🚩संकटमोचन मंदिर वाराणासी🚩

🚩संकटमोचन मंदिर वाराणासी🚩

संकटमोचन मंदिर वाराणसी में हनुमान जी का मंदिर है। माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण गोस्वामी तुलसीदास जी ने कराया था। लगभग 1608 ई. 1611 ई. के बीच संकटमोचन मंदिर को बनाया गया है। मान्यता है कि तुलसीदास जी ने रामचरितमानस का कुछ अंश संकटमोचन मंदिर के पास विशाल पीपल के पेड़े के नीचे बैठकर लिखा था। चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को यहां हनुमान जयंती धूम-धाम से मनायी जाती है। इस दौरान मंदिर में बड़े स्तर पर संगीत कार्यक्रम आयोजित होता है। जिसमें देश के ख्यातिलब्ध गायक अपना गायन और संगीत प्रस्तुत करते हैं। हर मंगलवार और शनिवार को मंदिर में अन्य दिनों की अपेक्षा श्रद्धालुओं की खूब भीड़ जुटती है। मंदिर परिसर में काफ़ी संख्या में बन्दर भी रहते हैं।

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कामेंट्स

Sunil Ag Aug 30, 2017
jai jai siya ram jai jai hanumanaji

Manoj Aug 30, 2017
om sri hanumantae namah! Jai sri RAM!

Sajjan Singhal May 26, 2019

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Sajjan Singhal May 25, 2019

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Sajjan Singhal May 24, 2019

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Shri Khatu Shyam Ji May 25, 2019

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Swamini May 25, 2019

🙏⛳आज प्रातःकालीन (सुबह) ⛳Live Aarti में *माँ* वैष्णो दरबार से ⛳ *श्री विजय जी* द्वारा प्रस्तुत भेंट मेरी लगी मैया संग प्रीत ये दुनिया क्या जाने मेरी लगी मैया संग प्रीत ये दुनिया क्या जाने क्या जाने कोई क्या जाने क्या जाने कोई क्या जाने मेरी लगी मैया संग प्रीत ये दुनिया क्या जाने मेरी लगी मैया संग प्रीत ये दुनिया क्या जाने क्या जाने कोई क्या जाने क्या जाने कोई क्या जाने मेरी लगी मैया संग प्रीत ये दुनिया क्या जाने... छवि देखी मैंने माँ की जब से-2 हुई बावरी मैं तो तब से-2 बाँधी प्रेम की डोर मैया से नाता तोड़ा मैंने जग से ये बड़ी निराली प्रीत ये दुनिया क्या जाने ये बड़ी निराली प्रीत ये दुनिया क्या जाने मेरी लगी मैया संग प्रीत ये दुनिया क्या जाने मेरी लगी मैया संग प्रीत ये दुनिया क्या जाने क्या जाने कोई क्या जाने क्या जाने कोई क्या जाने मेरी लगी मैया संग प्रीत ये दुनिया क्या जाने... मईया की सुन्दर सूरतिया-2 मन में बस गयी माँ की मुरतिया-2 जब से ओढ़ी लाल चुनरिया लोग कहे मैं भई बावरिया मैंने छोड़ी जग की रीत ये दुनिया क्या जाने मेरी लगी मैया संग प्रीत ये दुनिया क्या जाने मेरी लगी मैया संग प्रीत ये दुनिया क्या जाने क्या जाने कोई क्या जाने क्या जाने कोई क्या जाने मेरी लगी मैया संग प्रीत ये दुनिया क्या जाने... हर दम अब तो रहूँ मस्तानी रूप राशि अंग अंग समानी हे रत-हे रत रहूँ दीवानी मैं तो गाऊँ ख़ुशी के गीत ये दुनिया क्या जाने मैंने छोड़ी जग की रीत ये दुनिया क्या जाने मेरी लगी मैया संग प्रीत ये दुनिया क्या जाने मेरी लगी मैया संग प्रीत ये दुनिया क्या जाने क्या जाने कोई क्या जाने क्या जाने कोई क्या जाने मेरी लगी मैया संग प्रीत ये दुनिया क्या जाने... लोक लाज कुछ काम ना आई माँ ने ऐसी लीला रचाई बार बार माँ के दर पे आई अब हार हो चाहे जीत ये दुनिया क्या जाने मेरी लगी मैया संग प्रीत ये दुनिया क्या जाने मेरी लगी मैया संग प्रीत ये दुनिया क्या जाने क्या जाने कोई क्या जाने क्या जाने कोई क्या जाने मेरी लगी मैया संग प्रीत ये दुनिया क्या जाने... निसदिन माँ की ज्योत जगाऊँ भक्ति करूँ माँ के गुण गाउँ मन चाहा फल माँ से पाऊं माँ की भक्ति मेरेया मनमीत ये दुनिया क्या जाने मैंने छोड़ी जग की रीत ये दुनिया क्या जाने मेरी लगी मैया संग प्रीत ये दुनिया क्या जाने मेरी लगी मैया संग प्रीत ये दुनिया क्या जाने क्या जाने कोई क्या जाने क्या जाने कोई क्या जाने मेरी लगी मैया संग प्रीत ये दुनिया क्या जाने... मेरी लगी मैया संग प्रीत ये दुनिया क्या जाने मेरी लगी मैया संग प्रीत ये दुनिया क्या जाने क्या जाने कोई क्या जाने क्या जाने कोई क्या जाने मेरी लगी मैया संग प्रीत ये दुनिया क्या जाने ये दुनिया क्या जाने ये दुनिया क्या जाने *जय जय अम्बे*⛳ 🙏आज प्रातःकालीन (सुबह)⛳Live Aarti में *माँ* वैष्णो दरबार से ⛳ *श्री मनिंद्र जी* द्वारा प्रस्तुत भेंट।। तेरी जय हो माता मोतीयो के हार वालिऐ तेरी जय हो माता मोतीयो के हार वालिऐ तेरे द्वारे पे गई है करोङो की सुनी तेरी जय हो तेरी जय हो माता मोतीयो के हार वालिऐ तेरी जय हो माता मोतीयो के हार वालिऐ... तू भक्ता की चिन्ता मिटाने वाली है तू कुटिया को महल बनाने वाली है तेरी करूणा की मुथाज सारी दुनिया मेरी झोली भर दे भरे भण्डार वालिए तेरी जय हो माता मोतीया के हार वालिऐ तेरे द्वार पे गई है करोङो की सुनी सुन मेरी भी सच्चे दरबार वालीऐ तेरी जय हो माता मोतीया के हार वालिऐ तेरी जय हो माता मोतीयो के हार वालिऐ... तू दया का जिन पर हाथ रखती गूंगे पत्थरो को घङी मे जुबान लगती पूरी कर देना मेरी हर मनोकांमना माँ ममता के भीगे हुऐ प्यारवालीऐ तेरी जय हो माता मोतीयो के हार वालिऐ तेरे द्वार पे गई है करोङो की सुनी सुन मेरी भी सच्चे दरबार वालीऐ तेरी जय हो माता मोतीयो के हार वालिऐ तेरी जय हो माता मोतीयो के हार वालिऐ... रखा जिनो ने भरोसा महामाया तुम पर हुई रहमतो की सुखदायी छाया उन पर लाज रख लेना मेरी भी तू ममता की मैया लीला है तेरी अपरम्पार वालीऐ तेरी जय हो मोतीयो के हारवालीऐ तेरे द्वार पे गई है करोङो की सुनी सुन मेरी भी सच्चे दरबार वालीऐ तेरी जय हो माता मोतीया के हार वालिऐ तेरी जय हो माता मोतीयो के हार वालिऐ... तेरी जय हो माता मोतीयो के हार वालिऐ तेरी जय हो माता मोतीयो के हार वालिऐ तेरे द्वारे पे गई है करोङो की सुनी तेरी जय हो तेरी जय हो माता मोतीयो के हार वालिऐ *जय जय माँ*⛳🚩🐾 आज प्रातःकालीन (सुबह) Live Aarti में ⛳ *माँ वैष्णो दरबार* मे *श्री जयपाल जी* अपनी हाजरी लगाते हुऐ माँ दी मुरतीऐ हँस के मेरे नाल बोल माँ दी मुरतीऐ हँस के मेरे नाल बोल पैरी पवा के छाले मै ताँ आ गया तेरे कोल माँ दी मुरतीऐ हँस के मेरे नाल बोल माँ दी मुरतीऐ हँस के मेरे नाल बोल... दर्द तो खाली तेरे जेहा ना प्यार किथे ना लभे जिस पासे वी नजर घुमावां जान दे वैरी सबे मै निर्बल कमजोर बङा माँ हो गया डावांडोल माँ दी मुरतीऐ हँस के मेरे नाल बोल माँ दी मुरतीऐ हँस के मेरे नाल बोल... मै सुनया सब खैरा ले गये तेरे पावन दर तो हे दुनिया दीऐ दातीऐ मैनु ऐंवे ना मोङी दर तो कोई बहाना कर के वेखी करी ना टाल मटोल माँ दी मुरतीऐ हँस के मेरे नाल बोल माँ दी मुरतीऐ हँस के मेरे नाल बोल... दुखहरनी दुख मुसीबत तेरे ही हरेया हरदे निगाह सवंली होवे जे तेरी तां पत्थर वी तरदे वडंदे खजाना मेहर दा हुण वी द्वार दया दा खोल माँ दी मुरतीऐ हँस के मेरे नाल बोल माँ दी मुरतीऐ हँस के मेरे नाल बोल... तू मेरी मै तेरा भवानी फर्क भला है किथे असीं वी ओस थाँ क्यो ना रहीऐ तू माँ वसदी जिथे जी करदा निर्दोश बै के दुख सुख लईऐ खोल माँ दी मुरतीऐ हँस के मेरे नाल बोल माँ दी मुरतीऐ हँस के मेरे नाल बोल पैरी पवा के छाले मै ताँ आ गया तेरे कोल माँ दी मुरतीऐ हँस के मेरे नाल बोल माँ दी मुरतीऐ हँस के मेरे नाल बोल *जय जय माँ*

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Ashwini Tiwari May 25, 2019

🚩🚩 राधे राधे 🚩🚩 मंदिर में क्यों बजाई जाती है घंटी, क्या है इसका महत्व घंटी बजाने के पीछे का वैज्ञानिक कारण मंदिर घर का हो या किसी धार्मिक स्थल का. वहां घंटी तो होती ही है. इसके पीछे धार्मिक कारण तो हैं ही साथ में इसका हमारे जीवन पर साइंटिफिक असर भी होता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि जब घंटी बजाई जाती है तो वातावरण में कंपन पैदा होता है, जो वायुमंडल के कारण काफी दूर तक जाता है. इस कंपन का फायदा यह है कि इसके क्षेत्र में आने वाले सभी जीवाणु, विषाणु और सूक्ष्म जीव आदि नष्ट हो जाते हैं, जिससे आसपास का वातावरण शुद्ध हो जाता है. यही कारण है कि जिन जगहों पर घंटी बजने की आवाज नियमित आती रहती है, वहां का वातावरण हमेशा शुद्ध और पवित्र बना रहता है. इसी वजह से लोग अपने दरवाजों और खि‍ड़कियों पर भी विंड चाइम्स लगवाते हैं, ताकि उसकी ध्वनि से नकारात्मक शक्तियां हटती रहें. नकारात्मकता हटने से समृद्धि के द्वार खुलते हैं. ये फायदे भी हैं - घंटी बजाने से देवताओं के समक्ष आपकी हाजिरी लग जाती है. मान्यता अनुसार घंटी बजाने से मंदिर में स्थापित देवी-देवताओं की मूर्तियों में चेतना जागृत होती है जिसके बाद उनकी पूजा और आराधना अधिक फलदायक और प्रभावशाली बन जाती है. - घंटी की मनमोहक एवं कर्णप्रिय ध्वनि मन-मस्तिष्क को अध्यात्म भाव की ओर ले जाने का सामर्थ्य रखती है. मन घंटी की लय से जुड़कर शांति का अनुभव करता है. मंदिर में घंटी बजाने से मानव के कई जन्मों के पाप तक नष्ट हो जाते हैं. सुबह और शाम जब भी मंदिर में पूजा या आरती होती है तो एक लय और विशेष धुन के साथ घंटियां बजाई जाती हैं जिससे वहां मौजूद लोगों को शांति और दैवीय उपस्थिति की अनुभूति होती है.

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