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My Mandir Sep 5, 2017

गणेश विसर्जन और अनंत चतुर्दशी की हार्दिक शुभकामनाएं।

आशा करते हैं यह दिन आपके जीवन में नयी उमंग लेके आये और आप पर श्री गणेश और जगत के पालनहार श्री विष्णु की कृपा सदा बनी रहे ।

दर्शन करिए श्री विष्णु (शामला जी ) के गुजरात स्तिथ मंदिर शामला से।

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कामेंट्स

Dayashankar Gaur Sep 5, 2017
जय श्री विष्णु (शामलाजी) भगवान की जय

Shailendra Kumar Sep 5, 2017
🌹🌹🌹🌹🌹हरि अनंत हरि कथा अनंता🌹🌹🌹🌹🌹

[email protected] Sep 5, 2017
जय श्री गणेश गणपति बप्पा मोरिया पुढच्या वर्षी लवकर या

pisto Jan 27, 2020

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Neha Sharma, Haryana Jan 27, 2020

जय श्री राधेकृष्णा सुंदर सुविचार॰॰॰कोढ़ी पर दया एक बार श्री गुरु नानक देव जी जगत का उद्धार करते हुए एक गाँव के बाहर पहुँचे और देखा वहाँ एक झोपड़ी बनी हुई थी। उस झोपड़े में एक आदम रहता था, जिसे कुष्ठ का रोग था। गाँव के सारे लोग उससे नफरत करते थे कोई उसके पास नहीं आता था। कभी किसी को दया आ जाती तो उसे खाने के लिए कुछ दे देते। गुरुजी उस कोढ़ी के पास गए और कहा भाई हम आज रात तेरी झोपड़ी में रहना चाहते है अगर तुझे कोई परेशानी ना हो तो। कोढ़ी हैरान हो गया क्योंकि उसके तो पास में कोई आना नहीं चाहता था। फिर उसके घर में रहने के लिए कोई राजी कैसे हो गया ? कोढ़ी अपने रोग से इतना दुखी था कि चाह कर भी कुछ ना बोल सका। सिर्फ गुरुजी को देखता ही रहा। लगातार देखते-देखते ही उसके शरीर में कुछ बदलाव आने लगे, पर कह नहीं पा रहा था। गुरुजी ने मरदाना को कहा रबाब बजाओ और गुरुजी उस झोपड़ी में बैठ कर कीर्तन करने लगे। कोढ़ी ध्यान से कीर्तन सुनता रहा कीर्तन समाप्त होने पर कोढ़ी के हाथ जुड़ गए जो ठीक से हिलते भी नहीं थे। उसने गुरुजी के चरणों में अपना माथा टेका। गुरुजी ने कहा और भाई ठीक हो, यहाँ गाँव के बाहर झोपड़ी क्यों बनाई है ? कोड़ी ने कहा मैं बहुत बदकिस्मत हूँ मुझे कुष्ठ रोग हो गया है मुझसे कोई बात नहीं करता यहाँ तक कि मेरे घर वालो ने भी मुझे घर से निकाल दिया है। मैं नीच हूँ इसलिए कोई मेरे पास नहीं आता। उसकी बात सुन कर गुरुजी ने कहा नीच तो वो लोग है जिन्होंने तुम जैसे रोगी पर दया नहीं की और अकेला छोड़ दिया। आ मेरे पास मैं भी तो देखूँ… कहाँ है तुझे कोढ़ ? जैसे ही गुरुजी ने ये वचन कहे कोढ़ी गुरुजी के नजदीक आया तो प्रभु की ऐसी कृपा हुई कि कोढ़ी बिलकुल ठीक हो गया। यह देख वह गुरुजी के चरणों में गिर गया। गुरुजी ने उसे उठाया और गले से लगा के कहा प्रभु का स्मरण करो और लोगों की सेवा करो यही मनुष्य के जीवन का मुख्य कार्य है। बोलिये वृन्दावन बिहारी लाल की जय। जय जय श्री राधे। श्री राधा- कृष्ण की कृपा से आपका हर पल मंगलमय हो। श्री राधेकृष्ण शरणम ममः

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siva siva Jan 27, 2020

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sapna amola Jan 27, 2020

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Aruna Sharma(anu) Jan 27, 2020

🙏🙏🌹🌹💯%*कटु सत्य*🌹🌹🙏🙏 🙏🙏🌹🌹🌹 जय श्री राम 🌹🌹🙏🙏 ईसाईयों को इंग्लिश आती है वो बाइबिल पढ लेते है, उधर मुस्लिम को उर्दू आती है वो कुरान शरीफ़ पढ लेते हैं, सिखों को गुरबानी का पता है वो श्री गुरू ग्रन्थ साहिब पढ लेते है । हिन्दूओ को संस्कृत नही आती वो ना वेद पढ पाते है न उपनिषद । इस से बडा दुर्भाग्य क्या होगा हमारा *संस्कृत ही विश्व की सर्वश्रेष्ठ भाषा है इसे अवश्य सीखें* *प्रतिदिन स्मरण योग्य शुभ सुंदर मंत्र। संग्रह* *🔹 प्रात: कर-दर्शनम्🔹* कराग्रे वसते लक्ष्मी करमध्ये सरस्वती। करमूले तू गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम्॥ *🔸पृथ्वी क्षमा प्रार्थना🔸* समुद्र वसने देवी पर्वत स्तन मंडिते। विष्णु पत्नी नमस्तुभ्यं पाद स्पर्शं क्षमश्वमेव॥ *🔺त्रिदेवों के साथ नवग्रह स्मरण🔺* ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी भानु: शशी भूमिसुतो बुधश्च। गुरुश्च शुक्र: शनिराहुकेतव: कुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम्॥ *स्नान मन्त्र* गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती। नर्मदे सिन्धु कावेरी जले अस्मिन् सन्निधिम् कुरु॥ *🌞 सूर्यनमस्कार🌞* ॐ सूर्य आत्मा जगतस्तस्युषश्च आदित्यस्य नमस्कारं ये कुर्वन्ति दिने दिने। दीर्घमायुर्बलं वीर्यं व्याधि शोक विनाशनम् सूर्य पादोदकं तीर्थ जठरे धारयाम्यहम्॥ ॐ मित्राय नम: ॐ रवये नम: ॐ सूर्याय नम: ॐ भानवे नम: ॐ खगाय नम: ॐ पूष्णे नम: ॐ हिरण्यगर्भाय नम: ॐ मरीचये नम: ॐ आदित्याय नम: ॐ सवित्रे नम: ॐ अर्काय नम: ॐ भास्कराय नम: ॐ श्री सवितृ सूर्यनारायणाय नम: आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीदमम् भास्कर। दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमोऽस्तु ते॥ *🔥दीप दर्शन🔥* शुभं करोति कल्याणम् आरोग्यम् धनसंपदा। शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपकाय नमोऽस्तु ते॥ दीपो ज्योति परं ब्रह्म दीपो ज्योतिर्जनार्दनः। दीपो हरतु मे पापं संध्यादीप नमोऽस्तु ते॥ *🌷 गणपति स्तोत्र 🌷* गणपति: विघ्नराजो लम्बतुन्ड़ो गजानन:। द्वै मातुरश्च हेरम्ब एकदंतो गणाधिप:॥ विनायक: चारूकर्ण: पशुपालो भवात्मज:। द्वादश एतानि नामानि प्रात: उत्थाय य: पठेत्॥ विश्वम तस्य भवेद् वश्यम् न च विघ्नम् भवेत् क्वचित्। विघ्नेश्वराय वरदाय शुभप्रियाय। लम्बोदराय विकटाय गजाननाय॥ नागाननाय श्रुतियज्ञविभूषिताय। गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते॥ शुक्लाम्बरधरं देवं शशिवर्णं चतुर्भुजं। प्रसन्नवदनं ध्यायेतसर्वविघ्नोपशान्तये॥ *⚡आदिशक्ति वंदना ⚡* सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥ *🔴 शिव स्तुति 🔴* कर्पूर गौरम करुणावतारं, संसार सारं भुजगेन्द्र हारं। सदा वसंतं हृदयार विन्दे, भवं भवानी सहितं नमामि॥ *🔵 विष्णु स्तुति 🔵* शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्ण शुभाङ्गम्। लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम् वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥ *⚫ श्री कृष्ण स्तुति ⚫* कस्तुरी तिलकम ललाटपटले, वक्षस्थले कौस्तुभम। नासाग्रे वरमौक्तिकम करतले, वेणु करे कंकणम॥ सर्वांगे हरिचन्दनम सुललितम, कंठे च मुक्तावलि। गोपस्त्री परिवेश्तिथो विजयते, गोपाल चूडामणी॥ मूकं करोति वाचालं पंगुं लंघयते गिरिम्‌। यत्कृपा तमहं वन्दे परमानन्द माधवम्‌॥ *श्रीराम वंदना* लोकाभिरामं रणरंगधीरं राजीवनेत्रं रघुवंशनाथम्। कारुण्यरूपं करुणाकरं तं श्रीरामचन्द्रं शरणं प्रपद्ये॥ ♦ *श्रीरामाष्टक♦* हे रामा पुरुषोत्तमा नरहरे नारायणा केशवा। गोविन्दा गरुड़ध्वजा गुणनिधे दामोदरा माधवा॥ हे कृष्ण कमलापते यदुपते सीतापते श्रीपते। बैकुण्ठाधिपते चराचरपते लक्ष्मीपते पाहिमाम्॥ 🔱 *एक श्लोकी रामायण* आदौ रामतपोवनादि गमनं हत्वा मृगं कांचनम्। वैदेही हरणं जटायु मरणं सुग्रीवसम्भाषणम्॥ बालीनिर्दलनं समुद्रतरणं लंकापुरीदाहनम्। पश्चाद्रावण कुम्भकर्णहननं एतद्घि श्री रामायणम्॥ 🍁 *सरस्वती वंदना* या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता। या वींणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपदमासना॥ या ब्रह्माच्युतशङ्करप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता। सा माम पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्याऽपहा॥ 🔔 *हनुमान वंदना* अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहम्‌। दनुजवनकृषानुम् ज्ञानिनांग्रगणयम्‌। सकलगुणनिधानं वानराणामधीशम्‌। रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥ मनोजवं मारुततुल्यवेगम जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठं। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणम् प्रपद्ये॥ 🌹 *स्वस्ति-वाचन* ॐ स्वस्ति न इंद्रो वृद्धश्रवाः स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः। स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्ट्टनेमिः स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु॥ * *शांति पाठ ** ऊँ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्‌ पूर्णमुदच्यते। पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते॥ ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्ष (गुँ) शान्ति:, पृथिवी शान्तिराप: शान्तिरोषधय: शान्ति:। वनस्पतय: शान्तिर्विश्वे देवा: शान्तिर्ब्रह्म शान्ति:, सर्व (गुँ) शान्ति:, शान्तिरेव शान्ति:, सा मा शान्तिरेधि॥ *॥ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति:॥* 🚩 बहुत ही सुंदर संग्रह इसे हर हिन्दू को अपने 'saver' में डाले या प्रिंट आउट ले । ऐसा संग्रह सरलता से नही मिलता । एक प्रति परिवार के बच्चों को भी दे । 🙏🙏🙏

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sapna amola Jan 27, 2020

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siva siva Jan 27, 2020

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