pintu
pintu Aug 14, 2017

👑श्री कृष्ण जन्मोत्सव👑

👑श्री कृष्ण जन्मोत्सव👑

#कृष्णजन्माष्टमी
👑श्री कृष्ण जन्मोत्सव👑

यह भी कहा जाता है कि श्रीकृष्ण द्वापर युग में महाभारत युद्ध करवाया जिससे आसुरी दुनिया का नाश हुआ और स्वर्ग की स्थापना हुई। परंतु द्वापर युग के बाद तो कलियुग अर्थात कलह-क्लेश का युग ही आया। इसमें तो और ही पाप तथा भ्रष्टाचार बढ़ा, स्वर्ग की स्थापना कहाँ हुई❓

👀विचार कीजिए कि यदि अपवित्र दृष्टि, वृत्ति वाले लोग जैसे कंस, जरासंध, शिशुपाल आदि पावन श्रीकृष्ण को देख सकते हैं तो उनकी एक झलक के लिए भक्तों को नवधा भक्ति और सन्यासियों को घोर तपस्या करने की आवश्यकता क्यों पड़ी❓

यदि श्रीकृष्ण की दुनिया में भी इतना पापादि और दुष्ट व्यक्ति थे तो आज की दुनिया को नर्क क्यों कहा जाए❓

वास्तविकता तो यह है कि श्रीकृष्ण की दुनिया में कंस, जरासंध, शिशुपाल जैसे आसुरी वृत्ति वाले लोग थे ही नहीं और न ही उस समय कोई पाप अथवा भ्रष्टाचार का नामोनिशान था क्योंकि श्रीकृष्ण का जन्म तो द्वापर में नहीं, बल्कि सतयुग के आरंभ में होता है।

🔱शयाम सो सुंदर, सुंदर सो श्याम👑

यहाँ एक और बात गौर करने की है कि चित्रकारों ने कृष्ण को सदा एक शिशु अथवा एक युवा व्यक्ति के रूप में राजकीय वेशभूषा में चित्रित किया है। स्वर्णिम युग में, एक आत्मा के अधिकतम 8 जन्म हो सकते हैं। उस युग में 8 वंश भी चलते हैं। रजत युग में, एक आत्मा के अधिकतम 12 जन्म हो सकते हैं। इस युग में 12 वंशावलियाँ चलती हैं। ताम्र युग में, एक आत्मा अधिकतम 21 जन्म ले सकती है और लौह युग में एक आत्मा के अधिकतम 42 जन्म हो सकते हैं; अतः एक आत्मा एक कल्प में ज़्यादा से ज़्यादा 84 जन्म ले सकती है। यह सब पुनर्जन्म के कारण होता है। नारायण को ब्रह्मा बनने में 84 जन्म लगते हैं, किन्तु ब्रह्मा को नारायण बनने में एक झलक या एक सेकेंड (साक्षात्कार द्वारा) का समय लगता है। नारायण का अगलाअवतरण स्वयं कृष्ण देवता है। वास्तव में, ‘श्याम सुंदर’ नाम, कृष्ण के जन्म और अविनाशी विश्व नाटक का संपूर्ण इतिहास है।‘श्याम सुंदर’ का शाब्दिक अर्थ ‘काला (सांवरा) और गोरा (सुंदर) होता है। सुंदर, कृष्ण के स्वर्णिम और रजत युगों में पवित्र, शांत और खुशहाल जीवन का प्रतीक है। यह सुख की दुनिया अर्थात स्वर्ग को दर्शाता है और यह राम राज्य भी कहलता है। श्याम का अर्थ है ताम्र और लौह की रात्रि के समय में कृष्ण की रात्रि की अवस्था। यही कारण है चित्रकारों ने कुछ तस्वीरोंमें उन्हे सांवरे रूप में चित्रित किया है। असत्य और अधर्म का यह काल रावण राज्य के रूप में जाना जाता है।क्या हम श्रीकृष्ण के दर्शन कर सकते हैं❓

👸इस संसार में यदि कोई व्यक्ति बहुत सुंदर होता है तो लोग कहते हैं कि ब्रह्मा अथवा विश्वकर्मा ने इस पर अपनी सारी कारीगरी लगा दी है। कोई कहता है कि इसे तो भगवान ने अपने हाथों से स्वयं रचा है तथा कई ऐसा भी कहते हैं कि इसका सौंदर्य तो न्यारा ही है तो ऐसे ही न्यारे सतोगुणी तत्वों से प्रकृति ने श्रीकृष्ण जी की छवि को रचा था। जन्म से ही उन्हें पवित्रता तथा रत्न-जड़ित ताज प्राप्त थे। ऐसे सतोप्रधान पुरुष को निहारने के लिए उन जैसा ही श्रेष्ठ जीवन बनाने की आवश्यकता है। जैसे कहावत भी है -
'जहाँ काम है वहाँ राम नहीं,
जहाँ सुख है वहाँ दुख नहीं,
जहाँ भोग है वहाँ योग नहीं',
अतः स्पष्ट है कि संपूर्ण अहिंसक, संपूर्ण निर्विकारी, योगेश्वर श्रीकृष्ण की दुनिया में कोई भी कामी, क्रोधी अथवा भ्रष्टाचारी व्यक्ति हो ही नहीं सकता।

👼वर्तमान समय कलियुग के अंत में ब्रह्मचर्य का व्रत लेने वाले योगीजन, संपूर्ण पवित्रता को प्राप्त करने के पश्चात अर्थाततमोप्रधान से सतोप्रधान बनने के पश्चात ही सतयुग के आदि में श्रीकृष्ण के सच्चे जन्मदिन को अपने नेत्रों द्वारा देख भी सकते हैं और स्वर्ग अर्थात सतयुग में गोप-गोपियाँ बन श्रीकृष्ण के साथ मंगल-मिलन भी मना सकते हैं।

👶 श्री कुष्ण आ रहा है
🔱 आप को याद है❓

+62 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 53 शेयर
Bhavana Gupta Apr 17, 2021

+58 प्रतिक्रिया 15 कॉमेंट्स • 31 शेयर

+10 प्रतिक्रिया 3 कॉमेंट्स • 0 शेयर
Harpal Bhanot Apr 17, 2021

+13 प्रतिक्रिया 3 कॉमेंट्स • 3 शेयर
Mahaveer Vaishnav Apr 17, 2021

+3 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर

+19 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 7 शेयर
J Lodhi #@Lodhi jii Apr 17, 2021

+8 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 1 शेयर
sarla rana Apr 17, 2021

. "जीवन दर्शन" एक आदमी प्रातःकाल तडके नदी की ओर जल लेकर जा रहा था। नदी के पास पहुँचने पर उसे आभास हुआ कि सूर्योदय अभी पूरी तरह नहीं निकला है और चारों ओर कुछ ज्यादा ही अंधकार फैला हुआ है। घने अंधेरे में वह मस्ती से टहलने लगा। तभी उसका पैर एक झोले से टकराया। उत्सुकतावश उसने झोले मे हाथ डाला तो पाया कि उसमें बहुत सारे पत्थर रखें है। समय बिताने के लिए वह झोले में से एक-एक पत्थर निकालकर नदी में फेंकता गया। धीरे-धीरे उसने पत्थर पानी में फेंक दिए। जब अंतिम पत्थर उसके हाथ में था तभी सूर्य की रोशनी धरती पर फैल गयी। रोशनी में देखा कि वह पत्थर बहुत तेज चमक रहा था। वह दंग रह गया। उसकी धडकने बंद होने लगीं क्योंकि जिसे वह साधारण पत्थर समझ रहा था, वह अनमोल हीरा था। वह फूट-फूटकर रोने लगा। अपने हाथों में अंतिम बचे कीमती पत्थर को देखकर अंधेरे को कोस रहा था। वह नदी किनारे शोकमग्न बैठा था तभी एक महात्मा वहाँ से गुजर रहे थे, उसका दुःख जानकर वे बोले- "बेटा ! तुम दुःखी मत हो। तुम अब भी भाग्यशाली हो कि अंतिम पत्थर फेंकने से पहले ही सूर्य की रोशनी फूट पड़ी, वरना यह कीमती पत्थर भी तुम्हारे हाथ से निकल जाता। यह कीमती हीरा अभी भी तुम्हारी जिन्दगी को संवार सकता है। जो चीज हाथ से निकल गई, उसे लेकर रोने के बजाय जो तुम्हारे हाथ में है, तुम्हें उसी में खुश होना चाहिए, आनन्द मनाना चाहिए और उज्जवल भविष्य के लिए प्रयास करना चाहिए, और ईश्वर का शुक्रिया अदा करना चाहिए।" महात्मा की बात सुनकर उसकी आँखें खुल गईं, और खुशी-खुशी घर आ गया। अर्थात जो बीत गया(चला गया), उसे भुलाकर आगे बढ़ना ही श्रेयस्कर है। ----------:::×:::---------- "जय जय श्री राधे" ******************************************* "श्रीजी की चरण सेवा" की सभी धार्मिक, आध्यात्मिक एवं धारावाहिक पोस्टों के लिये हमारे पेज से जुड़े रहें👇 https://www.facebook.com/%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%9C%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%9A%E0%A4%B0%E0%A4%A3-%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A4%BE-724535391217853/

+34 प्रतिक्रिया 8 कॉमेंट्स • 61 शेयर
ranu Ankur Mishra Apr 17, 2021

+1 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 1 शेयर
Vandana Singh Apr 17, 2021

+1 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 0 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB