HEMANT JOSHI
HEMANT JOSHI Nov 22, 2020

*🙏🏻सनातन संस्कृति और उसका उन्नत विज्ञान🙏🏻* *🕉️छाया सोमेश्वर महादेव- तेलंगाना🕉️* बहुत से चमत्कारिक मंदिरों में हम दर्शन के लिए भी जाते है. क्या आप जानते है कि हमारे पूर्वज ना केवल धर्म के मामले में अपितु विज्ञानं और स्थापत्य के मामले में भी हमसे आगे थे. इसका सबसे बड़ा प्रमाण दक्षिण भारत में मिलने वाले अद्भुत स्थापत्य और वास्तुकला वाले मंदिर है. हैदराबाद से करीब 100 किलोमीटर दूर नालगोंडा में भी एक इसी प्रकार का विलक्षण शिव मंदिर है. कहा जाता है कि ये मंदिर करीब 1000 साल पुराना है. कला की दृष्टि से ये मंदिर अपने आप में अनोखा है. इस शिव मंदिर का नाम छाया सोमेश्वर मंदिर है... इस मंदिर में हर समय भगवान शिव की मूर्ति के पीछे एक खम्बे की छाया पड़ती थी. इस मंदिर में बहुत से खम्बे है जो मंदिर को सहारा देते है लेकिन रहस्य की बात ये थी कि यदि आप सभी खम्बों के सामने भी खड़े हो जाएँ तो भी शिवजी के पीछे खम्बे की छाया दिखाई देगी. शिव के पीछे दिखने वाली इस छाया का रहस्य बहुत समय तक रहस्य ही बना हुआ था. बहुत से लोग इसे चमत्कार मानते थे. कुछ समय पहले वैज्ञानिकों ने शिव के पीछे पड़ने वाली खम्बे की छाया का रहस्य सुलझ लिया है. वैज्ञानिकों के अनुसार ये छाया किसी चमत्कार का परिणाम नहीं, ये विज्ञान के एक सिद्धांत आधारित है. Diffraction of Light या प्रकाश का विवर्तन सिद्धांत कहता है कि यदि प्रकाश के मार्ग में कोई अवरोध आ जाये तो प्रकश की किरने उस अवरोध से टकराकर रास्ता बदल देती है, इसके परिणामस्वरूप उस अवरोध की छाया दिखाई देती है. *Differaction of Light* छाया सोमेश्वर मंदिर में पड़ने वाली छाया का रहस्य तो वैज्ञानिकों ने खोज निकाला लेकिन उससे भी बड़ा रहस्य ये है कि प्रकाश के विवर्तन सिद्धांत की खोज 17वीं सदी में हुई थी. मतलब छाया सोमेश्वर मंदिर के निर्माण के करीब 700 वर्ष बाद. इसका अर्थ ये है कि जो भी इस मंदिर का निर्माता और वास्तुकार रहा होगा उसे Diffraction of Light के बारे में पता था. समय समय पर ऐसी बातें सुनने को और पढने को मिलती रहती है कि भारतीय विज्ञान प्राचीन काल में भी बहुत उन्नत था. कुछ लोग इस बात का मजाक भी उड़ाते है. छाया सोमेश्वर मंदिर में उपयोग किया गया भौतिकी का प्रकाश विवर्तन सिद्धांत इस बात का साक्ष्य है कि प्राचीन भारतीय विज्ञान अपने समय में पश्चिमी देशों के विज्ञानं से कहीं आगे था.।। *🚩🙏🏻संत सनातन धर्म की जय🙏🏻🚩*

*🙏🏻सनातन संस्कृति और उसका उन्नत विज्ञान🙏🏻*

*🕉️छाया सोमेश्वर महादेव- तेलंगाना🕉️*

बहुत से चमत्कारिक मंदिरों में हम दर्शन के लिए भी जाते है. क्या आप जानते है कि हमारे पूर्वज ना केवल धर्म के मामले में अपितु विज्ञानं और स्थापत्य के मामले में भी हमसे आगे थे.

इसका सबसे बड़ा प्रमाण दक्षिण भारत में मिलने वाले अद्भुत स्थापत्य और वास्तुकला वाले मंदिर है.

हैदराबाद से करीब 100 किलोमीटर दूर नालगोंडा में भी एक इसी प्रकार का विलक्षण शिव मंदिर है. कहा जाता है कि ये मंदिर करीब 1000 साल पुराना है. कला की दृष्टि से ये मंदिर अपने आप में अनोखा है.

इस शिव मंदिर का नाम छाया सोमेश्वर मंदिर है...
 
इस मंदिर में हर समय भगवान शिव की मूर्ति के पीछे एक खम्बे की छाया पड़ती थी.

इस मंदिर में बहुत से खम्बे है जो मंदिर को सहारा देते है लेकिन रहस्य की बात ये थी कि यदि आप सभी खम्बों के सामने भी खड़े हो जाएँ तो भी शिवजी के पीछे खम्बे की छाया दिखाई देगी.

शिव के पीछे दिखने वाली इस छाया का रहस्य बहुत समय तक रहस्य ही बना हुआ था. बहुत से लोग इसे चमत्कार मानते थे.

