Jagdish Kumar
Jagdish Kumar Sep 7, 2017

रोज सुबह हल्दी का पानी पीने से ये होते है फायदे ।

रोज सुबह हल्दी का पानी पीने से ये होते है फायदे ।

रोज सुबह हल्दी का पानी पीने से ये होते है फायदे
हम में से बहुत से लोग सुबह उठते ही हल्का गर्म पानी पीते हैं, ताकि पेट अच्छी तरह साफ हो।लेकिन एक अमेरिकन स्टडी के मुताबिक, उठते ही गुनगुने पानी में हल्दी मिलाकर पी जाए तो इसके फायदे कई गुना बढ़ जाते हैं।
हल्दी में मौजूद करक्यूमिन डाइजेशन में मदद करता है, जिससे पेट की बीमारियों को खतरा टलता है। इसके अलावा हल्दी की एंटीऑक्सीडेंट और एंटीबायोटिक प्रॉपर्टी से भी हमें कई फायदे मिलते हैं। आयुर्वेद कहता है कि हल्दी शरीर के वात, पित्त और कफ तीनों तरह दोष नष्ट करती है। इससे इम्यूनिटी बढ़ती है और इन्फेक्शन का खतरा टलता है। आज हम आपको बता रहे हैं कि रोज सुबह हल्दी वाला पानी पीने से आपके शरीर को क्या फायदे होते है।
कैसे बनाएं यह पानी- हल्दी वाला पानी बनाने के लिए एक गिलास पानी गुनगुना करें। इसमें आधा छोटा चम्मच हल्दी पाउडर, आधा नींबू का रस और एक चम्मच शहद मिला लें। इसे छानकर पी सकते हैं। रेग्युलर सुबह खाली पेट ये पानी पीने से कई फायदे मिलते हैं।

हल्दी का पानी पीने के फायदे

हेल्दी हार्ट- हल्दी वाला पानी पीने से ब्लड प्यूरीफाई होता है और क्लोटिंग की आशंका घटती है। इससे बॉडी में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और हार्ट हेल्दी रखने में मदद मिलती है।

टॉक्सिन्स- हल्दी वाला पानी पीने से शरीर के टॉक्सिन्स निकालने में मदद मिलेगी। इससे बॉडी फंक्शन्स बेहतर बनेंगे।लिवर और किडनी से जुडी प्रॉब्लम्स का खतरा भी टलेगा।

 
मेमोरी- हल्दी मौजूद करक्यूमिन ब्रेन फंक्शन्स को बेहतर बनाता है। रोज़ इसका पानी पिएंगे, तो दिमाग तेज़ होगा और बढ़ती उम्र में भी मेमोरी स्ट्रांग बनाए रखने मिलेगी।

उम्र का असर- हल्दी के पानी में भरपूर एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं। रेग्युलर इसे पीने से बढ़ती उम्र का असर कम होता है और लंबे समय तक यंग बने रहने में मदद मिलती है।

 
हेल्दी स्किन- हल्दी वाला पानी पीने से खून साफ़ होता है जिससे पिम्पल्स और स्किन इंफेक्शन जैसी प्रॉब्लम्स से बचाव होता है। स्किन का ग्लो बढ़ाने में भी मदद मिलती है।

सूजन- बॉडी के किसी हिस्से में सूजन आने से परेशान हैं, तो हल्दी वाला पानी पीने से काफी फायदा होगा। इसमें मौजूद करक्यूमिन सूजन दूर करने में मदद करता है।

 
कैंसर- हल्दी में भरपूर एंटीऑक्सीडेंट्स होते है, जो कैंसर सेल्स को बढ़ने से रोकते हैं। रेग्युलर इसका पानी पिएंगे, तो कैंसर का खतरा टलेगा।

दर्द से राहत- हल्दी के पानी मौजूद करक्यूमिन जोड़ों का दर्द दूर करने में मदद करता है।

डाइजेशन- रोज़ हल्दी वाला पानी पीने से डाइजेशन बेहतर होता है। इससे गैस और कब्ज़ की प्रॉब्लम दूर होती है।

वजन- हल्दी वाला पानी बॉडी के टॉक्सिन्स बाहर निकालने और मेटाबॉलिज़्म बढ़ाने में मदद करता है। इससे मोटापा घटाने में मदद मिलती है।

डायबिटीज़- रेग्युलर हल्दी वाला पानी पीने से बॉडी जा ग्लूकोस बैलेंस होता है। इससे डायबिटीज़ कण्ट्रोल में रहती है। इसका खतरा भी टलता है।

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कामेंट्स

Jagdish Kumar Sep 7, 2017
@shashi.sharma.16 ratri me sote samay pi sakte hai yadi jyada problem ho to.is baat ka bhi dhyan rakhna hoga kishi bhi chij ki ati sarvatra varjayte.

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*दही में नमक डाल कर न खाऐं* कभी भी आप दही को नमक के साथ मत खाईये। दही को अगर खाना ही है, तो हमेशा दही को मीठी चीज़ों के साथ खाना चाहिए, जैसे कि गुड के साथ, बूरे के साथ आदि। इस क्रिया को और बेहतर से समझने के लिए आपको बाज़ार जाकर किसी भी साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट की दूकान पर जाना है, और वहां से आपको एक लेंस खरीदना है, अब अगर आप दही में इस लेंस से देखेंगे तो आपको छोटे-छोटे हजारों बैक्टीरिया नज़र आएंगे। ये बैक्टीरिया जीवित अवस्था में आपको इधर-उधर चलते फिरते नजर आएंगे. ये बैक्टीरिया जीवित अवस्था में ही हमारे शरीर में जाने चाहिए, क्योंकि जब हम दही खाते हैं तो हमारे अंदर एंजाइम प्रोसेस अच्छे से चलता है। *हम दही केवल बैक्टीरिया के लिए खाते हैं।* दही को आयुर्वेद की भाषा में जीवाणुओं का घर माना जाता है, अगर एक कप दही में आप जीवाणुओं की गिनती करेंगे तो करोड़ों जीवाणु नजर आएंगे। अगर आप मीठा दही खायेंगे तो ये बैक्टीरिया आपके लिए काफ़ी फायदेमंद साबित होंगे। *वहीं अगर आप दही में एक चुटकी नमक भी मिला लें तो एक मिनट में सारे बैक्टीरिया मर जायेंगे* और उनकी लाश ही हमारे अंदर जाएगी जो कि किसी काम नहीं आएगी। अगर आप 100 किलो दही में एक चुटकी नामक डालेंगे तो दही के सारे बैक्टीरियल गुण खत्म हो जायेंगे क्योंकि नमक में जो केमिकल्स है वह जीवाणुओं के दुश्मन है। आयुर्वेद में कहा गया है कि दही में ऐसी चीज़ मिलाएं, जो कि जीवाणुओं को बढाये ना कि उन्हें मारे या खत्म करे। दही को गुड़ के साथ खाईये, गुड़ डालते ही जीवाणुओं की संख्या मल्टीप्लाई हो जाती है और वह एक करोड़ से दो करोड़ हो जाते हैं थोड़ी देर गुड मिला कर रख दीजिए। बूरा डालकर भी दही में जीवाणुओं की ग्रोथ कई गुना ज्यादा हो जाती है। मिश्री को अगर दही में डाला जाये तो ये सोने पर सुहागे का काम करेगी। सुना है कि भगवान कृष्ण भी दही को मिश्री के साथ ही खाते थे। पुराने जमाने में लोग अक्सर दही में गुड़ या मिश्री डाल कर दिया करते थे। 👉🏼कृपया आगे शेयर अवश्य करें।

