Rameshanand Guruji
Rameshanand Guruji Apr 15, 2021

आज का श्रंगार दर्शन *श्री खाटूश्यामजी* दि 15-04-2021 गुरुवार श्री खाटू नगरिया, जिला सीकर-राजस्थान

आज का श्रंगार दर्शन
*श्री खाटूश्यामजी*
दि 15-04-2021 गुरुवार
श्री खाटू नगरिया, जिला सीकर-राजस्थान

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कामेंट्स

Ranveer soni Apr 15, 2021
🌹🌹जय श्री खाटू श्याम बाबा🌹🌹

Dinesh Lohar Apr 15, 2021
जय हो श्री खाटु श्याम बाबा की जय हो

Anita Sharma May 9, 2021

+46 प्रतिक्रिया 6 कॉमेंट्स • 3 शेयर
Madhuvan May 9, 2021

+16 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 6 शेयर
Anita Sharma May 8, 2021

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Madhuvan May 8, 2021

+12 प्रतिक्रिया 4 कॉमेंट्स • 5 शेयर
Madhuvan May 7, 2021

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Anita Sharma May 7, 2021

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*एक बहुत सुंदर कहानी* 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻 *नारद मुनि जहां भी जाते थे, बस ‘नारायण , नारायण’ कहते रहते थे।नारद को तीनों लोकों में जाने की छूट थी। वह आराम से कहीं भी आ-जा सकते थे। एक दिन उन्होंने देखा कि एक किसान परमानंद की अवस्था में अपनी जमीन जोत रहा था।नारद को यह जानने की उत्सुकता हुई कि उसके आनंद का राज क्या है, जब वह उस किसान से बात करने पहुंचे, तो वह अपनी जमीन को जोतने में इतना डूबा हुआ था, कि उसने नारद पर ध्यान भी नहीं दिया। दोपहर के समय, उसने काम से थोड़ा विराम लिया और खाना खाने के लिए एक पेड़ के नीचे बैठा। उसने बर्तन को खोला, जिसमें थोड़ा सा भोजन था। उसने सिर्फ नारायण, नारायण, नारायण’ कहा और खाने लगा। किसान अपना खाना उनके साथ बांटना चाहता था मगर जाति व्यवस्था के कारण नारद उसके साथ नहीं खा सकते थे। नारद ने पूछा, ‘तुम्हारे इस आनंद की वजह क्या है?’ किसान बोला, ‘हर दिन नारायण अपने असली रूप में मेरे सामने आते हैं। मेरे आनंद का बस यही कारण है। नारद ने उससे पूछा, तुम कौन सी साधना करते हो? किसान बोला, मुझे कुछ नहीं आता।मैं एक अज्ञानी,अनपढ़ आदमी हूं। बस सुबह उठने के बाद मैं तीन बार ‘नारायण’ बोलता हूं। अपना काम शुरू करते समय मैं तीन बार ‘नारायण’ बोलता हूं, अपना काम खत्म करने के बाद मैं फिर तीन बार ‘नारायण’ बोलता हूं। जब मैं खाता हूं, तो तीन बार ‘नारायण’ बोलता हूं और जब सोने जाता हूं, तो भी तीन बार ‘नारायण’ बोलता हूं। ’नारद ने गिना कि वह खुद 24 घंटे में कितनी बार ‘नारायण’ बोलते हैं। वह लाखों बार ऐसा करते थे, मगर फिर भी उन्हें नारायण से मिलने के लिए वैकुण्ठ तक जाना पड़ता था,जो बहुत ही दूर था,मगर खाने, हल चलाने या बाकी कामों से पहले सिर्फ तीन बार ‘नारायण’बोलने वाले इस किसान के सामने नारायण वहीं प्रकट हो जाते थे। नारद को लगा कि यह ठीक नहीं है, इसमें जरूर कहीं कोई त्रुटि है।* *वह तुरंत वैकुण्ठ पहुंच गए और उन्होंने विष्णु से पुछा, ‘मैं हर समय आपका नाम जपता रहता हूं, मगर आप मेरे सामने नहीं प्रकट नहीं होते। मुझे आकर आपके दर्शन करने पड़ते हैं। मगर उस किसान के सामने आप रोज प्रकट होते हैं और वह परमानंद में जीवन बिता रहा है!’ विष्णु ने नारद की ओर देखा और लक्ष्मी को तेल से लबालब भरा हुआ एक बर्तन लाने को कहा। उन्होंने नारद से कहा, ‘पहले आपको एक काम करना पड़ेगा।तेल से भरे इस बर्तन को भूलोक ले जाइए। मगर इसमें से एक बूंद भी तेल छलकना नहीं चाहिए।इसे वहां छोड़कर आइए, फिर हम इस प्रश्न का जवाब देंगे। ’नारद तेल से भरा बर्तन ले कर भूलोक गए, उसे वहां छोड़ कर वापस आ गए और बोले, ‘अब मेरे प्रश्न का जवाब दीजिए।’ विष्णु ने पूछा, ‘जब आप तेल से भरा यह बर्तन लेकर जा रहे थे, तो आपने कितनी बार नारायण बोला?’ नारद बोले, ‘उस समय मैं नारायण कैसे बोल सकता था? आपने कहा था कि एक बूंद तेल भी नहीं गिरना चाहिए, इसलिए मुझे पूरा ध्यान उस पर देना पड़ा। मगर वापस आते समय मैंने बहुत बार ‘नारायण’ कहा।’ विष्णु बोले, ‘यही आपके प्रश्न का जवाब है। उस किसान का जीवन तेल से भरा बर्तन ढोने जैसा है जो किसी भी पल छलक सकता है। उसे अपनी जीविका कमानी पड़ती है, उसे बहुत सारी चीजें करनी पड़ती हैं। मगर उसके बावजूद, वह नारायण बोलता है। जब आप इस बर्तन में तेल लेकर जा रहे थे, तो आपने एक बार भी नारायण नहीं कहा। यानी यह आसान तब होता है जब आपके पास करने के लिए कुछ नहीं होता।’* *इसलिए ईश्वर कहते हैं "जो अपने कर्म करते हुए भी मुझे याद करता है उसके द्वार पर उसके दुख हरने मैं स्वयं जाता हूँ और जो फुरसत मिलने पर मुझे याद करता है उसे दुख के समय मेरे द्वार पर आना होगा"* *🙏🙏 भगवत्कृपा हि केवलम्🙏🙏* *जय श्री राम*🙏🙏

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