कुछ समय पहले वैज्ञानिकों ने शिव के पीछे पड़ने वाली खम्बे की छाया का रहस्य सुलझ लिया है.

वैज्ञानिकों के अनुसार ये छाया किसी चमत्कार का परिणाम नहीं, ये विज्ञान के एक सिद्धांत आधारित है.

Diffraction of Light या प्रकाश का विवर्तन सिद्धांत कहता है कि यदि प्रकाश के मार्ग में कोई अवरोध आ जाये तो प्रकश की किरने उस अवरोध से टकराकर रास्ता बदल देती है, इसके परिणामस्वरूप उस अवरोध की छाया दिखाई देती है.
*Differaction of Light*
छाया सोमेश्वर मंदिर में पड़ने वाली छाया का रहस्य तो वैज्ञानिकों ने खोज निकाला लेकिन उससे भी बड़ा रहस्य ये है कि प्रकाश के विवर्तन सिद्धांत की खोज 17वीं सदी में हुई थी. मतलब छाया सोमेश्वर मंदिर के निर्माण के करीब 700 वर्ष बाद.

इसका अर्थ ये है कि जो भी इस मंदिर का निर्माता और वास्तुकार रहा होगा उसे Diffraction of Light के बारे में पता था.

समय समय पर ऐसी बातें सुनने को और पढने को मिलती रहती है कि भारतीय विज्ञान प्राचीन काल में भी बहुत उन्नत था.

कुछ लोग इस बात का मजाक भी उड़ाते है. छाया सोमेश्वर मंदिर में उपयोग किया गया भौतिकी का प्रकाश  विवर्तन सिद्धांत इस बात का साक्ष्य है कि प्राचीन भारतीय विज्ञान अपने समय में पश्चिमी देशों के विज्ञानं से कहीं आगे था.।।
*🚩🙏🏻संत सनातन धर्म की जय🙏🏻🚩*

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Renu Singh Jan 25, 2021

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sanjay choudhary Jan 25, 2021

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🙏((( गुरु की सीख ))))🙏 . 🔱 🔱🔱🔱🔱🔱🔱 पुराने समय में एक आश्रम में गुरु और शिष्य मूर्तियां बनाने का काम करते थे। . मूर्तियां बेचकर जो धन मिलता था, उससे ही दोनों का जीवन चल रहा था। . गुरु की वजह से शिष्य बहुत अच्छी मूर्तियां बनाने लगा था और उसकी मूर्तियां ज्यादा कीमत में बिकने लगी थी। . कुछ ही दिनों शिष्य को इस बात घमंड होने लगा था कि वह ज्यादा अच्छी मूर्तियां बनाने लगा है, लेकिन गुरु उसे रोज यही कहते थे कि... . बेटा और मन लगाकर काम करो। काम में अभी भी पूरी कुशलता नहीं आई है। . ये बातें सुनकर शिष्य को लगता था कि गुरुजी की मूर्तियां मुझसे कम दाम में बिकती हैं, शायद इसीलिए ये मुझसे जलते हैं और ऐसी बातें करते हैं। . जब कुछ दिनों तक लगातार गुरु ने उसे अच्छा काम करने की सलाह दी तो एक दिन शिष्य को गुस्सा आ गया। . शिष्य ने गुरु से कहा कि गुरुजी मैं आपसे अच्छी मूर्तियां बनाता हूं, मेरी मूर्तियां ज्यादा कीमत में बिकती हैं, फिर भी आप मुझे ही सुधार करने के लिए कहते हैं। . गुरु समझ गए कि शिष्य में अहंकार आ गया है, ये क्रोधित हो रहा है। . उन्होंने शांत स्वर में कहा कि बेटा जब मैं तुम्हारी उम्र का था, तब मेरी मूर्तियां भी मेरे गुरु की मूर्तियों से ज्यादा दाम में बिकती थीं। . एक दिन मैंने भी तुम्हारी ही तरह मेरे गुरु से भी यही बातें कही थीं। . उस दिन के बाद गुरु ने मुझे सलाह देना बंद कर दिया और मेरी कला का विकास नहीं हो पाया। . मैं नहीं चाहता कि तुम्हारे साथ भी वही हो जो मेरे साथ हुआ था। . ये बातें सुनकर शिष्य शर्मिंदा हो गया और गुरु से क्षमा मांगी। . इसके बाद वह गुरु की हर आज्ञा का पालन करता और धीरे-धीरे उसे अपनी कला की वजह से दूर-दूर तक ख्याति मिलने लगी। . इस प्रसंग की सीख यह है कि हमें भी अपने गुरु का पूरा सम्मान करना चाहिए और गुरु की दी हुई सलाह पर गंभीरता से काम करना चाहिए। . गुरु के सामने कभी भी अपनी कला पर घमंड नहीं करना चाहिए, वरना हमारी योग्यता में निखार नहीं आ पाएगा 💞🌹💞🌹💞🌹💞🌹💞🌹💞🌹 💞🌹💞🌹💞🌹💞🌹💞🌹💞🌹

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Madhu Soni. Jan 25, 2021

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Archana Singh Jan 25, 2021

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Radha Bansal Jan 25, 2021

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