Kushal Ghosh
Kushal Ghosh Dec 14, 2019

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matalalratod Dec 14, 2019
श्री राम जय श्री हनुमान जय श्री शनिदेव महाराज सुप्रभात गुड मॉर्निंग भाई जी

Rekchand Bisane Dec 14, 2019
जय श्री राम जय श्री हनुमान जी जय जय श्री राम

Vnita Dec 14, 2019
ओम शांति।*14.12.19 की मुरली से प्रश्नोत्तर* *प्रात:मुरली ओम् शान्ति* *प्रश्न:-मीठे बच्चे - तुम बाप के पास आते हो रिफ्रेश होने, बाप के मिलने से क्या होता है?* उत्तर:-भक्ति मार्ग की सब थकान दूर हो जाती है। *प्रश्नः-तुम बच्चों को बाबा किस विधि से रिफ्रेश करते हैं?* उत्तर:- *1.* बाबा ज्ञान सुना-सुना कर तुम्हें रिफ्रेश कर देते हैं। *2.* याद से भी तुम बच्चे रिफ्रेश हो जाते हो। वास्तव में सतयुग है सच्ची विश्राम पुरी। ☝️वहाँ कोई अप्राप्त वस्तु नहीं, जिसको प्राप्त करने के लिए परिश्रम करना पड़े। *3.* शिवबाबा की गोद में आते ही तुम बच्चों को विश्राम मिल जाता है। सारी थकान दूर हो जाती है। *ओम् शान्ति।* *प्रश्न:-बाप बैठ समझाते हैं, साथ में यह दादा भी समझते हैं, क्यों?* उत्तर:-क्योंकि बाप इन दादा द्वारा बैठ समझाते हैं। जैसे तुम समझते हो, वैसे यह दादा भी समझते हैं। दादा को भगवान नहीं कहा जाता, यह है भगवानुवाच। *प्रश्न:-बाप क्या समझाते हैं?* उत्तर:-देही-अभिमानी भव क्योंकि अपने को आत्मा समझने बिगर परमपिता परमात्मा को याद कर न सकें। *प्रश्न:-इस समय तो सभी आत्मायें पतित हैं। पतित को ही क्या कहा जाता है?* उत्तर:-मनुष्य कहा जाता है, पावन को देवता कहा जाता है। यह बहुत सहज समझने और समझाने की बातें हैं। मनुष्य ही पुकारते हैं-हे पतितों को पावन बनाने वाले आओ। देवी-देवतायें ऐसे कभी नहीं कहेंगे। *प्रश्न:-पतित-पावन बाप किसके बुलावे पर आते हैं?* उत्तर:-पतितों के। आत्माओं को पावन बनाकर फिर नई पावन दुनिया भी स्थापन करते हैं। आत्मा ही बाप को पुकारती है। शरीर तो नहीं पुकारेगा। *प्रश्न:-पारलौकिक बाप जो सदा पावन है, उसे ही सब याद करते हैं। यह है पुरानी दुनिया। बाप नई पावन दुनिया बनाते हैं। कई तो ऐसे भी हैं जो क्या कहते हैं?* उत्तर:-हमको तो यहाँ ही अपार सुख हैं, धन माल बहुत है। वह समझते हैं हमारे लिए स्वर्ग यही हैं। वह तुम्हारी बातें कैसे मानेंगे? *प्रश्न:-कलियुगी दुनिया को स्वर्ग समझना-यह भी क्या है?* उत्तर:-यह भी बेसमझी है। कितनी जड़जड़ीभूत अवस्था हो गई है। तो भी मनुष्य कहते हैं हम तो स्वर्ग में बैठे हैं। *प्रश्न:-बच्चे नहीं समझाते हैं तो बाप क्या कहेंगे?* उत्तर:-तुम क्या पत्थरबुद्धि हो? दूसरे को नहीं समझा सकते हो? जब खुद पारसबुद्धि बनें तब तो दूसरों को भी बनावें। पुरूषार्थ अच्छा करना चाहिए, इसमें लज्जा की बात नहीं। परन्तु मनुष्यों की बुद्धि में आधाकल्प की जो उल्टी मतें भरी हुई हैं वह कोई जल्दी भूलते नहीं। *प्रश्न:-जब तक बाप को यथार्थ रीति नहीं पहचाना है तब तक क्या नहीं आ सकती?* उत्तर:-वह ताकत आ नहीं सकती। *प्रश्न:-बाप कहते हैं इन वेदों-शास्त्रों आदि से मनुष्य कुछ भी सुधरते नहीं हैं। दिन-प्रतिदिन और ही क्या होता है?* उत्तर:-और ही बिगड़ते आये हैं। सतोप्रधान से तमोप्रधान ही बने हैं। यह किसकी भी बुद्धि में नहीं है कि हम ही सतोप्रधान देवी-देवता थे, कैसे नीचे गिरे हैं। किसको ज़रा भी पता नहीं है और फिर 84 जन्म के बदले 84 लाख जन्म कह दिया है तो फिर पता भी कैसे पड़े। *प्रश्न:-बाप बिगर ज्ञान की ......... देने वाला कोई नहीं?* उत्तर:-रोशनी। सभी एक-दो के पिछाड़ी दर-दर धक्के खाते रहते हैं। नीचे गिरते-गिरते पट पड़ गये हैं, सब ताकत खत्म हो गई है। बुद्धि में भी ताकत नहीं जो बाप को यथार्थ जान सकें। *प्रश्न:-बाप ही आकर सबकी बुद्धि का ताला खोलते हैं। तो कितने.......होते हैं?* उत्तर:-रिफ्रेश होते हैं। बाप के पास बच्चे रिफ्रेश होने आते हैं। घर में विश्राम मिलता है ना। *प्रश्न:-बाप के मिलने से क्या होता है?* उत्तर:-भक्ति मार्ग की सब थकान ही दूर हो जाती है। *प्रश्न:-सतयुग को भी कौन सी पुरी कहा जाता है?* उत्तर:-विश्रामपुरी कहा जाता है। वहाँ तुम्हें कितना विश्राम मिलता है। कोई अप्राप्त वस्तु नहीं जिसके लिए परिश्रम करना पड़े। *प्रश्न:-यहाँ रिफ्रेश कौन करते हैं?* उत्तर:-बाप भी करते हैं तो यह दादा भी करते हैं। शिवबाबा की गोद में आते कितना विश्राम मिलता है। विश्राम माना ही शान्त। *प्रश्न:-मनुष्य भी थककर........ हो जाते हैं।?* उत्तर:-विश्रामी। कोई कहाँ, कोई कहाँ विश्राम के लिए जाते हैं ना। लेकिन उस विश्राम में रिफ्रेशमेंट नहीं। यहाँ तो बाप तुम्हें कितना ज्ञान सुनाकर रिफ्रेश करते हैं। *प्रश्न:-बाप की याद से भी क्या होता है?* उत्तर:-कितने रिफ्रेश होते और तमोप्रधान से सतोप्रधान भी बनते जाते हो। सतोप्रधान बनने के लिए यहाँ बाप के पास आते हो। *प्रश्न:-बाप कहते हैं मीठे-मीठे बच्चों, क्या करो?* उत्तर:-बाप को याद करो। बाप ने समझाया है कि सारे सृष्टि का चक्र कैसे फिरता है, सर्व आत्माओं को विश्राम कैसे और कहाँ मिलता है। *प्रश्न:-तुम बच्चों का क्या फ़र्ज है?* उत्तर:-सबको बाप का पैगाम देना। बाप कहते हैं मुझे याद करो तो इस वर्से के तुम मालिक बन जायेंगे। *प्रश्न:-बाप इस संगमयुग पर क्या करते हैं?* उत्तर:-नई स्वर्ग की दुनिया रचते हैं। जहाँ तुम जाकर मालिक बनते हो। *प्रश्न:-फिर द्वापर में माया रावण के द्वारा तुम्हें क्या मिलता है?* उत्तर:-श्राप मिलता है, तो पवित्रता, सुख, शान्ति, धन आदि सब खत्म हो जाता है। कैसे धीरे-धीरे खत्म होता है वह भी बाप ने समझाया है। दु:खधाम में कोई विश्राम थोड़ेही होता है। सुखधाम में विश्राम ही विश्राम है। *प्रश्न:-मनुष्यों को भक्ति क्या करती है?* उत्तर:-कितना थकाती है। जन्म-जन्मान्तर भक्ति से कितने थक जाते हैं। कैसे एकदम कंगाल बन गये हो, यह सारा राज़ बाप बैठ समझाते हैं। नये-नये आते हैं तो उन्हें कितना समझाना होता है। *प्रश्न:-हर एक बात पर मनुष्य कितना सोचते हैं। क्या समझते हैं?* उत्तर:-समझते हैं कहाँ जादू न हो। अरे, तुम ही कहते हो भगवान जादूगर है। तो बाप कहते हैं हाँ, मैं बरोबर जादूगर हूँ। परन्तु वह जादू नहीं, जिससे मनुष्य भेड़-बकरी बन जायें। *प्रश्न:-यह बुद्धि से समझा जाता है, यह तो जैसे रिढ़ मिसल है। गायन भी तो है, कौन-सा?* उत्तर:-सुरमण्डल के साज़ से..... इस समय तो जैसे सभी मनुष्य रिढ़-बकरियाँ हैं। यह बातें सारी यहाँ की हैं। इस समय का ही गायन है। कल्प के पिछाड़ी को भी मनुष्य समझ नहीं सकते। *प्रश्न:-चण्डिका का कितना बड़ा मेला लगता है। वह कौन थी?* उत्तर:-कहते हैं वह एक देवी थी। ऐसा नाम तो वहाँ कोई होता ही नहीं। सतयुग में कितने अच्छे सुन्दर नाम होते हैं। *प्रश्न:-सतयुगी सम्प्रदाय को ........ कहा जाता है?* उत्तर:-श्रेष्ठाचारी। कलियुगी सम्प्रदाय को तो कितना छी-छी टाइटल देते हैं। अभी के मनुष्यों को श्रेष्ठ नहीं कहेंगे। *प्रश्न:-देवताओं को श्रेष्ठ कहा जाता है। गायन भी है कौन सा?* उत्तर:-मनुष्य से देवता किये, करत न लागी वार। मनुष्य से देवता, देवता से मनुष्य कैसे बनते हैं, यह राज़ बाप ने तुम्हें समझाया है। उनको डीटी वर्ल्ड, इनको ह्युमन वर्ल्ड कहा जाता है। *प्रश्न:-दिन को सोझरा, रात को अन्धियारा कहा जाता है। ज्ञान है ........, भक्ति है ........?* उत्तर:-सोझरा, भक्ति है अन्धियारा। अज्ञान नींद कहा जाता है ना। तुम भी समझते हो कि आगे हम कुछ भी नहीं जानते थे तो नेती-नेती कहते थे अर्थात् हम नहीं जानते। *प्रश्न:-अभी तुम समझते हो-हम भी तो पहले कैसे थे?* उत्तर:-नास्तिक थे। बेहद के बाप को ही नहीं जानते थे। वह है असली अविनाशी बाबा। उसे सर्व आत्माओं का बाप कहा जाता है। तुम बच्चे जानते हो-अभी हम उस बेहद के बाप के बने हैं। *प्रश्न:-बाप बच्चों को गुप्त ....... देते हैं?* उत्तर:-ज्ञान। यह ज्ञान मनुष्यों के पास कहाँ मिल न सके। आत्मा भी गुप्त है, गुप्त ज्ञान आत्मा धारण करती है। आत्मा ही मुख द्वारा ज्ञान सुनाती है। आत्मा ही गुप्त बाप को गुप्त याद करती है। *प्रश्न:-बाप कहते हैं बच्चों, देह-अभिमानी नहीं बनो। देह-अभिमान से क्या होता है?* उत्तर:-आत्मा की ताकत खत्म होती है। आत्म-अभिमानी बनने से आत्मा में ताकत जमा होती है। बाप कहते हैं ड्रामा के राज़ को अच्छी रीति समझकर चलना है। *प्रश्न:-इस अविनाशी ड्रामा के राज़ को जो ठीक रीति जानते हैं, वह सदा कैसे रहते हैं?* उत्तर:-हर्षित रहते हैं। *प्रश्न:-इस समय मनुष्य ऊपर जाने की कितनी कोशिश करते हैं, क्या समझते हैं?* उत्तर:-ऊपर में दुनिया है। शास्त्रों में सुन रखा है ऊपर में दुनिया है तो वहाँ जाकर देखें। वहाँ दुनिया बसाने की कोशिश करते हैं। दुनिया तो बहुत बसाई है ना। *प्रश्न:-भारत में सिर्फ एक ही आदि सनातन देवी-देवता धर्म था और कोई क्या नहीं था?* उत्तर:-कोई खण्ड आदि नहीं था। फिर कितना बसाया है। तुम विचार करो भारत के कितने थोड़े टुकड़े में देवतायें होते हैं। *प्रश्न:-जमुना के किनारे पर ही परिस्तान था जहाँ कौन राज्य करते थे?* उत्तर:-यह लक्ष्मी-नारायण राज्य करते थे। कितनी सुन्दर शोभायमान, सतोप्रधान दुनिया थी। नैचुरल ब्युटी थी। आत्मा में ही सारा चमत्कार रहता है। *प्रश्न:-बच्चों को दिखाया था श्रीकृष्ण का जन्म कैसे होता है। सारे कमरे में जैसे क्या हो जाता है?* उत्तर:-रोशनी हो जाती है। तो बाप बैठ कर बच्चों को समझाते हैं, अभी तुम परिस्तान में जाने के लिए पुरूषार्थ कर रहे हो। बाकी ऐसे नहीं - तालाब में डुबकी लगाने से परियाँ बन जायेंगे। यह सभी झूठे नाम रख दिये हैं। *प्रश्न:-लाखों वर्ष कह देने से क्या हो गया है?* उत्तर:-बिल्कुल ही सब-कुछ भूल गये हैं। अभी तुम अभुल बन रहे हो नम्बरवार पुरूषार्थ अनुसार। *प्रश्न:-विचार किया जाता है-इतनी छोटी-सी आत्मा क्या करती है?* उत्तर:-कितना बड़ा पार्ट शरीर से बजाती है, फिर शरीर से आत्मा निकल जाती है तो शरीर का देखो क्या हाल हो जाता है। आत्मा ही पार्ट बजाती है। कितनी बड़ी विचार की बात है। *प्रश्न:-सारी दुनिया के एक्टर्स (आत्मायें) अपनी एक्ट अनुसार ही क्या करते हैं?* उत्तर:-पार्ट बजाते हैं। कुछ भी फर्क नहीं पड़ सकता। हूबहू सारी एक्ट फिर से रिपीट हो रही है। इसमें संशय कर नहीं सकते। *प्रश्न:-हर एक की बुद्धि में फर्क पड़ सकता है, क्यों?* उत्तर:-क्योंकि आत्मा तो मन-बुद्धि सहित है ना। बच्चों को मालूम है कि हमको स्कॉलरशिप लेनी है तो दिल अन्दर खुशी होती है। यहाँ भी अन्दर आने से ही एम ऑब्जेक्ट सामने देखते हैं तो खुशी तो जरूर होगी। *प्रश्न:-अभी तुम जानते हो हम यह (देवी-देवता) बनने के लिए यहाँ क्या करते हैं?* उत्तर:-पढ़ते हैं। ऐसा कोई स्कूल नहीं जहाँ दूसरे जन्म की एम ऑब्जेक्ट को देख सकें। तुम देखते हो कि हम लक्ष्मी-नारायण जैसे बन रहे हैं। *प्रश्न:-अभी हम संगमयुग पर क्या कर रहे हैं?* उत्तर:-भविष्य में इन जैसा लक्ष्मी-नारायण बनने की पढ़ाई पढ़ रहे हैं। *प्रश्न:-कितनी गुप्त पढ़ाई है। एम ऑब्जेक्ट को देख क्या होना चाहिए?* उत्तर:-कितनी खुशी होनी चाहिए। खुशी का पारावार नहीं। स्कूल वा पाठशाला हो तो ऐसी। है कितनी गुप्त, परन्तु जबरदस्त पाठशाला है। *प्रश्न:-जितनी बड़ी पढ़ाई उतनी ही........ रहती हैं?* उत्तर:-फैसिलिटीज़। परन्तु यहाँ तुम पट पर बैठ पढ़ते हो। आत्मा को पढ़ना होता है फिर चाहे पट पर बैठे, चाहे तख्त पर, परन्तु खुशी से खग्गियां मारते रहो कि इस पढ़ाई को पास करने बाद जाकर यह बनेंगे। *प्रश्न:-अभी तुम बच्चों को बाप ने आकर क्या किया है?* उत्तर:-अपना परिचय दिया है कि मैं इनमें कैसे प्रवेश कर तुम्हें पढ़ाता हूँ। बाप देवताओं को तो नहीं पढ़ायेंगे। देवताओं को यह ज्ञान कहाँ। *प्रश्न:-मनुष्य तो कैसे मूँझते हैं?* उत्तर:-क्या देवताओं में ज्ञान नहीं है। देवतायें ही इस ज्ञान से देवता बनते हैं। देवता बनने के बाद फिर ज्ञान की क्या दरकार है। लौकिक पढ़ाई से बैरिस्टर बन गया, कमाई में लग गया फिर बैरिस्टरी पढ़ेंगे क्या? *अच्छा!* *मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का याद-प्यार और गुडमॉर्निंग। रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते।* *धारणा के लिए मुख्य सार:-* 1) अविनाशी ड्रामा के राज़ को यथार्थ समझ हर्षित रहना है। इस ड्रामा में हर एक एक्टर का पार्ट अपना-अपना है, जो हूबहू बजा रहे हैं। 2) एम ऑब्जेक्ट को सामने रख खुशी में खग्गियां मारनी है। बुद्धि में रहे हम इस पढ़ाई से ऐसा लक्ष्मी-नारायण बनेंगे। *वरदान:-ब्राह्मण जीवन में हर सेकण्ड सुखमय स्थिति का अनुभव करने वाले सम्पूर्ण पवित्र आत्मा भव* ⚜️ पवित्रता को ही सुख-शान्ति की जननी कहा जाता है। ⚡किसी भी प्रकार की अपवित्रता दु:ख अशान्ति का अनुभव कराती है। ⚜️ ब्राह्मण जीवन अर्थात् हर सेकण्ड सुखमय स्थिति में रहने वाले। ⚡चाहे दु:ख का नज़ारा भी हो लेकिन जहाँ पवित्रता की शक्ति है वहाँ दु:ख का अनुभव नहीं हो सकता। ⚜️ पवित्र आत्मायें मास्टर सुख कर्ता बन दु:ख को रूहानी सुख के वायुमण्डल में परिवर्तन कर देती हैं। *स्लोगन:-वनिता कासनियां पंजाब साधनों का प्रयोग करते साधना को बढ़ाना ही बेहद की वैराग्य वृत्ति है।* *ओम शान्ति*

Shantila More Dec 14, 2019
मन को शांति मिल गई यह भजन सुनकर

Gajrajg Dec 14, 2019
🙏जय श्री कृष्ण🙏 “कामयाबी और नाकामयाबी दोनों ज़िन्दगी के हिस्से है, दोनों ही स्थायी नहीं हैं।” 🌷शुभ दिन🌷

Kamala Maheshwari Dec 15, 2019
ऊँसुर्य देवायनमःसुर्य देव कीकृपाअचछा सवास्थ्य आरोगय आपको प्रदान होआपके जीवनमेखुशियो खजाना होसभी को मेराप्रणाम नमस्कार प्यारजी sweet good morning ji happy Sunday 🌴🙏🌻🌼🌴🙏🌻🌼🌴🙏🌻🌼🌴🙏

Lakkad Kishor Jan 23, 2020

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Lakkad Kishor Jan 22, 2020

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Lakkad Kishor Jan 21, 2020

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Sarju Gupta Jan 24, 2020

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Rakesh Jan 23, 2020

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Niranjan saini Jan 24, 2020

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