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white beauty Apr 19, 2021

श्री दुर्गा माता शक्ति पीठ काशी

श्री दुर्गा माता शक्ति पीठ काशी

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Anita Sharma May 13, 2021

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Anita Sharma May 13, 2021

एक बार नारद जी के मन में एक विचित्र सा कौतूहल पैदा हुआ। वैसे नारदजी के साथ विचित्र घटनाएं होती ही रहती हैं। उन्हें यह जानने की धुन सवार हुई कि ब्रह्मांड में सबसे बड़ा और महान कौन है? नारद जी ने अपनी जिज्ञासा भगवान विष्णु के सामने ही रख दी। भगवान विष्णु मुस्कुराने लगे। फिर बोले-नारद जी सब पृथ्वी पर टिका है। इसलिए पृथ्वी को बड़ा कह सकते हैं। परंतु नारद जी यहां भी एक शंका है। स्वयं नारायण अपने उत्तर के साथ ही परंतु लगा रहे हैं। नारद जी का कौतूहल शांत होने की बजाय और बढ़ गया। नारद जी ने पूछा स्वयं आप सशंकित हैं फिर तो विषय गंभीर है। कैसी शंका है प्रभु? विष्णु जी बोले-समुद्र ने पृथ्वी को घेर रखा है। इसलिए समुद्र उससे भी बड़ा है। अब नारद जी बोले-प्रभु आप कहते हैं तो मान लेता हूं कि समुद्र सबसे बड़ा है। यह सुनकर विष्णु जी ने एक बात और छेड़ दी-परंतु नारद जी समुद्र को अगस्त्य मुनि ने पी लिया था। इसलिए समुद्र कैसे बड़ा हो सकता है? बड़े तो फिर अगस्त्य मुनि ही हुए। नारद जी के माथे पर बल पड़ गया। फिर भी उन्होंने कहा-प्रभु आप कहते हैं तो अब अगस्त्य मुनि को ही बड़ा मान लेता हूं। नारद जी अभी इस बात को स्वीकारने के लिए तैयार हुए ही थे कि विष्णु ने नई बात कहकर उनके मन को चंचल कर दिया। श्री विष्णु जी बोले-नारद जी पर ये भी तो सोचिए वह रहते कहां हैं। आकाशमंडल में एक सूई की नोक बराबर स्थान पर जुगनू की तरह दिखते हैं। फिर वह कैसे बड़े, बड़ा तो आकाश को होना चाहिए। नारद जी बोले-हां प्रभु आप यह बात तो सही कर रहे हैं। आकाश के सामने अगस्त्य ऋषि का तो अस्तित्व ही विलीन हो जाता है। आकाश ने ही तो सारी सृष्टि को घेर आच्छादित कर रखा है। आकाश ही श्रेष्ठ और सबसे बड़ा है। भगवान विष्णु जी ने नारद जी को थोड़ा और भ्रमित करने की सोची। श्रीहरि बोल पड़े, पर नारदजी आप एक बात भूल रहे हैं। वामन अवतार ने इस आकाश को एक ही पग में नाप लिया था मैंने। फिर आकाश से विराट तो वामन हुए। नारदजी ने श्रीहरि के चरण पकड़ लिए और बोले भगवन आप ही तो वामन अवतार में थे। फिर अपने सोलह कलाएं भी धारण कीं और वामन से बड़े स्वरूप में भी आए। इसलिए यह तो निश्चय हो गया कि सबसे बड़े आप ही हैं। भगवान विष्णु ने कहा-नारद, मैं विराट स्वरूप धारण करने के उपरांत भी अपने भक्तों के छोटे हृदय में विराजमान हूं। वहीं निवास करता हूं। जहां मुझे स्थान मिल जाए वह स्थान सबसे बड़ा हुआ न। इसलिए सर्वोपरि और सबसे महान तो मेरे वे भक्त हैं जो शुद्ध हृदय से मेरी उपासना करके मुझे अपने हृदय में धारण कर लेते हैं। उनसे विस्तृत और कौन हो सकता है। तुम भी मेरे सच्चे भक्त हो इसलिए वास्तव में तुम सबसे बड़े और महान हो। श्रीहरि की बात सुनकर नारद जी के नेत्र भर आए। उन्हें संसार को नचाने वाले भगवान के हृदय की विशालता को देखकर आनंद भी हुआ और अपनी बुद्धि के लिए खेद भी। नारद जी ने कहा-प्रभु संसार को धारण करने वाले आप स्वयं खुद को भक्तों से छोटा मानते हैं। फिर भक्तगण क्यों यह छोटे-बड़े का भेद करते हैं। मुझे अपनी अज्ञानता पर दुख है। मैं आगे से कभी भी छोटे-बड़े के फेर में नहीं पड़ूंगा। इसीलिए तो कहते हैं भक्त के वश में हैं भगवान। भक्त अपनी निष्काम भक्ति से भगवान को वश में कर लेता है। तेरा तुझको सौंपते क्या लागे है मोरा इसी भाव में रहिए तो त्रिलोक के स्वामी आपके पास आकर बस जाने को लालायित रहेंगे।

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M.S.Chauhan May 12, 2021

श्रील प्रभुपाद ( इस्कॉन फाउंडर आचार्य ) 🚩🌞 एक ऐसा भारतीय सन्यासी जो पाकिस्तान में 12 मंदिर बनवा दिए । एक ऐसा सन्यासी जो मात्र 12 वर्ष में 15 बार पूरी पृथ्वी का भ्रमण किया । एक ऐसा सन्यासी जो 70 वर्ष की उम्र में अमेरिका में जाकर दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक संस्था इस्कान की स्थापना की । एक ऐसा सन्यासी जिसके नाम दुनिया में सबसे ज्यादा भागवत गीता बांटने का रिकॉर्ड है । एक ऐसा सन्यासी जिसने दुनिया में सबसे ज्यादा विदेशियों को सनातन धर्म से जोड़ने का रिकॉर्ड बनाया । एक ऐसा सन्यासी जो मृत्यु के अंतिम क्षणों में भगवत गीता का श्लोक का इंग्लिश में ट्रांसलेट करते करते प्राण त्याग दिया । एक ऐसा सन्यासी जिसने दुनिया में सबसे पहले रथयात्रा निकालने की परंपरा शुरू की । एक ऐसा भारतीय सन्यासी जो सभी विदेशियों को शुद्ध शाकाहारी बना दिए और हरे कृष्ण महामंत्र ...जाप करने में लगा दिए। एक ऐसा सन्यासी जो चार नियम पालन करने को कह गए वो चार नियम पालन करके कोई भी श्रीला प्रभुपाद का शिष्य अभी भी बन सकता है ये प्रभुपाद खुद बोल कर गए हैं..... ये चार नियम ये हैं 👇👇👇 1* 16 माला नित्य हरि नाम जाप। (हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे) 👈 ये हरिनाम जपना नित्य 16 माला। 2* शुद्ध शाकाहारी रहना। लहसुन,प्याज ,मांस, मछली, अंडा, जीव हत्या बंद करो.. 3* पर पुरुष/ पर स्त्री गमन का त्याग। 4* जुवा न खेलना ...किसी भी प्रकार का नशा का त्याग, मदिरा, चाय, कॉफ़ी, गुटका, बीड़ी, सिगरेट जितना भी नशा है सब त्याग करो. ________________+______________ एक ऐसा सन्यासी जिसने करोड़ों अरबों कि धार्मिक संपत्ति बिबी बच्चों भाई के नाम न करके इस्कान के नाम कर दिया जिसको दुनिया के 12 अलग-अलग देशों के 12 दीक्षित सन्यासी फाउंडर बनकर चलाएंगे। हरे कृष्ण! हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे।।

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Suchitra Singh May 13, 2021

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Udit Sagar May 13, 2021

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Sonali Kumar May 13, 2021

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Anita Sharma May 12, 2021

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Ashwini Srinivas May 13, 2021

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Kushal Ghosh May 13, 2021

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Pritam Chhabariy May 12, 2021

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