मायमंदिर फ़्री कुंडली
डाउनलोड करें
G.SHARMA
G.SHARMA Jun 9, 2019

ऊं नमः शिवाय हर हर महादेव शुभ प्रभात वंदन नमन

ऊं नमः शिवाय हर हर महादेव शुभ प्रभात वंदन नमन

+220 प्रतिक्रिया 48 कॉमेंट्स • 10 शेयर

कामेंट्स

G.SHARMA Jun 10, 2019
@sanjayawasthi2 जय शिव शंभू शुभ दोपहर वंदन जी भोलेनाथ आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करें राधे राधे जी।। सादर प्रणाम।।

G.SHARMA Jun 10, 2019
@knpadshala जय शिव शंभू शुभ दोपहर वंदन जी भोलेनाथ आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करें राधे राधे जी।। सादर प्रणाम।।

G.SHARMA Jun 10, 2019
@renusingh15 जय शिव शंभू शुभ दोपहर वंदन जी भोलेनाथ आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करें राधे राधे जी,।। सादर प्रणाम।।

G.SHARMA Jun 10, 2019
@ansouya जय शिव शंभू शुभ दोपहर वंदन जी भगवान आशुतोष आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करें राधे राधे जी,सादर प्रणाम।

G.SHARMA Jun 10, 2019
@ramakanttripathi5 जय शिव शंभू शुभ दोपहर वंदन जी भोलेनाथ आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करें राधे राधे जी सादर प्रणाम।।

G.SHARMA Jun 10, 2019
@mamtachauhan3 जय शिव शंभू शुभ दोपहर वंदन जी भगवान आशुतोष आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करें राधे राधे जी सादर प्रणाम।।

G.SHARMA Jun 10, 2019
@anjanagupta4 जय शिव शंभू शुभ दोपहर वंदन जी भोलेनाथ की कृपा दृष्टि आप एवं आपके परिवार पर सदैव बनी रहे राधे राधे जी।। प्रणाम।।

G.SHARMA Jun 10, 2019
@sangeetalal धन्यवाद जी सादर प्रणाम शुभ दोपहर वंदन जी भगवान भोलेनाथ आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करें राधे राधे जी

G.SHARMA Jun 10, 2019
@sonutomar12345gmailcom जय शिव शंभू शुभ दोपहर वंदन जी भोलेनाथ आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करें राधे राधे जी।। प्रणाम।।

G.SHARMA Jun 10, 2019
@vinodagrawal1 धन्यवाद जी सादर प्रणाम शुभ दोपहर वंदन जी भोलेनाथ आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करें राधे राधे जी

G.SHARMA Jun 10, 2019
@queen1 जय शिव शंभू शुभ दोपहर वंदन जी भोलेनाथ की कृपा से आपका हर पल मंगल हो राधे राधे जी

G.SHARMA Jun 10, 2019
@rajeshkumard शुभ दोपहर वंदन जी आपका दिन शुभ एवं मंगलमय हो राधे राधे जी

G.SHARMA Jun 10, 2019
@narendrakumarpandey2 जय शिव शंभू शुभ दोपहर वंदन जी भोलेनाथ आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करें राधे राधे जी।। प्रणाम।।

G.SHARMA Jun 10, 2019
@narayanprajapati9 जय शिव शंभू शुभ दोपहर वंदन जी भोलेनाथ आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करें राधे राधे जी

Anjana Gupta Jun 10, 2019
om nmo shivay Bhai ji mahadev aapki har mnokamna puri Kare Shubh dophar Vandan ji 🌹🙏

Sandhya Nagar Jun 10, 2019
⛳🙏🥀||"ԶเधॆԶเधॆ जी आप सभिन कूँ."||🌹🙏⛳ "पृथ्वी पर एक ऐसा "अलौकिक स्थान" है जो "वैकुण्ठ" से भी अधिक श्रेष्ठ है.जिसे वृंदावन कहते हैं और यहीं स्तिथ है"निधि वन"जहां आज भी हर रात्रि को महारास होता है.जिस में भाग लेने श्रीकृष्ण स्वयं आते हैं.इसलिए निधि वन को संध्या आरती के बाद दर्शनों के लिए बंद कर दिया जाता है.फिर यहाँ कोई नहीं रुकता.यहाँ तक की निधिवन में रहने वाले पशु-पक्षी भी संध्या होते ही निधिवन से बाहर चले जाते है.कई एकड़ में फैले इस निधिवन में जितने भी पेड़ है वे सभी कई वर्षों पुराने हैं फिर भी ये चमत्कार ही है कि ये पेड़ कभी सूखते नही हैं.और नीचे की ओर बढ़ते ये पेड़ फिर से हरे होना शुरू हो जाते हैं.निधि वन में खास बात ये है कि यहां तुलसी के सभी पौधे जोड़े में है जो कृष्ण और राधा जी के रूप में एक दूसरे से लिपटे हुए रहते हैं.कहते हैं कि रात्रि में जब महारास होता है तो ये पेड़ पौधे गोपियाँ और श्री कृष्ण बन जाते हैं और जैसे ही सुबह होती है तो यहां फिर से सब कुछ बदल जाता हैं. निधि वन के अंदर "रंग महल"नाम का एक स्थान है जहां रोजाना रात को श्री कृष्ण विश्राम करने आते है.रंग महल में चन्दन की लकड़ी से बना एक पलँग है जिसे रात होने से पहले सजाया जाता है.पलंग के बगल में ठाकुर जी के लिए एक लोटे में जल, एक दातुन और पान,रखा जाता है.सुबह जब ‘रंग महल’ के पट खोले जाते हैं तो बिस्तर अस्त -व्यस्त,लोटा खाली,दातुन चबाई हुई और पान खाया हुआ मिलता है.सुबह होते ही निधिवन में सब कुछ बदला हुआ नजर आता है.मथुरा योगेश्वर भगवान श्री कृष्ण की जन्मभूमि है लेकिन फिर भी मथुरा में भगवान के केवल दो ही प्रमुख बड़े मन्दिर श्री"द्वारिकाधीश"जी और गर्भगृह है परन्तु वृन्दावन में करीब 5000 से भी अधिक मन्दिर हैं.जिन जिन स्थानों पर भगवान श्री कृष्ण ने बाल लीलाएं की उनमे से 5 प्रमुख स्थान निधिवन में आते हैं.निधि वन में ही वंशी चोर राधिका जी का मंदिर भी है.कहते हैं कि जब राधा जी को लगने लगा कि श्री कृष्ण हर समय वंशी ही बजाते रहते हैं और उनकी तरफ ध्यान नहीं देते,तो उन्होंने श्री कृष्ण की वंशी चुरा ली इस कारण इस स्थान पर वंशी चोर राधिका जीे मंदिर का निर्माण किया गया.मंदिर में राधिका जी की सबसे प्रिय सखी ललिता जी की भी मूर्ति राधा जी के ही साथ विराजमान है.निधिवन में दूसरा स्थान है "विशाखा कुंड" जिसे भगवान श्री कृष्ण ने अपनी वंशी से खोदा था.भगवान श्रीकृष्ण सखियों के साथ जब रास रचा रहे थे,तभी विशाखा सखी को प्यास लगी. तब भगवान श्री कृष्ण ने अपनी वंशी से इस कुंड की रचना की.जिसमें से निकले जल को पीकर विशाखा सखी ने अपनी प्यास बुझायी. इसलिए कुंड को "विशाखा कुंड"के नाम से जाना गया.इसके अलावा संगीत सम्राट तानसेन के गुरुजी स्वामी श्री हरिदास जी महाराज ने भी भगवान श्री "बाँके बिहारी" जी को यहीं प्रकट किया था.निधिवन स्वामी श्री हरिदास जी की "तपोभूमि"है.निधिवन कि खास बात ये है कि अगर कोई निधिवन में छुपकर श्री कृष्ण और गोपियों के महारास को देखने का प्रयास करता है तो वह या तो पागल हो जाता है या शारीरिक रूप से अक्षम हो जाता है ऐसे ही एक कृष्ण भक्त सन्त थे "पागल बाबा" जिनकी समाधि निधिवन में बनी हुई है.कहते हैं की उन्होंने भी एक बार निधि वन में छुपकर महारास देखने की कोशिश की थी जिस के बाद वे पागल हो गए थे. कृष्ण भक्त होने के कारण उनकी मृत्यु के पश्चात मंदिर कमेटी ने निधि वन में ही उनकी समाधि का निर्माण कराया. हरे कृष्ण हरे कृष्ण ll मेरो प्यारो कन्हैया ll राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे सबका दिन शुभ हो l"

Brajesh Sharma Jun 10, 2019
Har Har Mahadev Om Namha Shivai Jai shri Radhey krishna ji

Aruna..sharma..(अनु) Jun 10, 2019
🙏🌹 Good night Ji🌹🙏 🙏 Jai Shree Radhy Krishna Ji aap par or aap ky Parivar par Sadha parbhu Ji ki Mehar Bani Ray Ji🙏🌷 सहनशीलता स्वभाव नहीं अपितु संस्कार हैं, तराजु वजन माप सकता हैं गुणवत्ता नहीं. 🙏🌹 शुभरात्रि 🌹🙏

Sajjan Singhal Jun 16, 2019

+31 प्रतिक्रिया 6 कॉमेंट्स • 28 शेयर
Pooja Ji Jun 17, 2019

+14 प्रतिक्रिया 5 कॉमेंट्स • 6 शेयर
Komal dagar Jun 17, 2019

+23 प्रतिक्रिया 4 कॉमेंट्स • 1 शेयर
Virender Singh Jun 16, 2019

+6 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 23 शेयर

,,,,,- कर्मफल -,,,,,- और-,,,,,- ईश्वर-,,,,, सत्य सनातन संस्कृति संस्कार धर्म की जय हो जटाजूट में शशि गंग हे - नेत्र तीन सुखधाम । कान में कुण्डल गले भुजंग दरसे आठ याम । नेक यह हर्षन अनमोल ।। भोला मनका ओला दोला भरदेगा झोला ।। सत्य , शिव और सौंदर्य उसी एक ( प्रभु ) के विभिन्न रूप हैं ।। संसार की रचना करने वाला वह परमात्मा सदेव प्राणियों के ह्रदय में स्थिर है । इस महात्मा ( परमात्मा ) को जो शुध्द हृदय और निर्मल मन से अपने भीतर विघमान देखते हैं , वे अमृतत्व को प्राप्त कर लेते हैं ।। इस संसार रूपी समुद्र को पार करने के लिए यह मानव शरीर ⛵ नाव के समान है, जिसमें बैठकर आत्मा रूपी नाविक भवसागर को पार कर सकता है ।। श्रध्दा का अर्थ है - आत्म- विश्वास और आत्म - विश्वास का अर्थ है _ ईश्वर का विश्वास ।

+6 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 44 शेयर
Mamta Chauhan Jun 17, 2019

+81 प्रतिक्रिया 14 कॉमेंट्स • 272 शेयर
TR. Madhavan Jun 18, 2019

+8 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 31 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB