बेटी जो एक खूबसूरत एहसास होती हैं निश्छल मन के परी का रूप होती हैं कड़कती धुप में शीतल हवाओ की तरह वो उदासी के हर दर्द का इलाज़ होती हैं घर की रौनक आंगन में चिड़िया की तरह अन्धकार में उजालों की खिलखिलाहट होती है सुबह सुबह सूरज की किरण की तरह चंचल सुमन मधुर आभा होती हैं कठनाइयों को पार करती हैं असंभव की तरह हर प्रश्न का सटीक जवाब होती हैं इन्द्रधनुष के साथ रंगों की तरह कभी माँ, कभी बहन, कभी बेटी होती हैं पिता की उलझन साझा कर नासमझ की तरह पिता की पगड़ी गर्व सम्मान होती हैं बेटी जो एक खूबसूरत एहसास होती हैं बेटी जो एक खूबसूरत एहसास होती हैं🙏🙏🌹🌹🌹💧💧💧

बेटी जो एक खूबसूरत एहसास होती हैं
निश्छल मन के परी का रूप होती हैं
कड़कती धुप में शीतल हवाओ की तरह
वो उदासी के हर दर्द का इलाज़ होती हैं

घर की रौनक आंगन में चिड़िया की तरह
अन्धकार में उजालों की खिलखिलाहट होती है
सुबह सुबह सूरज की किरण की तरह
चंचल सुमन मधुर आभा होती हैं

कठनाइयों को पार करती हैं असंभव की तरह
हर प्रश्न का सटीक जवाब होती हैं
इन्द्रधनुष के साथ रंगों की तरह
कभी माँ, कभी बहन, कभी बेटी होती हैं

पिता की उलझन साझा कर नासमझ की तरह
पिता की पगड़ी गर्व सम्मान होती हैं
बेटी जो एक खूबसूरत एहसास होती हैं
बेटी जो एक खूबसूरत एहसास होती हैं🙏🙏🌹🌹🌹💧💧💧

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कामेंट्स

r h Bhatt Sep 25, 2020
Jai Shri Radhe Krishna Shubh ratri ji Vandana ji Jai matage

🔴 Suresh Kumar 🔴 Sep 25, 2020
Radhey Radhey Ji 🙏 Shubh ratri vandan meri behan 🌼🌼🌼🌼 always be happy and healthy 🌹🌹🌹🌹🌹

🔴 Suresh Kumar 🔴 Sep 25, 2020
very sweet good night to my sweet sister 🏵️🏵️ God bless you 🙏 🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳 🙏 JAI JINENDRA 🙏 🎄🎄🎄🎄🎄🎄🎄🎄🎄

गीताराम शर्मा Sep 25, 2020
जय श्री राधे राधे जय श्री कृष्णाजी शुभ रात्रिवंदन बहनजीआप व आप के परिवार मे श्री लक्ष्मी नारायण विष्णु जी श्री नाथजी कीकृपा सदैव ही बनी रहे जी आपसभीका हरपल शुभ मंगलमय हो जीजय जिनेन्द्र जी

SOM DUTT SHARMA Sep 25, 2020
Sri Radhey Radhey ji good night ji sweet dreams ji nice 👍👌 beautiful thanks 👍👌

Ramesh mathwas Sep 25, 2020
@preetijain1 Meri pyari Bdi Bahana ji Radhe Radhe Jai Shri Krishna ji aap ko Baba Bholenath ki Kripa dristi aap par Hames Bni Rahe ji Meri pyari Bdi Tai ji

Mamta Chauhan Sep 25, 2020
Radhe radhe ji 🌷🙏 Shubh ratri vandan dear sister ji aapka har pal khushion bhra ho aapki sbhi mnokamna puri ho 👌👌👌👌🌷🙏🌷🙏🙏

Praveen sharma Sep 25, 2020
Z🌹🌹🌿🌿🙏🙏राधे राधे जी।शुभरात्री वन्दनजी।🙏🙏🌿🌿🌹🌹

GOVIND CHOUHAN Sep 25, 2020
JAI SHREE RADHEY RADHEY KRISHNAJI 🌹 SUBH RATRI VANDAN PRNAM JII DIDI 🙏 🙏 🌷 🌷 👏 👏

CG Sahu Sep 25, 2020
very nice post radhe Krishna ji nice good night ji radhe Krishna ji have a nice night ji 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🍁🍁🍁🍁🍀🍀🍀🍀🍀🍁🍁🍨🍁🍁🍀🍁🍁🍁🙋‍♀️

Alka Devgan Sep 25, 2020
Jai Mata Di 🙏 Matarani bless you and your family aapka har pal mangalmay n shubh ho bahna ji Matarani aap sabhi ko kushiyan pradhan karein meri sweet bahna ji aap sabhi par sada kirpa karein shubh ratri vandan sister ji Jai Mata Di 🙏🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

Neha Sharma, Haryana Sep 26, 2020
🌿🌺🌿🌺🌿🌺🌿🌺🌿 ✍ _*पावों में यदि जान हो*_ _*तो*_ _*मंजिल तुमसे दूर नहीं।*_ _*आँखों में यदि पहचान हो,*_ _*तो*_ _*इंसान तुमसे दूर नहीं।*_ _*दिल में यदि स्थान हो*_ _*तो*_ _*अपने तुमसे दूर नहीं।*_ _*भावना में यदि जान हो,*_ _*तो*_ _*भगवान तुमसे दूर नहीं!!*_ 🌹🙏🏼*जय श्री राधेकृष्णा*🙏🏼🌹 🙏🌹*शुभ शनिवार🌹🙏 *आपका दिन शुभ व मंगलमय हो बहनाजी* 🙏🌿🌺🌿🌺🌿🌺🌿🌺🌿🙏

laltesh kumar sharma Sep 26, 2020
🌹🌿🌹 jai shree ram ji 🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹 jai shree hanuman ji 🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🙏🙏

