हक छीनना* 3⃣🍁 *व्यर्थ की चिंता* 4⃣🍁 *कुछ रोगों के कारण* 🌿 *(1) हरा धनिया का रस व मिश्री मिलाकर " ॐ हंसं हंसः " १०८ बार जप करके पी लें ।* 🐄 *(2) गाय का घी सिर व पैरों के तलवों पर मलें ।* 🐃 *(3) भैंस के दूध से बनी लस्सी दोपहर को पियें ।थोड़ी शक्कर डालके ... पर जोड़ो का दर्द हो, तो लस्सी में खटास होगी तो तकलीफ़ करेगी ... वे लोग न लें ।* 🚩 *(4) "शुद्धे शुद्धे महायोगिनी महानिद्रे स्वाहा" इस मंत्र का जप सोते समय प्रेम पूर्वक करें।* 🌞~*आज का हिन्दू पंचांग*~🌞 🚩✊जय हिंदुत्व✊🚩☀!! श्री हरि: शरणम् !! ☀ 🍃🎋🍃🎋🕉️🎋🍃🎋🍃 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

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RAJKUMAR RATHOD Aug 7, 2020

🌺🙏शुभ शनिवार जय शनिदेव 🙏🌺 💜🌺💙सुप्रभात वंदन... 🙏🙏शनिदेव की कृपा सदा आप पर बनी रहे 💜🌺💙 कर्म फल:- इन्सान जैसा कर्म करता है कुदरत या परमात्मा उसे वैसा ही उसे लौटा देता है । एक बार द्रोपदी सुबह तडके स्नान करने यमुना घाट पर गयी भोर का समय था तभी उसका ध्यान सहज ही एक साधु की ओर गया जिसके शरीर पर मात्र एक लँगोटी थी l साधु स्नान के पश्चात अपनी दुसरी लँगोटी लेने गया तो वो लँगोटी अचानक हवा के झोके से उड पानी मे चली गयी ओर बह गयी l सँयोगवस साधु ने जो लँगोटी पहनी वो भी फटी हुई थी l साधु सोच मे पड़ गया कि अब वह अपनी लाज कैसे बचाए थोडी देर मे सुर्योदय हो जाएगा और घाट पर भीड बढ जाएगी l साधु तेजी से पानी के बाहर आया और झाडी मे छिप गया l द्रोपदी यह सारा दृश्य देख अपनी साडी जो पहन रखी थी उसमे आधी फाड कर उस साधु के पास गयी ओर उसे आधी साडी देते हुए बोली-तात मै आपकी परेशानी समझ गयी l इस वस्त्र से अपनी लाज ढँक लीजिए l साधु ने सकुचाते हुए साडी का टुकडा ले लिया और आशीष दिया l जिस तरह आज तुमने मेरी लाज बचायी उसी तरह एक दिन भगवान तुम्हारी लाज बचाएगे l और जब भरी सभा मे चीरहरण के समय द्रोपदी की करुण पुकार नारद ने भगवान तक पहुचायी तो भगवान ने कहा-कर्मो के बदले मेरी कृपा बरसती है क्या कोई पुण्य है द्रोपदी के खाते मे l जाँचा परखा गया तो उस दिन साधु को दिया वस्त्र दान हिसाब मे मिला जिसका ब्याज भी कई गुणा बढ गया था l जिसको चुकता करने भगवान पहुच गये द्रोपदी की मद्दद करने l दुस्सासन चीर खीचता गया और हजारो गज कपडा बढता गया l इँसान यदि सुकर्म करे तो उसका फल सूद सहित मिलता है ओर दुस्कर्म करे तो सूद सहित भोगना पडता है

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Archana Singh Aug 8, 2020

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sunita Sharma Aug 8, 2020

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R N Agroya Aug 7, 2020

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Rajeev Thapar Aug 8, 2020

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