Manish Bansal
Manish Bansal Dec 28, 2016

Paday mata mandir didwana rajasthan

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Poonam Aggarwal Feb 27, 2021

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Neha Sharma, Haryana Feb 27, 2021

🙏*जय श्री शनिदेव*🙏*शुभ प्रभात् नमन*🙏 🌞 ~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~ 🌞 ⛅ *दिनांक 27 फरवरी 2021* ⛅ *दिन - शनिवार* ⛅ *विक्रम संवत - 2077* ⛅ *शक संवत - 1942* ⛅ *अयन - उत्तरायण* ⛅ *ऋतु - वसंत* ⛅ *मास - माघ* ⛅ *पक्ष - शुक्ल* ⛅ *तिथि - पूर्णिमा दोपहर 01:46 तक तत्पश्चात प्रतिपदा* ⛅ *नक्षत्र - मघा सुबह 11:18 तक तत्पश्चात पूर्वाफाल्गुनी* ⛅ *योग - सुकर्मा रात्रि 07:38 तक तत्पश्चात धृति* ⛅ *राहुकाल - सुबह 09:56 से सुबह 11:24 तक* ⛅ *सूर्योदय - 07:01* ⛅ *सूर्यास्त - 18:41* ⛅ *दिशाशूल - पूर्व दिशा में* ⛅ *व्रत पर्व विवरण - माघी पूर्णिमा, माघ स्नान समाप्त, हरिद्वार कुंभ स्नान* 💥 *विशेष - पूर्णिमा के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)* 💥 *ब्रह्म पुराण' के 118 वें अध्याय में शनिदेव कहते हैं- 'मेरे दिन अर्थात् शनिवार को जो मनुष्य नियमित रूप से पीपल के वृक्ष का स्पर्श करेंगे, उनके सब कार्य सिद्ध होंगे तथा मुझसे उनको कोई पीड़ा नहीं होगी। जो शनिवार को प्रातःकाल उठकर पीपल के वृक्ष का स्पर्श करेंगे, उन्हें ग्रहजन्य पीड़ा नहीं होगी।' (ब्रह्म पुराण')* 💥 *शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष का दोनों हाथों से स्पर्श करते हुए 'ॐ नमः शिवाय।' का 108 बार जप करने से दुःख, कठिनाई एवं ग्रहदोषों का प्रभाव शांत हो जाता है। (ब्रह्म पुराण')* 💥 *हर शनिवार को पीपल की जड़ में जल चढ़ाने और दीपक जलाने से अनेक प्रकार के कष्टों का निवारण होता है ।(पद्म पुराण)* 🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞 🌷 *शराब की आदत छुडाने के लिए* 🌷 🍺 *जिन्हें शराब पीने की आदत हो वो रोज शराब की जगह गौझरण अर्क पियें । इससे उनकी शराब की लत छूट जाएगी, साथ ही उनकी कई बीमारियाँ भी दूर होंगी ।* 🙏🏻 *पूज्य बापूजी - Rajokari 30th Nov. 10* 🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞 🌷 *गले व छाती के रोगों में क्या करें* 🌷 ➡ *१) गले में दर्द, खाँसी, कफ, संक्रमण (इन्फेक्शन ) आदि में आधा चम्मच पिसी हल्दी मुँह में रखकर मुँह बंद कर लें | लार के साथ हल्दी अंदर जाने से उपरोक्त सभी बीमारियों में आराम मिलता है | बच्चों की टॉन्सिल्स की समस्या में ऑपरेशन न कराके इस प्रयोग से लाभ लें | (बच्चों के लिए हल्दी की मात्रा – पौन चम्मच)* ➡ *२) छाती की गम्भीर बीमारियाँ जैसी – डीएमए, पुरानी खाँसी, न्युमोनिया आदि में सुबह आधा कप ताजा गोमूत्र कपड़े से ७ बार छानकर पीना लाभदायक है | गोमूत्र नहीं मिले तो आश्रम की गौशाला में बना हुआ १०-१५ ग्राम गोझरण अर्क और उतना ही पानी मिलाकर लेना भी लाभदायी है | ५ – ६ महिने तक लगातार गोमूत्र पीने से क्षयरोग (टी.बी.) में भी आराम मिलता है |* ➡ *३) दमे में प्रतिदिन खाली पेट १ – २ ग्राम दालचीनी का चूर्ण गुड़ या शहद मिलाकर गरम पानी के साथ लेना हितकारी है |* 🙏🏻 *ऋषिप्रसाद – मार्च २०१४ से* 🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞 🌷 *सुख-शांति व बरकत के उपाय* 🌷 🌿 *· तुलसी को रोज जल चढायें तथा गाय के घी का दीपक जलायें |* 🍃 *· सुबह बिल्वपत्र पर सफेद चंदन का तिलक लगाकर संकल्प करके शिवलिंग पर जल अर्पित करें तथा पूरी श्रद्धा से प्रार्थना करें |* 🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞 🙏🏻🌷💐🌸🌼🌹🍀🌺💐🙏🏻 ॥श्री शनिदेव जी की आरती॥ -*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-* जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी। सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी॥ जय॥ श्याम अंक वक्र दृष्ट चतुर्भुजा धारी। नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी॥ जय॥ क्रीट मुकुट शीश रजित दिपत है लिलारी। मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी॥ जय॥ मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी। लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी॥ जय॥ देव दनुज ऋषि मुनि सुमरिन नर नारी। विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी ॥जय॥ ********************************************* आरती श्री शनिदेव जय गणेश, गिरजा, सुवन, मंगल करण कृपाल। दीनन के दुख दूर करि, कीजै नाथ निहाल॥ जय-जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहुं विनय महाराज। करहुं कृपा रक्षा करो, राखहुं जन की लाज॥ प्रेम विनय से तुमको ध्याऊं, सुधि लो बेगि हमारी॥ आरती श्री शनिदेव तुम्हारी॥ वेद के ज्ञाता, जगत-विधाता तेरा रूप विशाला। कर्म भोग करवा भक्तों का पाप नाश कर डाला। यम-यमुना के प्यारे भ्राता, भक्तों के भयहारी। आरती श्री शनिदेव तुम्हारी॥ स्वर्ण सिंहासन आप विराजो, वाहन सात सुहावे। श्याम भक्त हो, रूप श्याम, नित श्याम ध्वजा फहराये। बचे न कोई दृष्टि से तेरी, देव-असुर नर-नारी॥ आरती श्री शनिदेव तुम्हारी उड़द, तेल, गुड़, काले तिल का तुमको भोग लगावें। लौह धातु प्रिय, काला कपड़ा, आंक का गजरा भावे। त्यागी, तपसी, हठी, यती, क्रोधी सब छबी तिहारी। आरती श्री शनिदेव तुम्हारी॥ शनिवार प्रिय शनि, तेलाभिषेक करावे। शनिचरणानुरागी मदन तेरा आशीर्वाद नित पावे। छाया दुलारे, रवि सुत प्यारे, तुझ पे मैं बलिहारी। आरती श्री शनिदेव तुम्हारी॥

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