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Madan Kaushik Mar 25, 2020

****अपना पोस्ट*** **नक्षत्रवाणी** *༺⊰०║|। ॐ ।|║०⊱༻*  गजाननं भूतगनादि सेवितम, कपित्थजम्बू फलचारु भक्षणम। उमासुतं शोकविनाशकारकम, नमामि विघ्नेश्वर पादपंकजम।। श्रीमते रघुवीराय सेतूल्लङ्घितसिन्धवे। जितराक्षसराजाय रणधीराय मङ्गलम्।। भुजगतल्पगतं घनसुन्दरं गरुडवाहनमम्बुजलोचनम् । नलिनचक्रगदाकरमव्ययं भजत रे मनुजाः कमलापतिम् ।।  क्यों भटके मन बावरा, दर-दर ठोकर खाये...! शरण श्याम की ले ले प्यारे, जनम सफल हो जाये...!! 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 ~~~~~~~~~~~~~~~~~~ मित्रों...! सबसे पहले तो नक्षत्रवाणी की पोस्टिंग में व्यस्तत्तम शेड्यूल के चलते ना चाहते हुए भी होने वाले विलंब के लिए आप सभी से हृदयपूर्वक क्षमा प्रार्थना सहित.....🙏🙏 आप सभी परम प्रिय धर्मपारायण, ज्योतिषविद्या प्रेमी विद्वतजनों को आचार्य/पं.मदन तुलसीराम जी कौशिक मुंबई (सिरसा-हरियाणा वाले) की ओर से सादर-सप्रेम 🌸 जय गणेश 🌸 जय अंबे 🌸 *जय श्री कृष्ण*🌷मंगल प्रभात🌷इसी के साथ आप सभी परम भागवत, उत्सव प्रेमी, मातृशक्ति उपासक एवं राष्ट्रभक्त मित्र-बंन्धुओं को आज *विक्रमीय सम्वत्सर 2077 प्रारम्भ, वर्षफल श्रवण विधान, चैत्र शुक्ल पक्ष प्रारम्भ, वासन्त नवरात्र प्रारम्भ (नवरात्रि का पहला दिन, माँ शैलपुत्री पूजन/व्रत, कलश स्थापना (06:19 से 07:17 तक विशेष, वैसे पूरा दिन शुभ), ध्वजारोहण, वर्षपति पूजा, गुड़ी पड़वा (महाराष्ट्र), आरोग्य व्रत, विद्या व्रत, नव सम्वत्सरोत्सव, आर्य समाज स्थापना दिवस (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, नव संवत्सर), गुरु श्री अमरदास गुरयाई दिवस एवं श्री महर्षि गौतम जयन्ती* की भी बहुत-2 हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं...!!!**💐💐 ※══❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖══※ आइये...! अब चलें आपके प्रिय पोस्ट 'नक्षत्रवाणी' के अंतर्गत आज कुछ विशेष महत्वपूर्ण जानकारी, दृकपंचांग, चन्द्र राशिफल' एवं 'आरोग्य मंत्र' की ज्ञानयात्रा पर...🙏 ```༺⊰🕉⊱༻ ``` *༺⊰०║|। ॐ ।|║०⊱༻* ☘️🌸!! ॐ श्री गणेशाय नमः!! 🌸☘️ ****************************** 𴀽𴀊🕉श्री हरिहरौविजयतेतराम्🕉 🇬🇧 *आंग्ल मतानुसार* :- आज दिनांक *25 मार्च 2020 ईस्वी*बुधवार/वेडनसडे प्रस्तुत है ««« *आज का दृकपंचांग:««« (दिनमान को छोड़ कर यहां दिए गए सभी तिथि, नक्षत्र आदि के समय समाप्ति काल हैं।) कलियुगाब्द................5122 विक्रम संवत्...............2077 (प्रमादी नाम) शक संवत्.................1942 मास......................चैत्र पक्ष.....................शुक्ल तिथी.................प्रतिपदा संध्या 05.26 पर्यंत पश्चात द्वितीया वार/दिन......बुधवार नक्षत्र.....................रेवती दुसरे दिन प्रातः 07.11 पर्यंत पश्चात अश्विनी योग....................ब्रह्मा दोप 03.26 पर्यंत पश्चात इंद्र करण....................बव संध्या 05.27 पर्यंत पश्चात बालव रवि.................उत्तरायण सूर्योदय......प्रातः 06.42.00 पर सूर्यास्त......संध्या 06.47.00 पर चंद्रोदय.......प्रातः 07.19.00 सूर्य राशि................मीन चन्द्र राशि................मीन ऋतु.....................बसंत दिन......................बुधवार 🚦 *दिशाशूल* :- उत्तरदिशा - यदि बहुत ही आवश्यक हो तो पान, पिस्ता, धनिया या तिल का सेवन कर यात्रा प्रारंभ करें। ☸ शुभ अंक.............7 🔯 शुभ रंग.............हरित/हरा 👁‍🗨 *राहुकाल* :- मध्याह्न 12.44 से 02.15 तक । गुलिक काल:- पूर्वाह्न 11.14 से 12.44 तक 🙏अति विशिष्ट जानकारी:👇 नव सम्वत का नाम - प्रमादी सम्वत का राजा - बुध सम्वत का मंत्री - चन्द्र सम्वत का वास - वैश्य के घर सम्वत का वाहन - गीदड़ 🙏👉⚜ *तिथि/पर्व विशेष विवरण :*👇 *चैत्र शुक्ल प्रतिपदा :* हिन्दू पंचांग के बारह महीनों के क्रम में पहले चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा वर्ष भर की सभी तिथियों में इसलिए सबसे अधिक महत्व रखती है क्योंकि मान्यता के अनुसार इसी तिथि पर ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की। इस तिथि को प्रथम स्थान मिला, इसलिए इसे प्रतिपदा कहा गया है। जब ब्रह्मा ने सृष्टि का प्रारंभ किया उस समय इसे प्रवरा तिथि सूचित किया था, जिसका अर्थ है सर्वोत्तम । इस अर्थ में यह वर्ष का सर्वोत्तम दिन है जो सिखाता है कि हम अपने जीवन में सभी कामों में, सभी क्षेत्रों में जो भी कर्म करें, उनमें हमारा स्थान और हमारे कर्म लोक कल्याण की दृष्टि से श्रेष्ठ स्थान पर रखे जाने योग्य हों। इसे संवत्सर प्रतिपदा भी कहते हैं। सिंधी समाज का पर्व चेटीचंड भी वर्ष प्रतिपदा के अगले दिन शुरू होता है। शुक्ल पक्ष में चांद अपने पूरे सौन्दर्य के साथ आकाश में विराजमान होता है। इसलिए चैत्रचंद्र का देशज रूप हुआ चैतीचांद और फिर सिंधी में हुआ चेटीचंड। महाराष्ट्र में यह पर्व गुड़ी पाड़वा ( गुढी पाड़वा) के नाम से मनाया जाता है। वैसे नवसंवत्सर के लिए गुड़ी पड़वा अब समूचे देश में सामान्य तौर पर जाना जाने लगा है। महान गणितज्ञ भास्कराचार्य ने प्रतिपादित किया है कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से दिन-मास-वर्ष और युगादि का आरंभ हुआ है। *नववर्ष प्रतिपदा मनाने के महत्वपूर्ण पौराणिक तथ्य :* 1. वासंती नवरात्री का प्रारम्भ | 2. नवसंवत्सर आरम्भ | 3. राम राज्याभिषेक | 4. युधिष्ठिर राज्याभिषेक | 5. झुलेलाल जयंती | 6. स्वामी दयानंद जन्मदिवस | 7. गुरु अंगददेव जी का जन्मदिवस | 8. ब्रह्मा जी द्वारा सृष्टि की रचना | 9. आद्यासरसंघचालक श्री केशव बलिराम हेडगेवार जी का जन्मदिवस | 10. महाराज विक्रमादित्य द्वारा नूतन संवत्सर प्रारंभ | ******************************************* 🌞 *उदय लग्न मुहूर्त :-* *मीन* 05:56:35 07:27:32 *मेष* 07:27:32 09:08:14 *वृषभ* 09:08:14 11:06:51 *मिथुन* 11:06:51 13:20:32 *कर्क* 13:20:32 15:36:43 *सिंह* 15:36:43 17:48:32 *कन्या* 17:48:32 19:59:11 *तुला* 19:59:11 22:13:48 *वृश्चिक* 22:13:48 24:29:59 *धनु* 24:29:59 26:35:37 *मकर* 26:35:37 28:22:46 *कुम्भ* 28:22:46 29:56:35 ⚜ *चौघडिया :-* प्रात: 06.28 से 07.59 तक लाभ प्रात: 07.59 से 09.30 तक अमृत प्रात: 11.01 से 12.32 तक शुभ दोप 03.33 से 05.04 तक चंचल सायं 05.04 से 06.35 तक लाभ रात्रि 08.04 से 09.33 तक शुभ । *************************** ✍ आज के विशेष योगायोग/युति संयोग, वेध, ग्रहचार (ग्रहचाल), व्रत/पर्व/प्रकटोत्सव, जयंती/जन्मोत्सव व मोक्ष दिवस/स्मृतिदिवस/पुण्यतिथि आदि 🙏👇:- 👉 **आज चैत्र कृष्ण पक्ष बुधवार को वर्ष का 354 वां दिन 👉 चैत्र सुदी प्रतिपदा 17:26 तक पश्चात् द्वितीया शुरु, विक्रमीय सम्वत्सर 2077 प्रारम्भ, वर्षफल श्रवण, चैत्र शुक्ल पक्ष प्रारम्भ, वासन्त नवरात्र प्रारम्भ (नवरात्रि का पहला दिन, माँ शैलपुत्री पूजन/व्रत, कलश स्थापना ( 06:19 से 07:17 तक विशेष , वैसे पूरा दिन शुभ) , ध्वजारोहण, वर्षपति पूजा, गुड़ी पड़वा, पंचक जारी, आरोग्य व्रत, विद्या व्रत, चन्द्रदर्शन शुभ (कल भी), नव सम्वत्सरोत्सव, आर्य समाज स्थापना दिवस (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, नव संवत्सर), गुरु श्री अमरदास गुरयाई दिवस, श्री महर्षि गौतम जयन्ती, श्री विजय गोविन्द हलंकर दिवस (मणिपुर) व श्री गणेश शंकर विद्यार्थी बलिदान दिवस।** 🙏 💥 *विशेष ध्यातव्य 👉 प्रतिपदा को कुष्मांड/पेठा का सेवन नहीं करना चाहिए, इससे धन का नाश होता है। *(ब्रह्म वैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड 27:29:34)* 📿 *आज का आराधना/उपासना मंत्र* *🚩 🌞🕉️ ॐ बुं बुधाय नमः‼️ 🌞🚩* *🚩🎪🕉 ॐ मंगलमूर्तये नमः।।🎪🚩* 🏡 *वास्तु टिप्स* उत्तरामुखी भूखंड पर बना भवन:-ऐसे भूखंड पर बने भवन में मुख्य द्वार या प्रवेश द्वार यदि उत्तर दिशा की ओर ही हो तो आश्चर्यजनक लाभ होता है। 🌷🙏👉 ध्यान दें...! मित्रों आज Corona वायरस जनित इस Covid 19 नामक महामारी के कारण हमारी इन वैदिक परम्पराओं व मान्यताओं की आवश्यकता बहुत अधिक बढ़ गई है। इसमें पर्यावरण संरक्षण व शुद्धि हेतु दैनिक अग्निहोत्र व हर प्रकार के वायरस व दूसरे की नेगेटिव एनर्जी से बचने के लिए किसी से भी दूर से ही अभिवादन या नमस्ते करके मिलना तो मात्र कुछ एक उदाहरण भर हैं। अब देखिए क्या-क्या वैदिक कार्य वापिस लौटता है..? परसों से साधना का महाशुभ काल नवरात्रि भी प्रारंभ होने जा रहा है। आप अगर अपने घर पर किसी विद्वान पुरोहित/आचार्य को बुलाकर विधिवत महामृत्युंजय या नवरात्र अनुष्ठान संपन्न करवाने में सक्षम नहीं हैं तो आप हमसे अविलंब संपर्क करें, हम आपको इसका समाधान या आसान मार्ग बतायेंगे और शास्त्रों पुराणों में वर्णित दिव्य मंत्रों का लाभ दिलाने का प्रयास करेंगे। अपनी अन्य समस्याओं के निदान व निवारण के लिए भी आप हमसे साधना के इस स्वर्णिम काल देखते हुए बदली हुई राष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण अब भी संपर्क कर सकते हैंऔर लाभ ले सकते हैं। धन्यवाद...! *********** 📯 *संस्कृत सुभाषितानि :-* पिबन्ति नद्यः स्वयमेव नाम्भः स्वयं न खादन्ति फलानि वृक्षाः । नादन्ति सस्यं खलु वारिवाहाः परोपकाराय सतां विभृतयः ॥ *अर्थात :-* नदियाँ अपना पानी खुद नहीं पीती, वृक्ष अपने फल खुद नहीं खाते, (खुद ने उगाया हुआ) अनाज खुद नहीं खाते । सत्पुरुषों का जीवन परोपकार केलिए ही होता है । 🍃 *आरोग्य मंत्र:*- 🍌 *केले के औषधीय गुण -* *1. ब्लड शुगर का स्तर कम करे -* केले के औषधीय गुण में ब्लड शुगर के स्तर को कम करना शामिल है। केला पेक्टिन का समृद्ध स्रोत है, यह एक प्रकार का फाइबर है। इसके अलावा केले में रेजिसटेंट स्टार्च होता है, जो घुलनशील फाइबर की तरह कार्य करता है और पाचन में बहुत ही सहायता करता है। पेक्टिन और रेजिसटेंट स्टार्च ब्लड शुगर का स्तर कम कर सकता है और आपके पेट को खाली करके भूख को कम कर सकता है। ⚜ *आज का चन्द्र राशिफल :-* 🐏 *राशि फलादेश मेष :-* *(चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, आ)* भेंट व उपहार की प्राप्ति संभव है। रोजगार प्राप्ति के प्रयास सफल रहेंगे। शेयर मार्केट व म्युचुअल फंड इत्यादि से लाभ होगा। समय की अनुकूलता का लाभ लें। सट्टे व लॉटरी से दूरी बनाए रखें। धन प्राप्ति सुगम होगी। उत्साह बना रहेगा। प्रमाद न करें। 🐂 *राशि फलादेश वृष :-* *(ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)* घर में अतिथियों का आगमन होगा। शुभ समाचार प्राप्त होंगे। आत्मसम्मान बना रहेगा। कारोबारी लाभ होता रहेगा। नौकरी में चैन रहेगा। घर-बाहर प्रसन्नता बनी रहेगी। कोई बड़ा कार्य करने का मन बनेगा। निर्णय लेने की क्षमता बढ़ेगी। आय में वृद्धि होगी। 👫 *राशि फलादेश मिथुन :-* *(का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह)* रुके कार्य पूर्ण होने के योग हैं। मेहनत का फल पूरा-पूरा मिलेगा। कार्य की प्रशंसा होगी। नौकरी में प्रभाव वृद्धि होगी। मित्रों तथा संबंधियों का सहयोग करने का अवसर प्राप्त होगा। शेयर मार्केट व म्युचुअल फंड जैसे स्थानों में सफलता प्राप्त होगी। प्रेम-प्रसंग अनुकूल रहेंगे। 🦀 *राशि फलादेश कर्क :-* *(ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)* मेहनत अधिक तथा लाभ कम रहेगा। वाणी पर नियंत्रण रखें। फिजूल की बातों पर ध्यान न दें। स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। किसी से बिना वजह विवाद हो सकता है। लेन-देन में जल्दबाजी न करें। मन में संवेदनशीलता अधिक रहेगी। चिड़चिड़ापन रहेगा। व्यापार ठीक चलेगा। 🦁 *राशि फलादेश सिंह :-* *(मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)* शैक्षणिक व शोध कार्यों में सफलता मिलेगी। वरिष्ठ व्यक्तियों का सहयोग व मार्गदर्शन प्राप्त होगा। किसी पारिवारिक मांगलिक कार्यक्रम का आयोजन हो सकता है। यात्रा मनोरंजक रहेगी। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। प्रसन्नता व संतुष्टि में वृद्धि होगी। प्रमाद न करें। 👩🏻‍🦰 *राशि फलादेश कन्या :-* *(ढो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)* स्थायी संपत्ति में वृद्धि के योग हैं। रोजगार प्राप्ति के प्रयास सफल रहेंगे। किसी बड़े सौदे से बड़ा लाभ हो सकता है। नौकरी में प्रभाव क्षेत्र बढ़ेगा। धन प्राप्ति सुगम होगी। किसी बड़ी समस्या का हल सहज ही मिल सकता है। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी। जल्दबाजी न करें। ⚖ *राशि फलादेश तुला :-* *(रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)* राजकीय सहयोग समय पर प्राप्त होगा। लाभ के अवसर बढ़ेंगे। प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। भेंट व उपहार पर व्यय होगा। पारिवारिक सहयोग से कार्य में सफलता प्राप्त होगी। कारोबारी लाभ में वृद्धि होगी। समय की अनुकूलता का लाभ लें। झंझटों से दूर रहें। 