Rohitbhai Biscuitwala
Rohitbhai Biscuitwala Dec 15, 2017

Ma Ambika Niketan Ambaji Mandir Parle Point SURAT Rohitbhai Biscuitwala SURAT

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कामेंट्स

Pk Nanda Dec 15, 2017
Jay Mata Rani ki Jay Suprabhat ji

Sanjay Tyagi Tyagi Dec 15, 2017
जय माता रानी तेरी सदा ही जय जय कार

Ajnabi Dec 15, 2017
good morning jay shree Radhe

Babbu Dixit Dec 15, 2017
श्री जय माता रानी की

jai shri krishna May 22, 2019

और एक कहानी।* जिसमे वृद्ध माँ रात को 11:30 बजे रसोई में बर्तन साफ कर रही है घर मे दो बहुवे है बर्तनों की आवाज से परेशान होकर वो पतियों को सास को उल्हाना देने को कहती है वो कहती है आपकी माँ को मना करो इतनी रात को बर्तन धोने के लिये हमारी नींद खराब होती है साथ ही सुबह 4 बजे उठकर फिर खट्टर पट्टर शुरू कर देती है सुबह 5 बजे पूजा आरती करके हमे सोने नही देती ना रात को ना ही सुबह जाओ सोच क्या रहे हो जाकर माँ को मना करो । बड़ा बेटा खड़ा होता है और रसोई की तरफ जाता है रास्ते मे छोटे भाई के कमरे में से भी वो ही बाते सुनाई पड़ती जो उसके कमरे हो रही थी वो छोटे भाई के कमरे को खटखटा देता है छोटा भाई बाहर आता है दोनो भाई रसोई में जाते है और माँ को बर्तन साफ करने में मदद करने लगते है माँ मना करती पर वो नही मानते बर्तन साफ हो जाने के बाद दोनों भाई माँ को बड़े प्यार से उसके कमरे में ले जाते है , तो देखते है पिताजी भी जग रहे है । दोनो भाई माँ को बिस्तर पर बैठा कर कहते है माँ सुबह जल्दी उठा देना हमे भी पूजा करनी है और सुबह पिताजी के साथ योगा करेंगे माँ बोलती ठीक है दोनो बेटे सुबह जल्दी उठने लगे रात को 9:30 पर ही बर्तन मांजने लगे तो पत्नियां बोली माता जी करती है आप कियु कर रहे हो बर्तन साफ तो बेटे बोले हम लोगो की शादी करने के पीछे एक कारण यह भी था कि माँ की सहायता हो जायेगी पर तुम लोग ये कार्य नही कर रही हो कोई बात नही हम अपनी माँ की सहायता कर देते है । हमारी तो माँ है इसमें क्या बुराई है अगले तीन दिनों में घर मे पूरा बदलाव आ गया बहुवे जल्दी बर्तन इसलिये साफ करने लगी कि नही तो उनके पति बर्तन साफ करने लगेंगे साथ ही सुबह वो भी पतियों के साथ ही उठने लगी और पूजा आरती में शामिल होने लगी । कुछ दिनों में पूरे घर के वातावरण में पूरा बदलाव आ गया बहुवे सास ससुर को पूरा सम्मान देने लगी । 🙏🏽🙏🏽🙏🏽 कहानी का सार। माँ का सम्मान तब कम नही होता जब बहुवे उनका सम्मान नही करती माँ का सम्मान तब कम होता है जब बेटे माँ का सम्मान नही करे या माँ के कार्य मे सहयोग ना करे । 🙏🏽🙏🏽🙏🏽 जन्म का रिश्ता हैं माता पिता पहले आपके हैं

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GEETA DEVI May 22, 2019

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PRAMIL KUMAR SHARMA May 22, 2019

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|| रब दिल मे बसा हुआ है | ||📚🕉️ मुल्ला नसीरुद्दीन का नाम किसने नहीं सुना है। बगदाद के रेगिस्तान में 800 वर्ष पूर्व घूमने वाले मुल्ला परमज्ञानी थे। परंतु ज्ञान बांटने के उनके तरीके बड़े अनूठे थे। वे लेक्चर नहीं देते थे बल्कि हास्यास्पद हरकत करके समझाने की कोशिश करते थे। उनका मानना था कि हास्यास्पद तरीके से समझाई बात हमेशा के लिए मनुष्य के जहन में उतर जाती है। बात भी उनकी सही है, और मनुष्य जाति के इतिहास में वे हैं भी इकलौते ज्ञानी जो हास्य के साथ ज्ञान का मिश्रण करने में सफल रहे हैं। आज मैं उनके ही जीवन का एक खूबसूरत दृष्टांत बताता हूँ। एक दिन मुल्ला बगदाद की गलियों से गुजर रहे थे। प्रायः वे गधे पर और वह भी उलटे बैठकर सवारी किया करते थे। और कहने की जरूरत नहीं कि उनका यह तरीका ही लोगों को हंसाने के लिए पर्याप्त था। खैर, उस दिन वे बाजार में उतरे और कुछ खजूर खरीदे। फिर बारी आई दुकानदार को मुद्राएं देने की। तो उन्होंने अपने पायजामे की जेब में टटोला, पर मुद्रा वहां नहीं थी। फिर उन्होंने अपने जूते निकाले और जमीन पर बैठ गए। जूतों को चारों ओर टटोलने लगे, परंतु मुद्राएं जूतों में भी नहीं थी। अबतक वहां काफी भीड़ एकत्रित हो गई थी। एक तो मुल्ला की सवारी ही भीड़ इकट्ठी करने को पर्याप्त थी, और अब ऊपर से उनकी चल रही हरकतें भी लोगों के आकर्षण का केन्द्र बनती जा रही थी। देखते-ही-देखते पचास के करीब लोग मुल्ला के आसपास एकत्रित हो गए थे। यानी माजरा जम चुका था। इधर मुल्ला एक तरफ मुद्राएं ढूंढ़ रहे थे और दूसरी तरफ खरीदे खजूर भी खाए जा रहे थे। निश्चित ही दुकानदार इस बात से थोड़ा टेंशन में आ गया था। एक तो यह व्यक्ति उटपटांग जगह मुद्राएं ढूंढ़ रहा है और ऊपर से खजूर भी खाए जा रहा है। कहीं मुद्राएं न मिली तो क्या इसके पेट से खजूर निकालकर पैसे वसूलूंगा? अभी दुकानदार यह सब सोच ही रहा था कि मुल्ला ने सर से टोपी उतारी और फिर उसमें मुद्राएं खोजने लगा। अबकी दुकानदार से नहीं रहा गया, उसने सीधा मुल्ला से कहा- यह मुद्राएं यहां-वहां क्या खोज रहे हो? सीधे-सीधे कुर्ते की जेब में क्यों नहीं देखते? इस पर मुल्ला बोला- लो, यह पहले क्यों नहीं सुझाया? इतना कहते-कहते मुल्ला ने कुर्ते की जेब में हाथ डाला और मुद्राएं दुकानदार को थमाते हुए बोला- वहां तो थी ही। यह तो ऐसे ही चान्स ले रहा था। यह सुनते ही पूरी भीड़ हंस पड़ी। भीड़ में से एक बुजुर्ग बोला भी- लगता है कोई पागल है। जब मालूम है कि मुद्रा कुर्ते की जेब में है तो भी यहां-वहां ढूंढ़ रहा है। सार📚🕉️ अब मुल्ला की बारी आ गई थी। जो बात कहने हेतु उन्होंने इतना सारा नाटक किया था, वह कहने का वक्त आ गया था। सो उन्होंने बड़ी गंभीरतापूर्वक सबको संबोधते हुए कहा- पागल मैं, जो मुद्राएं जहां रखी है वहां नहीं खोज रहा हूँ। वाह रे दुनियावालों थोड़ा अपने गिरेबान में झांको। यह जानते हुए भी कि रब दिल में बसा हुआ है तुम लोग उसे मस्जिदों में मंदिरों में खोजते फिर रहे हो। उसे कहीं और दूसरी जगह ढूढ़ने की ज़रूरत ही नही है | यदि मैं पागल हूँ तो तुम लोग महा-पागल हो। क्योंकि मैं तो मामूली बात पर यह मूर्खता कर रहा था, तुम लोग तो विश्व के सबसे अहम सत्य के मामले में यह मूर्खता कर रहे हो |

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Rajeev Thapar May 22, 2019

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hiren May 22, 2019

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