(नवरात्रि माता ब्रह्मचारिणी की आरती) ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़ जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी, तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी। मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको॥ कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै, रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै॥ केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी, सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी॥ कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती, कोटिक चंद्र दिवाकर, सम राजत ज्योती।। शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती, धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती॥ चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे, मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे। ब्रह्माणी, रूद्राणी, तुम कमला रानी, आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी। चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरों, बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू|| तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता, भक्तन की दुख हरता, सुख संपति करता। भुजा चार अति शोभित, खडग खप्पर धारी, मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी॥ कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती, श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती। श्री अंबेजी की आरति, जो कोइ नर गावे, कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपति पावे॥

(नवरात्रि माता ब्रह्मचारिणी की
आरती) ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़ 
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी,
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी।
मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को
उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको॥
कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै,
रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै॥
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी,
सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी॥
कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती,
कोटिक चंद्र दिवाकर, सम राजत ज्योती।।
शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती,
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती॥
चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे,
मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे। 
ब्रह्माणी, रूद्राणी, तुम कमला रानी,
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी।
चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरों,
बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू||
तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता,
भक्तन की दुख हरता, सुख संपति करता।
भुजा चार अति शोभित, खडग खप्पर धारी,
मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी॥
कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती,
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती।
श्री अंबेजी की आरति, जो कोइ नर गावे,
कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपति पावे॥

+11 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 4 शेयर

कामेंट्स

Diwakar Vishwakarma Mar 27, 2020

+6 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 4 शेयर

माता चंद्रघंटा आप को बारंबार प्रणाम नमन नमस्कार है टीटू शुभ नवरात्रि का तीसरा दिन आज मां दुर्गा का प्रवेश है सभी घरों में माता चंद्रघंटा के रूप में जय माता की टीटू त्यागी नवरात्रि माता चंद्रघंटा आज आपका यह तीसरा स्वरुप है... टीटू त्यागी या देवी सर्वभूतेषु माँ चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्ये नमस्तस्यै नमस्तस्ये नमो नमः।। पिण्डज प्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैर्युता। प्रसादं तनुते महयं चन्द्रघण्टेति विश्रुता ।। _______________________________ ध्यान_______________________________ _______________________________ वन्दे वांछित लाभाय चन्द्रार्धकृत शेखरम्। सिंहारूढा चंद्रघंटा यशस्वनीम्॥ 'मणिपुर स्थितां तृतीय दुर्गा त्रिनेत्राम्। खंग, गदा, त्रिशूल,चापशर,पदम कमण्डलु माला वराभीतकराम्॥ पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्। मंजीर हार केयूर,किंकिणि, रत्नकुण्डल मण्डिताम॥ प्रफुल्ल वंदना बिबाधारा कांत कपोलां तुगं कुचाम्। कमनीयां लावाण्यां क्षीणकटि नितम्बनीम्॥ टीटू त्यागी चमरी हापुड़_____________ _________

