Balwant Singh Rawat
Balwant Singh Rawat Dec 10, 2017

हर हर गंगे

हर हर गंगे
हर हर गंगे

🌸🙏हर हर गंगे🙏🌸

🌺पुनाति कीर्तिता पापं🌺
🌺दृष्टा भद्रं प्रयच्छति🌺
🌺अवगाढा च पीता च🌺
🌺पुनात्यासप्तमं कुलम्🌺
................................. (पद्मपुराण)🙏🌺

🌻गंगाजी नाम लेने मात्र से पापों को धो देती है, दर्शन करने पर कल्याण प्रदान करती हैं तथा स्नान करने और जल पीने पर सात पीढ़ियों तक को पवित्र कर देती है🌻

🌸🙏जय गंगा मैय्या🙏🌸
(आज दिनांक १०.१२.२०१७ को अलकनन्दा व धवला माँ के संगम विष्णुप्रयाग जोशीमठ में गंगा आरती व सत्संग कार्यक्रम में रा. इ. कालेज जोशीमठ के प्रधानाचार्य श्री चौबे जी गंगा माँ व गणेश भगवान की महिमा बताते हुये)

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कामेंट्स

Balwant Singh Rawat Dec 10, 2017
🌺🙏विष्णुप्रयाग पर सत्संग🙏🌺 🌸उपरोक्त पर आज अलकनंदा व धवला माँ के पवित्र संगम विष्णुप्रयाग के तट पर आयोजित गंगा आरती दर्शन कार्यक्रम के दौरान सत्संग पर राजकीय इण्टर कालेज जोशीमठ के प्रधानाचार्य श्री चौबे जी ने गणेश व गंगा माँ की महिमा पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि गणेश जी का जीवन सनातन धर्म में हमें उच्च कोटि का दृष्टांत देता है कि जो लोग माता-पिता की वन्दना करते हैं, ऐसे लोग जगत में वन्दनीय हो जाते हैं। आगे यह भी बताया कि विश्व में सनातन धर्म नित्य नूतन है। गंगा माँ हमें हमेशा निस्वार्थ व उच्च कोटि की सेवा की प्रेरणा भी देती है🌸 💐ऐसे पावन संगम पर आज आयोजन समिति द्वारा सत्संग का आयोजन अपने-आप में अनुठा प्रयोग रहा, जिसका सभी भक्तों ने भरपुर आनन्द लिया, व अश्रुमिश्रित भक्तिमय भजनों से माँ गंगा के चरणों को धो डाला💐 🙏🕉हे विष्णपदी, शिवजटानिवासिनी व ब्रह्म कमण्डलवासिनी गंगा माँ! आपकी जय हो, जय हो, सदा ही जय हो🕉🙏 🌺🙏🕉जय मोक्षदायिनी गंगा माँ🕉🙏🌺

Jitendra Tagore Dec 11, 2017
MAA mokshdayni Ganga maiya ki jai ho.maa sapt Ganga ki jai ho. thanks good morning Hari sarnam have a nice day

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Shanti Pathak Aug 5, 2020

🚩🙏🚩जय श्री राम 🚩🙏🚩 💐राम जिनका नाम है, अयोध्या जिनका धाम है;💐 💐ऐसे रघुनंदन को हमारा प्रणाम है;💐 ़ 💐उनके चरणों में जिसने जीवन वार दिया,💐 💐संसार में उसका कल्याण है💐 श्री राम नवमी, विजय दशमी, सुंदरकांड, रामचरितमानस कथा, श्री हनुमान जन्मोत्सव और अखंड रामायण के पाठ में प्रमुखता से वाचन किया जाने वाली वंदना। ॥दोहा॥ श्री रामचन्द्र कृपालु भजुमन हरण भवभय दारुणं । नव कंज लोचन कंज मुख कर कंज पद कंजारुणं ॥१॥ कन्दर्प अगणित अमित छवि नव नील नीरद सुन्दरं । पटपीत मानहुँ तडित रुचि शुचि नोमि जनक सुतावरं ॥२॥ भजु दीनबन्धु दिनेश दानव दैत्य वंश निकन्दनं । रघुनन्द आनन्द कन्द कोशल चन्द दशरथ नन्दनं ॥३॥ शिर मुकुट कुंडल तिलक चारु उदारु अङ्ग विभूषणं । आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित खरदूषणं ॥४॥ इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनं । मम् हृदय कंज निवास कुरु कामादि खलदल गंजनं ॥५॥ मन जाहि राच्यो मिलहि सो वर सहज सुन्दर सांवरो । करुणा निधान सुजान शील स्नेह जानत रावरो ॥६॥ एहि भांति गौरी असीस सुन सिय सहित हिय हरषित अली। तुलसी भवानिहि पूजी पुनि-पुनि मुदित मन मन्दिर चली ॥७॥ ॥सोरठा॥ जानी गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि । मंजुल मंगल मूल वाम अङ्ग फरकन लगे। रचयिता: गोस्वामी तुलसीदास

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Mahesh Malhotra Aug 5, 2020

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Mahesh Malhotra Aug 5, 2020

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आशुतोष Aug 5, 2020

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Mahesh Malhotra Aug 5, 2020

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