Jay shree radhe Krishna ji

Jay shree radhe Krishna ji

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P Pradhan Oct 20, 2018
शुभ रात्रि राधे राधे

Purvin kumar Apr 25, 2019

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Swami Lokeshanand Apr 25, 2019

आज अयोध्या में बहुत दिनों बाद दरबार लगा है। राजसिंहासन सूना पड़ा है, वशिष्ठजी सभाध्यक्ष हैं। भरतजी और राममाता ने दरबार में प्रवेश किया। विचित्र दृश्य है, होना तो यह चाहिए था कि भरतजी माँ को सहारा देते, यहाँ माँ ही भरतजी को सहारा देकर ला रहीं हैं। उनका अपने से खड़े रह पाना ही कठिन हो रहा है, चलना तो दूर की बात है। कौशल्याजी बाँई ओर के सिंहासन पर बैठ गईं, भरतजी ने कातर दृष्टि से पहले शत्रुघ्नजी की ओर देखा, फिर भूमि पर दृष्टि टिका ली। शत्रुघ्नजी ने तुरंत नीचे भूमि पर उतरीय बिछा दिया, भरतजी बैठ गए। गुरुजी धीर गंभीर वाणी से बोले, भरत! चक्रवर्ती महाराज ने श्रीराम को वनवास और तुम्हें यह राजपद दिया है, जैसे रामजी ने पिताजी की आज्ञा मानी, तुम भी मानो। कम से कम, जब तक रामजी लौटकर अयोध्या वापिस नहीं आ जाते, तब तक तो बैठो। अधिकार समझकर नहीं तो जिम्मेदारी समझकर, कर्तव्य समझकर ही बैठो, पर बैठो। रामजी के आ जाने पर, जो उचित समझो करना, पर अभी तो पद संभालना ही योग्य है। भरत! यह अयोध्या रूपी पौधा कितने कितने महापुरुषों के जीवन से सींचा गया है, क्या यह यूँही सूख जाएगा? राममाता का भी यही मत है, वे भी समझाती हैं, सभी मंत्री भी यही समझा रहे हैं। पर भरतजी का मत है कि पहले मैं भगवान का दर्शन करूंगा, राज्य संचालन बाद में देखा जाएगा। देखें, धर्म दो प्रकार का माना गया है, देह धर्म और आत्म धर्म। जहाँ देह धर्म आत्म धर्म में रुकावट बन जाता है, वहाँ महापुरुष देह धर्म छोड़ देता है। भरतजी भी देह धर्म छोड़ रहे हैं। भरतजी कहते हैं, मेरा जन्म रामजी की सेवा के लिए हुआ है, भोग भोगने के लिए नहीं हुआ। लोकेशानन्द का आग्रह है कि अब आप पाठकजन विचार करें, आपका जन्म किसलिए हुआ है?

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Vikram singh chauhan Apr 26, 2019

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Nitin Kharbanda Apr 25, 2019

🌹🌹🌸🌹🌹जय श्री राधे कृष्णा🌹🌹🌸🌹🌹 🍁 *विचार संजीवनी* 🍁 *संसार में आना, चौरासी लाख योनियों में भटकना हमारा काम नहीं है।* ये देश, गाँव, कुटुम्ब, धन, पदार्थ, शरीर आदि हमारे नहीं हैं और हम इनके नहीं हैं। भूल से हमने अपने को यहाँ रहने वाला मान लिया है। *इस भूल को मिटाना चाहिये, क्योंकि हम भगवान के अंश हैं, भगवान के धाम के हैं।* जहाँ से लौटकर नहीं आना पड़ता, वहाँ जाना हमारा खास काम है, जन्म-मरण से रहित होना हमारा खास काम है। परन्तु अपने घर जाने को, खुद की चीज़ को कठिन मान लिया, उद्योगसाध्य मान लिया ! वास्तव में यह कठिन नहीं है। भगवान की प्राप्ति तो सुगम है, क्योंकि भगवान सब देश में हैं, सब कॉल में हैं, सब वस्तुओं में हैं, सब व्यक्तियों में हैं, सब घटनाओं में हैं, सब परिस्थितियों में हैं और सभी भगवान में हैं। *हम हरदम भगवान के साथ हैं और भगवान हरदम हमारे साथ हैं। हम भगवान से और भगवान हमारे से कभी अलग हो नहीं सकते।*

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Mysuvichar Apr 25, 2019

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Vikram singh chauhan Apr 24, 2019

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sompal Prajapati Apr 25, 2019

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Vikram singh chauhan Apr 24, 2019

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