दीपावली - दीपोकी सजावट ।

दीपावली - दीपोकी सजावट ।

दीपावली : दीपोंकी सजावट ।

१. दीपावली की व्युत्पत्ति एवं अर्थ

दीपावली शब्द दीप एवं आवली की संधिसे बना है । आवली अर्थात पंक्ति । इस प्रकार दीपावली शब्दका अर्थ है, दीपोंकी पंक्ति । दीपावलीके समय सर्वत्र दीप जलाए जाते हैं, इसीलिए इस त्योहारका नाम दीपावली है । भारतवर्षमें मनाए जानेवाले सभी त्यौहारोंमें दीपावलीका सामाजिक एवं धार्मिक इन दोनों दृष्टियोंसे अत्यधिक महत्त्व है । इसे दीपोत्सव भी कहते हैं । ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय ।’ अर्थात अंधेरेसे ज्योति अर्थात प्रकाशकी ओर जाइए’ यह उपनिषदोंकी आज्ञा है । अपने घरमें सदैव लक्ष्मीका वास रहे, ज्ञानका प्रकाश रहे, इसलिए हरकोई बडे आनंदसे दीपोत्सव मनाता है । प्रभु श्रीराम चौदह वर्षका वनवास समाप्त कर अयोध्या लौटे,  उस समय प्रजाने दीपोत्सव मनाया।
तबसे प्रारंभ हुई दीपावली !

‘श्रीकृष्णने आसुरी वृत्तिके नरकासुरका वध कर जनताको भोगवृत्ति, लालसा, अनाचार एवं दुष्टप्रवृत्तिसे मुक्त किया एवं प्रभुविचार (दैवी विचार) देकर सुखी किया, यह वही ‘दीपावली’ है । हम अनेक वर्षोंसे रूढिके रूपमें ही दीपावली मना रहे हैं । आज उसका गुह्यार्थ लुप्त हो गया है । इस गुह्यार्थको ध्यानमें रखते हुए, अस्मिता जागृत हो, तो अज्ञानरूपी अंधःकारकी, साथ ही भोगवृत्ति, अनाचारी एवं आसुरी वृत्तिके लोगोंकी प्रबलता अल्प होगी एवं सज्जनशक्तिपर उनका वर्चस्व अल्प होगा ।

२. दीपावली का इतिहास

बलिराजा अत्यंत दानशूर थे । द्वारपर पधारे अतिथिको उनसे मुंहमांगा दान मिलता था । दान देना गुण है; परंतु गुणोंका  अतिरेक दोष ही सिद्ध होता है । किसे क्या, कब और कहां दें, इसका निश्चित विचार शास्त्रमें एवं गीतामें बताया गया है ।  सत्पात्रको दान देना चाहिए, अपात्रको नहीं । अपात्र मानवोंके हाथ संपत्ति लगनेपर वे मदोन्मत्त होकर मनमानी करने लगते हैं । बलि राजासे कोई, कभी भी, कुछ भी मांगता, उसे वह देते थे । तब भगवान श्रीविष्णुने ब्रह्मचारी बालकका (वामन) अवतार  लिया । ‘वामन’ अर्थात छोटा । ब्रह्मचारी बालक छोटा होता है और वह ‘ॐ भवति भिक्षां देही ।’ अर्थात ‘भिक्षा दो’ ऐसा कहता है । विष्णुने वामन अवतार लिया एवं बलिराजाके पास जाकर भिक्षा मांगी । बलिराजाने पूछा, ‘‘क्या चाहिए ?’’ तब वामनने  त्रिपाद भूमिदान मांगा । ‘वामन कौन है एवं इस दानसे क्या होगा’, इसका ज्ञान न होनेके कारण बलिराजाने इस वामनको त्रिपाद भूमि दान कर दी । इसके साथ ही वामनने विराट रूप धारण कर एक पैरसे समस्त पृथ्वी नाप ली, दूसरे पैरसे अंतरिक्ष एवं फिर  बलिराजासे पूछा ‘‘तीसरा पैर कहां रखूं ?’’ उसने उत्तर दिया ‘‘तीसरा पैर मेरे मस्तकपर रखें’’ । तब तीसरा पैर उसके मस्तकपर रख, उसे पातालमें भेजनेका निश्चय कर वामनने बलिराजासे कहा, ‘‘तुम्हें कोई वर मांगना हो, तो मांगो (वरं ब्रूहि) ।’’ बलिराजाने वर मांगा कि ‘अब पृथ्वीपर मेरा समस्त राज्य समाप्त होनेको है एवं आप मुझे पातालमें भेजनेवाले हैं, ऐसेमें तीन कदमोंके इस प्रसंगके प्रतीकरूप पृथ्वीपर प्रतिवर्ष कमसे कम तीन दिन मेरे राज्यके रूपमें माने जाएं । प्रभु, यमप्रीत्यर्थ दीपदान करनेवालेको यमयातनाएं न हों । उसे अपमृत्यु न आए । उसके घरपर सदा लक्ष्मीका वास हो ।’ ये तीन दिन अर्थात कार्तिक कृष्ण पक्ष चतुर्दशी, अमावस्या एवं कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रतिपदा । इसे ‘बलिराज्य’ कहा जाता है ।

३. दीपावली कब मनाई जाती है ?

दीपावली पर्वके अंतर्गत आनेवाले महत्त्वपूर्ण दिन हैं, कार्तिक कृष्ण पक्ष त्रयोदशी (धनत्रयोदशी / धनतेरस), कार्तिक कृष्ण पक्ष चतुर्दशी (नरकचतुर्दशी), अमावस्या (लक्ष्मीपूजन) एवं कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रतिपदा (बलिप्रतिपदा) ये तीन दिन दीपावलीमें विशेष उत्सवके रूपमें मनाए जाते हैं । कुछ लोग त्रयोदशीको दीपावलीमें सम्मिलित न कर, शेष तीन दिनोंकी ही दीवाली मनाते हैं । वसुबारस अर्थात गोवत्स द्वादशी, धनत्रयोदशी अर्थात धनतेरस तथा भाईदूज अर्थात यमद्वितीया, ये दिन दीपावलीके साथ ही आते हैं । इसलिए, भले ही ये त्यौहार भिन्न हों,  फिर भी इनका समावेश दीपावलीमें ही किया जाता है । इन दिनोंको दीपावलीका एक अंग माना जाता है । कुछ प्रदेशोंमें वसुबारस अर्थात गोवत्स द्वादशी को ही दीपावलीका आरंभदिन मानते है ।

दीपावलीमें अंतर्भूत दिन

१. वसुबारस                                 –  कार्तिक कृष्ण पक्ष द्वादशी (१६ अक्टूबर २०१७)

२. धनत्रयोदशी / धनतेरस             –  कार्तिक कृष्ण पक्ष त्रयोदशी (१७ अक्टूबर २०१७)

३. नरकचतुर्दशी                           –  कार्तिक कृष्ण पक्ष चतुर्दशी (१८ अक्टूबर २०१७)

४. लक्ष्मीपूजन                             –  कार्तिक अमावस्या (१९ अक्टूबर २०१७)

५. बलिप्रतिपदा                            –  कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रतिपदा (२० अक्टूबर २०१७)

६. भैयादूज                                   –  कार्तिक शुक्ल पक्ष द्वितीया (२१ अक्टूबर २०१७)

४. दीपावलीका पूर्वायोजन

दीपावली आनेसे पूर्व ही लोग अपने घर-द्वारकी स्वच्छतापर ध्यान देते हैं । घरका कूडा-करकट साफ करते हैं । घरमें टूटी-फूटी वस्तुओंको ठीक करवाकर घरकी रंगाई करवाते हैं । इससे उस स्थानकी न केवल आयु  बढती  है, वरन आकर्षण भी बढ जाता है । वर्षाऋतुमें फैली अस्वच्छताका भी परिमार्जन हो जाता है । स्वच्छताके साथ ही घरके सभी सदस्य नए कपडे सिलवाते हैं । विविध मिठाइयां भी बनायी जाती हैं । ब्रह्मपुराणमें लिखा है, कि दीपावलीको श्री लक्ष्मी सदगृहस्थोंके घरमें विचरण करती हैं । घरको सब प्रकारसे स्वच्छ, शुद्ध एवं सुशोभित कर दीपावली मनानेसे श्री लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं तथा वहां स्थायीरूपसे निवास करती हैं ।

५. दीपावलीमें बनाई जानेवाली विशेष रंगोलियां

दीपावलीके पूर्वायोजनका ही एक महत्त्वपूर्ण अंग है, रंगोली । दीपावलीके शुभ पर्वपर विशेष रूपसे रंगोली बनानेकी प्रथा है । रंगोलीके दो उद्देश्य हैं – सौंदर्यका साक्षात्कार एवं मंगलकी सिद्धि । रंगोली देवताओंके स्वागतका प्रतीक है । रंगोलीसे सजाए आंगनको देखकर देवता प्रसन्न होते हैं । इसी कारण दिवालीमें प्रतिदिन देवताओंके तत्त्व आकर्षितकरनेवाली रंगोलियां बनानी चाहिए तथा उस माध्यमसे देवतातत्त्वका  लाभ प्राप्त करना चाहिए ।

६. तेलके दीप जलाना

रंगोली बनानेके साथही दीपावलीमें प्रतिदिन किए जानेवाला यह एक महत्त्वपूर्ण कृत्य है । दीपावलीमें प्रतिदिन सायंकालमें देवता एवं तुलसीके समक्ष, साथ ही द्वारपर एवं आंगनमें विविध स्थानोंपर तेलके दीप लगाए जाते हैं । यह भी देवता तथा अतिथियोंका स्वागत करनेका प्रतीक है । आजकल तेलके दीपके स्थानपर मोमके दीप लगाए जाते हैं अथवा कुछ स्थानोंपर बिजलीके दीप भी लगाते हैं । परंतु शास्त्रके अनुसार तेलके दीप लगानाही उचित एवं लाभदायक है । तेलका दीप एक मीटरतककी सात्त्विक तरंगें खींच सकता है । इसके विपरीत मोमका दीप केवल रज-तमकणोंका प्रक्षेपण करता है, जबकि बिजलीका दीप वृत्तिको बहिर्मुख बनाता है । इसलिए दीपोंकी संख्या अल्प ही क्यों न हो, तो भी तेलके दीपकी ही पंक्ति लगाएं ।

७. आकाशदीप अथवा आकाशकंदील

विशिष्ट प्रकारके रंगीन कागज, थर्माकोल इत्यादिकी विविध कलाकृतियां बनाकर उनमें बिजलीके दिये लगाए जाते हैं, उसे आकाशदीप अथवा आकाशकंदील कहते हैं । आकाशदीप सुशोभनका ही एक भाग है ।

८. दीपावली पर्वपर बच्चोंद्वारा बनाए जानेवाले घरौंदे एवं किले

दीपावलीके अवसरपर उत्तर भारतके कुछ स्थानोंपर बच्चे आंगनमें मिट्टीका घरौंदा बनाते हैं, जिसे कहींपर ‘हटरी’, तो कहीं पर ‘घरकुंडा’के नामसे जानते हैं । दीपसे सजाकर, इसमें खीलें, बताशे, मिठाइयां एवं मिट्टीके खिलौने रखते हैं । महाराष्ट्रमें बच्चे किला बनाते हैं तथा उसपर छत्रपति शिवाजी महाराज एवं उनके सैनिकोंके चित्र रखते हैं । इस प्रकार त्यौहारोंके माध्यमसे पराक्रम तथा धर्माभिमानकी वृद्धि कर बच्चोंमें राष्ट्र एवं धर्मके प्रति कुछ नवनिर्माणकी वृत्तिका पोषण किया जाता है ।

