Dr.janhavi
Dr.janhavi Oct 17, 2017

Jai mata di

Jai mata di

धनतेरस..........

एक समय भगवान विष्णु मृत्युलोक में विचरण करने के लिए आ रहे थे, लक्ष्मी जी ने भी साथ चलने का आग्रह किया. विष्णु जी बोले- 'यदि मैं जो बात कहूं, वैसे ही मानो, तो चलो.'

लक्ष्मी जी ने स्वीकार किया और भगवान विष्णु, लक्ष्मी जी सहित भूमण्डल पर आए.

कुछ देर बाद एक स्थान पर भगवान विष्णु लक्ष्मी से बोले- 'जब तक मैं न आऊं, तुम यहां ठहरो. मैं दक्षिण दिशा की ओर जा रहा हूं, तुम उधर मत देखना.'

विष्णुजी के जाने पर लक्ष्मी जी को कौतुक उत्पन्न हुआ कि आखिर दक्षिण दिशा में क्या है जो मुझे मना किया गया है और भगवान स्वयं दक्षिण में क्यों गए, कोई रहस्य जरूर है.

लक्ष्मी जी से रहा न गया, जैसे ही भगवान ने राह पकड़ी, वैसे ही मां लक्ष्मी भी पीछे-पीछे चल पड़ीं. कुछ ही दूर पर सरसों का खेत दिखाई दिया. वह खूब खिला हुआ और लहलहा रहा था.

वे उधर ही चलीं. सरसों की शोभा से वे मुग्ध हो गईं और उसके फूल तोड़कर अपना शृंगार किया और आगे चलीं.

आगे गन्ने (ईख) का खेत खड़ा था. लक्ष्मी जी ने चार गन्ने लिए और रस चूसने लगीं. उसी क्षण विष्णु जी आए और यह देख लक्ष्मी जी पर नाराज होकर शाप दिया- 'मैंने तुम्हें इधर आने को मना किया था,

पर तुम न मानीं और यह किसान की चोरी का अपराध कर बैठीं. अब तुम उस किसान की 12 वर्ष तक इस अपराध की सजा के रूप में सेवा करो.'
ऐसा कहकर भगवान उन्हें छोड़कर क्षीरसागर चले गए.

लक्ष्मी किसान के घर रहने लगीं. वह किसान अति दरिद्र था. लक्ष्मीजी ने किसान की पत्नी से कहा कि तुम स्नान कर पहले इस मेरी बनाई देवी लक्ष्मी का पूजन करो,

फिर रसोई बनाना, तुम जो मांगोगी मिलेगा. किसान की पत्नी ने लक्ष्मी के आदेशानुसार ही किया.

पूजा के प्रभाव और लक्ष्मी की कृपा से किसान का घर दूसरे ही दिन से अन्न, धन, रत्न, स्वर्ण आदि से भर गया और लक्ष्मी से जगमग होने लगा.

लक्ष्मी ने किसान को धन-धान्य से पूर्ण कर दिया. किसान के 12 वर्ष बड़े आनन्द से कट गए.
12 वर्ष के बाद लक्ष्मीजी जाने के लिए तैयार हुईं.
विष्णुजी, लक्ष्मीजी को लेने आए तो किसान ने उन्हें भेजने से इंकार कर दिया.

लक्ष्मी भी बिना किसान की मर्जी वहां से जाने को तैयार न थीं.
तब विष्णुजी ने एक चतुराई की. विष्णुजी जिस दिन लक्ष्मी को लेने आए थे, उस दिन वारुणी पर्व था.

इसलिए किसान को वारुणी पर्व का महत्व समझाते हुए भगवान ने कहा कि तुम परिवार सहित गंगा में जाकर स्नान करो और इन कौड़ियों को भी जल में छोड़ देना.

जब तक तुम नहीं लौटोगे, तब तक मैं लक्ष्मी को नहीं ले जाऊंगा. लक्ष्मीजी ने किसान को चार कौड़ियां गंगा के देने को दी.

किसान ने वैसा ही किया. वह सपरिवार गंगा स्नान करने के लिए चला. जैसे ही उसने गंगा में कौड़ियां डालीं, वैसे ही चार हाथ गंगा में से निकले और वे कौड़ियां ले लीं

तब किसान को आश्चर्य हुआ कि वह तो कोई देवी है. तब किसान ने गंगाजी से पूछा 'हे माता! ये चार भुजाएं किसकी हैं ?'

गंगाजी बोलीं 'हे किसान! वे चारों हाथ मेरे ही थे. तूने जो कौड़ियां भेंट दी हैं, वे किसकी दी हुई हैं ?'

किसान ने कहा- 'मेरे घर जो स्त्री आई है, उन्होंने ही दी हैं.' इस पर गंगाजी बोलीं कि तुम्हारे घर जो स्त्री आई है वह साक्षात लक्ष्मी हैं और पुरुष विष्णु भगवान हैं.

तुम लक्ष्मी को जाने मत देना, नहीं तो पुन: निर्धन हो जाआगे. यह सुन किसान घर लौट आया. वहां लक्ष्मी और विष्णु भगवान जाने को तैयार बैठे थे. किसान ने लक्ष्मीजी का आंचल पकड़ा और बोला कि मैं तुम्हें जाने नहीं दूंगा.

तब भगवान ने किसान से कहा कि इन्हें कौन जाने देता है, पर ये तो चंचला हैं. कहीं ठहरती ही नहीं, इनको बड़े-बड़े नहीं रोक सके.

इनको मेरा शाप था, जो कि 12 वर्ष से तुम्हारी सेवा कर रही थीं. तुम्हारी 12 वर्ष सेवा का समय पूरा हो चुका है.

किसान हठपूर्वक बोला कि नहीं अब मैं लक्ष्मीजी को नहीं जाने दूंगा. तुम कोई दूसरी स्त्री यहां से ले जाओ.

तब लक्ष्मीजी ने कहा - हे किसान! तुम मुझे रोकना चाहते हो तो जो मैं कहूं जैसा करो. कल तेरस है, मैं तुम्हारे लिए धनतेरस मनाऊंगी.

तुम कल घर को लीप-पोतकर, स्वच्छ करना.
रात्रि में घी का दीपक जलाकर रखना और सांयकाल मेरा पूजन करना और एक तांबे के कलश में रुपया भरकर मेरे निमित्त रखना, मैं उस कलश में निवास करूंगी.

किंतु पूजा के समय मैं तुम्हें दिखाई नहीं दूंगी. मैं इस दिन की पूजा करने से वर्ष भर तुम्हारे घर से नहीं जाऊंगी. मुझे रखना है तो इसी तरह प्रतिवर्ष मेरी पूजा करना.

यह कहकर वे दीपकों के प्रकाश के साथ दसों दिशाओं में फैल गईं और भगवान देखते ही रह गए.
अगले दिन किसान ने लक्ष्मीजी के कथानुसार पूजन किया. उसका घर धन-धान्य से पूर्ण हो गया.

इसी भांति वह हर वर्ष तेरस के दिन लक्ष्मीजी की पूजा करने लगा.

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ममता Feb 29, 2020

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Sharmila Singh Feb 29, 2020

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ManojC Feb 29, 2020

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Ratan Verma Feb 29, 2020

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Neha Sharma, Haryana Feb 29, 2020

