रूप चौदस नरक चौदस

रूप चौदस नरक चौदस

जय गुरुदेव जय दुधेश्वर महादेव

हिंदुतत्व जागरण अभियान

( रूप चौदस )

18 अक्टूबर को नरक चतुर्दशी का पर्व है इसे छोटी दिवाली,रूप चौदस या फिर हनुमान जयंती भी कहा जाता है। वैसे तो धनतेरस लेकर बड़ी दिवाली तक लक्ष्मी पूजन का बड़ा ही महत्व माना गया है और लेकिन छोटी दिवाली के दिन कृष्ण भगवान,यमराज और हनुमान जी की पूजा को महत्व दिया गया है।
ऐसे करें कृष्ण भगवान और हनुमान जी की पूजा
1.इस दिन सूर्योदय से पहले उठें और अपने पूरे शरीर पर तिल के तेल लगाएं। इसके बाद स्नान करें। मान्यता है कि जो कोई भी तिल के तेल से मालिश करने के बाद स्नान करता है उसे बहुत ही शुभ फल मिलता है। इस दिन सूर्योदय के बाद बिल्कुल नहीं नहाना चाहिए।
2.नहाने के बाद भगवान कृष्ण की पूजा करें। इसके लिए पूजा स्थल पर कृष्ण जी की मूर्ति स्थापना करें और दीप जलाएं।
3.अब भगवान कृष्ण का ध्यान कर उनकी आरती करें और जो प्रसाद का भोग लगाएं। प्रसाद में आप फल या कुछ मीठा भी रख सकते हैं।
4.चूंकि नरक चतुर्दशी को ही हनुमान जयंती कहा जाता है इसलिए इस दिन हनुमान जी की पूजा-अर्चना भी की जानी चाहिए। हनुमानजी की मूर्ति स्थापना करने के बाद दीप और धूप जलाएं और फूल चढ़ाएं। उन पर सिंदूर लगाएं। इसके बाद उनकी आरती करें।
4.आरती करने के बाद जो प्रसाद पूजा में रखा है उसे घर-परिवारवालों में या जितने लोगों में हो सके बांट दें।
यमराज की पूजा विधि
नरक चतुर्दशी में यमराज की पूजा का बड़ा महत्व है। कहा जाता है कि इस दिन यमराज का पूजन करने और उनका तर्पण करने से इंसान को नरक की यातनाएं भोगने से मुक्ति मिलती है और अकाल मृत्यु का भय भी समाप्त हो जाता है।
यमराज की पूजा सुबह भी की जा सकती है और शाम को भी। सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करने के बाद दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके बैठ जाएं और यमराज का ध्यान करें।
यमराज का ध्यान करने के लिए इस मंत्र का जाप करें-
ऊं यमाय नम:,ऊं धर्मराजाय नम:,ऊं मृत्यवे नम:,ऊं अन्तकाय नम:,ऊं वैवस्वताय नम:,ऊं कालाय नम:,ऊं सर्वभूतक्षयाय नम:।
ऊं औदुम्बराय नम:,ऊं दध्राय नम:,ऊं नीलाय नम:,ऊं परमेष्ठिने नम:,ऊं वृकोदराय नम:,ऊं चित्राय नम:,ऊं चित्रगुप्ताय नम:।।
इस मंत्र का उच्चारण करते समय तीन बार तिलयुक्त जलांजलि दें और यमराज का तर्पण करें। ऐसा करने से इंसान को ना सिर्फ उसके पापों से मुक्ति मिलती है बल्कि अकाल मृत्यु का भय भी समाप्त हो जाता है।
इसके बाद शाम को तिल के तेल के 14 दीए जलाएं और उनका पूजन करके मंदिर से लेकर घर के हर कमरे,नल,पानी की टंकी और तुलसी के पौधे में रख दें।
नरक चतुदर्शी का शुभ मुहूर्त
अभ्यंग स्नान शुभ मुहूर्त-प्रात:04:47 से प्रात:06:27 तक रहेगा।
नरक चतुर्दशी के उपाय
नरक चतुर्दशी के दिन कुछ उपाय भी किए जा सकते हैं जिनसे आपको सालभर समृद्धि मिलेगी और धन की प्राप्ति भी होगी।
1.लिंग पुराण में कहा गया है कि अगर इस दिन उड़द के पत्तों वाले साग का भोजन किया जाए तो पापों से मुक्ति मिलती है।
2.नरक चतुर्दशी के दिन शाम के समय घर के मेन गेट पर चार बत्तियों वाला दीया जलाएं और पूर्व दिशा की ओर मुंह करके दीपदान करें। ऐसा करने से पितरों को स्वर्ग का मार्ग दिखता है
और उन्हें नरक से मुक्ति मिलती हैं


श्रीमहंत नारायण गिरि
श्रीदूधेश्वर नाथ मंदिर
गाजियाबाद उत्तर प्रदेश

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कामेंट्स

Babita Sharma Oct 18, 2017
पूजा से भरी थाली है, चारों ओर खुशहाली है, आओ मिलके मनाए ये दिन, आज छोटी दिवाली है। आपको और आपके परिवार को ढेरों शुभकामनाएं।।

Asha Mar 7, 2021

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dhruv wadhwani Mar 7, 2021

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Ramu bhai j Mar 7, 2021

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