Mamta Chauhan
Mamta Chauhan Mar 4, 2021

Shubh Ratri Vandan Rathey Radhey 🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌷🌿🌿🌿🌿🌿🌷🌿🌿🌿🌿🌿

Shubh Ratri Vandan  Rathey Radhey  🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌷🌿🌿🌿🌿🌿🌷🌿🌿🌿🌿🌿

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कामेंट्स

k l तिवारी Mar 4, 2021
🌺🚩ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः🚩🌺🏵️ 🌷🌹🌷🌹🌷 🌷🌹राम राम बहन 🌹🌷जय श्रीमाता की बहन🌷🌺प्यारी प्यारी स्वीट सी रानी बहना के चरणों में सादर प्रणाम करता हूँ🙏🌼🌺🌹हे जगतजननी माँ मेरी प्यारी बहना को सदैव स्वस्थ और सुंदर बनाये रखना🌺सदासुहागिन करना🌹🙏🌹श्रीहरि जगदीश नारायण भगवान जी की कृपा दृष्टि आप पर सदैव बनी रहे सदा स्वस्थ रखें🌻🌻पाँव में पायल हाँथो में चूड़ियां छनकती रहें🌼आप हमेशा हँसती रहें मुस्कराती रहें गुनगुनाती रहें बहन🌼🌷आपका हर पल शुभ और मंगलमय हो बहन🌸🌺प्रभु आपको सदा सुखी और प्रसन्न रखें बहन🌼जुग जुग जियो मेरी रानी बहना🌹🌹शुभ🙏रात्रि🌹🌹

Pavitra Mar 4, 2021
Radhey radhey radhey radhey radhey radhey

prem Mar 4, 2021
Radhey Radhey bahen ji 🙏🙏🌹🌹 shubh ratri 🙏🙏🙏🙏

Shri Kant Yadav Mar 4, 2021
🌹🌿🌹शुभ रात्रि जी 🌹🌿🌹 🙏 जय श्री कृष्णा 🙏 राधे राधे जी 🙏 💗💗💗💗💗💗💗💗💗💗💗💗

Dhananjay Khanna Mar 5, 2021
Jai Mata Di 🙏🙏🙏🙏🙏 Radhey Radhey ji 🙏🙏🌹🌹🌹🌹🌹🌹 May Matarani bless you all with her choicest blessings 🚩🚩🚩🚩🚩

s.r.pareek rajasthan Mar 5, 2021
Good morning have a great day God bless you ji jay shri krishna ji pyari bahina shree sada khush rahe ji 🙏🏻🙏🏻🍁🍁🌺🌺🌻🌻🍒🍒🥀🕉🕉🌠🌠🌠👌

EXICOM Mar 5, 2021
🙏🏻🌷ऊँ🌷🙏🏻 🙏🏻🌷शाँतिं🌷🙏🏻 🙏🏻🌷दीदी🌷🙏🏻 🙏🏻🌷जी🌷🙏🏻

🌹bk preeti 🌹 Apr 12, 2021

🏵️ *ताँबा - कोरोना के लिए घातक* 🏵️ ताँबा धातु और कोरोना वायरस को लेकर एक हैरान कर देने वाली बात सामने आ रही है। कहा जा रहा है ताँबा धारण करने वाले पर कोरोना का असर नहीं हो रहा. अगर किसी ने शुद्ध ताँबे की अंगूठी, कड़ा या पैंडेंट पहना हुआ है तो कोरोना वायरस उस पर बेअसर है। ब्रिटेन के माइक्रोबायोलॉजी रिसर्चर कीविल का दावा है ताँबा वायरसों का काल है. कीविल काफी समय से ताँबे का विभिन्न वायरसों पर प्रयोग कर रहे हैं. उनका कहना है कोविड 19 ही नहीं कोरोना परिवार के अन्य वायरस भी ताँबे के संपर्क में आते ही तुरंत नष्ट हो जाते हैं। मेडिकल यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ कैरोलिना में माइक्रोबायोलॉजी और इम्यूनोलॉजी के प्रोफेसर माइकल जी श्मिट कहते हैं कीविल का काम हमारे पूर्वजों द्वारा ताँबे के अधिक से अधिक प्रयोग के कारण को सत्यापित करता है। खासकर भारत में तो ताँबे का बहुत ही व्यापक प्रयोग मिलता है। नदियों को साफ़ रखने के लिए उनमें ताँबे के सिक्के डालने से लेकर रसोई में ताँबे के बर्तनों के इस्तेमाल तक ताँबे के चमत्कारिक गुणों का उपयोग हुआ है। कीविल का कहना है ताँबा मनुष्य को प्रकृति का वरदान है। प्राचीनकाल से ही मनुष्य ने इसकी जर्म्स और बैक्टीरिया नष्ट करने की प्रकृति को जान लिया था। उनका मानना है यदि अस्पतालों, सार्वजानिक स्थानों और घरों के हैंडल और रेलिंग्स ताँबे के बनाये जाएं तो संक्रमणजनित रोगों पर बड़ी आसानी से विजय पाई जा सकती है। सनातन में सूर्य को सबसे बड़ा इम्युनिटी बूस्टर माना गया है और ताँबा सूर्य की धातु है. ताँबे को सबसे पवित्र और शुद्ध धातु भी माना गया है। 1918 में भारत में फ्लू महामारी से लगभग दो करोड़ लोग मारे गए थे, कहते हैं तब भी जिन लोगों ने ताँबा पहना हुआ था उन पर इस महामारी का कोई असर नहीं हुआ...! 🌹 *ज्ञानस्य मूलम धर्मम्* 🌹

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VIDIA TOMAR Apr 12, 2021

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Shanti Pathak Apr 12, 2021

*जय माता दी* *शुभरात्रि वंदन* *आप सभी को आज के लिए शुभरात्रि एवं कल के लिए चैत्र नवरात्रि पर्व की हार्दिक शुभकामनाए* मां दुर्गा को शक्ति का स्वरूप माना जाता है। नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा अर्चना के साथ ही व्रत भी किए जाते हैं। नवरात्रि का पहला दिन घटस्थापना से शुरू होता है। प्रथम नवरात्रि में मां शैलपुत्री, द्वितीय में मां ब्रहाचारिणी, तृतीया में मां चन्द्रघण्टा, चतुर्थ में कूष्माण्डा, पंचम में मां स्कन्दमाता, षष्ठ में मां कात्यायनी, सप्तम में मां कालरात्री, अष्टम में मां महागौरी, नवम् में मां सिद्विदात्री का पूजन किया जाता है। ज्योतिष के अनुसार इस नवरात्रि मां दुर्गा का आगमन घोड़े पर हो रहा है। जबकि प्रस्थान नर वाहन (मानव कंधे) पर होगा। चैत्र नवरात्रि शुभ मुहूर्त। चैत्र नवरात्रि की प्रतिपदा तिथि 12 अप्रैल को प्रातः 8 बजे से शुरू होकर 13 अप्रैल को प्रातः 10: 16 पर समाप्त हो रही है। कलश स्थापना मुहूर्त । कलश स्थापना 13 अप्रैल को प्रातः 5:45 बजे से प्रातः 9:59 तक और अभिजीत मुहूर्त पूर्वाह्न 11: 41 से 12:32 तक है। 🚩जय माता दी 🚩 ॥ माँ शैलपुत्री ॥ मां दुर्गा को सर्वप्रथम शैलपुत्री के रूप में पूजा जाता है। हिमालय के वहां पुत्री के रूप में जन्म लेने के कारण उनका नामकरण हुआ शैलपुत्री। इनका वाहन वृषभ है, इसलिए यह देवी वृषारूढ़ा के नाम से भी जानी जाती हैं। मां शैलपुत्री सती के नाम से भी जानी जाती हैं। इनकी कहानी इस प्रकार है - एक बार प्रजापति दक्ष ने यज्ञ करवाने का फैसला किया। इसके लिए उन्होंने सभी देवी-देवताओं को निमंत्रण भेज दिया, लेकिन भगवान शिव को नहीं। देवी सती भलीभांति जानती थी कि उनके पास निमंत्रण आएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वो उस यज्ञ में जाने के लिए बेचैन थीं, लेकिन भगवान शिव ने मना कर दिया। उन्होंने कहा कि यज्ञ में जाने के लिए उनके पास कोई भी निमंत्रण नहीं आया है और इसलिए वहां जाना उचित नहीं है। सती नहीं मानीं और बार बार यज्ञ में जाने का आग्रह करती रहीं। सती के ना मानने की वजह से शिव को उनकी बात माननी पड़ी और अनुमति दे दी। सती जब अपने पिता प्रजापित दक्ष के यहां पहुंची तो देखा कि कोई भी उनसे आदर और प्रेम के साथ बातचीत नहीं कर रहा है। सारे लोग मुँह फेरे हुए हैं और सिर्फ उनकी माता ने स्नेह से उन्हें गले लगाया। उनकी बाकी बहनें उनका उपहास उड़ा रहीं थीं और सति के पति भगवान शिव को भी तिरस्कृत कर रहीं थीं। स्वयं दक्ष ने भी अपमान करने का मौका ना छोड़ा। ऐसा व्यवहार देख सती दुखी हो गईं। अपना और अपने पति का अपमान उनसे सहन न हुआऔर फिर अगले ही पल उन्होंने वो कदम उठाया जिसकी कल्पना स्वयं दक्ष ने भी नहीं की होगी। सती ने उसी यज्ञ की अग्नि में खुद को स्वाहा कर अपने प्राण त्याग दिए। भगवान शिव को जैसे ही इसके बारे में पता चला तो वो दुखी हो गए। दुख और गुस्से की ज्वाला में जलते हुए शिव ने उस यज्ञ को ध्वस्त कर दिया। इसी सती ने फिर हिमालय के यहां जन्म लिया और वहां जन्म लेने की वजह से इनका नाम शैलपुत्री पड़ा। वन्दे वांच्छितलाभाय चंद्रार्धकृतशेखराम्‌ । वृषारूढ़ां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्‌

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ANITA Apr 12, 2021

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Surekha Sonar Apr 12, 2021

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