: कब्ज़ के आयुर्वेदिक उपचार (Ayurveda For Constipation) आयुर्वेद के अनुसार: कब्ज़ शरीर में वात के बढ़ने से होती है। आयुर्वेद के अनुसार वात प्रकृति वाले व्यक्तियों को कब्ज़ होने की संभावना ज्यादा रहती है। आयुर्वेद के अनुसार कब्ज़ का मूलभूत कारण हमारा भोजन है। अगर भोजन में फाइबर और तरल पर्दार्थों की कमी होगी तो हमारे मल को शरीर से बाहर निकलने में परेशानी होगी । आयुर्वेदिक उपचार (Ayurvedic Treatment) कड़ा कब्ज़ (Hard Stool): हल्के गर्म तिल के तेल से अनिमा (Enema) लेने पर कड़े कब्ज़ में तुरन्त राहत मिलती है। तिल के तेल से पेट पर मालिश करने से भी कब्ज़ में आराम मिलता है। ग्लिसरीन से पेट पर मालिश करने से भी कब्ज़ में आराम मिलता है। पुरानी कब्ज़ (Chronic Constipation) त्रिफला (Triphala) के सेवन से पुरानी कब्ज़ में बहुत आराम मिलता है। रात को सोते वक्त 5 ग्राम (एक चम्मच भर) त्रिफला चुर्ण हल्के गर्म दूध अथवा गर्म पानी के साथ लेने से कब्ज़ दूर होती है। त्रिफला व ईसबगोल की भूसी दो चम्मच मिलाकर शाम को गुनगुने पानी से लें इससे कब्ज़ दूर होती है। वात युक्त शरीर(Vata Type Body) वात युक्त शरीर वालों के लिए हल्के गर्म तिल के तेल से अनिमा लेने पर कब्ज़ में तुरन्त राहत मिलती है। रात को सोते समय दूध के साथ अलसी के बीज़ Flaxseeed लेना लाभकर होता है। पित्त युक्त शरीर (Pitta Type Body) पित्त युक्त शरीर वालों में कब्ज़ का मूल कारण शरीर में पित्त की अधिकता के कारण इन्फ्लेमेशन का होना है। पित्त युक्त शरीर में पेट और छोटी आँत, दो ऐसी जगह है जहाँ पित्त दोष का असर सबसे ज्यादा होता है। नीम पित्त दोष के लिए एक बहुत उपयुक्त जड़ी बूटी है। इसके उपयोग से पित्त दोष में आराम मिलता है और छोटी आँत की इन्फ्लेमेशन कम होती है जिस कारण वहाँ से मल को आगे बढ़ने में आसानी होती है। कफ युक्त शरीर (Kapha Type Body) कफ युक्त शरीर वालों के लिए शरीर में कफ को नियंत्रित करने वाले आहार पर जोर दिया जाता है। बासमती चावल, कच्ची सब्जियाँ और फ़ल जैसे की सेब, केला, अंगूर का सेवन लाभदायक होता है। कफ युक्त शरीर वालों को कभी भी जुलाब प्रेरक प्रदार्थ नही लेना चाहिये। अपने भोजन में उन पर्दार्थो का समावेश करें जिनमे फाइबर अधिक होता है। [ *सावधान:--* ------------------ ★ सर्दी बिल्कुल नही होने दें । ★ जुकाम बुखार आते ही *क्रोसिन एडवांस* सुबह दोपहर शाम को 1-1 गोली 3 बार लेवें। ●-●-● ★ विक्स का इन्हेलर पास में रखें। ★ रात सोते समय नाक कान गले और माथे पर विक्स लगावें। ★ज्यादा जरूरी लगे तो *Duonase* इनहेलर लेवें। *★लापरवाही बिल्कुल नही करें।* ★ डॉक्टर को तुरंत दिखाएं। *कोरोना वायरस उज्जैन और अन्य जगहों पर दस्तक दे चुका हैं।* सरकारी मशीनरी संभावित संकट से निपटने के लिए चुप चाप तैयारी में जुट गई है। हम लोगों को भी सावधानी बरतना होगी। ध्यान रखने की बात है कि चीन से भारत की बड़ी सीमा लगती है। मिजोरम, अरूणाचल प्रदेश, मेघालय, मणिपुर, आसाम, सिक्किम, भूटान के रास्ते चीन के साथ हम लोगों की आवा जाही लगी ही रहती है। *□🙏□* चॉकलेट , आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक, कोल्ड कॉफी, फास्ट फूड, ठंडा दूध, बासी मीठा दूध, बड़ा पाव, बेकरी की बनी चीजें, पेस्टी, केक *ये सब चीजें बंद करो।