🦂 *राशि फलादेश वृश्चिक :-* *(तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)* चोट व दुर्घटना से शारीरिक हानि की आशंका प्रबल है। लापरवाही न करें। स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। किसी भी व्यक्ति के उकसाने में नहीं आएं। अपने विवेक से कार्य करें। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। व्यापार-व्यवसाय ठीक चलेगा। आय में निश्चितता रहेगी। कार्य की गति धीमी रहेगी। 🏹 *राशि फलादेश धनु :-* *(ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे)* पूजा-पाठ में मन लगेगा। सत्संग का लाभ मिलेगा। कानूनी अड़चन दूर होकर स्थिति अनुकूल बनेगी। कारोबार में वृद्धि संभव है। मित्रों का सहयोग प्राप्त होगा। नौकरी में चैन रहेगा। स्वास्थ्य का पाया कमजोर रह सकता है। स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें। जल्दबाजी न करें। 🐊 *राशि फलादेश मकर :-* *(भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी)* कार्यस्थल पर सुधार या परिवर्तन हो सकता है। नई योजना बनेगी। मित्रों व रिश्तेदारों का सहयोग कर पाएंगे। घर-बाहर पूछ-परख रहेगी। कारोबार में वृद्धि होगी। नए अनुबंध हो सकते हैं। प्रतिद्वंद्विता बढ़ेगी। ईर्ष्यालु व्यक्तियों से सावधान रहें। निवेश शुभ फलदायक रहेगा। 🏺 *राशि फलादेश कुंभ :-* *(गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)* यात्रा लाभदायक रहेगी। नौकरी में प्रभाव बढ़ेगा। डूबी हुई रकम प्राप्ति के योग हैं, प्रयास करें। सफलता मिलेगी। शेयर मार्केट व मुच्युअल फंड लाभदायक रहेगा। जल्दबाजी न करें। समय की अनुकूलता का लाभ मिलेगा। पार्टनरों व मित्रों का सहयोग व मार्गदर्शन मिलेगा। 🐡 *राशि फलादेश मीन :-* *(दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)* अप्रत्याशित खर्च सामने आएंगे। कर्ज लेना पड़ सकता है। कुसंगति से बचें। अपेक्षित कार्यों में विलंब होगा। तनाव रहेगा। विवाद को बढ़ावा न दें। आशंका-कुशंका के चलते समय पर निर्णय नहीं ले पाएंगे। दूसरों के काम में हस्तक्षेप न करें। आय में निश्चितता रहेगी। व्यापार में लाभ होगा। ☯ आप सभी मित्रो को *हिन्दू नववर्ष* के शुभावसर पर *हार्दिक शुभकामनाये* । वर्तमान परिस्थिति अनुसार नववर्ष के शुभावसर पर अपने निवास स्थान पर *भगवा ध्वज* अवश्य लगायें, *बंधनवार* बांधें, *रंगोली* बनायें, रात्रि में *दीपमालिका* सजाएं एवं *आतिशबाजी* कर व सभी परिचित - अपरिचित हिन्दू भाइयों को नववर्ष की यथेष्ठ शुभकामनाये अवश्य प्रेषित करें...! ****************************************** *🎊🎉🎁 आज जिनका जन्मदिवस या विवाह की वर्षगांठ हैं, उन सभी प्रिय मित्रो को कोटिशः शुभकामनायें🎁🎊🎉* ※══❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖══※ और ज़रा इन बातों पर भी ज़रूर ध्यान दें मित्रों...! अगर...??? 1) खूब मेहनत के बाद भी या व्यापार-व्यवसाय में पर्याप्त इन्वेस्टमेंट करने के बाद भी आप अकारण आर्थिक दृष्टी से निरंतर पिछड़ते ही जा रहे हैं....? 2) एक ही नौकरी में लम्बे समय तक कार्य नहीं कर पाते हैं या वहां दिल से काम करते हुए भी आपको कोई पूछता ही नहीं है...? आपकी प्रमोशन ड्यू है कब से लेकिन आप बस दूसरों को आगे बढ़ते देख कर अपने नसीब को कोस रहे हैं...? आपके प्रतिद्वंदी अलग से परेशान करते रहते हैं...? 3) आपस में निरंतर अकारण क्लेश होता रहता है..? 4) शेयर मार्किट से कमाना चाहते हैं पर हर बार नुकसान उठा बैठते हैं...? 5) बिमारी आपको छोड़ ही रही है...? घर का हरएक व्यक्ति किसी न किसी बीमारी से त्रस्त है...? आमदनी का एक बड़ा हिस्सा हमेशां इसी पर खर्च हो जाता है...? 6) अकारण ही विवाह योग्य बच्चों के विवाह में दिक्कतें आ रही हैं...? 7) शत्रुओं ने आपकी रात की नींद और दिन का चैन हराम किया हुआ है...? 8) पैतृक सम्पति विवाद सुलझ ही नहीं रहा है...? और संपति केवास्तविक हकदार आप हैं तथा आप इसे अपने हक में सुलझना चाहते हैं...? 9) विदेश यात्रा या विदेश में सेटलमेंट को लेकर बहुत समय से परेशान हैं...? 10) आपको डरावने सपने आते हैं..? सपने में सांप या भूत-प्रेत या ऐसे ही नींद उड़ाने वाले दृश्य दीखते हैं...? 11) फिल्म या मीडिया में बहुत समय से संघर्ष के बाद भी सफलता​ नहीं मिल रही...? 12) राजनीति को ही आप अपना कैरियर बनाना चाहते हैं पर आपको कुछ भी समझ नहीं आ रहा...? यदि हाँ...??? तो यह सब अकारण ही नहीं है...! इसके पीछे बहुत ठोस कारण हैं जो कि आपकी जन्म कुंडली या आपके घर-आफिस का वास्तु देखकर या आपकी जन्मकुंडली भी ना होने की स्थिति में हमारे दीर्घ अध्ययन और प्रैक्टिकल ज्योतिषीय अनुभव के आधार पर अन्य विधियों से जाने जा सकते हैं...? तो अब आप और देरी ना करें और तुरंत हमें फोन करें...! आपकी उन्नति निश्चित है और आपकी मंजिल अब दूर नहीं...! ※══❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖══※ प्रस्तुति: आचार्य मदन टी.कौशिक मुंबई (सिरसा-हरियाणा वाले, मूल निकास: गौड़ बंगाल एवं तत्पश्चात ढाणी भालोट-झुंझनूँ-राज.) (चयनित/Appointed/) ज्योतिष एवं वास्तु शोध वैज्ञानिक एवं पूर्व विभागाध्यक्ष: TARF, Dadar-Mumbai साभार: बाँके बिहारी (धुरंधर वैदिक विद्वानों का अद्वितीय वैश्विकमंच) कार्यकारी अध्यक्ष: एस्ट्रो-वर्ल्ड मुंबई व सिरसा (सभी दैहिक दैविक भौतिक समस्याओं का एक ही जगह सटीक निदान व स्थायी समाधान) अध्यक्ष: सातफेरे डॉट कॉम मुंबई व सिरसा (आपके अपनों के दिव्य एवं सुसंस्कारी वैवाहिक जीवन की झटपट शुरूआत हेतु अनूठा संस्थान) नोट: हमारी या हमारे संस्थान 'एस्ट्रो-वर्ल्ड' तथा आपके अपनों के वैवाहिक जीवन सम्बन्धी सभी समस्याओं का एकमात्र हल एवं विश्व के इस सबसे अनूठे मंच 'सातफेरे डॉट कॉम' मुंबई या सिरसा की किसी भी प्रकार की गरिमापूर्ण सेवा जैसे वैज्ञानिकतापूर्ण ज्योतिष-वास्तु मार्गदर्शन, सभी प्रकार के मुहूर्त शोधन, नामकरण संस्कार, विवाह संस्कार या अन्य कोई भी वैदिक पूजा-अनुष्ठान आयोजित करवाने, रत्न अभिमन्त्रण, सभी राशिरत्न-उपरत्न, मणि-माणिक्य, सियारसिंगी, हत्थाजोड़ी, नागकेसर, विविध प्रकार के वास्तु पिरामिडज एवं अन्य कई प्रकार की सौभाग्यवर्धक वस्तुओं की प्राप्ति हेतु हमारे... सम्पर्क सूत्र: 9987815015 / 9991610514 ईमेल आई डी: [email protected] 🌺आपका दिन ईशकृपा से परम मंगलमय हो मित्रो! *🚩जयतु जयतु हिन्दुराष्ट्रम🚩* 🇮🇳🇮🇳 *भारत माता की जय* 🚩🚩 ।। 🐚 *शुभम भवतु* 🐚 ।। ※══❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖══※

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छाछ का नियमित सेवन करने वाला कभी रोगी नहीं होता और न ही छाछ के सेवन से नष्ट हुए रोग दोबारा उत्पन्न होते हैं। जिस प्रकार देवताओं में अमृत ही जीवन है, उसी प्रकार मनुष्यों के लिए इस पृथ्वी पर छाछ अमृत स्वरूप है। छाछ पीने वाला व्यक्ति सुदृढ़ शरीर वाला, पुष्ट, बलवान और संतुष्ट रहकर कामदेव से भी अधिक रूपवान होकर सौ वर्षों तक जीता है। इतनी लाभकारी छाछ से दूर रहना ठीक नहीं है। इसका उचित व नियमित सेवन प्रत्येक व्यक्ति को आरंभ कर देना चाहिए। मट्ठे में कैल्शियम होता है जो अस्थियों को मजबूत और जोड़ों को स्निग्ध बनाता है। यदि कैलाश पर्वत पर तक्र (छाछ) उपलब्ध होता तो भगवान शंकर के गले का विष नष्ट हो जाता और उनका कण्ठ नीला न होता, यदि बैकुण्ठ में उपलब्ध होता तो क्या विष्णुजी काले होते? जो देवलोक में उपलब्ध होता तो इन्द्र को भगन्दर न होता, चन्द्रमा का क्षय न होता और अग्नि में इतनी दाहकता न होती। कहने का तात्पर्य यह है कि छाछ के अन्दर विष, श्यामवर्ण, भगन्दर, क्षय-रोग, मोटापा, कोढ़, दाहकता आदि विकारों को नष्ट कर देने की शक्ति होती है। इस प्रकार यह स्वर्ग के अमृत से भी ज्यादा गुणकारी है। छाछ या मट्ठा शरीर से विजातीय तत्वों को बाहर निकालकर नव-जीवन प्रदान करता है। शरीर में रोग-प्रतिरोधक शक्ति उत्पन्न करता है। छाछ में घी नहीं होना चाहिए। गाय के दूध से बनी छाछ श्रेष्ठ होती है। छाछ पीने से जो रोग नष्ट होते हैं वे जीवनभर पुन: नहीं होते। छाछ खट्टी नहीं होनी चाहिए। पेट के रोगों में छाछ कई बार पियें। गर्मी में छाछ पीने से शरीर में ताजगी एवं तरावट आती है। नित्य नाश्ते एवं भोजन के बाद छाछ पीने से शारीरिक शक्ति बढ़ती है एवं बनी रहती है। बाल असमय में सफेद नहीं होते। भोजन के अन्त में छाछ, रात्रि के मध्य दूध और रात्रि के अन्त में पानी पीने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है। मधुमेह – प्रात: भूखे पेट एक गिलास छाछ पियें। इसके बाद तत्काल ही टमाटर का एक गिलास रस पियें। तीन सप्ताह इस तरह सेवन करने से शक्कर (Sugar) सामान्य हो जायेगी। बवासीर – एक गिलास छाछ में स्वादानुसार नमक और एक चम्मच पिसी हुई अजवायन मिलाकर पीने से हर प्रकार के बवासीर में लाभ होता है। छाछ के उपयोग से नष्ट हुए बवासीर पुन: उत्पन्न नहीं होते। सेंधा नमक ज्यादा लाभ करता है। छाछ में सिका हुआ जीरा मिलाकर पीना भी लाभदायक है। सोंठ का पाउडर छाछ में मिलाकर सेवन करें। छोटी पीपल का पाउडर छाछ के साथ लें। जमीकंद की सब्जी भी फायदेमंद रहती है। इसी प्रकार हरा धनिया, सौंफ, जीरा, गुलकंद, आँवला आदि विशेष लाभदायक हैं। रक्तस्रावी बवासीर – छाछ में सेंधा नमक और सेंककर पिसा हुआ जीरा मिलाकर नित्य चार बार एक-एक गिलास पियें। अजीर्ण, घी, तेल और मूंगफली का – घी, तेल और मूंगफली अधिक खाने से अजीर्ण होने पर, छाछ पीने से लाभ होता है। कृमि – (1) एक दिन जलेबी खायें। इससे पेट के कीड़े सब एकत्रित हो जायेंगे। दूसरे दिन से एक गिलास छाछ में नमक मिलाकर नित्य पियें। (2) एक गिलास छाछ में सेंककर पिसा हुआ जीरा एक चम्मच, पिसी हुई कालीमिर्च आधी चम्मच और स्वादानुसार नमक मिलाकर नित्य चार बार पियें। पेट के कृमि निकल जायेंगे। गैस – दिन के भोजन में एक बार भोजन के बाद एक गिलास छाछ में जरा-सा नमक, आधा चम्मच पिसी हुई अजवायन मिलाकर नित्य 21 दिन तक पीने से गैस बनना बन्द हो जाती है। पेट हल्का रहता है। पीलिया – छाछ में शहद मिलाकर नित्य पीने से पीलिया में लाभ होता है। जी मिचलाने पर छाछ में पोदीना मिलाकर पियें। दस्त – (1) आधा पाव छाछ में एक चम्मच शहद मिलाकर नित्य 3 बार पीने से दस्त बन्द हो जाते हैं। (2) सौंफ, धनिया तथा जीरा-तीनों को बराबर लेकर महीन चूर्ण बना लें। उसमें थोड़ा-सा सेंधा नमक मिला लें। इसकी आधा चम्मच दिन में तीन बार छाछ के साथ सेवन करें। (3) बरगद के पेड़ की जटा को सुखाकर पीस लें। उसमें से एक चम्मच चूर्ण रोजाना एक बार छाछ के साथ सेवन करें। पुराने दस्त – लम्बे समय से दस्त लग रहे हों, तो छाछ में सेंधा नमक, सेंका हुआ जीरा, घी में सेंकी हुई हींग मिलाकर एक-एक गिलास नित्य चार बार पियें। भाँग का नशा खट्टी छाछ पीने से उतर जाता है। दाँत निकलना – छोटे बच्चों को नित्य छाछ पिलाने से दाँत निकलने में कष्ट नहीं होता और दाँतों का रोग भी नहीं होता। दाँत सरलता से निकल आते हैं। मोटापा छाछ पीने से कम होता है। पेट के क्षय (T.B.) में छाछ का नित्य सेवन अधिकाधिक मात्रा में करें। कब्ज़ – छाछ का एक गिलास नित्य तीन बार पीने से कब्ज़ दूर हो जाती है। अाँतों में सूजन, गैस, अपच – गरिष्ठ भोजन से अपच होने पर खाना बन्द कर दें। छाछ में भुना हुआ जीरा, कालीमिर्च, पोदीना, सेंधा नमक पीसकर स्वाद के अनुसार मिलाकर दिन में तीन बार पियें। अपच दूर हो जायेगी। छाछ की जगह दही भी काम में ले सकते हैं। अम्लपित्त (Acidity) – एक गिलास छाछ में आठ पिसी हुई कालीमिर्च और स्वादानुसार पिसी हुई मिश्री मिलाकर हर दो घण्टे से पाँच बार में पाँच गिलास छाछ पीने से अम्लपित्त ठीक हो जाता है। पेट दर्द भूखे होने पर हो तो छाछ पीने से यह दर्द ठीक हो जाता है। जलोदर (Ascites) – इक्कीस तुलसी के पत्ते चबाकर एक गिलास छाछ नित्य पीते रहने से जलोदर में लाभ होता है। अपच – अपच के लिए छाछ एक औषधि है। तली, भुनी, गरिष्ठ चीजों को पचाने में छाछ लाभदायक है। छाछ ऑतों में स्वास्थ्यवर्धक कीटाणुओं की वृद्धि करती है, आँतों में सड़ांध रोकती है। छाछ में सेंधा नमक, भुना हुआ जीरा, कालीमिर्च पीसकर मिलायें, अजीर्ण शीघ्र ठीक हो जायेगा। छाछ से कब्ज़, दस्त, पेचिश, खुजली, चौथे दिन आने वाला मलेरिया बुखार, तिल्ली, जलोदर, रक्तचाप (कमी या अधिकता), दमा, गाठिया, अर्धागघात, गर्भाशय के रोग, मलेरिया जनित यकृत के रोग, मूत्राशय की पथरी में लाभ होता है। बुढ़ापा – नित्य एक गिलास छाछ सदा पीते रहें। इससे बुढ़ापे का प्रभाव शरीर में नहीं दिखाई देगा। नेत्र रोग – नित्य छाछ पीते रहने से बुढ़ापे तक नेत्रों की ज्योति ठीक रहती है। वृक्क रोग – छाछ नित्य पीते रहने से वृक्क ठीक रहते हैं। वृक्कों की सफाई होती रहती है। चेहरे पर सूजन नहीं रहेगी। इसमें अजवायन मिला सकते हैं। नमक नहीं मिलायें। पेशाब में रुकावट हो तो छाछ में हरा धनिया पीसकर, मिलाकर पियें। आधे सिर का दर्द सुबह छाछ में सेंधा नमक मिलाकर चावल के साथ खाने से ठीक हो जाता है। यूरिक अम्ल नित्य छाछ पीने से नष्ट हो जाता है। यूरिक अम्ल घटने से जोड़ों के दर्द में लाभ होता है। कमर दर्द – दस कालीमिर्च और आधी गाँठ लहसुन पीसकर पतले मलमल के कपड़े में रखकर इसे निचोड़ें। जो रस निकले, उसे एक गिलास छाछ में मिलाकर, इसी प्रकार नित्य पियें। कमर का दर्द ठीक हो जायेगा। गठिया – छाछ में समान मात्रा में पिसी हुई सोंठ, जीरा, कालीमिर्च, अजवायन, काला तथा सेंधा नमक मिलाकर एक गिलास छाछ दिन में नित्य तीन बार पियें। गठिया ठीक हो जायेगी। शक्तिवर्धक – छाछ पीने से स्रोतों, मार्गों की शुद्धि होकर रस का भली-भाँति संचार होने लगता है। अाँतों से सम्बन्धित कोई रोग नहीं होता। नियमित छाछ पीने से शरीर की पुष्टि, प्रसन्नता, बल, कान्ति, ओज की वृद्धि होती है। पिसी हुई अजवायन, सेंधा नमक, छाछ-तीनों मिलाकर नित्य भोजन के अन्त में कुछ दिन पीने से बहुत लाभ होता है, यह अच्छी न लगे तो छाछ में कालीमिर्च और नमक मिलाकर भी पी सकते हैं। वीर्य-वृद्धि – नियमित खाना खाने के बाद छाछ पीने से वीर्य-वृद्धि होती है। घाव – छाछ में आम की गुठली या सूखा अाँवला घिसकर नित्य दो बार घाव पर लेप करने से घाव भर जाता है। पित्ती (Urticaria) – 25 ग्राम पिसी हुई अजवायन एवं इतना ही गुड़ मिलाकर दो भागों में बाँट लें। एक भाग प्रात: खाकर ताजा छाछ का एक गिलास पियें तथा दूसरा भाग शाम को खाकर पानी पियें। भोजन हल्का, दलिया ही खायें। पित्ती ठीक हो जायेगी। सीने में कफ जमकर घर्र-घर्र की आवाज आती हो तो नित्य छाछ में अजवायन पिसी हुई एक चम्मच डालकर पियें। थकान होने पर छाछ पीने से स्फूर्ति आती है। यक्ष्मा में छाछ पीना बहुत लाभदायक है। श्वेत प्रदर – आधा गिलास चावलों का माँड और आधा गिलास छाछ मिलाकर नित्य पीते रहने से श्वेत प्रदर ठीक हो जाता है। सफेद दाग – बावची चार चम्मच, मूली के बीज चार चम्मच, हल्दी दो चमच, सब पीस लें। इसमें चार चम्मच बेसन और आधा कप छाछ मिला लें। सफेद धब्बों पर इसे मलें और लेप करें। यह लेप चार घण्टे लगा रहने दें। इसके बाद धोयें। कुछ महीनों यह प्रयोग करते रहने से सफेद दाग मिट जाते हैं। बावची का चूर्ण एक चम्मच सुबह तथा शाम को छाछ से फंकी लें और एक गिलास छाछ पियें। बावची को छाछ में पीस कर सफेद धब्बों पर लेप करें। नित्य लम्बे समय तक करें। यदि किसी प्रकार का कष्ट हो तो प्रयोग बन्द कर दें। पथ्यापथ्य – खट्टे पदार्थ, लालमिर्च, गर्म प्रकृति के पदार्थ, नमक आदि का सेवन बंद कर देना चाहिए या कम से कम लें। हृदय रोग में नित्य छाछ पीने से लाभ होता है। मोटापा – (1) छाछ मोटापा घटाती है। एक गिलास छाछ में दो चम्मच शहद डाल कर नित्य प्रात: पियें। (2) छाछ छौंक कर सेंधा नमक डालकर नित्य पियें। (3) एक चम्मच त्रिफला पाउडर छाछ से फंकी लेकर एक गिलास छाछ पियें। जो भी सरल लगे कोई सा एक प्रयोग लगातार करें। छाछ की मात्रा – छाछ की मात्रा का कोई नियम नहीं हैं। अपनी रुचिनुसार जितनी चाहें छाछ पी सकते हैं। सामान्य रूप से बच्चे 500 ग्राम तक और बड़े एक किलो तक छाछ पी सकते हैं।

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भारतीय आयुर्वेद और योग विज्ञान पर विश्वास करने वालों के लिए - कोरोना वायरस से बचाव के लिए Respiratory system को मजबूत करना आवश्यक है। उसके उपाय- 1. भस्त्रिका, कपालभाति और अनुलोम विलोम प्राणायाम नियमित रूप से करें। 2. Lungs की strengh को जानने के लिए गहरी श्वास ले कर कुम्भक लगाएं अर्थात रोके और कितने seconds रोक सकते हैं check करें। यदि 35 से 45 seconds रोक सकते हैं तो यह फेफड़ों की मजबूत स्थिति बताता है। लेकिन यदि यह कम है तो कोरोना वायरस के attack से बचने के लिए निम्न उपाय करें- 1. प्राणायाम दिन में दो बार करें खाली पेट या भोजन के 3 - 4 घंटे बाद। 2. गहरी सांस ले कर रोके अपनी क्षमता के अनुसार और श्वास निकलने के बाद भी इसी प्रकार रोकें। 3. गर्म पानी में हल्दी और फिटकरी डाल कर दिन में कई बार गरारे /gargle करें। 4. प्रत्येक एक डेढ़ घंटे के बाद चाहे थोड़ा सा ही लें गर्म पानी पी लें। 5. पानी को उबाल लें और उबलने के बाद उसमें नीलगिरी तेल/ eucalyptus oil की कुछ बूंदे डाल कर स्टीम लें। स्थिति के अनुसार यह एक से चार समय तक लें सकते हैं। 6. घर मे दोनो समय थोड़ी सी लकड़ी/ गाय के गोबर के उपले को गाय के घी से जला कर उस पर थोड़ा सा गुड़ या शक्कर डाले, कुछ दाने किशमिश के, दो तीन लोंग डालें। जब यह पूरा जल जाय और कुछ अँगारे रहें तो उस पर कपूर तथा गुग्गल के कुछ टुकड़े डाल कर उसके धुएं/ खुशबू को पूरे घर में फैल जाने दें। 7. भोजन हल्का लें और फलों की तथा पानी की मात्रा बढ़ा दें। 8. एकांतवास जरूरी है बहुत जरूरी होने पर ही बाहर निकलें। 9. पानी मे गिलोय, तुलसी, अदरख का छोटा टुकड़ा , एक दो लोंग, एक दो काली मिर्च, कुछ नीम के पत्ते डाल कर काढ़ा बनाये और सुबह शाम लें। 10. दिन में कई बार दोनों नासिकाओं/ nostrils में सरसों का तेल लगाएं। घर से बाहर जाते समय जरूर लगाएं। 11. Mobile फ़ोन का प्रयोग कम करें। 12. ताली बजाने या शंख ध्वनि को व्यर्थ न समझे। करने पर लाभ ही होगा। सामान्य लोग भी कुछ समय तक, जब तक वायरस के संक्रमण का खतरा टलता नही है, ऊपर दिए उपायों को करें चाहे कम मात्रा में तो लाभकारी होगा। क्योंकि कोरोना वायरस का attack हो जाने के बाद चार पांच दिन तक तो पता भी नही चलता। हां, कुछ लोग सरकार के नियमों की अवहेलना कर रहे हैं। यह स्वभावगत है। शायद अपने शरीर की मजबूती को बताना चाह रहे

