मायमंदिर फ़्री कुंडली
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"नाकामयाबी एक पड़ाव हैं…आख़िरी पड़ाव नहीं!" 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️ ।।प्रेरक कहानी।। 〰️〰️🔸〰️〰️ आज दसवीं का रिज़ल्ट था . कविता मैम …सुबह से टेंस थी. पता नहीं ….इस बार उसके स्कूल का कौन सा बच्चा …फेल होने के कारण …कोई ग़लत कदम उठा ले. पिछले साल ही ..स्कूल का सबसे हरफ़नमौला छात्र चिराग ने ….लोवर ग्रेड के कारण….बड़े ही दर्दनाक ढंग से ख़ुदकुशी कर ली थी . वह स्कूल के बॉलीवॉल टीम का कॅप्टन भी था. और सौम्या …ने भी ….एक सब्जेक्ट में फेल होने के कारण …..ख़ुदकुशी का प्रयास किया था. थैंक गॉड ….वह बच गयी थी। ठीक चार बजे शाम को …जब रिज़ल्ट ऑनलाइन हुआ …कविता मैम ने लिस्ट में सबसे पहले असफल स्टूडेंट्स और लोवर ग्रेड वाले छात्रों का नाम देखा …..कुल चार नाम थे …कनिष्क , मोहित, सुरभि और अनुपमा. उन्होने तुरंत….उन चारों को फोन किया …..डियर ….रिज़ल्ट में कुछ गड़बड़ी हैं…स्कूल को मैसेज आया हैं…तुरंत आकर .....स्कूल के असेंब्ली हॉल में मिलो. और मैम ने तुरंत वॉटस अप के ज़रिए सभी सफल स्टूडेंट्स को भी …….फ़ौरन …स्कूल के असेंब्ली हॉल में एकट्ठा होने को कहा. अगले दो घंटे में …..असेंब्ली हॉल …..करीब -55- स्टूडेंट्स …...बड़े ही बेसब्री से मेडम की प्रतीक्ष कर रहे थे . . एक बड़ा स्टेज सजाया गया था . कुर्सियाँ रखी गयी थी. गुलदस्ते रखे थे. मैडम के आते ही…हॉल मे “ गुड ईव्निंग “, मैम का शोर उभरा ….जिसमे ….बेहद खुशी …कम खुशी और उदासी की मिली जुली आवाज़ें थी. स्कूल के और भी टीचर्स भी मंच पर थे . मैम ने माइक लेकर बोलना शुरू किया ……” मेरे प्यारे स्टूडेंट्स …..सॉरी फॉर रॉंग इन्फर्मेशन . रिज़ल्ट के गड़बड़ी की खबर मैने केवल तुम सब को बुलाने के लिए दी थी. " मुझे सफल छात्रों से पहले चूक गये छात्रों से बात करनी हैं. और मैं पहले बुलाना चाहूँगी उन स्टूडेंट्स को जो अगली बार पास होने वाले हैं. मुँह लटकाएँ एक एक कर चारों छात्र-छात्राएँ स्टेज पर आ गये. कविता मैडम ने उन चारों को पहले शपथ दिलवाई कि …पिछले साल के चिराग और सौम्या की तरह वे कोई ग़लत कदम नहीं उठाएँगे। फिर उसने उन चारों का मुँह मीठा करवाया -" तुम चारों आज हार कर भी विजेता हो . तुम्हें ….एक हार नहीं तोड़ सकती ….तुम्हें एक साल और अच्छे से तैयारी कर के …खुद को साबित करना हैं……तुम सब अपने अपने घरों के सबसे अनमोल हीरे हो….पूछो चिराग की माँ से.....कि ... उन्हे चिराग चाहिए था ….या ….उसका उस साल सफल होना ज़रूरी था. वे आज भी बेटे के गम में रो रहे . और तुम्हें किसी से शर्माने की ज़रूरत नहीं ….कि तुम सब फेल हो गये या लोवर ग्रेड आया हैं…..क्योकि…पूरे देश में कल कितने हारे हुए बच्चे ( भगवान ना करे ) ख़ुदकुशी कर लेंगे …मगर …तुम चारों पूरे समाज को मैसेज दो कि तुम सब विनर हो…. अगले मैच के विनर . “ नाकामयाबी एक पड़ाव हैं…..आख़िरी पड़ाव नहीं….इसके आगे निकल कर ही …कई कामो में असफल रहा…कई चुनावों में हारा …एक अमरीकी ….अमरीका का ऑल टाइम फ़ेवरेट प्रेसीडेंट अब्राहम लिंकन के नाम से जाना जाता हैं. हवाई जहाज़ों के निर्माता बंधुयों ने शुरुआत एक साइकल की दुकान से की थी. मैंने अपने कैरियर में 900 से ज्यादा शॉट्स मिस किये, करीब 300 मैचों में नाकाम रहा , 26 मौकों पर विनिंग शॉट्स गंवाए . मैं बार बार नाकाम रहा ...मगर नाउममीद नहीं हुआ ...और इसी कारण मैं कामयाब भी रहा ” पता हैं यह किसकी कहानी हैं द ग्रेटेस्ट बास्केट बॉल प्लेयर …………..” “ माइकल जोर्डन की “ भीड़ से आवाज़ आई. इसे भी पढ़ें : कैसे खोज सकते हैं आप अपने सभी समस्याओं का समाधान - प्रेरक प्रसंग ! “एक लड़का जो रामेश्वरम में अख़बार बेचा करता था . जिसकी बनाई पहली मिसाइल फेल हो गयी थी” “ अब्दुल कलाम “ भीड़ से दूसरी आवाज़ आई “ और तुम लोग उस युवक के बारे में जानते होगे …जिसे एक न्यूज़ पेपर के ऑफीस से “ लैक ऑफ इमॅजिनेशन एंड गुड आइडिया “ कह कर निकाल दिया गया था…..मगर उसने सुसाइड नही किया बल्कि वॉल्ट डिज़्नी बना. मैडम के उदाहरणों से असफल हुए स्टूडेंट्स के चेहरे पर छाई उदासी ख़त्म हो रही थी. “नाकाम होने के बाद भी हिम्मत टूटने नहीं देना …..यह है "रियल विनर " की निशानी …तो ऑडियेन्स बता ओ आज का सच्चा विनर कौन हैं भीड़ में से उन चारों के फ्रेंड्स ने ……खूब ज़ोर से कहा .. कनिष्क , मोहित, सुरभि अनुपमा.” वाउ…..असफलता का जश्न पहली बार देखा था और यह जश्न अपने उद्देश्य में सफल भी रहा। 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️

"नाकामयाबी एक पड़ाव हैं…आख़िरी पड़ाव नहीं!"
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।।प्रेरक कहानी।।
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आज दसवीं का रिज़ल्ट था . कविता मैम …सुबह से टेंस थी. पता नहीं ….इस बार उसके स्कूल का कौन सा बच्चा …फेल होने के कारण …कोई ग़लत कदम उठा ले.
पिछले साल ही ..स्कूल का सबसे हरफ़नमौला छात्र चिराग ने ….लोवर ग्रेड के कारण….बड़े ही दर्दनाक ढंग से ख़ुदकुशी कर ली थी . वह स्कूल के बॉलीवॉल टीम का कॅप्टन भी था.
और सौम्या …ने भी ….एक सब्जेक्ट में फेल होने के कारण …..ख़ुदकुशी का प्रयास किया था. थैंक गॉड ….वह बच गयी थी।
ठीक चार बजे शाम को …जब रिज़ल्ट ऑनलाइन हुआ …कविता मैम ने लिस्ट में सबसे पहले असफल स्टूडेंट्स और लोवर ग्रेड वाले छात्रों का नाम देखा …..कुल चार नाम थे …कनिष्क , मोहित, सुरभि और अनुपमा.
उन्होने तुरंत….उन चारों को फोन किया …..डियर ….रिज़ल्ट में कुछ गड़बड़ी हैं…स्कूल को मैसेज आया हैं…तुरंत आकर .....स्कूल के असेंब्ली हॉल में मिलो.
और मैम ने तुरंत वॉटस अप के ज़रिए सभी सफल स्टूडेंट्स को भी …….फ़ौरन …स्कूल के असेंब्ली हॉल में एकट्ठा होने को कहा.
अगले दो घंटे में …..असेंब्ली हॉल …..करीब -55- स्टूडेंट्स …...बड़े ही बेसब्री से मेडम की प्रतीक्ष कर रहे थे .
. एक बड़ा स्टेज सजाया गया था . कुर्सियाँ रखी गयी थी. गुलदस्ते रखे थे.
मैडम के आते ही…हॉल मे “ गुड ईव्निंग “, मैम का शोर उभरा ….जिसमे ….बेहद खुशी …कम खुशी और उदासी की मिली जुली आवाज़ें थी. स्कूल के और भी टीचर्स भी मंच पर थे .
मैम ने माइक लेकर बोलना शुरू किया ……” मेरे प्यारे स्टूडेंट्स …..सॉरी फॉर रॉंग इन्फर्मेशन . रिज़ल्ट के गड़बड़ी की खबर मैने केवल तुम सब को बुलाने के लिए दी थी. "
मुझे सफल छात्रों से पहले चूक गये छात्रों से बात करनी हैं. और मैं पहले बुलाना चाहूँगी उन स्टूडेंट्स को जो अगली बार पास होने वाले हैं.
मुँह लटकाएँ एक एक कर चारों छात्र-छात्राएँ स्टेज पर आ गये.
कविता मैडम ने उन चारों को पहले शपथ दिलवाई कि …पिछले साल के चिराग और सौम्या की तरह वे कोई ग़लत कदम नहीं उठाएँगे।
फिर उसने उन चारों का मुँह मीठा करवाया -" तुम चारों आज हार कर भी विजेता हो . तुम्हें ….एक हार नहीं तोड़ सकती ….तुम्हें एक साल और अच्छे से तैयारी कर के …खुद को साबित करना हैं……तुम सब अपने अपने घरों के सबसे अनमोल हीरे हो….पूछो चिराग की माँ से.....कि ... उन्हे चिराग चाहिए था ….या ….उसका उस साल सफल होना ज़रूरी था. वे आज भी बेटे के गम में रो रहे .
और तुम्हें किसी से शर्माने की ज़रूरत नहीं ….कि तुम सब फेल हो गये या लोवर ग्रेड आया हैं…..क्योकि…पूरे देश में कल कितने हारे हुए बच्चे ( भगवान ना करे ) ख़ुदकुशी कर लेंगे …मगर …तुम चारों पूरे समाज को मैसेज दो कि तुम सब विनर हो…. अगले मैच के विनर .
“ नाकामयाबी एक पड़ाव हैं…..आख़िरी पड़ाव नहीं….इसके आगे निकल कर ही …कई कामो में असफल रहा…कई चुनावों में हारा …एक अमरीकी ….अमरीका का ऑल टाइम फ़ेवरेट प्रेसीडेंट अब्राहम लिंकन के नाम से जाना जाता हैं.
हवाई जहाज़ों के निर्माता बंधुयों ने शुरुआत एक साइकल की दुकान से की थी.
मैंने अपने कैरियर में 900 से ज्यादा शॉट्स मिस किये, करीब 300 मैचों में नाकाम रहा , 26 मौकों पर विनिंग शॉट्स गंवाए . मैं बार बार नाकाम रहा ...मगर नाउममीद नहीं हुआ ...और इसी कारण मैं कामयाब भी रहा ” पता हैं यह किसकी कहानी हैं द ग्रेटेस्ट बास्केट बॉल प्लेयर …………..”
“ माइकल जोर्डन की “ भीड़ से आवाज़ आई.
इसे भी पढ़ें : कैसे खोज सकते हैं आप अपने सभी समस्याओं का समाधान - प्रेरक प्रसंग !
“एक लड़का जो रामेश्वरम में अख़बार बेचा करता था . जिसकी बनाई पहली मिसाइल फेल हो गयी थी”
“ अब्दुल कलाम “ भीड़ से दूसरी आवाज़ आई
“ और तुम लोग उस युवक के बारे में जानते होगे …जिसे एक न्यूज़ पेपर के ऑफीस से “ लैक ऑफ इमॅजिनेशन एंड गुड आइडिया “ कह कर निकाल दिया गया था…..मगर उसने सुसाइड नही किया बल्कि वॉल्ट डिज़्नी बना.
मैडम के उदाहरणों से असफल हुए स्टूडेंट्स के चेहरे पर छाई उदासी ख़त्म हो रही थी.
“नाकाम होने के बाद भी हिम्मत टूटने नहीं देना …..यह है "रियल विनर " की निशानी …तो ऑडियेन्स बता ओ आज का सच्चा विनर कौन हैं भीड़ में से उन चारों के फ्रेंड्स ने ……खूब ज़ोर से कहा .. 
कनिष्क , 
मोहित,
सुरभि
अनुपमा.”
वाउ…..असफलता का जश्न पहली बार देखा था और यह जश्न अपने उद्देश्य में सफल भी रहा।
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सोया भाग्य 〰️🔸〰️ एक व्यक्ति जीवन से हर प्रकार से निराश था । लोग उसे मनहूस के नाम से बुलाते थे । एक ज्ञानी पंडित ने उसे बताया कि तेरा भाग्य फलां पर्वत पर सोया हुआ है , तू उसे जाकर जगा ले तो भाग्य तेरे साथ हो जाएगा । बस ! फिर क्या था वो चल पड़ा अपना सोया भाग्य जगाने । रास्ते में जंगल पड़ा तो एक शेर उसे खाने को लपका , वो बोला भाई ! मुझे मत खाओ , मैं अपना सोया भाग्य जगाने जा रहा हूँ । शेर ने कहा कि तुम्हारा भाग्य जाग जाये तो मेरी एक समस्या है , उसका समाधान पूछते लाना । मेरी समस्या ये है कि मैं कितना भी खाऊं … मेरा पेट भरता ही नहीं है , हर समय पेट भूख की ज्वाला से जलता रहता है । मनहूस ने कहा– ठीक है । आगे जाने पर एक किसान के घर उसने रात बिताई । बातों बातों में पता चलने पर कि वो अपना सोया भाग्य जगाने जा रहा है , किसान ने कहा कि मेरा भी एक सवाल है .. अपने भाग्य से पूछकर उसका समाधान लेते आना … मेरे खेत में , मैं कितनी भी मेहनत कर लूँ . पैदावार अच्छी होती ही नहीं । मेरी शादी योग्य एक कन्या है, उसका विवाह इन परिस्थितियों में मैं कैसे कर पाऊंगा ? मनहूस बोला — ठीक है । और आगे जाने पर वो एक राजा के घर मेहमान बना । रात्री भोज के उपरान्त राजा ने ये जानने पर कि वो अपने भाग्य को जगाने जा रहा है , उससे कहा कि मेरी परेशानी का हल भी अपने भाग्य से पूछते आना । मेरी परेशानी ये है कि कितनी भी समझदारी से राज्य चलाऊं… मेरे राज्य में अराजकता का बोलबाला ही बना रहता है । मनहूस ने उससे भी कहा — ठीक है । अब वो पर्वत के पास पहुँच चुका था । वहां पर उसने अपने सोये भाग्य को झिंझोड़ कर जगाया— उठो ! उठो ! मैं तुम्हें जगाने आया हूँ । उसके भाग्य ने एक अंगडाई ली और उसके साथ चल दिया । उसका भाग्य बोला — अब मैं तुम्हारे साथ हरदम रहूँगा । अब वो मनहूस न रह गया था बल्कि भाग्यशाली व्यक्ति बन गया था और अपने भाग्य की बदौलत वो सारे सवालों के जवाब जानता था । वापसी यात्रा में वो उसी राजा का मेहमान बना और राजा की परेशानी का हल बताते हुए वो बोला — चूँकि तुम एक स्त्री हो और पुरुष वेश में रहकर राज – काज संभालती हो , इसीलिए राज्य में अराजकता का बोलबाला है । तुम किसी योग्य पुरुष के साथ विवाह कर लो , दोनों मिलकर राज्य भार संभालो तो तुम्हारे राज्य में शांति स्थापित हो जाएगी । रानी बोली — तुम्हीं मुझ से ब्याह कर लो और यहीं रह जाओ । भाग्यशाली बन चुका वो मनहूस इन्कार करते हुए बोला — नहीं नहीं ! मेरा तो भाग्य जाग चुका है । तुम किसी और से विवाह कर लो । तब रानी ने अपने मंत्री से विवाह किया और सुखपूर्वक राज्य चलाने लगी | कुछ दिन राजकीय मेहमान बनने के बाद उसने वहां से विदा ली । चलते चलते वो किसान के घर पहुंचा और उसके सवाल के जवाब में बताया कि *तुम्हारे खेत में सात कलश हीरे जवाहरात के गड़े हैं , उस खजाने को निकाल लेने पर तुम्हारी जमीन उपजाऊ हो जाएगी और उस धन से तुम अपनी बेटी का ब्याह भी धूमधाम से कर सकोगे । किसान ने अनुग्रहित होते हुए उससे कहा कि मैं तुम्हारा शुक्रगुजार हूँ , तुम ही मेरी बेटी के साथ ब्याह कर लो । पर भाग्यशाली बन चुका वह व्यक्ति बोला कि नहीं !नहीं ! मेरा तो भाग्योदय हो चुका है , तुम कहीं और अपनी सुन्दर कन्या का विवाह करो । किसान ने उचित वर देखकर अपनी कन्या का विवाह किया और सुखपूर्वक रहने लगा । कुछ दिन किसान की मेहमान नवाजी भोगने के बाद वो जंगल में पहुंचा और शेर से उसकी समस्या के समाधानस्वरुप कहा कि यदि तुम किसी बड़े मूर्ख को खा लोगे तो तुम्हारी ये क्षुधा शांत हो जाएगी । शेर ने उसकी बड़ी आवभगत की और यात्रा का पूरा हाल जाना । सारी बात पता चलने के बाद शेर ने कहा कि भाग्योदय होने के बाद इतने अच्छे और बड़े दो मौके गंवाने वाले ऐ इंसान ! तुझसे बड़ा मूर्ख और कौन होगा ? तुझे खाकर ही मेरी भूख शांत होगी और इस तरह वो इंसान शेर का शिकार बनकर मृत्यु को प्राप्त हुआ । . सच है यदि आपके पास सही मौका परखने का विवेक और अवसर को पकड़ लेने का ज्ञान नहीं है तो भाग्य भी आपके साथ आकर आपका कुछ भला नहीं कर सकता। 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️

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राजपूत और मांसाहार .... """"""""""""""""""""""""""""""""""" राजपूतों ने जब से मांसाहार और शराब को अपनाया तभी से मुगल से पराजित होना शुरू हुआ… राजपूतों का सिर धड से अलग होने के बाद कुल देवी युद्ध लडा करती थी… “एक षड्यंत्र और माँस और शराब की घातकता….” हिंदू धर्म ग्रंथ नहीँ कहते कि देवी को शराब चढ़ाई जाये.., ग्रंथ नहीँ कहते की शराब पीना ही क्षत्रिय धर्म है......... ये सिर्फ़ एक मुग़लों का षड्यंत्र था हिंदुओं को कमजोर करने का ! जानिये एक सच्ची ऐतिहासिक घटना… “एक षड्यंत्र और शराब की घातकता….” कैसे हिंदुओं की सुरक्षा प्राचीर को ध्वस्त किया मुग़लों ने ?? जानिये और फिर सुधार कीजिये !! मुगल का दिल्ली में दरबार लगा था और हिंदुस्तान के दूर दूर के राजा महाराजा दरबार में हाजिर थे । उसी दौरान मुगल बादशाह ने एक दम्भोक्ति की “है कोई हमसे बहादुर इस दुनिया में ?” सभा में सन्नाटा सा पसर गया ,एक बार फिर वही दोहराया गया ! तीसरी बार फिर उसने ख़ुशी से चिल्ला कर कहा “है कोई हमसे बहादुर जो हिंदुस्तान पर सल्तनत कायम कर सके ?? सभा की खामोशी तोड़ती एक बुलन्द शेर सी दहाड़ गूंजी तो सबका ध्यान उस शख्स की और गया ! वो जोधपुर के महाराजा राव रिड़मल थे ! रिड़मल जी ने कहा, “मुग़लों में बहादुरी नहीँ कुटिलता है…, सबसे बहादुर तो राजपूत है दुनियाँ में ! मुगलो ने राजपूतो को आपस में लड़वा कर हिंदुस्तान पर राज किया ! कभी सिसोदिया राणा वंश को कछावा जयपुर से तो कभी राठोड़ो को दूसरे राजपूतो से…। बादशाह का मुँह देखने लायक था , ऐसा लगा जैसे किसी ने चोरी करते रंगे हाथो पकड़ लिया हो। “बाते मत करो राव…उदाहरण दो वीरता का।” रिड़मल ने कहा “क्या किसी कौम में देखा है किसी को सिर कटने के बाद भी लड़ते हुए ??” बादशाह बोला ये तो सुनी हुई बात है देखा तो नही , रिड़मल बोले ” इतिहास उठाकर देख लो कितने वीरो की कहानिया है सिर कटने के बाद भी लड़ने की ….......!! ” बादशाह हंसा और दरबार में बेठे कवियों की और देखकर बोला “इतिहास लिखने वाले तो मंगते होते है । मैं भी १०० मुगलो के नाम लिखवा दूँ इसमें क्या ? मुझे तो जिन्दा ऐसा राजपूत बताओ जो कहे की मेरा सिर काट दो में फिर भी लड़ूंगा।” राव रिड़मल निरुत्तर हो गए और गहरे सोच में डूब गए। रात को सोचते सोचते अचानक उनको रोहणी ठिकाने के जागीरदार का ख्याल आया। रात को ११ बजे रोहणी ठिकाना (जो की जेतारण कस्बे जोधपुर रियासत) में दो घुड़सवार बुजुर्ग जागीरदार के पोल पर पहुंचे और मिलने की इजाजत मांगी। ठाकुर साहब काफी वृद्ध अवस्था में थे फिर भी उठ कर मेहमान की आवभगत के लिए बाहर पोल पर आये ,, घुड़सवारों ने प्रणाम किया और वृद्ध ठाकुर की आँखों में चमक सी उभरी और मुस्कराते हुए बोले ” जोधपुर महाराज… आपको मैंने गोद में खिलाया है और अस्त्र शस्त्र की शिक्षा दी है.. इस तरह भेष बदलने पर भी में आपको आवाज से पहचान गया हूँ। हुकम आप अंदर पधारो…मैं आपकी रियासत का छोटा सा जागीरदार, आपने मुझे ही बुलवा लिया होता। राव रिड़मल ने उनको झुककर प्रणाम किया और बोले एक समस्या है , और बादशाह के दरबार की पूरी कहानी सुना दी अब आप ही बताये कि जीवित योद्धा का कैसे पता चले की ये लड़ाई में सिर कटने के बाद भी लड़ेगा ? रोहणी जागीदार बोले ,” बस इतनी सी बात.. मेरे दोनों बच्चे सिर कटने के बाद भी लड़ेंगे और आप दोनों को ले जाओ दिल्ली दरबार में ये आपकी और राजपूती की लाज जरूर रखेंगे ” राव रिड़मल को घोर आश्चर्य हुआ कि एक पिता को कितना विश्वास है अपने बच्चो पर.. , मान गए राजपूती धर्म को। सुबह जल्दी दोनों बच्चे अपने अपने घोड़ो के साथ तैयार थे! उसी समय ठाकुर साहब ने कहा ,” महाराज थोडा रुकिए !! मैं एक बार इनकी माँ से भी कुछ चर्चा कर लूँ इस बारे में।” राव रिड़मल ने सोचा आखिर पिता का ह्रदय है कैसे मानेगा ! अपने दोनों जवान बच्चो के सिर कटवाने को , एक बार रिड़मल जी ने सोचा की मुझे दोनों बच्चो को यही छोड़कर चले जाना चाहिए। ठाकुर साहब ने ठकुरानी जी को कहा........ ” आपके दोनों बच्चो को दिल्ली मुगल बादशाह के दरबार में भेज रहा हूँ सिर कटवाने को........ , दोनों में से कौनसा सिर कटने के बाद भी लड़ सकता है........ ? आप माँ हो आपको ज्यादा पता होगा....... ! ठकुरानी जी ने कहा....... “बड़ा लड़का तो क़िले और क़िले के बाहर तक भी लड़ लेगा पर छोटा केवल परकोटे में ही लड़ सकता है क्योंकि पैदा होते ही इसको मेरा दूध नही मिला था। लड़ दोनों ही सकते है, आप निश्चित् होकर भेज दो” दिल्ली के दरबार में आज कुछ विशेष भीड़ थी और हजारो लोग इस दृश्य को देखने जमा थे। बड़े लड़के को मैदान में लाया गया और मुगल बादशाह ने जल्लादो को आदेश दिया की इसकी गर्दन उड़ा दो.. तभी बीकानेर महाराजा बोले “ये क्या तमाशा है ? राजपूती इतनी भी सस्ती नही हुई है , लड़ाई का मौका दो और फिर देखो कौन बहादुर है ? बादशाह ने खुद के सबसे मजबूत और कुशल योद्धा बुलाये और कहा ये जो घुड़सवार मैदान में खड़ा है उसका सिर् काट दो… २० घुड़सवारों को दल रोहणी ठाकुर के बड़े लड़के का सिर उतारने को लपका और देखते ही देखते उन २० घुड़सवारों की लाशें मैदान में बिछ गयी। दूसरा दस्ता आगे बढ़ा और उसका भी वही हाल हुआ , मुगलो में घबराहट और झुरझरि फेल गयी , इसी तरह बादशाह के ५०० सबसे ख़ास योद्धाओ की लाशें मैदान में पड़ी थी और उस वीर राजपूत योद्धा के तलवार की खरोंच भी नही आई। ये देख कर मुगल सेनापति ने कहा.......” ५०० मुगल बीबियाँ विधवा कर दी आपकी इस परीक्षा ने अब और मत कीजिये हजुर , इस काफ़िर को गोली मरवाईए हजुर…तलवार से ये नही मरेगा… कुटिलता और मक्कारी से भरे मुगलो ने उस वीर के सिर में गोलिया मार दी। सिर के परखचे उड़ चुके थे पर धड़ ने तलवार की मजबूती कम नही करी और मुगलो का कत्लेआम खतरनाक रूप से चलते रहा। बादशाह ने छोटे भाई को अपने पास निहत्थे बैठा रखा था ये सोच कर की ये बड़ा यदि बहादुर निकला तो इस छोटे को कोई जागीर दे कर अपनी सेना में भर्ती कर लूंगा लेकिन जब छोटे ने ये अंन्याय देखा तो उसने झपटकर बादशाह की तलवार निकाल ली। उसी समय बादशाह के अंगरक्षकों ने उनकी गर्दन काट दी फिर भी धड़ तलवार चलाता गया और अंगरक्षकों समेत मुगलो का काल बन गए। बादशाह भाग कर कमरे में छुप गया और बाहर मैदान में बड़े भाई और अंदर परकोटे में छोटे भाई का पराक्रम देखते ही बनता था। हजारो की संख्या में मुगल हताहत हो चुके थे और आगे का कुछ पता नही था। बादशाह ने चिल्ला कर कहा अरे कोई रोको इनको..। एक मौलवी आगे आया और बोला इन पर शराब छिड़क दो। राजपूत का इष्ट कमजोर करना हो तो शराब का उपयोग करो। दोनों भाइयो पर शराब छिड़की गयी ऐसा करते ही दोनों के शरीर ठन्डे पड़ गए। मौलवी ने बादशाह को कहा ” हजुर ये लड़ने वाला इनका शरीर नही बल्कि इनकी कुल देवी है और ये राजपूत शराब से दूर रहते है और अपने धर्म और इष्ट को मजबूत रखते है। यदि मुगलो को हिन्दुस्तान पर शासन करना है तो इनका इष्ट और धर्म भ्रष्ट करो और इनमे दारु शराब की लत लगाओ। यदि मुगलो में ये कमियां हटा दे तो मुगल भी मजबूत बन जाएंगे। उसके बाद से ही राजपूतो में मुगलो ने शराब का प्रचलन चलाया और धीरे धीरे राजपूत शराब में डूबते गए और अपनी इष्ट देवी को आराधक से खुद को भ्रष्ट करते गए। और मुगलो ने मुसलमानो को कसम खिलवाई की शराब पीने के बाद नमाज नही पढ़ी जा सकती। इसलिए इससे दूर रहिये। माँसाहार जैसी राक्षसी प्रवृत्ति पर गर्व करने वाले राजपूतों को यदि ज्ञात हो तो बताएं और आत्म मंथन करें कि महाराणा प्रताप की बेटी की मृत्यु जंगल में भूख से हुई थी क्यों …? यदि वो मांसाहारी होते तो जंगल में उन्हें जानवरों की कमी थी क्या मार खाने के लिए…? इसका तात्पर्य यह है कि राजपूत हमेशा शाकाहारी थे केवल कुछ स्वार्थी राजपूतों ने जिन्होंने मुगलों की आधिनता स्वीकार कर ली थी वे मुगलों को खुश करने के लिए उनके साथ मांसाहार करने लगे और अपने आप को मुगलों का विश्वासपात्र साबित करने की होड़ में गिरते चले गये हिन्दू भाइयो ये सच्ची घटना है और हमे हिन्दू समाज को इस कुरीति से दूर करना होगा। तब ही हम पुनः खोया वैभव पा सकेंगे और हिन्दू धर्म की रक्षा कर सकेंगे। नमन ऐसी वीर परंपरा को।

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🍎स्वर्ग का सेब🍎 〰️〰️🔸〰️〰️ एक बार स्वर्ग से घोषणा हुई कि भगवान सेब बॉटने आ रहे है सभी लोग भगवान के प्रसाद के लिए तैयार हो कर लाइन लगाकर खड़े हो गए। एक छोटी बच्ची बहुत उत्सुक थी क्योंकि वह पहली बार भगवान को देखने जा रही थी।एक बड़े और सुंदर सेब के साथ साथ भगवान के दर्शन की कल्पना से ही खुश थी।अंत में प्रतीक्षा समाप्त हुई। बहुत लंबी कतार में जब उसका नम्बर आया तो भगवान ने उसे एक बड़ा और लाल सेब दिया। लेकिन जैसे ही उसने सेब पकड़कर लाइन से बाहर निकली उसका सेब हाथ से छूटकर कीचड़ में गिर गया। बच्ची उदास हो गई।अब उसे दुबारा से लाइन में लगना पड़ेगा। दूसरी लाइन पहली से भी लंबी थी।लेकिन कोई और रास्ता नहीं था। सब लोग ईमानदारी से अपनी बारी बारी से सेब लेकर जा रहे थे। अन्ततः वह बच्ची फिर से लाइन में लगी और अपनी बारी की प्रतीक्षा करने लगी।आधी क़तार को सेब मिलने के बाद सेब ख़त्म होने लगे। अब तो बच्ची बहुत उदास हो गई। उसने सोचा कि उसकी बारी आने तक तो सब सेब खत्म हो जाएंगे। लेकिन वह ये नहीं जानती थी कि भगवान के भंडार कभी ख़ाली नही होते।जब तक उसकी बारी आई तो और भी नए सेब आ गए । भगवान तो अन्तर्यामी होते हैं। बच्ची के मन की बात जान गए।उन्होंने इस बार बच्ची को सेब देकर कहा कि पिछली बार वाला सेब एक तरफ से सड़ चुका था। तुम्हारे लिए सही नहीं था इसलिए मैने ही उसे तुम्हारे हाथों गिरवा दिया था। दूसरी तरफ लंबी कतार में तुम्हें इसलिए लगाया क्योंकि नए सेब अभी पेडों पर थे। उनके आने में समय बाकी था। इसलिए तुम्हें अधिक प्रतीक्षा करनी पड़ी। ये सब अधिक लाल, सुंदर और तुम्हारे लिए उपयुक्त है। भगवान की बात सुनकर बच्ची संतुष्ट हो कर गई इसी प्रकार यदि आपके किसी काम में विलंब हो रहा है तो उसे भगवान की इच्छा मानकर स्वीकार करें। भगवान अपने बच्चों को वही देंगे जो उनके लिए उत्तम होगा। ईमानदारी से अपनी बारी की प्रतीक्षा करने में सबकी भलाई है। *ॐ नमो भगवते वासुदेवाय* 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️

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shuchi arora Jun 15, 2019

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ramkumar verma Jun 16, 2019

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Krishna Kr Yadav Jun 17, 2019

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Anju Mishra Jun 15, 2019

🌹🙏🚩जय श्री राम🚩🙏🌹 श्री राम का आशीर्वाद सदा सभी पर बना रहे। सबसे बड़ा पुण्य ! एक राजा बहुत बड़ा प्रजापालक था, हमेशा प्रजा के हित में प्रयत्नशील रहता था. वह इतना कर्मठ था कि अपना सुख, ऐशो-आराम सब छोड़कर सारा समय जन-कल्याण में ही लगा देता था . यहाँ तक कि जो मोक्ष का साधन है अर्थात भगवत-भजन, उसके लिए भी वह समय नहीं निकाल पाता था. एक सुबह राजा वन की तरफ भ्रमण करने के लिए जा रहा था कि उसे एक देव के दर्शन हुए. राजा ने देव को प्रणाम करते हुए उनका अभिनन्दन किया और देव के हाथों में एक लम्बी-चौड़ी पुस्तक देखकर उनसे पूछा- “ महाराज, आपके हाथ में यह क्या है?” देव बोले- “राजन! यह हमारा बहीखाता है, जिसमे सभी भजन करने वालों के नाम हैं.” राजा ने निराशायुक्त भाव से कहा- “कृपया देखिये तो इस किताब में कहीं मेरा नाम भी है या नहीं?” देव महाराज किताब का एक-एक पृष्ठ उलटने लगे, परन्तु राजा का नाम कहीं भी नजर नहीं आया. राजा ने देव को चिंतित देखकर कहा- “महाराज ! आप चिंतित ना हों , आपके ढूंढने में कोई भी कमी नहीं है. वास्तव में ये मेरा दुर्भाग्य है कि मैं भजन-कीर्तन के लिए समय नहीं निकाल पाता, और इसीलिए मेरा नाम यहाँ नहीं है.” उस दिन राजा के मन में आत्म-ग्लानि-सी उत्पन्न हुई लेकिन इसके बावजूद उन्होंने इसे नजर-अंदाज कर दिया और पुनः परोपकार की भावना लिए दूसरों की सेवा करने में लग गए. कुछ दिन बाद राजा फिर सुबह वन की तरफ टहलने के लिए निकले तो उन्हें वही देव महाराज के दर्शन हुए, इस बार भी उनके हाथ में एक पुस्तक थी. इस पुस्तक के रंग और आकार में बहुत भेद था, और यह पहली वाली से काफी छोटी भी थी. राजा ने फिर उन्हें प्रणाम करते हुए पूछा- “महाराज ! आज कौन सा बहीखाता आपने हाथों में लिया हुआ है?” देव ने कहा- “राजन! आज के बहीखाते में उन लोगों का नाम लिखा है जो ईश्वर को सबसे अधिक प्रिय हैं !” राजा ने कहा- “कितने भाग्यशाली होंगे वे लोग ? निश्चित ही वे दिन रात भगवत-भजन में लीन रहते होंगे !! क्या इस पुस्तक में कोई मेरे राज्य का भी नागरिक है ? ” देव महाराज ने बहीखाता खोला , और ये क्या , पहले पन्ने पर पहला नाम राजा का ही था। राजा ने आश्चर्यचकित होकर पूछा- “महाराज, मेरा नाम इसमें कैसे लिखा हुआ है, मैं तो मंदिर भी कभी-कभार ही जाता हूँ ? देव ने कहा- “राजन! इसमें आश्चर्य की क्या बात है? जो लोग निष्काम होकर संसार की सेवा करते हैं, जो लोग संसार के उपकार में अपना जीवन अर्पण करते हैं. जो लोग मुक्ति का लोभ भी त्यागकर प्रभु के निर्बल संतानो की सेवा-सहायता में अपना योगदान देते हैं उन त्यागी महापुरुषों का भजन स्वयं ईश्वर करता है. ऐ राजन! तू मत पछता कि तू पूजा-पाठ नहीं करता, लोगों की सेवा कर तू असल में भगवान की ही पूजा करता है. परोपकार और निःस्वार्थ लोकसेवा किसी भी उपासना से बढ़कर हैं. देव ने वेदों का उदाहरण देते हुए कहा- “कुर्वन्नेवेह कर्माणि जिजीविषेच्छनं समाः एवान्त्वाप नान्यतोअस्ति व कर्म लिप्यते नरे..” अर्थात ‘कर्म करते हुए सौ वर्ष जीने की ईच्छा करो तो कर्मबंधन में लिप्त हो जाओगे.’ राजन! भगवान दीनदयालु हैं. उन्हें खुशामद नहीं भाती बल्कि आचरण भाता है.. सच्ची भक्ति तो यही है कि परोपकार करो. दीन-दुखियों का हित-साधन करो. अनाथ, विधवा, किसान व निर्धन आज अत्याचारियों से सताए जाते हैं इनकी यथाशक्ति सहायता और सेवा करो और यही परम भक्ति है..” राजा को आज देव के माध्यम से बहुत बड़ा ज्ञान मिल चुका था और अब राजा भी समझ गया कि परोपकार से बड़ा कुछ भी नहीं और जो परोपकार करते हैं वही भगवान के सबसे प्रिय होते हैं। हमारे पूर्वजों ने कहा भी है- “परोपकाराय पुण्याय भवति” अर्थात दूसरों के लिए जीना, दूसरों की सेवा को ही पूजा समझकर कर्म करना, परोपकार के लिए अपने जीवन को सार्थक बनाना ही सबसे बड़ा पुण्य है।

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Ramkishor Vaishnav Jun 17, 2019

📍 *पते की बात सिख* 📍 〰♾〰♾〰♾〰♾〰 *बात बात में मां बाप का टोकना हमें अखरता है । हम भीतर ही भीतर झल्लाते है कि कब इनके टोकने की आदत से हमारा पीछा जुटेगा । लेकिन हम ये भूल जाते है कि उनके टोकने से जो संस्कार हम ग्रहण कर रहे हैं, उनकी जीवन में क्या अहमियत है । इसी पर एक लेख किसी शिल्पकार भाई ने भेजा है, जिसे मैं आगे शेयर करने से अपने आप को रोक नहीं पाया ।* *साक्षात्कार* *बड़ी दौड़ धूप के बाद ,* *मैं आज एक ऑफिस में पहुंचा,* *आज मेरा पहला इंटरव्यू था ,* *घर से निकलते हुए मैं सोच रहा था,* *काश ! इंटरव्यू में आज* *कामयाब हो गया , तो अपने* *पुश्तैनी मकान को अलविदा* *कहकर यहीं शहर में सेटल हो जाऊंगा, मम्मी पापा की रोज़ की* *चिक चिक, मग़जमारी से छुटकारा मिल जायेगा ।* *सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक होने वाली चिक चिक से परेशान हो गया हूँ ।* *जब सो कर उठो , तो पहले* *बिस्तर ठीक करो ,* *फिर बाथरूम जाओ,* *बाथरूम से निकलो तो फरमान जारी होता है* *नल बंद कर दिया?* *तौलिया सही जगह रखा या यूँ ही फेंक दिया?* *नाश्ता करके घर से निकलो तो डांट पडती है* *पंखा बंद किया या चल रहा है?* *क्या - क्या सुनें यार ,* *नौकरी मिले तो घर छोड़ दूंगा..* *वहाँ उस ऑफिस में बहुत सारे उम्मीदवार बैठे थे , बॉस का इंतज़ार कर रहे थे ।* *दस बज गए ।* *मैने देखा वहाँ आफिस में बरामदे की बत्ती अभी तक जल रही है ,* *माँ याद आ गई , तो मैने बत्ती बुझा दी ।* *ऑफिस में रखे वाटर कूलर से पानी टपक रहा था* , *पापा की डांट याद आ गयी , तो पानी बन्द कर दिया ।* *बोर्ड पर लिखा था , इंटरव्यू दूसरी मंज़िल पर होगा ।* *सीढ़ी की लाइट भी जल रही थी* , *बंद करके आगे बढ़ा ,* *तो एक कुर्सी रास्ते में थी ,उसे हटाकर ऊपर गया* । *🌷देखा पहले से मौजूद उम्मीदवार जाते और फ़ौरन बाहर आते ,* *पता किया तो मालूम हुआ बॉस* *फाइल लेकर कुछ पूछते नहीं ,* *वापस भेज देते हैं ।🌷* *नंबर आने पर मैने फाइल* *मैनेजर की तरफ बढ़ा दी ।* *कागज़ात पर नज़र दौडाने के बाद उन्होंने कहा* *"कब ज्वाइन कर रहे हो?"* *उनके सवाल से मुझे यूँ लगा जैसे* *मज़ाक़ हो ,* *वो मेरा चेहरा देखकर कहने लगे ये मज़ाक़ नहीं हक़ीक़त है ।* *आज के इंटरव्यू में किसी से कुछ पूछा ही नहीं ,* *सिर्फ CCTV में सबका बर्ताव देखा* , *सब आये लेकिन किसी ने नल या लाइट बंद नहीं किया ।* *धन्य हैं तुम्हारे माँ बाप , जिन्होंने तुम्हारी इतनी अच्छी परवरिश की और अच्छे संस्कार दिए ।* *जिस इंसान के पास Self discipline नहीं वो चाहे कितना भी होशियार और चालाक हो , मैनेजमेंट और ज़िन्दगी की दौड़ धूप में कामयाब नहीं हो सकता ।* *घर पहुंचकर मम्मी पापा को गले लगाया और उनसे माफ़ी मांगकर उनका शुक्रिया अदा किया ।* *अपनी ज़िन्दगी की आजमाइश में उनकी छोटी छोटी बातों पर रोकने और टोकने से , मुझे जो सबक़ हासिल हुआ , उसके मुक़ाबले , मेरे डिग्री की कोई हैसियत नहीं थी और पता चला ज़िन्दगी के मुक़ाबले में सिर्फ पढ़ाई लिखाई ही नहीं , तहज़ीब और संस्कार का भी अपना मक़ाम है...* *संसार में जीने के लिए संस्कार जरूरी है ।* *संस्कार के लिए मां बाप का सम्मान जरूरी है ।* *जिन्दगी रहे ना रहे , जीवित रहने का स्वाभिमान जरूरी है ।*

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