#खुद_को_कैसे_चेक_करे एक छोटा बच्चा एक बड़ी दुकान पर लगे टेलीफोन बूथ पर जाता हैं और मालिक से छुट्टे पैसे लेकर एक नंबर डायल करता हैं। दुकान का मालिक उस लड़के को ध्यान से देखते हुए उसकी बातचीत पर ध्यान देता हैं - लड़का - मैडम क्या आप मुझे अपने बगीचे की साफ़ सफाई का काम देंगी? औरत - (दूसरी तरफ से) नहीं, मैंने एक दुसरे लड़के को अपने बगीचे का काम देखने के लिए रख लिया हैं। लड़का - मैडम मैं आपके बगीचे का काम उस लड़के से आधे वेतन में करने को तैयार हूँ! औरत - मगर जो लड़का मेरे बगीचे का काम कर रहा हैं उससे मैं पूरी तरह संतुष्ट हूँ। लड़का - ( और ज्यादा विनती करते हुए) मैडम मैं आपके घर की सफाई भी फ्री में कर दिया करूँगा!! औरत - माफ़ करना मुझे फिर भी जरुरत नहीं हैं। धन्यवाद। लड़के के चेहरे पर एक मुस्कान उभरी और उसने फोन का रिसीवर रख दिया। दुकान का मालिक जो छोटे लड़के की बात बहुत ध्यान से सुन रहा था वह लड़के के पास आया और बोला- " बेटा मैं तुम्हारी लगन और व्यवहार से बहुत खुश हूँ, मैं तुम्हे अपने स्टोर में नौकरी दे सकता हूँ"। लड़का - नहीं सर मुझे जॉब की जरुरत नहीं हैं आपका धन्यवाद। दुकानमालिक- (आश्चर्य से) अरे अभी तो तुम उस औरत से जॉब के लिए इतनी विनती कर रहे थे !! लड़का - नहीं सर, मैं अपना काम ठीक से कर रहा हूँ की नहीं बस मैं ये चेक कर रहा था, मैं जिससे बात कर रहा था, उन्ही के यहाँ पर जॉब करता हूँ l भावार्थ :-ऐसे ही हमे भी रोजाना रात्रि मे सोने के वक्त चेक करना चाहिए की दिनभर मे क्या किये कितना भगवान को याद किये, कहि आपकी वजह से किसी को कोई दुख तो नही हुआ ! अगर अन्जाने मे हुआ भी तो उसी समय कमी को सुधारे और आगे से न हो क्योंकि गल्ती एक बार होती है बारबार नही ! "This is called Self Appraisal" ..

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कामेंट्स

Munesh Tyagi Mar 26, 2019
बहूत सुन्दर जी जयश्री राधे कृष्णा जी

🌷🌷🌷mukseh nagar🌷🌷🌷 Mar 26, 2019
श्री राधे ☘ व्रज में अब भी बहुतों को बहुत सुन्दर-सुन्दर अनुभव होते हैं | एक साधु थे | भगवान् के दर्शन के लिये सब जगह घूमे, पर कहीं कोई अनुभव नहीं हुआ | सोचा, अब अन्तिम जगह गिरिराज चलें ! वहां किसी-न-किसी रूप में दर्शन देने की भगवान् अवश्य कृपा करेंगे | व्रज में आये | न जान, न पहचान | एकादशी का दिन था | फलाहार कहाँ मिले ? एक बालक आया | बोला, ‘बाबाजी ! मेरी माँ एकादशी करती है, ब्राह्मण जिमाने के लिये आपको बुला रही है !’ बाबाजी गये, बुढिया ने प्रसाद बड़े प्रेम से दिया | भरपेट खाकर फिर बोले – ‘वह बालक कहाँ गया माई ?’ बुढिया बोली – ‘बालक कौन ?’ वे बोले – ‘जो हमे लाया था |’ बुढिया बोली – ‘मेरा न तो कोई लडका है, न मैंने किसी को भेजा था | आप आ गये | मैंने अतिथि समझकर आपका सत्कार कर दिया |’ ऐसी बहुत सी घटनाएँ होती रहती हैं | जय श्री राधे राधे जी....👏

Brajesh Sharma Mar 26, 2019
शुभ संध्या वंदन जी जय श्री राधे राधे जी जय श्री कृष्णा जी

Ashok Kumar Apr 21, 2019

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Amar Jeet Mishra Apr 21, 2019

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Vikash Srivastava Apr 21, 2019

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Shanti Pathak Apr 20, 2019

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