+3 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर
Raj rani Mar 27, 2020

0 कॉमेंट्स • 0 शेयर

नवरात्रों में दूसरा दिन माता ब्रह्मचारिणी का होता है तो आज 26 मार्च दिन बृहस्पतिवार वीरवार गुरुवार माता ब्रह्मचारिणी के रूप में सभी भक्तों के घर में विराजमान हैं ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़ माता ब्रह्मचारिणी से निवेदन करता है कि माता अपने सभी भक्तों का कल्याण करो उद्धार करो जय मां ब्रह्मचारिणी नवरात्रि माता ब्रह्मचारिणी पूजा विधि देवी ब्रह्मचारिणी जी की पूजा का विधान इस प्रकार है, सर्वप्रथम आपने जिन देवी-देवताओ एवं गणों व योगिनियों को कलश में आमत्रित किया है उनकी फूल, अक्षत, रोली, चंदन, से पूजा करें उन्हें दूध, दही, शर्करा, घृत, व मधु से स्नान करायें व देवी को जो कुछ भी प्रसाद अर्पित कर रहे हैं उसमें से एक अंश इन्हें भी अर्पण करें. प्रसाद के पश्चात आचमन और फिर पान, सुपारी भेंट कर इनकी प्रदक्षिणा करें. कलश देवता की पूजा के पश्चात इसी प्रकार नवग्रह, दशदिक्पाल, नगर देवता, ग्राम देवता, की पूजा करें. इनकी पूजा के पश्चात मॉ ब्रह्मचारिणी की पूजा करें. देवी की पूजा करते समय सबसे पहले हाथों में एक फूल लेकर प्रार्थना करें "दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू. देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा”.. इसके पश्चात् देवी को पंचामृत स्नान करायें और फिर भांति भांति से फूल, अक्षत, कुमकुम, सिन्दुर, अर्पित करें देवी को अरूहूल का फूल (लाल रंग का एक विशेष फूल) व कमल काफी पसंद है उनकी माला पहनायें. प्रसाद और आचमन के पश्चात् पान सुपारी भेंट कर प्रदक्षिणा करें और घी व कपूर मिलाकर देवी की आरती करें. अंत में क्षमा प्रार्थना करें "आवाहनं न जानामि न जानामि वसर्जनं, पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वरी.. ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़

+3 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 1 शेयर

माता शैलपुत्री आपको प्रणाम नमन नमस्कार आपके चरणों में बारम्बार प्रणाम नमन नमस्कार है ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़ एवं सभी भक्तों का मैं बारंबार नमस्कार हूं ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़ मां शैलपुत्री आपको बारंबार प्रणाम नमन नमस्कार है ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़ एवं सभी भक्तो का ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़ आज माता शैलपुत्री रूप में माता दर्गा आपके प्रथम स्वरुप शैलपुत्री को ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़ ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़ माता माता शैलपुत्री. मां दुर्गा के पूजन में लगने वाली सामग्री इस प्रकार है- - - - सबसे पहले मां दुर्गा की फोटो या मूर्ति की आवश्यकता होती है. का - एक चौकी या मंदिर, जिस पर मां की मूर्ति या फोटो स्थापित की जाएगी. - चौकी पर बिछाने के लिए लाल या पीला कपड़ा. -चढ़ाने के लिए लाल चुनरी. घटस्थापना का शुभ मुहूर्त, जानें नियम, आवश्यक सामग्री, विधि... __ - नौ दिन पाठ करने के लिए मां दुर्गा की किताब दुर्गासप्तशती किताब खरीदें. चालीसा व आरती की किताब. '- कलश स्थापना के लिए कलश. आम के पत्ते. - ताजा, धुले हुए आम के पत्तों के साथ फूल और माला. - नारियल, जिसे छिला ना गया हो. इसे जटा वालो नारियल भी कहते हैं. - पान, सपारी, इलायची. लौंग, कपर रोली, सिंदर, मौली (कलावा), चावल, - यदि आप अखंड ज्योति जलाने वाले हैं तो उसके लिए भी सामग्री इस प्रकार हैं: पीतल या मिट्टी का साफ दीपक, घी, लंबी बत्ती के लिए रुई या बत्ती, दीपक पर लगाने के लिए रोली या सिंदूर, घी में डालने और दीपक के नीचे रखने के लिए चावल - यदि आप नवरात्रि के पहले दिन या नौ दिन हवन करना चाहते हैं तो यह सामग्री खरीद हवन कुंड, आम की लकड़ी, हवन कुंड पर लगाने के लिए रोली या सिंदूर, काले तिल, चावल, जौ (जवा), धूप, चीनी, पांच मेवा, घी, लोबान, गुगल, लौंग का जौड़ा, कमल गट्टा, सुपारी, कपूर, हवन में चढ़ाने के लिए प्रसाद की मिठाई और नवमी को हलवा-पूरी और आचमन के लिए शुद्ध जल. किस दिन किस देवी की पूजा पहले दिन शैलपुत्री, दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन चंद्रघंटा, चौथे दिन कुष्मांडा, पांचवें। दिन स्कंदमाता, छठे दिन कात्यानी, सातवें दिन कालरात्रि, आठवें दिन महागौरी, नवें दिन । सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है. ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़ मां दुर्गा का दिन गणेश जी का दिन - (ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़) (ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़) (ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़)

+4 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 1 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB