Suman Mishra Bhardwaj
Suman Mishra Bhardwaj Sep 7, 2017

मेरी लाडली के जैसा कोई दूसरा नहीं है

श्री बरसाना धाम में एक सेठ रहते थे। उनके तीन चार दुकाने बहुत अच्छी तरह चलती थीं। तीन बेटे तीन बहुएं थी, सब आज्ञाकारी। पर सेठ के मन मे एक
इच्छा थी,, उनके यहां बेटी नही थी।

संतो के दर्शन से चिंता कम हुई, और एक संत बोले; "मन में आभाव हो उस पर भगवान का भाव स्थापित कर लो,"
सुनो सेठजी-:
तुमको मिल्यो बरसाने का वास
यदि मानो नाते राधे, सुता काहे रहत उदास।

सेठ जी ने *राधारानी* का एक चित्र मंगवाया और अपने कमरे मे लगा कर पुत्री भाव से रहते। रोज़ सुबह *राधे राधे* कहते भोग लगाते और दुकान से लौटकर *राधे राधे* कहकर सो जाते।

तीन बहु बेटे हैं। घर मे सुख सुविधा है। पूरी संपति भरि भवन। रहती नही कोई मजबूरी।
कृष्ण कृपासे जीवन पथ पे आती न कोई बाधा!
मै बहुत बड़भागी पिता हूँ। मेरी बेटी है श्री राधा।

एक दिन एक मनिहारी चूड़ी पहनाने सेठ के होते हुए घर के दरवाजे के पास आ गयी और चूड़ी पहनने की गुहार लगाई। तीनो बहुऐ बारी बारी से चूड़ी पहन कर चली गयी। फिर एक हाथ और बढ़ा तो मनिहारीन सोचने लगी कि कोई रिश्तेदार आया होगा उसने उसको भी चूड़ी पहनाया और चली गयी।

सेठ के दुकान पर पहुच कर पैसे मांगे और कहा कि; इस बार पैसे पहले से ज्यादा चाहिए।

सेठजी बोले कि क्या चूड़ी मंहगी हो गयी हैं? तो मनिहारीन बोली नही सेठजी आज मैं चार लड़कियों को चूड़ी पहना कर आ रही हूं। सेठ जी ने कहा कि तीन बहुओं के अलावा चौथा कौन है माई? झूठ मत बोल यह ले तीन के पैसे। मैं घर पर पूछूँगा तब उस चौथी का पैसा दूँगा। अच्छा! मनिहारीन तीन का पैसा ले कर चली गयी।

सेठजी ने घर पर पूछा कि चौथा कौन था जो चूड़ी पहना है? बहुऐं बोली; कि हम तीन के अलावा तो कोई चौथा नही था। रात को सोने से पहले पुत्री *राधारानी* को स्मरण करके सो गये।

नींद मे राधा जी प्रकट हुईं। सेठजी बोले-: "बेटी बहुत उदास हो, क्या बात है?" बृषभानु दुलारी बोली-:
"तनया बनायो तात नात ना निभायो
चूड़ी पहनि लिनी मै जानि पितु गेह
आप मनिहारीन को मोल ना चुकायो
तीन बहु याद किन्तु बेटी नही याद रही
कहत श्रीराधिका को नीर भरि आयो है
कैसी भई दूरी कहो कौन मजबूरी हाय
आज चार चूड़ी काज मोहि बिसरायो है

सेठजी की नींद तो टूट गयी पर नीर नही टूटी, रोते रहे। सवेरा हुआ स्नान ध्यान करके मनिहारीन के घर सुबह सुबह पहुँच गये।
मनिहारीन देखकर चकित हुई। सेठ जी आंखों में आंसू लिये बोले-:

धन धन भाग तेरो मनिहारीन
तोरे से बड़भागी नही कोई
संत महंत पुजारी
धन धन भाग तेरो मनिहारीन

मनिहारीन बोली-: क्या हुआ सेठ साहब आगे बोले-:
"मैं ने मानी सुता किन्तु निज नैनन नही निहारिन
चूड़ी पहन गयी तव कर ते श्री बृषभानु दुलारी
धन धन भाग तेरो मनिहारीन
बेटी की चूड़ी पहिराई लेहु जाहू तौ बलिहारी
जन राजेश जोड़ि कर करियो चूक हमारी
जुगल नयन जलते भरि मुख ते कहे न बोल
मनिहारीन के पांय पड़ि लगे चुकावन मोल।"

मनिहारीन सोची
जब तोहि मिलो अमोल धन
अब काहे मांगत मोल
हे मन मेरो प्रेम से श्री राधे राधे बोल
श्री राधे राधे बोल श्री राधे राधे बोल

सेठ जी का जीवन धन्य हो गया।

मेरी लाडली के जैसा कोई दूसरा नहीं है
जहा बरसे कृपा हर पल बरसाने वो यही है।

*🙏🏼🌹श्री राधे राधे जी 🌹🙏🏼*

Bell Flower Pranam +149 प्रतिक्रिया 20 कॉमेंट्स • 91 शेयर

कामेंट्स

Happy Arora Sep 7, 2017
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Umesh Kumar Sep 8, 2017
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Rekha Singh Sep 8, 2017
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