Suchitra Singh
Suchitra Singh Nov 29, 2017

मोक्षदा एकादशी 2017: जानिए पूजा व‍िधि, व्रत कथा और पारण का समय।

मोक्षदा एकादशी 2017: जानिए पूजा व‍िधि, व्रत कथा और पारण का समय।

मार्गशीर्ष की एकादशी को मोक्षदा एकादशी कहा जाता है. मान्‍यता है कि मोक्षदा एकादशी का व्रत करने से मनुष्‍यों के सभी पाप नष्‍ट हो जाते हैं. यही नहीं इस व्रत के प्रभाव से पितरों को भी मुक्ति मिलती है. माना जाता है कि यह व्रत मनुष्‍य के मृतक पूर्वजों के लिए स्‍वर्ग के द्वार खोलने में मदद करता है. जो भी व्‍यक्ति मोक्ष पाने की इच्‍छा रखता है उसे इस एकादशी पर व्रत रखना चाहिए. इस दिन भगवान श्रीकृष्‍ण के मुख से पवित्र श्रीमदभगवद् गीता का जन्‍म हुआ था. इसलिए इस दिन गीता जयंती भी मनाई जाती है. भारत की सनातन संस्कृति में श्रीमद्भगवद्गीता न केवल पूज्य बल्कि अनुकरणीय भी है. यह दुनिया का इकलौता ऐसा ग्रंथ है जिसकी जयंती मनाई जाती है.

मोक्षदा एकादशी का महत्‍व
विष्‍णु पुराण के अनुसार मोक्षदा एकादशी का व्रत हिंदू वर्ष की अन्‍य 23 एकादश‍ियों पर उपवास रखने के बराबर है. इस एकादशी का पुण्‍य पितरों को अर्पण करने से उन्‍हें मोक्ष की प्राप्ति होती है. वे नरक की यातनाओं से मुक्‍त होकर स्‍वर्गलोक प्राप्‍त करते हैं. मान्‍यता के अनुसार जो मोक्षदा एकादशी का व्रत करता है उसके पाप नष्‍ट हो जाते हैं और उसे जीवन-मरण के बंधन से मु्क्ति म‍िल जाती है. यानी कि उसे मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है.

कब मनाई जाती है मोक्षदा एकादशी?
मोक्षदा एकादशी हिंदू चंद्र कैलेंडर के अनुसार 11वें दिन यानी चंद्र मार्गशीर्ष (अग्रहायण) के महीने में चांद (शुक्‍ल पक्ष) के दौरान मनाई जाती है. ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार मोक्षदा एकादशी नवंबर या दिसंबर के महीने में आती है. साल 2017 में यह गुरुवार 30 नवंबर को मनाई जाएगी.

व्रत रखने और पारण का समय
मोक्षदा एकादशी तिथ‍ि प्रारंभ: 29 नवंबर 2017 को रात्र‍ि 10 बजकर 59 मिनट
एकादशी तिथ‍ि समाप्‍त: 30 नवंबर 2017 को रात्र‍ि 9 बजकर 26 मिनट
पारण यानी व्रत खोलने का समय: 1 नवंबर 2017 को सुबह 06 बजकर 55 मिनट से रात्र‍ि 07 बजकर 12 मिनट

मोक्षदा एकादशी व्रत की पूजा विध‍ि
- इस दिन सुबह उठकर स्‍नान करने के बाद स्‍वच्‍छ वस्‍त्र धारण कर भगवान श्रीकृष्‍ण का स्‍मरण करते हुए पूरे घर में गंगाजल छ‍िड़कें.
- पूजन सामग्री में तुलसी की मंजरी, धूप-दीप, फल-फूल, रोली, कुमकुम, चंदन, अक्षत, पंचामृत रखें.
- विघ्‍नहर्ता भगवान गणेश, भगवान श्रीकृष्‍ण और महर्ष‍ि वेदव्‍यास की मूर्ति या तस्‍वीर सामने रखें. श्रीमदभगवद् गीता की पुस्‍तक भी रखें.
- सबसे पहले भगवान गणेश को तुलसी की मंजरियां अर्पित करें.
- इसके बाद विष्‍णु जी को धूप-दीप दिखाकर रोली और अक्षत चढ़ाएं.
- पूजा पाठ करने के बाद व्रत-कथा सुननी चाहिए. इसके बाद आरती कर प्रसाद बांटें.
- व्रत एकदाशी के अलग दिन सूर्योदय के बाद खोलना चाहिए.

मोक्षदा एकादशी व्रत कथा
मोक्षदा एकादशी का व्रत मनुष्‍यों के पाप दूर कर उनका उद्धार करने वाले श्री हरि के नाम से रखा जाता है. एक कथा के अनुसार चंपा नगरी में एक प्रतापी राजा वैखानस रहा करते थे. चारों वेदों के ज्ञाता राजा वैखानस बहुत प्रतापी और धार्मिक राजा थे. उनकी प्रजा खुशहाल और संपन्‍न थी. एक दिन राजा ने सपना देखा, जिसमें उनके पिता नरक में यातनाएं झेलते दिखाई दिए. सपना देखने के बाद राजा बेचैन हो उठे और सुबह होते ही उन्‍होंने पत्‍नी को सबकुछ बता दिया. राजा ने यह भी कहा, ‘इस दुख के कारण मेरा चित्त कहीं नहीं लग रहा है, मैं इस धरती पर सम्‍पूर्ण ऐशो-आराम में हूं और मेरे पिता कष्‍ट में हैं.’ पत्‍नी ने कहा महाराज आपको आश्रम में जाना चाहिए.

राजा आश्रम गए. वहां पर कई सिद्ध गुरु थे, जो तपस्‍या में लीन थे. राजा पर्वत मुनि के पास गए और उन्‍हें प्रणाम कर उनके पास बैठ गए. पर्वत मुनि ने मुस्‍कुराकर आने का कारण पूछा. राजा अत्‍यंत दुखी थे और रोने लगे. तब पर्वत मुनि ने अपनी दिव्‍य दृष्‍टि से सब कुछ जान लिया और राजा के सिर पर हाथ रखकर बोले, ‘तुम एक पुण्‍य आत्‍मा हो, जो अपने पिता के दुख से इतने दुखी हो. तुम्‍हारे पिता को उनके कर्मों का फल म‍िल रहा है. उन्‍होंने तुम्‍हारी माता को तुम्‍हारी सौतेली माता के कारण बहुत यातनाएं दीं. इसी कारण वे इस पाप के भागी बने और अब नरक भोग रहे हैं.’ राजा ने पर्वत मुनि से इसका हल पूछा इस पर मुनि ने उन्‍हें मोक्षदा एकादशी का व्रत का पालन करने और इसका फल अपने पिता को देने के लिए कहा. राजा ने विधि पूर्वक व्रत किया और व्रत का पुण्‍य अपने पिता को अर्पण कर दिया. व्रत के प्रभाव से राजा के पिता के सभी कष्‍ट दूर हो गए. उन्‍हें नरक के कष्‍टों से मुक्ति म‍िल गई. स्‍वर्ग को जाते उन्‍होंने अपने पुत्र को आशीर्वाद भी दिया.

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कामेंट्स

Prakash Patel Feb 28, 2018
🔔🐚🔔🐚🔔🐚🔔 🔔​ जयश्री गणपतीदादा 🌼​ जयश्री हनुमानदादा 🐚ॐ नम: शिवाय 🏹*" जयश्रीराम"* 🔔 *"जयश्रीकृष्णा"* ​ 🌼​*"ॐ श्रीराम जय राम जय जय राम"* https://youtu.be/kHGftI3VsTE 🌸आपकी हर पल शुभ ऐवम् मंगलमय हो 🌸

Malkhan Singh UP Mar 1, 2018
जय श्री गणेश जी, राधे राधे जी आप के पोस्ट सब देखा अतिसुन्दर है। पोस्ट करना बन्द न करे।

Naimin Mar 13, 2018
jai Shree Krishna🌹🙏🌹

RAJ Mar 18, 2018
🙏Hari om narayan ji🙏 🙏navratri or nav varsh ki shubhkamnayen ji🙏

Gajrajg Jun 13, 2018
🙏जय श्री कृष्ण🙏 *ये किताबी नहीं, जीवन का गणित है ...साहेब ,* यहाँ दो में से एक गया तो... कुछ नहीं बचता।* *चाहे जीवन साथी हो या दोस्त बस. सब शुन्य हो जाता है ,* 🌷शुभ रात्रि🌷

चम्पा (स्कंदषष्ठी) महत्व एवं मंगल देव को प्रसन्न करने के उपाय 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ चम्पा षष्ठी मार्गशीर्ष मास की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाई जाती है. मान्यता है की इस व्रत को करने से पापों से मुक्ति मिलती है और भगवान शिव का आशिर्वाद मिलता है। भगवान स्कंद शक्ति के अधिदेव हैं, देवताओं ने इन्हें अपना सेनापतित्व प्रदान किया मयूरा पर आसीन देवसेनापति कुमार कार्तिक की आराधना दक्षिण भारत मे सबसे ज्यादा होती है, यहां पर यह मुरुगन नाम से विख्यात हैं . प्रतिष्ठा, विजय, व्यवस्था, अनुशासन सभी कुछ इनकी कृपा से सम्पन्न  होते हैं.  स्कन्द पुराण के मूल उपदेष्टा कुमार कार्तिकेय ही हैं तथा यह पुराण सभी पुराणों में सबसे विशाल है। पुराणों के अनुसार षष्ठी तिथि को कार्तिकेय भगवान का जन्म हुआ था इसलिए आषाढ़ एवं कार्तिक माह के साथ ही प्रत्येक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि के दिन स्कन्द भगवान की पूजा का विशेष महत्व है, पंचमी से युक्त षष्ठी तिथि को व्रत के श्रेष्ठ माना गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भगवान कार्तिकेय षष्ठी तिथि और मंगल ग्रह के स्वामी हैं तथा दक्षिण दिशा में उनका निवास स्थान है। इसीलिए जिन जातकों की कुंडली में कर्क राशि अर्थात् नीच का मंगल होता है, उन्हें मंगल को मजबूत करने तथा मंगल के शुभ फल पाने के लिए इस दिन भगवान कार्तिकेय का व्रत करना चाहिए। क्योंकि स्कंद षष्ठी भगवान कार्तिकेय को प्रिय होने से इस दिन व्रत अवश्य करना चाहिए। कार्तिकेय को चम्पा के फूल पसंद होने के कारण ही इस दिन को स्कन्द षष्ठी के अलावा चम्पा षष्ठी भी कहते हैं। इस व्रत की प्राचीनता एवं प्रामाणिकता स्वयं परिलक्षित होती है. इस कारण यह व्रत श्रद्धाभाव से मनाया जाने वाले पर्व का रूप धारण करता है. स्कंद षष्ठी के संबंध में मान्यता है कि राजा शर्याति और भार्गव ऋषि च्यवन का भी ऐतिहासिक कथानक जुड़ा है कहते हैं कि स्कंद षष्ठी की उपासना से च्यवन ऋषि को आँखों की ज्योति प्राप्त हुई। ब्रह्मवैवर्तपुराण में बताया गया है कि स्कंद षष्ठी की कृपा से प्रियव्रत का मृत शिशु जीवित हो जाता है. स्कन्द षष्ठी पूजा की पौरांणिक परम्परा जुड़ी है, भगवान शिव के तेज से उत्पन्न बालक स्कन्द की छह कृतिकाओं ने स्तनपान करा रक्षा की थी इनके छह मुख हैं और उन्हें कार्तिकेय नाम से पुकारा जाने लगा. पुराण व उपनिषद में इनकी महिमा का उल्लेख मिलता है। स्कंद षष्ठी पूजन 〰️〰️〰️〰️〰️ इस तिथि पर विधिपूर्वक व्रत करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है और रोग, दुख, दरिद्रता से भी मुक्ति मिलती है। विधि पूर्वक व्रत करने के लिए सबसे पहले प्रातकाल उठकर स्नानादि के बाद नए वस्त्र धारण करें। तत्पश्चात् भगवान कार्तिकेय की प्रतिमा की स्थापना करें और दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पूजन करें। पूजा सामग्री में घी और दही को अवश्य शामिल करें। इसके बाद भगवान मुरुगन की आराधना के लिए कार्तिकेय गायत्री मंत्र- “ॐ तत्पुरुषाय विधमहे: महा सैन्या धीमहि तन्नो स्कंदा प्रचोदयात”।। “ॐ शारवाना-भावाया नम: ज्ञानशक्तिधरा स्कंदा वल्लीईकल्याणा सुंदरा, देवसेना मन: कांता कार्तिकेया नमोस्तुते” ।। देव सेनापते स्कन्द कार्तिकेय भवोद्भव। कुमार गुह गांगेय शक्तिहस्त नमोस्तु ते॥ मंत्र का जाप करें। जाप के बाद भगवान कार्तिकेय के निम्न 16 नामो का सामर्थ्य अनुसार उच्चारण करें। 1. कार्तिकेय 2. महासेन 3. शरजन्मा 4. षडानन 5. पार्वतीनन्दन 6. स्कन्द 7. सेनानी 8. अग्निभू 9. गुह 10. बाहुलेय 11. तारकजित् 12. विशाख 13. शिखिवाहन 14. शक्तिश्वर 15. कुमार 16. क्रौंचदारण इसके अलावा स्कन्द षष्ठी एवं चम्पा षष्ठी के दिन भगवान कार्तिकेय के इन मंत्रों का जाप भी किया जाना चाहिए। यह मंत्र हर प्रकार के दुख एवं कष्टों का नाश करने के लिए प्रभावशाली है। शत्रु नाश के लिए पढ़ें ये मंत्र- ॐ शारवाना-भावाया नम: ज्ञानशक्तिधरा स्कन्दा वल्लीईकल्याणा सुंदरा देवसेना मन: कांता कार्तिकेया नमोस्तुते। इस तरह से भगवान कार्तिकेय का पूजन-अर्चन करने से जीवन के सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है। ध्यान रखें कि व्रती को मांस, मदिरा, प्याज, लहसुन का परित्याग कर देना चाहिए। किसी वैद्य से सलाह लेकर ब्राह्मी का रस और घी का सेवन कर सकते हैं और रात्रि को जमीन पर सोना चाहिए।  स्कंद षष्ठी कथा 〰️〰️〰️〰️〰️ स्कंद पुराण के अनुसार भगवान शिव के दिये वरदान के कारण अधर्मी राक्षस तारकासुर अत्यंत शक्तिशाली हो चुका था। वरदान के अनुसार केवल शिवपुत्र ही उसका वध कर सकता था। और इसी कारण वह तीनों लोकों में हाहाकार मचा रहा था। इसीलिए सारे देवता भगवान विष्णु के पास जा पहुँचे। भगवान विष्णु ने उन्हें सुझाव दिया की वे कैलाश जाकर भगवान शिव से पुत्र उत्पन्न करने की विनती करें। विष्णु की बात सुनकर समस्त देवगण जब कैलाश पहुंचे तब उन्हें पता चला कि शिवजी और माता पार्वती तो विवाह के पश्चात से ही देवदारु वन में एकांतवास के लिए जा चुके हैं। विवश व निराश देवता जब देवदारु वन जा पहुंचे तब उन्हें पता चला की शिवजी और माता पार्वती वन में एक गुफा में निवास कर रहे हैं। देवताओं ने शिवजी से मदद की गुहार लगाई किंतु कोई लाभ नहीं हुआ, भोलेभंडारी तो कामपाश में बंधकर अपनी अर्धांगिनी के साथ सम्भोग करने में रत थे। उनको जागृत करने के लिए अग्नि देव ने उनकी कामक्रीड़ा में विघ्न उत्पन्न करने की ठान ली। अग्निदेव जब गुफा के द्वार तक पहुंचे तब उन्होने देखा की शिव शक्ति कामवासना में लीन होकर सहवास में तल्लीन थे, किंतु अग्निदेव के आने की आहट सुनकर वे दोनों सावधान हो गए। सम्भोग के समय परपुरुष को समीप पाकर देवी पार्वती ने लज्जा से अपना सुंदर मुख कमलपुष्प से ढक लिया। देवी का वह रूप लज्जा गौरी के नाम से प्रसिद्द हो गया। कामक्रीड़ा में मग्न शिव जी ने जब अग्निदेव को देखा तब उन्होने भी सम्भोग क्रीड़ा त्यागकर अग्निदेव के समक्ष आना पड़ा। लेकिन इतने में कामातुर शिवजी का अनजाने में ही वीर्यपात हो गया। अग्निदेव ने उस अमोघ वीर्य को कबूतर का रूप धारण करके ग्रहण कर लिया व तारकासुर से बचाने के लिए उसे लेकर जाने लगे। किंतु उस वीर्य का ताप इतना अधिक था की अग्निदेव से भी सहन नहीं हुआ। इस कारण उन्होने उस अमोघ वीर्य को गंगादेवी को सौंप दिया। जब देवी गंगा उस दिव्य अंश को लेकर जाने लगी तब उसकी शक्ति से गंगा का पानी उबलने लगा। भयभीत गंगादेवी ने उस दिव्य अंश को शरवण वन में लाकर स्थापित कर दिया किंतु गंगाजल में बहते बहते वह दिव्य अंश छह भागों में विभाजित हो गया था। भगवान शिव के शरीर से उत्पन्न वीर्य के उन दिव्य अंशों से छह सुंदर व सुकोमल शिशुओं का जन्म हुआ। उस वन में विहार करती छह कृतिका कन्याओं की दृष्टि जब उन बालकों पर पडी तब उनके मन में उन बालकों के प्रति मातृत्व भाव जागा। और वो सब उन बालकों को लेकर उनको अपना स्तनपान कराने लगी। उसके पश्चात वे सब उन बालकोँ को लेकर कृतिकालोक चली गई व उनका पालन पोषण करने लगीं। जब इन सबके बारे में नारद जी ने शिव पार्वती को बताया तब वे दोनों अपने पुत्र से मिलने के लिए व्याकुल हो उठे, व कृतिकालोक चल पड़े। जब माँ पार्वती ने अपने छह पुत्रों को देखा तब वो मातृत्व भाव से भावुक हो उठी, और उन्होने उन बालकों को इतने ज़ोर से गले लगा लिया की वे छह शिशु एक ही शिशु बन गए जिसके छह शीश थे। तत्पश्चात शिव पार्वती ने कृतिकाओं को सारी कहानी सुनाई और अपने पुत्र को लेकर कैलाश वापस आ गए। कृतिकाओं के द्वारा लालन पालन होने के कारण उस बालक का नाम कार्तिकेय पड़ गया। कार्तिकेय ने बड़ा होकर राक्षस तारकासुर का संहार किया। मंगल अरिष्ट निवारण हेतु विशेष उपाय एवं 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ 👉 मंगल कृत अरिष्ट शांति के लिए किसी भी शुक्ल पक्ष की स्कंदषष्ठी से शुरू करके लाल वस्त्र पहनकर श्री हनुमान जी की मूर्ती से सामने कुशाशन पर बैठा कर गेरू अथवा लाल चंदन का टीका लगाकर एवं घी की ज्योति जगाकर श्री हनुमानाष्टक अथवा हनुमान चालीसा का प्रतिदिन काम से कम २१ संख्या में पाठ करे।ऐसा नियमित ४१ दिन तक करने पर कठिन से कठिन कार्य की सिद्धि होती है।श्री हनुमानाष्टक पाठ के प्रारंभ में श्री हनुमत-स्तवन के सात मंत्रो का भी पाठ करने से विशेष लाभ होता है।पाठ के बाद किशमिश या लड्डू का भोग लगाना शुभ रहेगा। 👉 हर मंगलवार को स्नान आदि से निवृत होकर लाल वस्त्र एवं लाल चंदन का तिलक धारण कर कुशाशन पर बैठ कर ४१ दिन नियमित रूप से १०८ बार हनुमान चालीसा का पाठ एवं लड्डू का भोग लगाने से भौमकृत अरिष्ट की शांति होती है। 👉 जन्म कुंडली में मंगल योग कारक होकर भी शुभ फल ना दे रहा हो तो हर मंगल वार कपिला गाय को मीठी रोटियां खिलाकर नमस्कार करना चाहिए गौ को हरा चारा जल सेवा एवं लाल वस्त्र पहना कर अलंकृत करने से मंगल के अशुभ फल की शांति होती है। 👉 प्रत्येक सोमवार की रात्रि को ताँबे के बर्तन में पानी सिराहने रख कर मंगलवार की प्रातः घर में लगाये हुए गुलाब के पौधों को वही जल मंगल का बीज मंत्र पढ़ते हुए डाले। 👉 किसी भी विशेष यात्रा पर जाने से पहले शहद का सेवन शुभ रहेगा। 👉 यदि कुंडली में मंगल नीच राशिगत हो या अस्त हो तो शरीर पर सोने या तांबे का गहना या अन्य कोई वस्तु धारण नहीं करना चाहिए।इस स्तिथि में लाल रंग के वस्रों एवं लाल चंदन का भी परहेज करना चाहिए। 👉 मंगल अशुभ होने की स्तिथि में मंगल सम्बंधित वस्तुओ (ताम्र बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक वस्तु, लाल वस्त्र, गुड़ आदि) के उपहार विशेष कर स्कन्द षष्ठी, मंगलवार और मंगल के नक्षत्रो में ग्रहण ना करे अपतु इनका दान इन दिनों विशेष लाभदाय रहेगा। 👉 गेंहू तथा मसूर की दाल के सात-सात दाने लाल पत्थर पर सिंदूर का तिलक लगाकर इनको लाल वस्त्र में लपेटकर मंगल का बीज मंत्र पढ़ते हुए बहते जल में प्रवाहित करें। 👉 लगातार २७ स्कन्द षष्ठी तिथि किसी अंध विद्यालय में या किसी अंगहीन व्यक्ति को मीठा भोजन कराना शुभ होगा। 👉 मंगल की अशुभता में माँस-मछली-शराब आदि तामसिक भोजन का परहेज विशेष जरूरी है। 👉 कर्ज से छुटकारे एवं संतान सुख के लिए ज्योतिषी से परामर्श कर सवा दस रत्ती का मूंगा धारण करना, भौम गायत्री मंत्र का नियमानुसार जप ,तथा मंगल स्त्रोत्र का पाठ करना कल्याणकारी रहता है। 👉 ऋण, रोग एवं शत्रु भय से मुक्ति के लिए एवं आयोग्य,धन - संपदा - पुत्र प्राप्ति के लिए मंगल यंत्र धारण तथा मंगल की औषधियों से नियमित स्नान इसके अतिरिक्त मंगल के वैदिक मंत्रों का निर्दिष्ट अनुसार ब्राह्मणों द्वारा जप और दशांश हवन करना शीघ्र कल्याणकारी रहेगा। 👉 कुंडली में मांगलिक आदि दोष के कारण मंगल अशुभ फल दे रहा हो तो जातक/जातिका को श्री सुंदरकांड का स्कंदषष्ठी से लेकर नियमित १०८ दिन तक हनुमान जी की चोला -जनेऊ एवं भोग लगाकर पाठ करने से वैवाहिक एवं पारिवारिक सुखों में वृद्धि करता है।इसके अतिरिक्त भौम शांति के लिए मंगल चंडिका स्त्रोत्र का पाठ भी विशेष लाभप्रद माना गया है। 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️

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🚩🔱🔥📿🔯🧘‍♂️साधना-प्रधान देश का विलक्षण अधः - पतन ! सिद्धि की चाह में " सत्य - मार्ग " का त्याग !! हिन्दु- जाति साधकों की जाति रही है । ,,,,,,,,,, साधकों के देश में आज भ्रान्ति का बाजार धूम-धाम से लगा हुआ हैं । फलतः श्रद्धा -- यहाँ तक कि आस्तिकता का भी बुरी तरह पद-दलन किया जा रहा है! इस दुरवस्था का मूल कारण यहीं है कि आज हम सचमुच साधक नहीं रहे । हममें साधना के रहस्य का ज्ञान नहीं रहा । हम केवल भ्रान्त विचारों के अनुयायी मात्र हो रहे हैं । हममें न आस्तिक बुद्धि रह गई है और न अपने धर्म शास्त्रों पर श्रद्धा! साधना-प्रधान पुण्य-मय देश के निवासियों का यह विलक्षण अधः--पतन है ! बहु-प्रचारित साधकों में दभ्म के सिवा और कुछ नहीं हैं । न तपस्या हैं न तंत्र -गन्थों का सम्यक् झान ही है ! बस आडम्बर ढोंग मात्र ही उनके पास है ऐसे बहु - प्रचारितों की बातें सुनकर साधारण जन समझते हैं कि तांन्त्रिक दीक्षा ली नहीं कि बात - की बात में सिद्धि हुए जब कि बात इसके सर्वथा विपरीत है । तांन्त्रिक,अधोरी बनना,ओर साधना सिद्धि करने में सारा जीवन भी व्यतीत हो जाता हैं और सिद्धि नहीं मिलती । सिद्धि साधारण बात नहीं हैं । यह एक महान् दुर्लभ फलार्थ है ।शास्त्र में बताई हुई विधि के अनुसार वर्षों परिश्रम करने पर सिद्धि मिलती है आज के मानव में यदि इतना धैर्य भी हो तो इतनी सुविधा कहाँ ? बाल-बच्चों सुख-भोग का मोह प्रति-क्षण उसे चिन्ता-ग्रस्त किए रहता हैं । सत्य यही है पर इस सत्य की कौन कदर करे ? जहाँ सत्य नहीं वहाँ सिद्धि कहाँ ? परन्तु सिद्धि की चाह सबको है । सभी उसी के फेर में हैं । कौन शास्त्र के विधि-विधानों के चक्कर में पड़े और सो भी उस दशा में जब उसे अपने आस-पास अनायास ही सिद्धि दिलाने वाले महात्मा पुरुष घूमते दिखाई दे रहे हैं। Facebook रूपी गुरु की भरमार है। आज कोई अपने को कौल बता रहा है कोई अपने को शाक्त बता रहा है कोई अपने को 10 महाविद्या सिद्धि बता रहा है। कोई अपने को भैरवी चक्र भैरवी साधना का प्रवर्तक बता रहा है। कहीं से 25 50 तंत्र ग्रंथ पढ़ लिए है। अपने मन से कोई अपना कुछ लेख जोड़कर उसको Facebook पर ट्विटर पर प्रकाशित कर रहे हैं जिसका किसी भी ग्रंथ में कहीं उल्लेख नहीं मिलता हैं। तंत्र ग्रंथों का सत्यानाश कर दिया हैं । कुछ किताबें पढ़ ली और धर्म के नाम पर धंधा करना शुरू कर दिया ऐसे हजारों नाम है जो Facebook पर सिर्फ धर्म के नाम पर धंधा कर रहे हैं। और इससे बड़े धृत भी हैं जो धर्म के नाम पर शिविर लगाकर दीक्षा रूपी साधना रूपी सिद्धि रुपी यंत्र और माला बेच रहे हैं। जो रुद्राक्ष की कीमत 100 रुपए से ₹200 तक है। तथाकथित तांत्रिक, औधड,अधोरी गुरु अपने शिविरों में इसे 5000 6000 8000 में बेच रहे हैं। पारद के विग्रह,सिद्ध तावीज,कवच आदि बेच रहे हैं। कभी मन किया तो फ्री में दे दिया सिर्फ धर्म के नाम पर हमें यह लूट रहे हैं। जो लोग Google पर तंत्र को सर्च करके पढ़ लेते हैं। और बातें भी बहुत बड़ी-बड़ी करते हैं। जब उनको यह लगता है कि ये मेरे मतलब का नहीं है । फिर उसको छोड़ देते हैं दूसरे फेसबुकिया गुरु को पकड़ते हैं फिर Facebook पर ऐसे पेज को ढूंढते हैं जिसमें ऐसे तांत्रिक, अधोरी गुरु को ढूंढते हैं जो उनको बैठे-बैठे ही फोन पर सब काम करदे कोई ऐसा मंत्र दे दे कि चुटकी बजाते ही एक रात में करोड़पति हो जाएं और कर्ण पिशाचिनी,भैरवी साधना के आडम्बर मे कितनी लडक़ीयो के साथ अपनी वासनापुर्ती करके धोखा,ओर धर्म के नाम पर गलत,काम करते है साथ मे लक्ष्मी और योगिनी भी सिद्ध हो जाए जिन ढूँढा तिन पाईयाँ- चुटकी बजाते चमत्कार की आकांक्षी शिष्यों को ऐसे हीं गुरु मिलते हैं। मैं इन ठगों को दोष नही देता। जब हम स्वंय ठगाने को तैयार बैठे हैं तो ठगने वाले का कोई दोष नहीं। आज मुंड माला के साथ,खप्पर के साथ,श्मसान मे चिता के पास,बडी मालाएं ओर पब्लिसीटी वाले,साधना शिबीर चलाने वाले फोटो के साथ प्रचार-प्रसार करने वाले को ही सही व्यक्ति समझने की भूल करने वाले को ऐसे ही गुरु मिलते हैं। सही कहे तो मुझे अभी तक कोई ऐसा व्यक्ति मिला ही नहीं जिसकी धर्म में श्रद्धा हो देवी,देवता पर श्रद्धा,भरोसा हो मंत्रं तंत्र यंत्र के विषय में रुचि है ही नहीं बस उनको कोई ऐसा व्यक्ति मिल जाए जो हमको सिद्ध बना दें ओर हम अपना धंधा शुरु कर दे भाई किताब पढ़ लेने से और किताबों से मंत्र लेकर जप करने से कोई सिद्ध,महान नहीं हो सकता मैं यहां पर ऐसी फेसबुकिया सिद्धियों का दावा नहीं करता नाही ऐसी सिद्धियां सिखाता हूं मुझसे ऐसी आशा रखने वाले लोगों से निवेदन है कि वह फेसबुकिया औधड,अधोरी बाबाओं के यहां जाएं जहां पर वह तथाकथित अपने को तांत्रिक,अधोरी, औधड गुरु कहने वाले शिविर लगाकर माला यंत्र बेचकर धर्म के नाम पर धंधा करने वाले वह जो खुले मंच पर मंत्रों को बोल कर देते हैं और उस दीक्षा का भी शुल्क लेते हैं जो धर्म के नाम पर अपना धंधा चला रहा हैं जानिए,पहेचाने ओर सावधान रहे ऐसे ढोंगी पांखडी अधोरी बाबाओ से ओर अपना किमती समय बचाऐ! *आदेश **🔯⚛🏵️💢🪐

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*🚩Jai Shree Ganesh🌞* *🌷🌷जानिए दिसम्बर 2019 के तिथियों, ब्रतो एवं सभी महत्वपूर्ण पर्वो की समस्त जानकारी-*🚩🚩 *🙏दिसम्बर 2019* 01 रविवार विवाह पञ्चमी 02 सोमवार चम्पा षष्ठी 04 बुधवार मासिक दुर्गाष्टमी 08 रविवार मोक्षदा एकादशी, गीता जयन्ती, मत्स्य द्वादशी, गुरुवायुर एकादशी 09 सोमवार प्रदोष व्रत 11 बुधवार दत्तात्रेय जयन्ती, पूर्णिमा उपवास, रोहिणी व्रत 12 बृहस्पतिवार मार्गशीर्ष पूर्णिमा, अन्नपूर्णा जयन्ती, त्रिपुर भैरवी जयन्ती 13 शुक्रवार पौष प्रारम्भ 15 रविवार संकष्टी चतुर्थी 16 सोमवार धनु संक्रान्ति 19 बृहस्पतिवार कालाष्टमी 22 रविवार सफला एकादशी, साल का सबसे छोटा दिन 23 सोमवार प्रदोष व्रत 24 मंगलवार मासिक शिवरात्रि 25 बुधवार क्रिसमस 26 बृहस्पतिवार पौष अमावस्या, सूर्य ग्रहण, हनुमत जयन्ती 27 शुक्रवार चन्द्र दर्शन 30 सोमवार विनायक चतुर्थी 31 मंगलवार स्कन्द षष्ठी 🙏🙏🌞🙏🙏🚩🙏🙏🌷🙏🙏🌞🙏🙏 *Please check once again with 2019 calender and your community temple to avoid any type of error and omission.*  *🌹🌹जय श्री महाकाल🙏🙏* *जय श्रीमहाकालभैरव🙏🙏🌹🌹*

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