जय श्री शनि देव

जय श्री शनि देव

आज शनिश्चरी अमावस्या है , और उज्जैन में बहुत पारंपरीक विधी से मनाया जाता है , यहां दूर-दूर से भक्त आते हैं शनि पीड़ा से मुक्ति के लिए
मध्य प्रदेश की धार्मिक राजधानी उज्जैन को मंदिरों की नगरी भी कहा जाता है। यहां अनेक विश्व प्रसिद्ध मंदिर है, जिनमें से ज्योतिर्लिंग भगवान महाकालेश्वर का मंदिर सबसे प्रमुख है। नगर से थोड़ी दूर सांवेर रोड पर प्राचीन शनि मंदिर भी यहां का प्रमुख दर्शनीय स्थल है। ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य ने करवाया था।
इस मंदिर की खास बात यह है कि यहां शनि देव के साथ-साथ अन्य नवग्रह भी विराजमान हैं इसलिए इसे नवग्रह मंदिर भी कहा जाता है। यहां दूर-दूर से शनि भक्त तथा शनि प्रकोप से प्रभावित लोग दर्शन करने आते हैं और शनि देव की स्तुति करते हैं। यह मंदिर शिप्रा नदी के तट पर स्थित है, जिसे त्रिवेणी संगम भी कहा जाता है।यहां से शिप्रा नदी का नजारा बहुत ही सुंदर दिखाई देता है।प्रत्येक शनिवार को यहां श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। शनिश्चरी अमावस्या पर तो यहां दर्शनार्थियों का सैलाब उमड़ पड़ता है, जिसके कारण प्रशासन को यहां अतिरिक्त व्यवस्थाएं करनी पड़ती है। हजारों श्रद्धालु लंबी कतारों में लगाकर शनि देव के दर्शन करते हैं।
कैसे पहुंचें-
भारत के किसी भी कोने से इंदौर पहुंचकर आसानी से सड़क या रेलमार्ग द्वारा उज्जैन पहुंचा जा सकता है।

+273 प्रतिक्रिया 13 कॉमेंट्स • 66 शेयर

कामेंट्स

Sumitra Soni Nov 21, 2020

+1146 प्रतिक्रिया 259 कॉमेंट्स • 370 शेयर

+40 प्रतिक्रिया 3 कॉमेंट्स • 77 शेयर
pramod singh Nov 21, 2020

+254 प्रतिक्रिया 43 कॉमेंट्स • 172 शेयर
Suman Lata Nov 21, 2020

+230 प्रतिक्रिया 32 कॉमेंट्स • 148 शेयर
vineeta tripathi Nov 21, 2020

+223 प्रतिक्रिया 43 कॉमेंट्स • 54 शेयर
M.S.Chauhan Nov 21, 2020

*शुभ रात्रि वंदन* *जय श्री हनुमान जी* *जय श्री शनिदेव जी* *आपकी रात्रि सुखमय हो* *"क्यों हनुमान जी के भक्तों पर शनि देव का प्रकोप नहीं होता ?*" *शास्त्रों के अनुसार भगवान की सेना ने सागर सेतु बांध लिया, तब राक्षस इसे हानि न पहुंचा सकें, उसके लिए पवन सुत हनुमान को उसकी देखभाल की जिम्मेदारी सौपी गई। जब हनुमान जी शाम के समय अपने इष्टदेव राम के ध्यान में मग्न थे, तभी सूर्य पुत्र शनि ने अपना काला कुरूप चेहरा बनाकर क्रोधपूर्ण कहा- "हे वानर मैं देवताओ में शक्तिशाली शनि हूँ।* *सुना हैं, तुम बहुत बलशाली हो। आँखें खोलो और मेरे साथ युद्ध करो, मैं तुमसे युद्ध करना चाहता हूँ।" इस पर हनुमान जी ने विनम्रतापूर्वक कहा- "इस समय मैं अपने प्रभु को याद कर रहा हूं। आप मेरी पूजा में विघन मत डालिए। आप मेरे आदरणीय है। कृपा करके आप यहां से चले जाइए।"* *जब शनि देव लड़ने पर उतर आए, तो हनुमान जी ने उन्हें अपनी पूंछ में लपेटना शुरू कर दिया। फिर उन्हें कसना प्रारंभ कर दिया जोर लगाने पर भी शनि उस बंधन से मुक्त न होकर पीड़ा से व्याकुल होने लगे। हनुमान ने फिर सेतु की परिक्रमा कर शनि के घमंड को तोड़ने के लिए पत्थरो पर पूंछ को झटका दे-दे कर पटकना शुरू कर दिया।* *इससे शनि का शरीर लहुलुहान हो गया, जिससे उनकी पीड़ा बढ़ती गई। तब शनि देव ने हनुमान जी से प्रार्थना की कि "मुझे बधंन मुक्त कर दीजिए। मैं अपने अपराध की सजा पा चुका हूँ, फिर मुझसे ऐसी गलती नहीं होगी !" तब हनुमान जी ने जो तेल दिया, उसे घाव पर लगाते ही शनि देव की पीड़ा मिट गई।* *उसी दिन से शनिदेव को तेल चढ़ाया जाता हैं, जिससे उनकी पीडा शांत हो जाती हैं और वे प्रसन्न हो जाते हैं। हनुमानजी की कृपा से शनि की पीड़ा शांत हुई थी, इसी वजह से आज भी शनि हनुमानजी के भक्तों पर विशेष कृपा बनाए रखते हैं।* *शनि देव की प्रतिमा को तेल चढ़ाने से पहले तेल में अपना चेहरा अवश्य देखें। ऐसा करने पर शनि के दोषों से मुक्ति मिलती है। धन संबंधी कार्यों में आ रही रुकावटें दूर हो जाती हैं और सुख-समृद्धि बनी रहती है।* 🌷🌿🌸🙏🌸🌿🌷

+92 प्रतिक्रिया 12 कॉमेंट्स • 61 शेयर
umasharma Nov 21, 2020

+77 प्रतिक्रिया 26 कॉमेंट्स • 10 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB