🌹 जय माता की 🌹 🌹 चेनल को कृपया जरूर सर्च करना जी 🌹 💟 जय माँ 💞

🌹 जय माता की 🌹
🌹 चेनल को कृपया जरूर सर्च करना जी 🌹
💟 जय माँ 💞

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कामेंट्स

Priya Mar 25, 2019
@virandaryadav 🌹 जय माता की जी चेनल को सर्च जरूर करना जी 🌹🔱जय माँ

Priya Mar 25, 2019
@maheshkumar15 🌹 जय माता की जी चेनल को सर्च जरूर करना जी 🌹🔱जय माँ

Priya Mar 25, 2019
@satpalraghav 🌹 जय माता की जी चेनल को सर्च जरूर करना जी 🌹🔱जय माँ

Priya Mar 25, 2019
@shriniwasyadav1 🌹 जय माता की जी चेनल को सर्च जरूर करना जी 🌹🔱जय माँ

Priya Mar 25, 2019
@ramnaryanchubey 🌹 जय माता की जी चेनल को सर्च जरूर करना जी 🌹🔱जय माँ

Ramesh kumear Mar 25, 2019
manaapna friends KO bhia bola ji daknako or apto rj sa ho ham bhia

SAI KAMLESH Mar 26, 2019
omsairam Priya ji Shub dopahar Sai Baba bless you omsairam

Omprakash Upadhyay Apr 15, 2019

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radhe Krishna Apr 15, 2019

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Bindu singh Apr 17, 2019

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Bindu singh Apr 17, 2019

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Anita Mittal Apr 17, 2019

🌷🌷माँ ! तेरे सहारे जीवन चलता , तेरे सहारे भोजन । हम तो दास हैं मैया ! तेरे दरबार के , करते हैं खुद को तेरे चरणों में अर्पण 🌷🌷 🌹🌹जय णाँ काली जी 🌹🌹 🌻🌻प्राणी मात्र में ईश्वर - दर्शन 🌻🌻 -------------------------------------- स्वामी विवेकानंद नये - 2 संन्यासी बने थे ।वह तब तक प्राणी मात्र में ईश्वर के दर्शन के संदेश को समझ नहीं पाये थे । युवावस्था में वह काफी समय तक ग्रामीण अंचलों का भ्रमण करने लगे रहे । वह गाँवों की स्थिति का अध्ययन करते और लोगों को सदाचारी बनने और दुर्व्यसनों से दूर रहने का उपदेश दिया करते थे । एक दिन भीषण गर्मी में स्वामी जी एक गाँव से गुजर रहे थे । प्यास लगी , तो खेत की मेड़ पर बैठे एक व्यक्ति को लोटे से पानी पीते देखकर कहा , भैया ! मुझे भी थोड़ा पानी पिला दें । उस ग्रामीण ने भगवा वस्त्रधारी संन्यासी को देखकर सिर झुकाया और बोला , महाराज ! मैं निम्न जाति का व्यक्ति आपको अपने हाथों से पानी पिलाकर पाप मोल नहीं ले सकता । स्वामी जी यह सुनकर आगे बढ़ गये । कुछ ही क्षणों में उन्हें लगा कि मैंने साधु बनने के लिये जाति , परिवार तथा पुरानी प्रचलित गलत मान्यताओं का परित्याग कर दिया , फिर आग्रह करके उस निश्छल ग्रामीण का पानी क्यों नहीं स्वीकार किया ? मेरा सोया हुआ जाति अभिमान क्यों जाग उठा ? यह तो अधर्म हो गया । वह तुरंत उस ग्रामीण के पास लौटकर बोले , भैया ! मुझे क्षमा करना । मैंने तुम जैसे निश्छल परिश्रमी व्यक्ति के हाथों पानी ना पीकर घोर पाप किया है । निम्न जाति तो उसकी होती है , जो दुर्व्यसनी और अपराधी होता है । स्वामी जी ने उसके हाथ से लोटा लेकर पानी ग्रहण किया । बाद में वे खुलकर ऊँच - नीच की भावना पर प्रहार करते रहे । 🌲🌲माँ काली का शुभाशीष आजीवन आपके साथ बना रहे 🌲🌲 🌹🌹जय माँ काली जी.🌹🌹

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