Pandit Sandeep Mishra Shastri Sep 27, 2020
जय सियाराम जय श्री राधा माधव शुभ रात्री जी। 🙏❣️💗📿💓🌷♥️🌻💟💕💞💘🏵️🥀💔🌹💝💖👏👏👌👌👌 बहुत सुंदर पंक्तियां ।

✔ *एक प्रसंग जिंदगी का:* ✍एक 6 साल का छोटा सा बच्चा अक्सर परमात्मा से मिलने की जिद किया करता था। उसकी चाहत थी की एक समय की रोटी वो परमात्मा के साथ खाये। ✍1 दिन उसने 1 थैले में 5, 6 रोटियां रखीं और परमात्मा को ढूंढने निकल पड़ा। चलते चलते वो बहुत दूर निकल आया संध्या का समय हो गया। ✍उसने देखा नदी के तट पर 1 बुजुर्ग बूढ़ा बैठा हैं, और ऐसा लग रहा था जैसे उसी के इन्तजार में वहां बैठा उसका रास्ता देख रहा हों। ✍वो 6 साल का मासूम बालक,बुजुर्ग बूढ़े के पास जा कर बैठ गया,।अपने थैले में से रोटी निकाली और खाने लग गया।और उसने अपना रोटी वाला हाँथ बूढे की ओर बढ़ाया और मुस्कुरा के देखने लगा,बूढे ने रोटी ले ली,। बूढ़े के झुर्रियों वाले चेहरे पर अजीब सी ख़ुशी आ गई आँखों में ख़ुशी के आंसू भी थे,,,, ✍बच्चा बुढ़े को देखे जा रहा था, जब बुढ़े ने रोटी खा ली बच्चे ने एक और रोटी बूढ़े को दी। ✍बूढ़ा अब बहुत खुश था। बच्चा भी बहुत खुश था। दोनों ने आपस में बहुत प्यार और स्नेह केे पल बिताये। जब रात घिरने लगी तो बच्चा इजाज़त ले घर की ओर चलने लगा। ✍वो बार बार पीछे मुड़ कर देखता , तो पाता बुजुर्ग बूढ़ा उसी की ओर देख रहा था। बच्चा घर पहुंचा तो माँ ने अपने बेटे को आया देख जोर से गले से लगा लिया और चूमने लगी,बच्चा बहूत खुश था। ✍माँ ने अपने बच्चे को इतना खुश पहली बार देखा तो ख़ुशी का कारण पूछा, तो बच्चे ने बताया ! माँ,....आज मैंने परमात्मा के सांथ बैठ कर रोटी खाई,आपको पता है उन्होंने भी मेरी रोटी खाई,,,माँ परमात्मा् बहुत बूढ़े हो गये हैं,,,मैं आज बहुत खुश हूँ माँ ✍उस तरफ बुजुर्ग बूढ़ा भी जब अपने गाँव पहूँचा तो गाव वालों ने देखा बूढ़ा बहुत खुश हैं,तो किसी ने उनके इतने खुश होने का कारण पूछा???? बूढ़ा बोलां,,,,मैं 2 दिन से नदी के तट पर अकेला भूखा बैठा था,,मुझे पता था परमात्मा आएंगे और मुझे खाना खिलाएंगे। ✍आज भगवान् आए थे, उन्होंने मेरे साथ बैठ कर रोटी खाई मुझे भी बहुत प्यार से खिलाई,बहुत प्यार से मेरी और देखते थे, जाते समय मुझे गले भी लगाया,,परमात्मा बहुत ही मासूम हैं बच्चे की तरह दिखते हैं। ✔ *एक सीख:* इस कहानी का अर्थ बहुत गहराई वाला है। असल में बात सिर्फ इतनी है की दोनों के दिलों में परमात्मा के लिए प्यार बहुत सच्चा है। और परमात्मा ने दोनों को,दोनों के लिये, दोनों में ही (परमात्मा) खुद को भेज दिया। *जब मन परमात्मा भक्ति में रम जाता है तो हमे हर एक में वो ही नजर आने लग जाते है 🙏 🌷🌷🌷🌺🙏🏻*Shubh ratri ji🙋‍♀️🙋‍♀️🙋‍♀️🙋‍♀️🧁🧁🧁🍫🍫🌹🍀🍀🌿🙏🙏

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💐🌹🥀🚩 जय श्री कृष्णा 🚩🥀🌹💐 एक मालन को रोज़ राजा की सेज को फूलों से सजाने का काम दिया गया था . वो अपने काम में बहुत निपुण थी . एक दिन सेज़ सजाने के बाद उसके मन में आया की वो रोज़ तो फूलों की सेज़ सजाती है, पर उसने कभी खुद फूलों के सेज़ पर सोकर नहीं देखा . कौतुहलबस वो दो घड़ी फूल सजे उस बिस्तर पर सो गयी . उसे दिव्य आनंद मिला , ना जाने कैसे उसे नींद आ गयी . कुछ घंटों बाद राजा अपने शयन कक्ष में आये . मालन को अपने बिस्तर पर सोता देखकर राजा बहुत गुस्सा हुआ . उसने मालन को पकड़कर १०० कोड़े लगाने की सजा दी . मालन बहुत रोई विनती की पर राजा ने एक ना सुनी . जब कोड़े लगाने लगे तो शुरू में मालन खूब चीखी चिल्लाई, पर बाद में जोर जोर से हंसने लगी. राजा न कोड़े रोकने का हुक्म दिया और पूछा - अरे तू पागल हो गयी हैं क्या? हंस किस बात पर रही हैं तू ? मालन बोली - राजन , मैं इस आश्चर्य में हंस रही हूँ कि जब दो घड़ी फूलों की सेज़ पर सोने की सजा १०० कोड़े हैं , तो पुरे ज़िन्दगी हर रात ऐसे बिस्तर पर सोने की सजा क्या होगी ? राजा को मालन की बात समझ में आ गयी , वो अपनी कृत्य पर बेहद शर्मिंदा हुआ और जन कल्याण में अपने जीवन को लगा दिया. सीख - याद रखे जो कर्म हम इस लोक में करते हैं , उससे परलोक में हमारी सज़ा या पुरस्कार तय होती हैं .

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🌻 अनजाने में किये हुये पाप से मुक्ती का उपाय 🌻 🌷 श्रीमद्भागवत जी के षष्ठम स्कन्ध में , महाराज राजा परीक्षित जी ,श्री शुकदेव जी से बोले भगवन - आपने पञ्चम स्कन्ध में जो नरको का वर्णन किया ,उसको सुनकर तो गुरुवर रोंगटे खड़े जाते हैं। प्रभूवर मैं आपसे ये पूछ रहा हूँ की यदि कुछ पाप हमसे अनजाने में हो जाते हैं , जैसे चींटी मर गयी, हम लोग स्वास लेते हैं तो कितने जीव श्वासों के माध्यम से मर जाते हैं। भोजन बनाते समय लकड़ी जलाते हैं , उस लकड़ी में भी कितने जीव मर जाते हैं । और ऐसे कई पाप हैं जो अनजाने हो जाते हैं । तो उस पाप से मुक्ती का क्या उपाय है भगवन । आचार्य शुकदेव जी ने कहा -राजन ऐसे पाप से मुक्ती के लिए रोज प्रतिदिन पाँच प्रकार के यज्ञ करने चाहिए । महाराज परीक्षित जी ने कहा, भगवन एक यज्ञ यदि कभी करना पड़ता है तो सोंचना पड़ता है ।आप पाँच यज्ञ रोज कह रहे हैं । यहां पर आचार्य शुकदेव जी हम सभी मानव के कल्याणार्थ कितनी सुन्दर बात बता रहे हैं । बोले राजन पहली यज्ञ है -जब घर में रोटी बने तो पहली रोटी गऊ ग्रास के लिए निकाल देना चाहिए । दूसरी यज्ञ है राजन -चींटी को दस पाँच ग्राम आटा रोज वृक्षों की जड़ो के पास डालना चाहिए। तीसरी यज्ञ है राजन्-पक्षियों को अन्न रोज डालना चाहिए । चौथी यज्ञ है राजन् -आँटे की गोली बनाकर रोज जलाशय में मछलियो को डालना चाहिए । पांचवीं यज्ञ है राजन्- भोजन बनाकर अग्नि भोजन , रोटी बनाकर उसके टुकड़े करके उसमे घी चीनी मिलाकर अग्नि को भोग लगाओ। राजन् अतिथि सत्कार खूब करें, कोई भिखारी आवे तो उसे जूठा अन्न कभी भी भिक्षा में न दे । राजन् ऐसा करने से अनजाने में किये हुए पाप से मुक्ती मिल जाती है । हमे उसका दोष नहीं लगता । उन पापो का फल हमे नहीं भोगना पड़ता। राजा ने पुनः पूछ लिया ,भगवन यदि गृहस्त में रहकर ऐसी यज्ञ न हो पावे तो और कोई उपाय हो सकता है क्या। तब यहां पर श्री शुकदेव जी कहते हैं राजन् !, नरक से मुक्ती पाने के लिए हम प्रायश्चित करें। कोई ब्यक्ति तपस्या के द्वारा प्रायश्चित करता है। कोई ब्रह्मचर्य पालन करके प्रायश्चित करता है। कोई ब्यक्ति यम, नियम, आसन के द्वारा प्रायश्चित करता है। लेकिन मैं तो ऐसा मानता हूँ राजन्! केवल हरी नाम संकीर्तन से ही जाने और अनजाने में किये हुए पाप को नष्ट करने की सामर्थ्य है । इस लिए हे राजन् !----- सुनिए स्वास स्वास पर कृष्ण भजि बृथा स्वास जनि खोय। न जाने या स्वास की आवन होय न होय। । राजन् किसी को पता नही की जो स्वास अंदर जा रही है वो लौट कर वापस आएगी की नहीं । इस लिए सदैव हरी का जपते रहो । मैं यह निवेदन करता हूँ की, भगवान राम और कृष्ण के नाम को जपने के लिए कोई भी नियम की जरूरत नहीं होती है। कहीं भी कभी भी किसी भी समय सोते जागते उठते बैठते गोविन्द का नाम रटते रहो। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे 🙏 Զเधे Զเधे जी , जय श्री कृष्णा🌻प्रेम से बोलो ...राधे राधे 🌷

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Mamta Chauhan Oct 28, 2020

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Neha Sharma, Haryana Oct 28, 2020

*जानिये अठारह पुराणों के बारे में!!!• *भाई-बहनों,आज हम सभी अट्ठारह पुराणों के कुछ पहलुओं को संक्षिप्त में समझने की कोशिश करेंगे, पुराण शब्द का अर्थ ही है प्राचीन कथा, पुराण विश्व साहित्य के सबसे प्राचीन ग्रँथ हैं, उन में लिखित ज्ञान और नैतिकता की बातें आज भी प्रासंगिक, अमूल्य तथा मानव सभ्यता की आधारशिला हैं, वेदों की भाषा तथा शैली कठिन है, पुराण उसी ज्ञान के सहज तथा रोचक संस्करण हैं। उन में जटिल तथ्यों को कथाओं के माध्यम से समझाया गया है, पुराणों का विषय नैतिकता, विचार, भूगोल, खगोल, राजनीति, संस्कृति, सामाजिक परम्परायें, विज्ञान तथा अन्य बहुत से विषय हैं, विशेष तथ्य यह है कि पुराणों में देवी-देवताओं, राजाओं, और ऋषि-मुनियों के साथ साथ जन साधारण की कथाओं का भी उल्लेख किया गया हैं, जिस से पौराणिक काल के सभी पहलूओं का चित्रण मिलता है। महृर्षि वेदव्यासजी ने अट्ठारह पुराणों का संस्कृत भाषा में संकलन किया है, ब्रह्मदेव,श्री हरि विष्णु भगवान् तथा भगवान् महेश्वर उन पुराणों के मुख्य देव हैं, त्रिमूर्ति के प्रत्येक भगवान स्वरूप को छः पुराण समर्पित किये गये हैं, इन अट्ठारह पुराणों के अतिरिक्त सोलह उप-पुराण भी हैं, किन्तु विषय को सीमित रखने के लिये केवल मुख्य पुराणों का संक्षिप्त परिचय ही दे रहा हूंँ। ब्रह्म पुराण सब से प्राचीन है, इस पुराण में दो सौ छियालीस अध्याय तथा चौदह हजार श्र्लोक हैं, इस ग्रंथ में ब्रह्माजी की महानता के अतिरिक्त सृष्टि की उत्पत्ति, गंगा अवतरण तथा रामायण और कृष्णावतार की कथायें भी संकलित हैं, इस ग्रंथ से सृष्टि की उत्पत्ति से लेकर सिन्धु घाटी सभ्यता तक की कुछ ना कुछ जानकारी प्राप्त की जा सकती है। दूसरा हैं पद्म पुराण, जिसमें हैं पचपन हजार श्र्लोक और यह ग्रन्थ पाँच खण्डों में विभाजित किया गया है, जिनके नाम सृष्टिखण्ड, स्वर्गखण्ड, उत्तरखण्ड, भूमिखण्ड तथा पातालखण्ड हैं, इस ग्रंथ में पृथ्वी आकाश, तथा नक्षत्रों की उत्पति के बारे में विस्तार से उल्लेख किया गया है, चार प्रकार से जीवों की उत्पत्ति होती है जिन्हें उदिभज, स्वेदज, अणडज तथा जरायुज की श्रेणी में रखा गया है, यह वर्गीकरण पूर्णतया वैज्ञानिक आधार पर है। भारत के सभी पर्वतों तथा नदियों के बारे में भी विस्तार से वर्णन है, इस पुराण में शकुन्तला दुष्यन्त से ले कर भगवान राम तक के कई पूर्वजों का इतिहास है, शकुन्तला दुष्यन्त के पुत्र भरत के नाम से हमारे देश का नाम जम्बूदीप से भरतखण्ड और उस के बाद भारत पडा था, यह पद्म पुराण हम सभी भाई-बहनों को पढ़ना चाहियें, क्योंकि इस पुराण में हमारे भूगौलिक और आध्यात्मिक वातावरण का विस्तृत वर्णन मिलता है। तीसरा पुराण हैं विष्णु पुराण, जिसमें छः अँश तथा तेइस हजार श्र्लोक हैं, इस ग्रंथ में भगवान् श्री विष्णुजी, बालक ध्रुवजी, तथा कृष्णावतार की कथायें संकलित हैं, इस के अतिरिक्त सम्राट पृथुजी की कथा भी शामिल है, जिसके कारण हमारी धरती का नाम पृथ्वी पडा था, इस पुराण में सू्र्यवँशीयों तथा चन्द्रवँशीयों राजाओं का सम्पूर्ण इतिहास है। उत्तरं यत्समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम्। वर्षं तद भारतं नाम भारती यत्र सन्ततिः।। भारत की राष्ट्रीय पहचान सदियों पुरानी है, जिसका प्रमाण विष्णु पुराण के इस श्लोक में मिलता है, साधारण शब्दों में इस का अर्थ होता है कि वह भूगौलिक क्षेत्र जो उत्तर में हिमालय तथा दक्षिण में सागर से जो घिरा हुआ है, यही भारत देश है तथा उस में निवास करने वाले हम सभी जन भारत देश की ही संतान हैं, भारत देश और भारत वासियों की इस से स्पष्ट पहचान और क्या हो सकती है? विष्णु पुराण वास्तव में ऐक ऐतिहासिक ग्रंथ है। चौथा पुराण हैं शिव पुराण जिसे आदर से शिव महापुराण भी कहते हैं, इस महापुराण में चौबीस हजार श्र्लोक हैं, तथा यह सात संहिताओं में विभाजित है, इस ग्रंथ में भगवान् शिवजी की महानता तथा उन से सम्बन्धित घटनाओं को दर्शाया गया है, इस ग्रंथ को वायु पुराण भी कहते हैं, इसमें कैलास पर्वत, शिवलिंग तथा रुद्राक्ष का वर्णन और महत्व विस्तार से दर्शाया गया है। सप्ताह के सातों दिनों के नामों की रचना, प्रजापतियों