🌹bk preeti 🌹
🌹bk preeti 🌹 Feb 25, 2021

ओम नमः श्री लक्ष्मीनारायण 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🙏 *भक्त की दरिद्रता* ***************************** जगत−जननी पार्वती ने एक भूखे भक्त को श्मशान में चिता के अंगारों पर रोटी सेंकते देखा तो उनका कलेजा मुँह को आ गया। वह दौड़ी−दौड़ी ओघड़दानी शंकर के पास गयीं और कहने लगीं−”भगवन्! मुझे ऐसा लगता है कि आपका कठोर हृदय अपने अनन्य भक्तों की दुर्दशा देखकर भी नहीं पसीजता। कम−से−कम उनके लिए भोजन की उचित व्यवस्था तो कर ही देनी चाहिए। देखते नहीं वह बेचारा भर्तृहरि अपनी कई दिन की भूख मृतक को पिण्ड के दिये गये आटे की रोटियाँ बनाकर शान्त कर रहा है।” महादेव ने हँसते हुए कहा- “शुभे! ऐसे भक्तों के लिए मेरा द्वार सदैव खुला रहता है। पर वह आना ही कहाँ चाहते हैं यदि कोई वस्तु दी भी जाये तो उसे स्वीकार नहीं करते। कष्ट उठाते रहते हैं फिर ऐसी स्थिति में तुम्हीं बताओ मैं क्या करूं?” माँ भवानी अचरज से बोलीं- “तो क्या आपके भक्तों को उदरपूर्ति के लिए भोजन को आवश्यकता भी अनुभव नहीं होती?” श्री शिव जी ने कहा- “परीक्षा लेने की तो तुम्हारी पुरानी आदत है यदि विश्वास न हो तो तुम स्वयं ही जाकर क्यों न पूछ लो। परन्तु परीक्षा में सावधानी रखने की आवश्यकता है।” भगवान शंकर के आदेश की देर थी कि माँ पार्वती भिखारिन का छद्मवेश बनाकर भर्तृहरि के पास पहुँचीं और बोली- ”बेटा! मैं पिछले कई दिन से भूखी हूँ। क्या मुझे भी कुछ खाने को देगा?” “अवश्य" भर्तृहरि ने केवल चार रोटियाँ सेंकी थीं उनमें से दो बुढ़िया माता के हाथ पर रख दीं। शेष दो रोटियों को खाने के लिए आसन लगा कर खाने का उपक्रम करने लगे। भिखारिन ने दीन भाव से निवेदन किया- "बेटा! इन दो रोटियों से कैसे काम चलेगा? मैं अपने परिवार में अकेली नहीं हूँ एक बुड्ढा पति भी है उसे भी कई दिन से खाने को नहीं मिला है।” भर्तृहरि ने वे दोनों रोटियाँ भी भिखारिन के हाथ पर रख दीं। उन्हें बड़ा सन्तोष था कि इस भोजन से मुझसे भी अधिक भूखे प्राणियों का निर्वाह हो सकेगा। उन्होंने कमण्डल उठाकर पानी पिया। सन्तोष की साँस ली और वहाँ से उठकर जाने लगे। तभी आवाज सुनाई दी- "वत्स! तुम कहाँ जा रहे हो?" भर्तृहरि ने पीछे मुड़ कर देखा। माता पार्वती दर्शन देने के लिए पधारी हैं। माता बोलीं- "मैं तुम्हारी साधना से बहुत प्रसन्न हूँ। तुम्हें जो वरदान माँगना हो माँगो।" प्रणाम करते हुए भर्तृहरि ने कहा- "अभी तो अपनी और अपने पति की क्षुधा शाँत करने हेतु मुझसे रोटियाँ माँगकर ले गई थीं। जो स्वयं दूसरों के सम्मुख हाथ फैला कर अपना पेट भरता है वह क्या दे सकेगा। ऐसे भिखारी से मैं क्या माँगू।" पार्वती जी ने अपना असली स्वरूप दिखाया और कहा- "मैं सर्वशक्ति मान हूँ। तुम्हारी पर दुःख कातरता से बहुत प्रसन्न हूँ जो चाहो सो वर माँगो।" भर्तृहरि ने श्रद्धा पूर्वक जगदम्बा के चरणों में शिर झुकाया और कहा- "यदि आप प्रसन्न हैं तो यह वर दें कि जो कुछ मुझे मिले उसे दीन−दुखियों के लिए लगाता रहे और अभावग्रस्त स्थिति में बिना मन को विचलित किये शान्त पूर्वक रह सकूँ।" पार्वती जी 'एवमस्तु' कहकर भगवान् शिव के पास लौट गई। त्रिकालदर्शी शम्भु यह सब देख रहे थे उन्होंने मुसकराते हुए कहा- "भद्रे, मेरे भक्त इसलिए दरिद्र नहीं रहते कि उन्हें कुछ मिलता नहीं है। परंतु भक्ति के साथ जुड़ी उदारता उनसे "अधिकाधिक दान" कराती रहती हैं और वे खाली हाथ रहकर भी विपुल सम्पत्तिवानों से अधिक सन्तुष्ट बने रहते है।" हर-हर महादेव..!! >>>>>>>>>>>>>>>>>>> 11 >>>>>>>>>>>> प्रभु कृपा की महत्ता आज इस माया से भरे संसार में सत्कर्म करने की इच्छा किसी की नहीं होती है । सब अपनी वासनाओं / इन्द्रियों को पुष्ट करने में लगे रहते हैं । प्रभु कृपा होने पर ही जीव की सत्कर्म करने की इच्छा जागृत होती है । अतः प्रभु कृपा प्राप्त करने के लिए धर्म के मौलिक सिद्धांतो का अनुकरण करते हुए ब्रह्म को धारण करिये l >>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>> II जय श्रीहरिः II शरणागति क्या है ? शरणागति के 4 प्रकार है --- 1. जिह्वा से भगवान के नाम का जप- भगवान् के स्वरुप का चिंतन करते हुए उनके परम पावन नाम का नित्य निरंतर निष्काम भाव से परम श्रद्धापूर्वक जप करना तथा हर समय भगवान् की स्मृति रखना। 2. भगवान् की आज्ञाओं का पालन करना- श्रीमद्भगवद्गीता जैसे भगवान् के श्रीमुख के वचन, भगवत्प्राप्त महापुरुषों के वचन तथा महापुरुषों के आचरण के अनुसार कार्य करना। 3. सर्वस्व प्रभु के समर्पण कर देना-वास्तव मे तो सब कुछ है ही भगवान् का,क्योंकि न तो हम जन्म के समय कुछ साथ लाये और न जाते समय कुछ ले ही जायेंगे। भ्रम से जो अपनापन बना रखा है,उसे उठा देना है। 4 .भगवान् के प्रत्येक विधान मे परम प्रसन्न रहना-मनचाहा करते-करते तो बहुत-से जन्म व्यतीत कर दिए,अब तो ऐसा नही होना चाहिए।अब तो वही हो जो भगवान् चाहते है। भक्त भगवान् के विधानमात्र मे परम प्रसन्न रहता है फिर चाहे वह विधान मन,इंद्रिय और शरीर के प्रतिकूल हो या अनुकूल।I II ॐ नमो नारायणायः ी ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, " जीवन का सत्य आत्मिक कल्याण है ना की भौतिक सुख !" ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, "सत्य वचन में प्रीति करले,सत्य वचन प्रभु वास। सत्य के साथ प्रभु चलते हैं, सत्य चले प्रभु साथ।। " ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, किसी भी गौशाला में जाकर गौ सेवा करे और गोरक्षा की आवाज को समाज में बुलंद करे !गौ माता के जीवन को किसी भी धर्म विशेष के लोगो से इतना खतरा नहीं है जितना काले अंग्रेजो से है जो गौ मांस का निर्यात बढ़ाने के लिए कसाई घरों को अंशदान ( सब्सिडी ) देती है ! इस प्रकार गौवंश समाप्त करने और खेतों से जैविक खाद को गायब कर यूरिआ को बढ़ावा देने का प्रयास सफल हो रहा है ! गौ माता को बचाये और देवताओं का आशीर्वाद एवं कृपा प्राप्त करे ! साथ ही अपने प्रारब्ध ( भाग्य ) में पुण्य संचित करे ! यह एक ऐसा पुण्य है जिससे इहलोक में देवताओ से सुख समृद्धि मिलती है एवं परलोक में स्वर्ग ! 🙏👏🌹🌲🌿🌹 इस घोर कलियुग में वही परिवार सुख पायेगा ! गौमाता को पहली रोटी देकर हरिनाम गुण गायेगा !! दया प्रेम सब जीवों पर करके सेवाभाव अपनायेगा ! गुरूजनों की आज्ञा मान माता पिता के चरण दबायेगा !! गीता रामायण भागवत के द्वारा सोये मन को जगाता हूँ ! भूखों को भोजन पानी देकर पशु पंक्षियों को चुगाता हूँ !! ईष्या,क्रोध ,आलस्य,वैमनष्यता ,बुराई का त्याग करे ! सेवा,प्रेम,करूणा,ममता,दया,क्षमा को अपनाये !! 🙏जय गौमाता जय गोपाल जय गुरूदेव🙏 निवेदन = यदि आप यह सोचते है की देवलोक गौशाला के लेखों को पढ़कर विचारों में " परिपक्वत्ता एवं सुन्दर प्रवृतियों " का आगमन होता है तो हमारे लेखो को दूसरे ग्रुप्स में पोस्ट्स / शेयर करे जिससे दूसरे वंचित रह रहे लोग भी पढ़ सके ! आपको बहुत ही पुण्य प्राप्त होगा ! *संकलित*

ओम नमः श्री लक्ष्मीनारायण 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🙏

*भक्त की दरिद्रता*
*****************************
जगत−जननी पार्वती ने एक भूखे भक्त को श्मशान में चिता के अंगारों पर रोटी सेंकते देखा तो उनका कलेजा मुँह को आ गया।

वह दौड़ी−दौड़ी ओघड़दानी शंकर के पास गयीं और कहने लगीं−”भगवन्! मुझे ऐसा लगता है कि आपका कठोर हृदय अपने अनन्य भक्तों की दुर्दशा देखकर भी नहीं पसीजता। कम−से−कम उनके लिए भोजन की उचित व्यवस्था तो कर ही देनी चाहिए। देखते नहीं वह बेचारा भर्तृहरि अपनी कई दिन की भूख मृतक को पिण्ड के दिये गये आटे की रोटियाँ बनाकर शान्त कर रहा है।”

महादेव ने हँसते हुए कहा- “शुभे! ऐसे भक्तों के लिए मेरा द्वार सदैव खुला रहता है। पर वह आना ही कहाँ चाहते हैं यदि कोई वस्तु दी भी जाये तो उसे स्वीकार नहीं करते। कष्ट उठाते रहते हैं फिर ऐसी स्थिति में तुम्हीं बताओ मैं क्या करूं?”

माँ भवानी अचरज से बोलीं- “तो क्या आपके भक्तों को उदरपूर्ति के लिए भोजन को आवश्यकता भी अनुभव नहीं होती?”

श्री शिव जी ने कहा- “परीक्षा लेने की तो तुम्हारी पुरानी आदत है यदि विश्वास न हो तो तुम स्वयं ही जाकर क्यों न पूछ लो। परन्तु परीक्षा में सावधानी रखने की आवश्यकता है।”

भगवान शंकर के आदेश की देर थी कि माँ पार्वती भिखारिन का छद्मवेश बनाकर भर्तृहरि के पास पहुँचीं और बोली- ”बेटा! मैं पिछले कई दिन से भूखी हूँ। क्या मुझे भी कुछ खाने को देगा?”

“अवश्य" भर्तृहरि ने केवल चार रोटियाँ सेंकी थीं उनमें से दो बुढ़िया माता के हाथ पर रख दीं। शेष दो रोटियों को खाने के लिए आसन लगा कर खाने का उपक्रम करने लगे।

भिखारिन ने दीन भाव से निवेदन किया- "बेटा! इन दो रोटियों से कैसे काम चलेगा? मैं अपने परिवार में अकेली नहीं हूँ एक बुड्ढा पति भी है उसे भी कई दिन से खाने को नहीं मिला है।”

भर्तृहरि ने वे दोनों रोटियाँ भी भिखारिन के हाथ पर रख दीं। उन्हें बड़ा सन्तोष था कि इस भोजन से मुझसे  भी अधिक भूखे प्राणियों का निर्वाह हो सकेगा। उन्होंने कमण्डल उठाकर पानी पिया। सन्तोष की साँस ली और वहाँ से उठकर जाने लगे।

तभी आवाज सुनाई दी- "वत्स! तुम कहाँ जा रहे हो?"
भर्तृहरि ने पीछे मुड़ कर देखा। माता पार्वती दर्शन देने के लिए पधारी हैं।

माता बोलीं- "मैं तुम्हारी साधना से बहुत प्रसन्न हूँ। तुम्हें जो वरदान माँगना हो माँगो।"

प्रणाम करते हुए भर्तृहरि ने कहा- "अभी तो अपनी और अपने पति की क्षुधा शाँत करने हेतु मुझसे रोटियाँ माँगकर ले गई थीं। जो स्वयं दूसरों के सम्मुख हाथ फैला कर अपना पेट भरता है वह क्या दे सकेगा। ऐसे भिखारी से मैं क्या माँगू।"

पार्वती जी ने अपना असली स्वरूप दिखाया और कहा- "मैं सर्वशक्ति मान हूँ। तुम्हारी पर दुःख कातरता से बहुत प्रसन्न हूँ जो चाहो सो वर माँगो।"

भर्तृहरि ने श्रद्धा पूर्वक जगदम्बा के चरणों में शिर झुकाया और कहा- "यदि आप प्रसन्न हैं तो यह वर दें कि जो कुछ मुझे मिले उसे दीन−दुखियों के लिए लगाता रहे और अभावग्रस्त स्थिति में बिना मन को विचलित किये शान्त पूर्वक रह सकूँ।"

पार्वती जी 'एवमस्तु' कहकर भगवान् शिव के पास लौट गई।
त्रिकालदर्शी शम्भु यह सब देख रहे थे उन्होंने मुसकराते हुए कहा- "भद्रे, मेरे भक्त इसलिए दरिद्र नहीं रहते कि उन्हें कुछ मिलता नहीं है। परंतु भक्ति के साथ जुड़ी उदारता उनसे "अधिकाधिक दान" कराती रहती हैं और वे खाली हाथ रहकर भी विपुल सम्पत्तिवानों से अधिक सन्तुष्ट बने रहते है।"

       हर-हर महादेव..!!

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  प्रभु कृपा की महत्ता 
आज इस माया से भरे संसार में सत्कर्म करने की इच्छा किसी की नहीं होती है । सब अपनी वासनाओं / इन्द्रियों को पुष्ट करने में लगे रहते हैं । प्रभु कृपा होने पर ही जीव की सत्कर्म करने की इच्छा जागृत होती है । अतः प्रभु कृपा प्राप्त करने के लिए धर्म के मौलिक सिद्धांतो का अनुकरण करते हुए ब्रह्म को धारण करिये l
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II जय श्रीहरिः II
शरणागति क्या है ?
शरणागति के 4 प्रकार है ---
1. जिह्वा से भगवान के नाम का जप- भगवान् के स्वरुप का चिंतन करते हुए उनके परम पावन नाम का नित्य निरंतर निष्काम भाव से परम श्रद्धापूर्वक जप करना तथा हर समय भगवान् की स्मृति रखना।
2. भगवान् की आज्ञाओं का पालन करना-
श्रीमद्भगवद्गीता जैसे भगवान् के श्रीमुख के वचन, भगवत्प्राप्त महापुरुषों के वचन तथा महापुरुषों के आचरण के अनुसार कार्य करना।
3. सर्वस्व प्रभु के समर्पण कर देना-वास्तव मे तो सब कुछ है ही भगवान् का,क्योंकि न तो हम जन्म के समय कुछ साथ लाये और न जाते समय कुछ ले ही जायेंगे।
भ्रम से जो अपनापन बना रखा है,उसे उठा देना है।
4 .भगवान् के प्रत्येक विधान मे परम प्रसन्न रहना-मनचाहा करते-करते तो बहुत-से जन्म व्यतीत कर दिए,अब तो ऐसा नही होना चाहिए।अब तो वही हो जो भगवान् चाहते है।
भक्त भगवान् के विधानमात्र मे परम प्रसन्न रहता है फिर चाहे वह विधान मन,इंद्रिय और शरीर के प्रतिकूल हो या अनुकूल।I
II ॐ नमो नारायणायः ी
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" जीवन का सत्य आत्मिक कल्याण है ना की भौतिक सुख !"
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"सत्य वचन में प्रीति करले,सत्य वचन प्रभु वास।
सत्य के साथ प्रभु चलते हैं, सत्य चले प्रभु साथ।। "
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किसी भी गौशाला में जाकर गौ सेवा करे और गोरक्षा की आवाज को समाज में बुलंद करे !गौ माता के जीवन को किसी भी धर्म विशेष के लोगो से इतना खतरा नहीं है जितना काले अंग्रेजो से है जो गौ मांस का निर्यात बढ़ाने के लिए कसाई घरों को अंशदान ( सब्सिडी ) देती है ! इस प्रकार गौवंश समाप्त करने और खेतों से जैविक खाद को गायब कर यूरिआ को बढ़ावा देने का प्रयास सफल हो रहा है ! गौ माता को बचाये और देवताओं का आशीर्वाद एवं कृपा प्राप्त करे ! साथ ही अपने प्रारब्ध ( भाग्य ) में पुण्य संचित करे ! यह एक ऐसा पुण्य है जिससे इहलोक में देवताओ से सुख समृद्धि मिलती है एवं परलोक में स्वर्ग ! 🙏👏🌹🌲🌿🌹
इस घोर कलियुग में वही परिवार सुख पायेगा !
गौमाता को पहली रोटी देकर हरिनाम गुण गायेगा !!
दया प्रेम सब जीवों पर करके सेवाभाव अपनायेगा !
गुरूजनों की आज्ञा मान माता पिता के चरण दबायेगा !!
गीता रामायण भागवत के द्वारा सोये मन को जगाता हूँ !
भूखों को भोजन पानी देकर पशु पंक्षियों को चुगाता हूँ !!
ईष्या,क्रोध ,आलस्य,वैमनष्यता ,बुराई का त्याग करे !
सेवा,प्रेम,करूणा,ममता,दया,क्षमा को अपनाये !!
🙏जय गौमाता जय गोपाल जय गुरूदेव🙏
निवेदन = यदि आप यह सोचते है की देवलोक गौशाला के लेखों को पढ़कर विचारों में " परिपक्वत्ता एवं सुन्दर प्रवृतियों " का आगमन होता है तो हमारे लेखो को दूसरे ग्रुप्स में पोस्ट्स / शेयर करे जिससे दूसरे वंचित रह रहे लोग भी पढ़ सके ! आपको बहुत ही पुण्य प्राप्त होगा !
            *संकलित*

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कामेंट्स

Ravi Kumar Taneja Feb 25, 2021
*🌹🌹🌹ओम् नमो भगवते वासुदेवाय नमो नमः🌹🌹🌹 शुभ प्रभात वंदन🌹🌹🌹

sanjay choudhary Feb 25, 2021
🙏🙏 ॐ भगवते वासुदेवाय नमः 🙏🙏 ।।।।शुभ प्र्भात् जी।।।। *🙏🌸प्रातः!!🌼!!अभिनंदन🌸🙏* *✍️...दुनियाँ वो किताब है,* *जो कभी नहीं पढी़ जा सकती,* *लेकिन जमाना वो अध्यापक है* *जो सब कुछ सिखा देता है !!...✍️* *🌼आज का दिन शुभ हो🌼*                         *🙏सुप्रभात🌼!!राधेराधे!!🙏* 🍃💫🍃💫🍃💫🍃💫🍃

🌹🌺💮🌸🌸💮🌹 Feb 25, 2021
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः सुप्रभात सादर वंदन दीदी जी 🙏🌹

Sushil Kumar Sharma 🙏🙏🌹🌹 Feb 25, 2021
Good Morning My Sweet Sister ji 🙏🙏 Om Namo Bhagwate Vasudevay Namah 🙏🌹🌹💐🌷🌹Om Namo Lakshmi Narayan Namah 🙏🌹🌹🌹 Ki Kripa Dristi Aap Our Aapke Priwar Per Hamesha Sada Bhni Rahe ji 🙏 Aapka Har Pal Har Din Shub Mangalmay Ho ji 🙏🙏🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹💐🌷🥀🥀🥀🥀🥀💐🌷💐🌷💐🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹.

N. K. M. Feb 25, 2021
ji oom shree Laxmi patye namah jai vishnu priye maa laxmi sadaa viraaje hamaare aap je ghar me laxmi har ghar vaas karti behtrin sevaa karti hea us se koun badaa samjhe to su prabhat vandan preeti ji jai jinender ji 🌹🌹🙏🌹🌹🙏

🌹bk preeti 🌹 Feb 25, 2021
@shiburajak1 🙏🌹🙏 *हथेली तब भी छोटी थी*, *हथेली अब भी छोटी है*, *पहले खुशियां बटोरने में चीजें छूट जातीं थीं ,* *अब चीजें बटोरने में खुशियां छूट जातीं हैं -!!* 🙏 *शुभ प्रभात, 🙏

Naresh Rawat Feb 25, 2021
ॐ हरि नारायण विष्णु भगवतेय वासुदेवाय नमः 🙏🌷 शुभ गुरुवार सुप्रभात वंदन सिस्टर जी🙏जय श्रीकृष्ण जय राधे राधे जी🙏🌷 श्री हरि नारायण जी आपकी हर मनोकामना पूर्ण करें आप और आपके परिवार को हमेशा खुश और स्वास्थ रखें सिस्टर जी🙏🌷ऊँ हरि ऊँ

VAIBHAV BAIRAGI Feb 25, 2021
om namo bhagbate bashudevay namah Shubh dopher vandhan jee pranam 🌹 👏 🙏

madan pal 🌷🙏🏼 Feb 25, 2021
ओम् नमो भगवते वासुदेवाय नम जी शूभ दोपहर वनदंन ज़ी लक्ष्मी नारायण जी की कृपा आप व आपके परिवार पर बनीं रहे जी 💐🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼

Nitin Sharma Feb 25, 2021
💐🙏सुप्रभातम् 🙏💐 . . . . . . . . . . 💐🙏ॐ🙏💐 जय श्रीराधे-कृष्णा 💐🙏ॐ🙏💐 जय श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेवा। हर हर महादेव जय श्री राम जय श्री हनुमान जय माता दी।

Ravi Kumar Taneja Feb 25, 2021
प्रभु कृपा से आप हमेशा खुश रहे...🙏स्वस्थ रहे...🙏 हरि ॐ🔯🌸🔯🌸🔯 🌹🌹🌹ओम् नमो भगवते वासुदेवाय नमो नमः🌹🌹🌹 शुभ संध्या वंदन🌹🌹🌹

Meenakshi Patel Feb 25, 2021
ॐनमो भगवते वासुदेवाय ॐनमो नारायणा शुभ रात्री जी

Mamta Chauhan Apr 17, 2021

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ramkumarverma Apr 17, 2021

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Neeta Trivedi Apr 17, 2021

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dhruv wadhwani Apr 17, 2021

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Braj Kishor Dwivedi Apr 17, 2021

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