प्रेम भाव है, भावना नहीं। जो अन-कंडीशनल होता है, वह प्रेम है ।

प्रेम भाव है, भावना नहीं।  जो अन-कंडीशनल होता है, वह प्रेम है ।

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प्रेम भाव है, भावना नहीं।

जो अन-कंडीशनल होता है, वह प्रेम है ।

प्रेम श्रद्धा है सौदा नहीं।

इसलिये श्रद्धा हमेशा दिल से होती है और

सौदा हमेशा दिमाग से होता है ।

संसार का प्रेम आता जाता है, वह टिकने

वाला नहीं है, और परमात्मा का प्रेम स्थाई है।
"जगत का प्रेम टिकता नहीं

भगवान का प्रेम मिटता नहीं । । "

प्रेम परमात्मा का नाम है -

प्रेम अगर पाप है तो पुण्य किसका नाम है,

प्रेम अगर अधर्म है तो धर्म किसका नाम है,

प्रेम अगर कुकर्म है तो सुकर्म किसका नाम है,

पर प्रेम के पापियों से ही प्रेम बदनाम है,
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मैं तुम्हें कैसे बताऊँ कि

प्रेम तो सीता राम है, प्रेम तो राधे- श्याम है ।
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"शरीर" कभी पूरा पवित्र नहीं हो सकता,
फिर भी सभी इसकी पवित्रता की कोशिश करते है।
"मन" पवित्र हो सकता है,
परंतु अफ़सोस कोई कोशिश ही नहीं करता....
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