* कम से कम अप्रेल महीने तक। जब तक की वातावरण का टेम्प्रेचर 34-35 डिग्री नहीं हो जाता। * सबसे तत्काल, बहुत गंभीर, महत्वपूर्ण जानकारी - * स्वास्थ्य मंत्रालय की जनता के लिए आपातकालीन अधिसूचना है कि इस बार कोरोनावायरस इन्फ्लूएंजा का प्रकोप बहुत गंभीर और घातक है। संक्रमित होने के बाद कोई इलाज नहीं है। * * चीन से विभिन्न देशों में इसका प्रसार * * रोकथाम विधि अपने गले को नम रखना है, अपने गले को सूखने न दें। इस प्रकार अपनी प्यास को न पकड़ें क्योंकि एक बार जब आपके गले की झिल्ली सूख जाती है, तो वायरस आपके शरीर में 10 मिनट के भीतर आक्रमण करेगा। * उम्र के हिसाब से बच्चों के लिए 50-80cc गर्म पानी, 30-50cc पीएं। * * हर बार यू लगता है कि आपका गला सूखा है, तो इंतजार न करें, पानी जरूर पियें । * * एक बार में बहुत सारा पानी न पिएं , गले को नम रखने के लिए बार बार पानी पीना जारी रखें। * * मार्च २०२० के अंत तक, भीड़-भाड़ वाली जगहों पर न जाएँ, खासतौर पर ट्रेन या सार्वजनिक परिवहन में आवश्यकतानुसार मास्क पहनें * * तला-भुना या मसालेदार भोजन से बचें और विटामिन सी का सेवन करे । * * लक्षण / विवरण इस प्रकार हैं - * 1. तेज बुखार * * 2. बुखार के बाद खांसी का आना 4. * चिल्ड्रेन हैं प्रवण * 4. * वयस्क आमतौर पर असहज महसूस करते हैं, * सिरदर्द और मुख्य रूप से श्वसन संबंधित * * 5: अत्यधिक संक्रामक * ag यदि आप मानव जीवन की देखभाल करते हैं तो Pls साझा करें! For Dr. Dishant *स्वस्थ्य मंत्रालय और मानव संसाधन विकास मंत्रालय* *भारत सरकार द्वारा जारी डिजिटल निर्देश* *कोरोना वायरस* *लक्षण - हल्का बुखार, ज़ुकाम, सिर दर्द* *उपचार - अभी उपलब्ध नही* *संक्रमण के 7 दिन के अंदर मौत निश्चित* यह रोग असल मे चमगादड़ और सांप में होता है, लेकिन चीन में चमगादड़ के सूप पीने की वजह से यह मनुष्यों में फैला है ! छींकने और सम्पर्क में आने से फैल रहा है यह खतरनाक वायरस ! बचाव - ● यात्रा करते वक़्त मास्क ज़रूर पहने ! ● किसी भी जुकाम या सर्दी से पीड़ित व्यक्ति का तुरंत इलाज कराए ● सांप और पक्षियों का सेवन बिल्कुल भी न करे ● किसी व्यक्ति से हाथ मिलाने के बाद बिना धोए अपने आंख को न छुये *इस संदेश को सभी को भेजे लकवा का रामबाण इलाज (Paralysis Treatment) 1. तिल का तेल पैरालिसिस अटैक आने पर मरीज को तुरंत 100 मि.ली. तिल के तेल को गर्म करके खिलाएं और उसके बाद 5-6 लहसुन की कलियां चबाने के लिए दें। इसके बाद उसके अटैक वाले हिस्सें को तेल में काली मिर्च पकाकर वहां की मालिश करें। 2. शहद और लहसुन अटैक आने के बाद मरीज को तुरंत शहद और लहसुन मिलाकर चटाएं। ऐसा करने से प्रभावित अंग स्वस्थ हो जाएगा। लकवा मारने के कुछ दिनों तक मरीज को इसका सेवन करवाते रहें।

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sanjay agarwal Feb 29, 2020

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sandhya parihar Feb 29, 2020

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KRISHNA BABU Feb 29, 2020

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