का वर्णन तथा काम पर विजय पाने के सम्बन्ध में विस्तार से वर्णन किया गया है, सप्ताह के दिनों के नाम हमारे सौर मण्डल के ग्रहों पर आधारित हैं, और आज भी लगभग समस्त विश्व में प्रयोग किये जाते हैं, भगवान् शिवजी के भक्तों को श्रद्धा और भक्ति से शिवमहापुराण का नियमित पाठ करना चाहिये, भगवान् शंकरजी बहुत दयालु और भोले है, जो भी इस शीव पुराण को भाव से पढ़ता है उसका कल्याण निश्चित हैं। पाँचवा है भागवत पुराण, जिसमें अट्ठारह हजार श्र्लोक हैं, तथा बारह स्कंध हैं, इस ग्रंथ में अध्यात्मिक विषयों पर वार्तालाप है, भागवत् पुराण में भक्ति, ज्ञान तथा वैराग्य की महानता को दर्शाया गया है, भगवान् विष्णुजी और भगवान् गोविन्द के अवतार की कथाओं को विसतार से दर्शाया गया हैं, इसके अतिरिक्त महाभारत काल से पूर्व के कई राजाओं, ऋषि मुनियों तथा असुरों की कथायें भी संकलित हैं। इस ग्रंथ में महाभारत युद्ध के पश्चात श्रीकृष्ण का देहत्याग, दूारिका नगरी के जलमग्न होने और यादव वँशियों के नाश तक का विवरण भी दिया गया है। भगवान् श्रीकृष्ण के नाम की ही महिमा है जिस कारण मेरा जीवन ही बदल गया। नारद पुराण छठा पुराण हैं जो पच्चीस हजार श्र्लोकों से अलंकृत है, तथा इस के भी भी दो भाग हैं, दोनों भागो में सभी अट्ठारह पुराणों का सार दिया गया है, प्रथम भाग में मन्त्र तथा मृत्यु पश्चात के क्रम और विधान हैं, गंगा अवतरण की कथा भी विस्तार पूर्वक बतायी गयी है, दूसरे भाग में संगीत के सातों स्वरों, सप्तक के मन्द्र, मध्य तथा तार स्थानों, मूर्छनाओं, शुद्ध एवम् कूट तानो और स्वरमण्डल का ज्ञान लिखित है। संगीत पद्धति का यह ज्ञान आज भी भारतीय संगीत का आधार है, जो पाश्चात्य संगीत की चकाचौंध से चकित हो जाते हैं, उनके लिये उल्लेखनीय तथ्य यह है कि नारद पुराण के कई शताब्दी पश्चात तक भी पाश्चात्य संगीत में केवल पाँच स्वर होते थे, तथा संगीत की थ्योरी का विकास शून्य के बराबर था, मूर्छनाओं के आधार पर ही पाश्चात्य संगीत के स्केल बने हैं, सभी संगीत के प्रेमी, जो संगीत को ही अपना केरियर समझ लिया हो, या संगीत और अध्यात्म को साथ में देखने वाले ब्रह्म पुरूष को नारद पुराण को जरूर पढ़ना चाहियें। साँतवा है मार्कण्डेय पुराण, जो अन्य पुराणों की अपेक्षा सबसे छोटा पुराण है, मार्कण्डेय पुराण में नौ हजार श्र्लोक हैं तथा एक सो सडतीस अध्याय हैं, इस ग्रंथ में सामाजिक न्याय और योग के विषय में ऋषिमार्कण्डेयजी तथा ऋषि जैमिनिजी के मध्य वार्तालाप है; इस के अतिरिक्त भगवती दुर्गाजी तथा भगवान् श्रीक़ृष्ण से जुड़ी हुयी कथायें भी संकलित हैं, सभी ब्रह्म समाज को यह पुराण पढ़नी चाहिये, कम से कम मार्कण्डेयजी ऋषि के वंशज इस पुराण को थोड़ा-थोड़ा करके पढ़ने की कोशिश करनी चाहिये, मार्कण्डेय पुराण के अध्ययन से आध्यात्मिक अक्षय सुख की प्राप्ति होती है। आठवाँ है अग्नि पुराण, अग्नि पुराण में तीन सौ तैयासी अध्याय तथा पन्द्रह हजार श्र्लोक हैं, इस पुराण को भारतीय संस्कृति का ज्ञानकोष या आज की भाषा में विकीपीडिया कह सकते है, इस ग्रंथ में भगवान् मत्स्यावतार का अवतार लेकर पधारें थे, उसका वर्णन है, रामायण तथा महाभारत काल की संक्षिप्त कथायें भी संकलित हैं, इसके अतिरिक्त कई विषयों पर वार्तालाप है जिन में धनुर्वेद, गान्धर्व वेद तथा आयुर्वेद मुख्य हैं, धनुर्वेद, गान्धर्व वेद तथा आयुर्वेद को उप-वेद भी कहा जाता है। नवमा है भविष्य पुराण, भविष्य पुराण में एक सौ उनतीस अध्याय तथा अट्ठाईस श्र्लोक हैं, इस ग्रंथ में सूर्य देवता का महत्व, वर्ष के बारह महीनों का निर्माण, भारत के सामाजिक, धार्मिक तथा शैक्षिक विधानों और भी कई विषयों पर वार्तालाप है, इस पुराण में साँपों की पहचान, विष तथा विषदंश सम्बन्धी महत्वपूर्ण जानकारी भी दी गयी है, इस भविष्य पुराण की कई कथायें बाईबल की कथाओं से भी मेल खाती हैं, भविष्य पुराण में पुराने राजवँशों के अतिरिक्त भविष्य में आने वाले नन्द वँश, मौर्य वँशों का भी वर्णन है। इस के अतिरिक्त विक्रम बेताल तथा बेताल पच्चीसी की कथाओं का विवरण भी है, भगवान् श्रीसत्य नारायण की कथा भी इसी पुराण से ली गयी है, यह भविष्य पुराण भारतीय