श्री कृष्णः शरणम् ममः

श्री कृष्णः शरणम् ममः

शुभप्रभात दोस्तो

श्री कृष्णः शरणम् ममः

एक बार एक संत अपने चेलों के साथ किसी कीचड़ भरे रास्ते चले पर जा रहे थे, उसी रास्ते पर एक अमीरजादा भी अपनी प्रेमिका के साथ जा रहा था ।

जब संत उस के पास से गुजरे तो कीचड़ के कुछ छींटे अमीरजादे की प्रेमिका पर पड़ गए। *

अमीरजादे ने गुस्से में दो तीन चांटे उन संत को जड़ दिए ।

संत कुछ नही बोले और चुपचाप आगे चलते गये, इस पर संत के एक चेले ने नाराज होकर पूछा, आपने उसे कुछ कहा क्यों नहीं? संत फिर भी चुप रहे ।

कुछ ही समय बाद ही पीछे चल रहा अमीरजादा अचानक फिसल कर कीचड़ में गिर गया और बुरी तरह से कीचड़ में लिबड़ गया, साथ ही उसकी एक बाजु भी टूट गई !!

तब संत ने अपने चेले से कहा देखो, जैसे वो 'अमीरजादा' अपनी 'प्रेमिका' की तौहीन नहीं देख सका,

ठीक उसी तरह ऊपर बैठा वो मेरा *"मुरली वाला" भी अपने *'प्रेमी' (यानि भक्त / शरणागत) की तौहीन नहीं देख सकता ॥
🙏श्री वृन्दावन बिहारी लाल जी की जय🙏
🙏Shree Krishnah sharanam mamah🙏💐

+189 प्रतिक्रिया 16 कॉमेंट्स • 143 शेयर

कामेंट्स

Pashupati Nath Singh Nov 9, 2017
संत की यह सोच नहीं होती है । अच्छी और सत्यनिस्ठ कथा ही वताना चाहिये ।

Ravi pandey Nov 9, 2017
jai shree Krishna radhe Radhe radhe Radhe radhe Radhe radhe Radhe radhe Radhe radhe Radhe radhe Radhe radhe Radhe radhe Radhe radhe Radhe radhe Radhe radhe Radhe radhe Radhe radhe Radhe radhe Radhe radhe Radhe

Kanchan Bhagat Nov 9, 2017
श्री कृष्णः शरणम् मम्

+515 प्रतिक्रिया 89 कॉमेंट्स • 283 शेयर
Swami Lokeshanand May 27, 2019

बड़ी गंभीर बात है, आज असली और नकली का खेल समझना है। विभक्त माने जो टूट गया, भक्त माने जो जुड़ गया। हर कोई कहीं ना कहीं जुड़ा ही है, तो भक्त तो सब हैं, पर सबको एक जैसा फल नहीं मिलता, क्योंकि असली बात है कि कौन कहाँ जुड़ा है? भगवान से जुड़ा हुआ असली भक्त है, संसार पर दृष्टि वाला नकली भक्त है, उसे तो भक्त कहा भी नहीं जाता, आसक्त कहा जाता है। रामकथा में असली और नकली भक्ति के अंतर को सीताजी के माध्यम से दिखाया गया है। सीताजी जब असली थीं, तब रामजी और अयोध्या में से चुनना था, तो रामजी को चुना, सुख साधन का त्याग किया, दुर्गम वन का मार्ग पकड़ा। आज नकली बैठी हैं, तो रामजी से दृष्टि हट गई, स्वर्णमृग पर पड़ गई। गहनता से विचार करें, असली भक्ति में दुख नहीं है, दुख तो नकली भक्ति का फल है। देखें, सीताजी जब तक जनकजी के यहाँ रहीं, उन्हें कोई दुख नहीं था। रामजी से विवाह कर अवध आईं तब तो दुख होता ही क्यों? वनवास की सुबह, अयोध्या छोड़ कर, तपस्वी वेषधारी रामजी के पीछे चलते हुए भी, उनके मुख मंडल पर वही स्वाभाविक मुस्कान तैर रही थी, जो पिछली रात सोने जाते समय थी। यहाँ तक की लम्बे वनवासकाल में, सर्दी गर्मी वर्षा में, नंगे पैर पथरीली कंकरीली पगडंडियों पर चलते हुए भी उन्हें दुखानुभूति नहीं हुई। पर जिस दिन दृष्टि राम जी से हटी और संसार रूपी मारीच पर पड़ी, उनकी दुख की यात्रा प्रारंभ हो गई। वास्तव में भगवान से दृष्टि लग जाना ही सुख है, और संसार से दृष्टि लग जाना ही दुख है। इन्द्रियों का बहिर्मुखी, अधोमुखी, संसारोन्मुखी प्रवाह ही दुख नाम से, और अन्तर्मुखी, ऊर्ध्वमुखी, परमात्मोन्मुखी प्रवाह ही सुख नाम से जाना जाता है। तो येन् केन् प्रकारेन् भगवान में वृति लगाए रखने वाले को दुख छू नहीं पाता। यह विडियो भी देखें- तुम पावक महुँ करहु निवासा https://youtu.be/agl8M3skRo8 और https://youtu.be/BYTcbh0B0nU

+17 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 76 शेयर

+17 प्रतिक्रिया 3 कॉमेंट्स • 15 शेयर

+386 प्रतिक्रिया 40 कॉमेंट्स • 479 शेयर
Anju Mishra May 26, 2019

🙏🌹🚩🙏जय श्री कृष्णा 🙏🌹🚩🙏 कृष्ण के जीवन से सीख कृष्ण को पूरा बृज प्यार और सम्मान करता था क्योकि वो दूसरों की मदद करते थे और दूसरो के दुखो को भी दूर करते थे. प्रत्येक व्यक्ति अपनी यथा शक्ति दूसरों की मदद जरूर करनी चाहिए. कृष्ण पृथ्वी से दुष्टों का, बुराईयों का नाश किया और मानव को सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी. उन्होंने मानव समाज को सीख दे अच्छे कर्म का फल हमेशा अच्छा ही होता हैं और बुरे कर्म का फल हमेशा बुरा ही होता हैं. कृष्ण ने दुष्टों को भी अपनी गलती सुधारने का मौका दिया क्योकि वो किसी मनुष्य को नही उसके अंदर के बुराई को मारना चाहते थे. कृष्ण ने द्रोपदी के सम्मान की रक्षा के लिए एक बार बुलाने पर स्वयं आ गये क्योकि जब वीरों से भरा समाज किसी स्त्री की रक्षा करने में असमर्थ होता हैं तो भगवान् को स्वयं ही आना पड़ता हैं. भगवान् कृष्ण ने जैसे ही जाना अपने मित्र सुदामा की गरीबी को तो वो तीनों लोक अपने मित्र के नाम कर दिया. मित्र को लेने नंगे पाँव घर के बाहर आये और अपनी गद्दी पर बिठाकर उनका सम्मान किया. मानव समाज के लिए उनकी मित्रता एक मिसाल हैं.

+181 प्रतिक्रिया 24 कॉमेंट्स • 28 शेयर

+43 प्रतिक्रिया 8 कॉमेंट्स • 133 शेयर

+42 प्रतिक्रिया 4 कॉमेंट्स • 97 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB