प्रेम भाव है, भावना नहीं। जो अन-कंडीशनल होता है, वह प्रेम है ।

प्रेम भाव है, भावना नहीं।  जो अन-कंडीशनल होता है, वह प्रेम है ।

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प्रेम भाव है, भावना नहीं।

जो अन-कंडीशनल होता है, वह प्रेम है ।

प्रेम श्रद्धा है सौदा नहीं।

इसलिये श्रद्धा हमेशा दिल से होती है और

सौदा हमेशा दिमाग से होता है ।

संसार का प्रेम आता जाता है, वह टिकने

वाला नहीं है, और परमात्मा का प्रेम स्थाई है।
"जगत का प्रेम टिकता नहीं

भगवान का प्रेम मिटता नहीं । । "

प्रेम परमात्मा का नाम है -

प्रेम अगर पाप है तो पुण्य किसका नाम है,

प्रेम अगर अधर्म है तो धर्म किसका नाम है,

प्रेम अगर कुकर्म है तो सुकर्म किसका नाम है,

पर प्रेम के पापियों से ही प्रेम बदनाम है,
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मैं तुम्हें कैसे बताऊँ कि

प्रेम तो सीता राम है, प्रेम तो राधे- श्याम है ।
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"शरीर" कभी पूरा पवित्र नहीं हो सकता,
फिर भी सभी इसकी पवित्रता की कोशिश करते है।
"मन" पवित्र हो सकता है,
परंतु अफ़सोस कोई कोशिश ही नहीं करता....
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आशुतोष Sep 24, 2020

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🎄🎄🌹🌹🌹जय श्री राम🌹🌹🌹🎄🎄 🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿 एक करोड़पति बहुत अड़चन में था। करोड़ों का घाटा लगा था, और सारी जीवन की मेहनत डूबने के करीब थी ! नौका डगमगा रही थी। कभी मन्दिर नहीं गया था, कभी प्रार्थना भी न की थी। फुरसत ही न मिली थी ! पूजा के लिए उसने पुजारी रख छोड़े थे, कई मन्दिर भी बनवाये थे, जहाँ वे उसके नाम से नियमित पूजा किया करते थे लेकिन आज इस दुःख की घड़ी में कांपते हाथों वह भी मंदिर गया। सुबह जल्दी गया, ताकि परमात्मा से पहली मुलाकात उसी की हो, पहली प्रार्थना वही कर सके। कोई दूसरा पहले ही मांग कर परमात्मा का मन खराब न कर चुका हो ! बोहनी की आदत जो होती है, कमबख्त यहाँ भी नहीं छूटी, सो अल्ल-सुबह पहुँचा मन्दिर। लेकिन यह देख कर हैरान हुआ कि गाँव का एक भिखारी उससे पहले से ही मन्दिर में मौजूद था। अंधेरा था, वह भी पीछे खड़ा हो गया, कि भिखारी क्या मांग रहा है ? धनी आदमी सोचता है, कि मेरे पास तो मुसीबतें हैं; भिखारी के पास क्या मुसीबतें हो सकती हैं ? और भिखारी सोचता है, कि मुसीबतें मेरे पास हैं। धनी आदमी के पास क्या मुसीबतें होंगी ? एक भिखारी की मुसीबत दूसरे भिखारी के लिए बहुत बड़ी न थी ! उसने सुना, कि भिखारी कह रहा है- हे परमात्मा ! अगर पांच रुपए आज न मिलें तो जीवन नष्ट हो जाएगा। आत्महत्या कर लूँगा। पत्नी बीमार है और दवा के लिए पांच रुपए होना बिलकुल आवश्यक है। मेरा जीवन संकट में है। अमीर आदमी ने यह सुना और वह भिखारी बंद ही नहीं हो रहा है; कहे जा रहा है और प्रार्थना जारी है ! तो उसने झल्लाकर अपने खीसे से पांच रुपए निकाल कर उस भिखारी को दिए और कहा- जा ये ले जा पांच रुपए, तू ले और जा जल्दी यहाँ से ! अब वह परमात्मा से मुखतिब हुआ और बोला- "प्रभु, अब आप ध्यान मेरी तरफ दें, इस भिखारी की तो यही आदत है। दरअसल मुझे पांच करोड़ रुपए की जरूरत है !” भगवान मुस्करा उठे बोले- एक छोटे भिखारी से तो तूने मुझे छुटकारा दिला दिया, लेकिन तुझसे छुटकारा पाने के लिए तो मुझको तुमसे भी बढ़ा भिखारी ढूँढ़ना पड़ेगा ! तुम सब लोग यहाँ केवल कुछ न कुछ माँगने ही आते हो, कभी मेरी जरूरत का भी ख्याल आया है ? धनी आश्चर्यचकित हुआ बोला - प्रभु आपको क्या चाहिए ? भगवान बोले- प्रेम ! मैं भाव का भूखा हूँ। मुझे निस्वार्थ प्रेम व समर्पित भक्त प्रिय है। कभी इस भाव से मुझ तक आओ; फिर तुम्हे कुछ माँगने की आवश्यकता ही नही पड़ेगी🌸🍀🌸🍀🌸🙏🙏🙏☕

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🙏विष्णु_भगवान_सबके_पालनहार🙏 🌹लक्ष्मीजी विष्णुजीको भोजन करा रही थी। विष्णुजीने पहला ग्रास मुँह मे लेने से पहले ही हाथ रोक लिया और उठकर चले गए। लौटकर आने पर भोजन करते करते लक्ष्मीजी ने उठकर जाने का कारण पूछा तो विष्णुजी बोले- मेरे चार भक्त भूखे थे , उन्हें खिलाकर आया। लक्ष्मीजीने परीक्षा लेने के लिए दूसरे दिन एक छोटी डिबिया में पांच चीटियों को बंद किया और विष्णुजी को भोजन परोसा। प्रभु ने भोजन किया, तो लक्ष्मीजी बोलीं- आज आपके पांच भक्त भूखे हैं और आपने भोजन पा लिया? प्रभु ने कहा- ऐसा हो नहीं सकता। तो लक्ष्मीजी ने तुरंत डिबिया खोली और अचरज से हक्की-बक्की हो गयी क्योंकि हर चीटी के मुँह मे चावल के कण थे। लक्ष्मीजी ने पूछा बंद डिबिया चावल कैसे आए, आपने कब डाले? प्रभु ने सुंदर जबाब दिया- देवी आपने चिटियों को डिब्बी में बंद करते समय जब माथा टेका तभी आपके तिलक से एक चावल डिब्बी में गिर गया था और चीटिंयों को भोजन मिल गया। तात्पर्य यही है कि वह पालनहार हर जीव का ध्यान रखता है। हम भी रुकें, धैर्य रखें, विश्वास से कहे है कि चोंच दी वह चुग्गा भी देगा। उस दयालु पालनहार की माया कृपा अपरंपार है। हम अपना उद्यम करते रहें आगे तो वह देख ही रहे हैं। 🌹।श्रीलक्ष्मीनारायण भगवान की जय।🌹 ✍🏻लक्ष्मी का हाथ हो, सरस्वती का साथ हो.! गणेश का निवास हो, और,मां "पार्वती" के आशीर्वाद से आपके जीवन में प्रकाश ही प्रकाश हो..!! 🌹🙏जय श्री राम🌹🙏

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गणेशजी का वाहन मूषक , भगवानों ने अपनी सवारी बहुत ही विशेष रूप से चुनी। उनके वाहन उनकी चारित्रिक विशेषताओं को भी बताते हैं। शिवपुत्र गणेशजी का वाहन है मूषक। मूषक शब्द संस्कृत के मूष से बना है जिसका अर्थ है लूटना या चुराना। सांकेतिक रूप से मनुष्य का दिमाग मूषक, चुराने वाले यानी चूहे जैसा ही होता है। यह स्वार्थ भाव से गिरा होता है। गणेशजी का चूहे पर बैठना इस बात का संकेत है कि उन्होंने स्वार्थ पर विजय पाई है और जनकल्याण के भाव को अपने भीतर जागृत किया है। वैज्ञानिक मानते हैं कि मनुष्य और चूहे के मस्तिष्क का आकार प्रकार एक समान है। चूहे का किसी न किसी रूप में मनुष्य से कोई सबंध जरूर है उसी तरह ‍जिस तरह की चूहे और हाथी का। 💧🩸💧🩸💧🩸💧🩸💧🙏🙏🌹

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*घरेलू उपाय अपनाएं, सूखी खांसी से निजात पाएं* अदरक और नमक से आपको सूखी खांसी से निजात मिल सकती है। इसके लिए आप 1 अदरक लीजिए और इसमें थोड़ा-सा नमक लगाकर इसका सेवन करें। यह उपाय आपकी खांसी को भी ठीक करेगा, साथ ही आपके गले को भी साफ करेगा। मुलेठी की चाय भी आपको सूखी खांसी से आराम दिला सकती है। हल्दी वाला दूध सूखी खांसी को ठीक करने के लिए बहुत कारगर है। इसका सेवन आपको रात को सोने से पहले करना है। गर्म पानी पीने से आपका मेटाबॉलिज्म रेट बढ़ता है, मगर इससे भी ज्यादा यह सूखी खांसी को खत्म करने में असरदार होता है। दिन में अगर आप 3 बार गर्म पानी पी लेंगे तो आपको खांसी में काफी राहत मिलेगी। भाप आपको तुरंत और प्रभावी परिणाम भी दे सकती है। गर्म पानी की भाप एक सरल घरेलू उपाय है जिसे आप किसी भी समय फॉलो कर सकते हैं। यह कोल्‍ड और खराश से लड़ने में मददगार है। *ऐसे और भी कई आयुर्वेद में बताये गए एवं माने हुए सुप्रसिद् व रोजमर्रा जीवन में काम आने वाले कारगर नुस्ख़े पढ़ने और लाभ प्राप्त करने के लिए एप्प करेy/

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🚩🙏 यह विचार उचित है , और ये सत्य घटनाक्रम है *( यह लेख किसी को ठेस पहुंचाने के लिए नहीं है आप अपना विचार एवं मार्गदर्शन दे सकते हैं )* एक काल में देवराज इन्द्र ने देवगुरु बृहस्पति से असहमति जताई और देवकार्य सम्पन्न कराने के लिए उन्होंने विश्वरूप जी को पुरोहित पद पर नियुक्ति किया। लेकिन विश्वरूप जी जब भी देवताओं को बल देने वाले हवि का भाग आहुतियां प्रदान करते तो उसका कुछ भाग देवताओं को न मिल कर दैत्यों को मिलने लगा क्योंकि विश्वरूप जी दैत्यों के हितैषी थे , जब ये बात देवराज इन्द्र को पता चली तो उन्होंने उसी क्षण विश्वरूप जी का सिर काट डाला जिसके कारण उन्हें ब्रह्म हत्या का पाप लगा । जिसे बाद में बृक्षों , जल , स्त्रियों और पृथ्वी में बांट दिया गया । वृक्ष पर जो गोंद निकलता है वह उसी का भाग है , पानी में जो झाग बनता और काई है ये उनका ही भाग है , स्त्रियों को जो ऋतु धर्म होता है ये उसी ब्रह्म हत्या का भाग है , और भूमि पर जो बरसात में कुकुरमुत्ते होते हैं और बंजर भूमि है ये उसी का भाग है । इसके पीछे का भाव यह है कि पुरोहित को अपने यजमान के साथ विश्वासघात नहीं करना चाहिए । जैसा कि पुरोहित होने पर विश्वरूप जी ने किया है । आप सबको को जानकर आश्चर्य होगा कि दिव्य नारायण कवच को धारण करने की विद्या देवराज इन्द्र को विश्वरूप जी से ही प्राप्त हुई । इसलिए ऐसे कृत्य करने वाले पुरोहितों की वेद , पुराण, स्मृति निन्दा करते हैं ।। शेष आदरणीय विद्वतजनों से मार्गदर्शन की अपेक्षा है। सभी प्रभु प्रेमियों को जय माता दी ।। 🚩👏🌺🌷💐🙏🌺🌷💐

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