इतिहास का महत्वशाली स्त्रोत्र है, जिस पर शोध कार्य करना चाहिये, और इसके उपदेश हर आज के क्षात्र-क्षात्राओं को पढ़ाना चाहिये, और प्रथम क्लास से ही, शिक्षा से जुड़े समस्त अध्यापक एवम् अध्यापिका को इस भविष्य पुराण नामक पुराण को अवश्य पढ़ना चाहियें, ताकि आपकी समझ बढे, और समाज में अध्यात्म जागृति लायें। दसवाँ है ब्रह्मावैवर्ता पुराण, जो अट्ठारह हजार श्र्लोकों से अलंकृत है, तथा दो सौ अट्ठारह अध्याय हैं, इस ग्रंथ में ब्रह्माजी, गणेशजी, तुल्सी भाता, सावित्री माता, लक्ष्मी माता, सरस्वती माता तथा भगवान् श्रीकृष्ण की महानता को दर्शाया गया है, तथा उन से जुड़ी हुयी कथायें संकलित हैं, इस पुराण में आयुर्वेद सम्बन्धी ज्ञान भी संकलित है, जो आयुर्वेद और भारतीय परम्परा में निरोगी काया के विषय पर गंभीर है, उसे यह ब्रह्मावैवर्ता पुराण आपका पथ प्रदर्शक बनेगा। अगला ग्यारहवा है लिंग पुराण, इस पावन लिंग पुराण में ग्यारह हजार श्र्लोक और एक सौ तरसठ अध्याय हैं, सृष्टि की उत्पत्ति तथा खगौलिक काल में युग, कल्प की तालिका का वर्णन है, भगवान् सूर्यदेव के सूर्य के वंशजों में राजा अम्बरीषजी हुयें, रामजी इन्हीं राजा अम्बरीषजी के कूल में मानव अवतार हुआ था, राजा अम्बरीषजी की कथा भी इसी पुराण में लिखित है, इस ग्रंथ में अघोर मंत्रों तथा अघोर विद्या के सम्बन्ध में भी उल्लेख किया गया है। हमें हमारे ऋषियों ने विरासत में वेदों-उपनिषदों और पुराणों के रूप में जो अटूट खजाना दिया है, जो सही मायने में प्रभु से मिलने का माध्यम है। बाहरवां पुराण हैं वराह पुराण, वराह पुराण में दो सौ सत्रह स्कन्ध तथा दस हजार श्र्लोक हैं, इस ग्रंथ में भगवान् श्री हरि के वराह अवतार की कथा, तथा इसके अतिरिक्त भागवत् गीता महात्म्य का भी विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया है, इस पुराण में सृष्टि के विकास, स्वर्ग, पाताल तथा अन्य लोकों का वर्णन भी दिया गया है, श्राद्ध पद्धति, सूर्य के उत्तरायण तथा दक्षिणायन विचरने, अमावस और पूर्णमासी के कारणों का वर्णन है। महत्व की बात यह है कि जो भूगौलिक और खगौलिक तथ्य इस पुराण में संकलित हैं वही तथ्य पाश्चात्य जगत के वैज्ञिानिकों को पंद्रहवी शताब्दी के बाद ही पता चले थे, सभी सनातन धर्म को मानने वाले भाई-बहनों को यह वराह पुराण को अवश्य पढ़ना चाहियें, जो भक्त अपने जीवन में जीते जी स्वर्ग की कल्पना करता है, उसके लिये वराह पुराण अतुल्य है, इसमें स्वर्ग-नरक का भगवान् श्री वेदव्यासजी ने बखूबी वर्णन किया है। तेहरवां पुराण हैं सकन्द पुराण, सकन्द पुराण सब से विशाल पुराण है, तथा इस पुराण में अक्यासी हजार श्र्लोक और छः खण्ड हैं, सकन्द पुराण में प्राचीन भारत का भूगौलिक वर्णन है, जिस में सत्ताईस नक्षत्रों, अट्ठारह नदियों, अरुणाचल प्रदेश का सौंदर्य, भारत में स्थित भगवान् भोलेनाथ के बारह ज्योतिर्लिंगों, तथा गंगा अवतरण के आख्यान शामिल हैं, इसी पुराण में स्याहाद्री पर्वत श्रंखला तथा कन्या कुमारी मन्दिर का उल्लेख भी किया गया है, इसी पुराण में सोमदेव, तारा तथा उन के पुत्र बुद्ध ग्रह की उत्पत्ति की अलंकारमयी कथा भी है। चौदहवां पुराण है वामन पुराण, वामन पुराण में निन्यानवें अध्याय तथा दस हजार श्र्लोक हैं, एवम् दो खण्ड हैं, इस पुराण का केवल प्रथम खण्ड ही उप्लब्द्ध है, इस पुराण में भगवान् के वामन अवतार की कथा विस्तार से कही गयी हैं, जो भरूचकच्छ (गुजरात) में हुआ था, इस के अतिरिक्त इस ग्रंथ में भी सृष्टि, जम्बूदूीप तथा अन्य सात दूीपों की उत्पत्ति, पृथ्वी की भूगौलिक स्थिति, महत्वशाली पर्वतों, नदियों तथा भारत के खण्डों का जिक्र है। पन्द्रहवां पुराण है कुर्मा पुराण, कुर्मा पुराण में अट्ठारह हजार श्र्लोक तथा चार खण्ड हैं, इस पुराण में चारों वेदों का सार संक्षिप्त रूप में दिया गया है, कुर्मा पुराण में कुर्मा अवतार से सम्बन्धित सागर मंथन की कथा विस्तार पूर्वक लिखी गयी है, इस में ब्रह्माजी, शिवजी, विष्णुजी, पृथ्वी माता, गंगा मैया की उत्पत्ति, चारों युगों के बारे में सटीक जानकारी, मानव जीवन के चार आश्रम धर्मों, तथा चन्द्रवँशी राजाओं के बारे में भी विस्तार से वर्णन है। सोलहवां पुराण है मतस्य पुराण, मतस्य पुराण में दो सौ नब्बे अध्याय तथा चौदह हजार श्र्लोक हैं, इस ग्रंथ में मतस्य अवतार की कथा का विस्तरित उल्लेख किया गया है, सृष्टि की उत्पत्ति और हमारे सौर मण्डल के सभी ग्रहों, चारों युगों तथा चन्द्रवँशी राजाओं का इतिहास वर्णित है, कच, देवयानी, शर्मिष्ठा तथा राजा ययाति की रोचक कथा भी इसी मतस्य पुराण में है, सामाजिक विषयों के जानकारी के इच्छुक भाई-बहनों को मतस्य पुराण को जरूर पढ़ना चाहियें। सत्रहवां पुराण है गरुड़ पुराण, गरुड़ पुराण में दो सौ उनअस्सी अध्याय तथा अट्ठारह हजार श्र्लोक हैं; इस ग्रंथ में मृत्यु पश्चात की घटनाओं, प्रेत लोक, यम लोक, नरक तथा चौरासी लाख योनियों के नरक स्वरुपी जीवन के बारे में विस्तार से बताया गया है, इस पुराण में कई सूर्यवँशी तथा चन्द्रवँशी राजाओं का वर्णन भी है, साधारण लोग इस ग्रंथ को पढ़ने से हिचकिचाते हैं, क्योंकि? इस ग्रंथ को किसी सम्वन्धी या परिचित की मृत्यु होने के पश्चात ही पढ़वाया जाता है। वास्तव में इस पुराण में मृत्यु पश्चात पुनर्जन्म होने पर गर्भ में स्थित भ्रूण की वैज्ञानिक अवस्था सांकेतिक रूप से बखान की गयी है, जिसे वैतरणी नदी की संज्ञा दी गयी है, उस समय तक भ्रूण के विकास के बारे में कोई भी वैज्ञानिक जानकारी नहीं थी, तब हमारे इसी गरूड पुराण ने विज्ञान और वैज्ञानिकों को दिशा दी, इस पुराण को पढ़ कर कोई भी मानव नरक में जाने से बच सकता है। अट्ठारहवां और अंतिम पुराण हैं ब्रह्माण्ड पुराण, ब्रह्माण्ड पुराण में बारह हजार श्र्लोक तथा पू्र्व, मध्य और उत्तर तीन भाग हैं, मान्यता है कि अध्यात्म रामायण पहले ब्रह्माण्ड पुराण का ही एक अंश थी जो अभी एक प्रथक ग्रंथ है, इस पुराण में ब्रह्माण्ड में स्थित ग्रहों के बारे में विस्तार से वर्णन किया गया है, कई सूर्यवँशी तथा चन्द्रवँशी राजाओं का इतिहास भी संकलित है, सृष्टि की उत्पत्ति के समय से ले कर अभी तक सात मनोवन्तर (काल) बीत चुके हैं जिन का विस्तरित वर्णन इस ग्रंथ में किया गया है। भगवान् श्री परशुरामजी की कथा भी इस पुराण में दी गयी है, इस ग्रँथ को विश्व का प्रथम खगोल शास्त्र कह सकते है, भारत के ऋषि इस पुराण के ज्ञान को पूरे ब्रह्माण्ड तक ले कर गये थे, जिसके प्रमाण हमें मिलते रहे है, हिन्दू पौराणिक इतिहास की तरह अन्य देशों में भी महामानवों, दैत्यों, देवों, राजाओं तथा साधारण नागरिकों की कथायें प्रचिलित हैं, कईयों के नाम उच्चारण तथा भाषाओं की विभिन्नता के कारण बिगड़ भी चुके हैं जैसे कि हरिकुल ईश से हरकुलिस, कश्यप सागर से केस्पियन सी, तथा शम्भूसिहं से शिन बू सिन आदि बन गये। तक्षक के नाम से तक्षशिला और तक्षकखण्ड से ताशकन्द बन गये, यह विवरण अवश्य ही किसी ना किसी ऐतिहासिक घटना कई ओर संकेत करते हैं, प्राचीन काल में इतिहास, आख्यान, संहिता तथा पुराण को ऐक ही अर्थ में प्रयोग किया जाता था, इतिहास लिखने का कोई रिवाज नहीं था, राजाओ नें कल्पना शक्तियों से भी अपनी वंशावलियों को सूर्य और चन्द्र वंशों से जोडा है, इस कारण पौराणिक कथायें इतिहास, साहित्य तथा दंत कथाओं का मिश्रण हैं। रामायण, महाभारत तथा पुराण हमारे प्राचीन इतिहास के बहुमूल्य स्त्रोत्र हैं, जिनको केवल साहित्य समझ कर अछूता छोड़ दिया गया है, इतिहास की विक्षप्त श्रंखलाओं को पुनः जोड़ने के लिये हमें पुराणों तथा महाकाव्यों पर शोध करना होगा, पढ़े-लिखे आज की युवा पीढ़ी को यह आव्हान है, जो छुट गया उसे जाने दो, जो अध्यात्म विरासत बची है, उसे समझने की कोशिश करों, पुराणों में अंकीत उपदेशों को अपने जीवन में आत्मसात करें। आपको अट्ठारह पुराणों का संक्षिप्त परिचय करवाया, मुझे आशा है कि जरूर ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी आप हमें संदेश के माध्यम से हमें बता सकते हैं, आपके पास इस प्रस्तुति के सम्बन्धित कोई जानकारी हो, और आप मुझे बताना चाहते हो, तो संदेश के द्वारा आप बेझिझक लिख सकते हो, आप सभी की कोई न कोई जानकारी मेरा मार्ग प्रशस्त करेगी, और मुझे कुछ नया सीखने को मिलेगा, आपका बहुत बहुत धन्यवाद। *हरि ओऊम् तत्सत्*🙏🌸🌸 *जय श्री राधेकृष्णा*🙏🌸🌸