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Manishi sharma Mar 26, 2020

आज मै आपको कुछ जरूरी जानकारी दे रहा हूं, जो शायद आपके काम आए, बता रहे है विनीता कुमार चौहान, कांठ मुरादाबाद वाले, हम आज कोराना वायरस की महामारी से लड रहे है, और हम जीत ही जाएंगें पर इसके साथ आप सभी लोग जो स्वस्थ है ओर बीमारी के प्रति अपने शरीर में ताकत बनाए रखे, इसके लिए आप घर मे रहकर ताजी दही अवश्य खाएं,इसमे बहुत अच्छे वैक्टीरिया होते है,जो आपके शरीर में गये खराब वैक्टीरिया को खा जाते है,और आपका इम्यूनिट सिस्टम मजबूत होता है,यानी बीमारी से लडने की ताकत बढती है,, जिन भाई बहिनो को दही से जुकाम हो जाता है या कोल्ड हो जाता है,वो दही ना खाए, उनके लिए बाजार में लैक्टिक एसिड वैसिलस नामक केप्सूल मोजूद है, जो आपको एक कैपसूल रोज खाए, और विटामिन सी की एक गोली करीब 500 एम जी की रोज खाऐ, ये भी मनुष्य की बीमारी से लडंने की ताकत बढाती है,, और खांसी जुकाम को बहुत जल्दी ठीक करती है,, ये गोली लिमसी और सीलिन नाम से मेडीकल पर उपलब्ध है,, इसके साथ ही आप त्रिफला का सेवन करे,ये सभी देशी दवाई बनाने वाली कम्पनी बनाती है,ये भी मनुष्य की बीमारी से लडने की ताकत को बढाता है,तथा मनुष्य की तीनो धातु वात कफ पित्त को संतुलित करता है, इस त्रिफले को आप भोजन या नाश्ते के बाद दिन में एक बार आधी चम्मच त्रिफला और एक चम्मच शुद्ध शहद मिलाकर खाए,अगर शहद.ना हो तो गुड के चूरे मे मिलाकर खाएं, ये आपके पाचन तंत्र को मजबूत के अलाबा शरीर में बल भी प्रदान करेगा,जो किसी भी रोग को शरीर में जाने ही नही देगा, अगर आप को बुखार हे और बुखार के साथ खांसी भी है,और जुकाम भी है,और पूरे शरीर में दर्द है तो आप किसी भी देशी कम्पनी का महासुदर्शन काढा या क्वाथ ले आए,और तीन से चार चम्मच काढा चार गुने पानी में मिलाकर ,सुबह शाम पीले आपका बुखार गले मे खराश सांस लेने मे दिक्कत, जकडन और खांसी मे बहुत आराम मिलेगा,तीन से चार दिन में आप बहुत स्वस्थ हो जाएगें, बता रहे थे विनीत कुमार चौहान कांठ वाले

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Pushpesh Dwivedi Mar 26, 2020

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प्रकृति – गर्म। सरसों दो प्रकार की – पीली और लाल होती है। गुणवत्ता में पीली सरसों अच्छी होती है। दाँत-दर्द – एक-दो बार सरसों का तेल एक नथुने से सूंघने पर दाँत का दर्द कुछ समय के लिए बन्द हो जाता है। इसे सूंघने से नाक, कान, नेत्र और सिर को शक्ति मिलती है। सरसों का तेल, नीबू का रस, सेंधा नमक मिलाकर मंजन करने से दाँत साफ होते हैं, दर्द और हिलना बन्द हो जाता है। नमक बहुत बारीक कपड़े में छानकर सरसों के तेल में मिलाकर मंजन करने से भी दाँत-दर्द, मसूढ़े फूलना ठीक हो जाते हैं। मंजन – बहुत बारीक सेंधा नमक + नीबू का रस + जरा-सी फिटकरी सरसों के तेल में मिलाकर नित्य मंजन करने से दाँतों और मसूढ़ों की बीमारियाँ, दाँतों के कीड़े, दर्द, मसूढ़े फूलना बन्द होकर दाँत मजबूत और साफ हो जाते हैं। पाचन संस्थान ठीक रहता है। मधुमेह – अखिल भारतीय मधुमेह संस्थान में आयोजित कार्यशाला में किये गये अनुसंधान के बाद यह तथ्य सामने आया है कि यदि सरसों के तेल का नियमित सेवन किया जाए तो इससे मधुमेह से पीड़ित रोगी को न केवल राहत मिलती है अपितु इस रोग के फैलाव को नियंत्रित करके रोगियों को मौत के मुँह में जाने से बचाया जा सकता है। अनुसंधान के बाद यह निष्कर्ष सामने आया कि आहार के तौर-तरीकों को व्यवस्थित कर दिया जाए तो मधुमेह जैसे खतरनाक रोग के कारण होने वाली मौतों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। रोगियों पर किए गए प्रयोगात्मक कार्यों के निष्कर्ष में यह पाया गया कि मूंगफली व सूर्यमुखी का तेल इस रोग की उग्रता को और तेज कर देता है। डॉ. गुप्त का कहना है कि इस रोग से पीड़ित व्यक्ति को बिना किसी दवा के केवल आहार से ही ठीक किया जा सकता है क्योंकि विटामिन ‘ई’ व ‘सी’ युक्त आहार इस रोग के उपचार में काफी सार्थक भूमिका अदा करते हैं। त्वचा का सूखापन – ठण्डे मौसम में त्वचा खुरदरी और सूखी होती है। ठण्ड में शरीर पर सरसों के तेल की मालिश करके स्नान करने से ठण्ड कम लगती है। ठण्ड का प्रभाव कम होता है। सरसों के तेल की मालिश से शरीर हृष्ट-पुष्ट, चेहरे के धब्बों में कमी, त्वचा के रंग में निखार, सुन्दर, कान्तिमय और आकर्षक हो जाती है। सरसों का तेल हानिकारक जीवाणुओं को मारता है, इससे रक्तसंचार में तेजी आती है, माँसपेशियाँ मजबूत होती हैं और नाड़ी तंत्र को बल मिलता है। इससे शरीर में ताजगी आती है, थकान मिटती है। मालिश – शीत ऋतु में त्वचा की रुक्षता मिटाने एवं स्निग्ध बनाए रखने के लिए शरीर की मालिश करनी चाहिए। इससे त्वचा सुन्दर दिखती है। मालिश के लिए सरसों का तेल उपयोग में लीजिए। रात को सोते समय सरसों के तेल की मालिश करने से मच्छर नहीं काटते। कसरत से थकान होने पर पैरों पर मालिश करने से लाभ होता है। पैरों की मालिश – भाव प्रकाश में लिखा है कि तलवों में तेल की मालिश करने से उनमें स्थिरता रहती है, नींद गहरी आती है: अाँखों की रोशनी बढ़ती है: पैरों का फटना बन्द होता है: पैरों का सो जाना, थकावट, स्तम्भ तथा संकोच मिटता है। पैरों में रोग नहीं होते। जोड़ों का दर्द, मेरूदंड के रोग, लकवा, उच्च रक्तचाप आदि रोगों में तलवों पर सरसों के तेल की मालिश स्वयं 5 मिनट प्रतिदिन या सप्ताह में दो बार करने से लाभ होता है। पित्ती, छपाकी – पित्तीं होने पर दस्तावर औषधि देकर पेट साफ करें। सरसों के तेल की मालिश करके गर्म पानी से स्नान करें। इससे पित्ती में लाभ होता है। आटण, घट्टा (Corn) – सरसों के गर्म तेल से सेंक करने से आटण मिट जाता है। अनुमावक स्नायुशूल (Trigeminal Neuralgia) – नाक, तालुमूल, कान के मध्य भाग के दर्द में सरसों का तेल खूंघने में लाभ होता है।

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