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Renu Singh Oct 28, 2020

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🙏🙏राधे राधे जी 🙏🙏 🍒🍎शुभ रात्रि जी🍎🍒 मुस्कानों के फूल खिलाओ, महकेगा जग सारा, जिधर चलोगे, उधर सजेगा, गुलशन प्यारा-न्यारा. कुदरत का वरदान है मुस्कान, अधरों की तो शान है मुस्कान, रोने से कुछ हासिल नहीं होता, उदासी में तो जान है मुस्कान. जब भी किसी से मिला करो, मुस्कुरा कर मिला करो, देखकर तुम दूसरों को, सुमन-सम बस खिला करो. मुस्कुराते रहिए हमेशा, मुस्कुराहट खुदा की इबादत है, वही मुस्कुरा सकता है, जिस पर रब की इनायत है. रब की इनायत पाने को बस, मुस्कुराया करो हर हाल में, खुशी और गम का नाम है जिंदगी, व्यर्थ मत फंसो बवाल में. मुस्कुराने से हल मिल सकता है, कोई नया रस्ता दिख सकता है, आंखों में नई चमक आ जाती है, जब मुस्कुराहट का फूल खिलता है. मुस्कुराता चेहरा प्रभु को भी भाता है, मुस्कुराहट से खुशियों का गहरा नाता है, मुस्कानों के फूल खिलाने से ही, मन मधुमय हो जाता है. मुस्कुराने के लिए हर पल होता है, केवल World Smile Day नहीं होता है, दुःख में भी जो मुस्कुराना सीख सके, उसका तनाव मुस्कुराने से दूर होता है. सारा जहां है तेरा, तू मुस्कुराना सीख ले. मन को महकाना सीख ले, देखने का अंदाज़ सकारात्मक करके देख जरा, मुस्कानों के फूल खिलाना सीख ले ♦️♦️♦️😊😊😊♦️♦️♦️

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Shanti Pathak Oct 28, 2020

**जय श्री राधे कृष्णा** **शुभरात्रि वंदन** *कभी हम भी.. बहुत अमीर हुआ करते थे* *हमारे भी जहाज.. चला करते थे।*🙃🤣🤣 *हवा में.. भी।* *पानी में.. भी।* *दो दुर्घटनाएं हुई।* *सब कुछ.. ख़त्म हो गया।* *पहली दुर्घटना* 🙃🙃🙃 जब क्लास में.. हवाई जहाज उड़ाया। टीचर के सिर से.. टकराया। स्कूल से.. निकलने की नौबत आ गई। बहुत फजीहत हुई। कसम दिलाई गई। औऱ जहाज बनाना और.. उडाना सब छूट गया। *दूसरी दुर्घटना*🙃🙃🙃🙃 बारिश के मौसम में, मां ने.. अठन्नी दी। चाय के लिए.. दूध लाना था।कोई मेहमान आया था। हमने अठन्नी.. गली की नाली में तैरते.. अपने जहाज में.. बिठा दी। तैरते जहाज के साथ.. हम शान से.. चल रहे थे। ठसक के साथ। खुशी खुशी। अचानक.. तेज बहाब आया। और.. जहाज.. डूब गया। साथ में.. अठन्नी भी डूब गई। ढूंढे से ना मिली। मेहमान बिना चाय पीये चले गये। फिर.. जमकर.. ठुकाई हुई। घंटे भर.. मुर्गा बनाया गया। औऱ हमारा.. पानी में जहाज तैराना भी.. बंद हो गया। आज जब.. प्लेन औऱ क्रूज के सफर की बातें चलती हैं , तो.. उन दिनों की याद दिलाती हैं। वो भी क्या जमाना था ! और..🙂🙂🙂🙂 आज के जमाने में.. मेरे बेटे ने... पंद्रह हजार का मोबाइल गुमाया तो.. मां बोली ~ कोई बात नहीं ! पापा.. दूसरा दिला देंगे।😀😀😀 हमें अठन्नी पर.. मिली सजा याद आ गई। फिर भी आलम यह है कि.. आज भी.. हमारे सर.. मां-बाप के चरणों में.. श्रद्धा से झुकते हैं। औऱ हमारे बच्चे.. 'यार पापा ! यार मम्मी ! कहकर.. बात करते हैं। हम प्रगतिशील से.. प्रगतिवान.. हो गये हैं। कोई लौटा दे.. मेरे बीते हुए दिन।।😀😀😀

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Radha Bansal Oct 28, 2020

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Archana Singh Oct 28, 2020

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