९. दीपावली शुभसंदेश देनेवाले दीपावलीके शुभेच्छापत्र

दीपावलीके मंगल पर्वपर लोग अपने सगे-संबंधियों एवं शुभचिंतकोंको, आनंदमय दीपावलीकी शुभकामनाएं देते हैं । इसके लिए वे शुभकामना पत्र भेजते हैं तथा कुछ लोग उपहार भी देते हैं । ये साधन जितने सात्त्विक होंगे, देनेवाले एवं प्राप्त करनेवालेको उतना ही अधिक लाभ,  होगा । शुभकामना पत्रोंके संदेश एवं उपहार, यदि धर्मशिक्षा, धर्मजागृति एवं धर्माचरणसे संबंधित हों, तो प्राप्त करनेवालेको इस दिशामें कुछ करनेकी प्रेरणा भी मिलती है । हिंदू जनजागृति समिति एवं सनातन संस्थाद्वारा इस प्रकारके शुभेच्छापत्र बनाए जाते हैं ।

१०. दीपावली मनानेका एक अन्य महत्त्वपूर्ण अंग है, पटाखे

दीपावलीपर छोटे-बड़े, हर आयुवर्गके लोग पटाखे जलाकर आनंद व्यक्त करते हैं; परंतु क्या वास्तवमें पटाखोंका ऐसा उपयोग उचित है ? पटाखे जलानेका अर्थ है, बारूदके माध्यमसे उत्सवकी शोभा बढानेका एक प्रयास ! इसकी तुलनामें, उससे होनेवाली हानि कहीं अधिक है । पटाखे जलानेसे होनेवाले प्रदूषणके कारण आरोग्यकी हानि होनेके साथ ही आर्थिक हानि भी होती है । आजकल पटाखोंपर देवता, राष्ट्रपुरुषोंके चित्र बने होते हैं, उदा. लक्ष्मी छाप बम, कृष्णछाप फुलझडी, नेताजी छाप पटाखा इत्यादि । ऐसे पटाखे जलाकर देवताओंके चित्रोंके चिथडे कर, हम अपनी ही आस्थाको पैरोंतले रौंदते हैं । इससे हमारी आध्यात्मिक हानि भी होती है । हिंदू जनजागृति समिति, सनातन संस्था जैसे अन्य समविचारी संगठनोंके साथ सन २००० से पटाखोंके कारण होनेवाली हानिको रोकने हेतु जनजागृति अभियान चला रहीं हैं । आप भी इसमें सहभागी हो जाइए  ।

Pranam Like Modak +159 प्रतिक्रिया 5 कॉमेंट्स • 121 शेयर

कामेंट्स

om Prakash Singh Oct 14, 2017
अंधकार से प्रकाश की ओर अग्रसर :-दीपावली की हार्दिक शुभकामना

neeru gupta Aug 18, 2018

Tulsi Pranam Milk +47 प्रतिक्रिया 37 कॉमेंट्स • 186 शेयर
Anju Mishra Aug 18, 2018

🍃एक बात बताते हैं संतलोग बहुत ही रहस्यमय है।🍃
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कहते हैं कि जब कोई रसिक भक्त,कृष्ण विरह में रोते हैं, तब हमारी आँख से निकले एक-एक आंसू रुपी मोती की श्री जी माला बनाती है और उस माला को कृष्ण जी को पहनात...

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Flower Bell Pranam +108 प्रतिक्रिया 38 कॉमेंट्स • 218 शेयर

पत्नी क्या होती है।
एक बार जरूर पड़े।

🤔🤔🤔🤔🤔🤔🤔🤔🤔

"रामलाल तुम अपनी बीबी से इतना क्यों डरते हो?
"मैने अपने नौकर से पुछा।।

"मै डरता नही साहब उसकी कद्र करता हूँ
उसका सम्मान करता हूँ।"उसने जबाव दिया।

मैं हंसा और बोला-" ऐसा क्या है उसमें।

न...

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Pranam Fruits Like +5 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 115 शेयर
Anju Mishra Aug 18, 2018

जय श्री राधे कृष्णा

अंधेरा चाहे कितना भी घना हो लेकिन एक छोटा सा दीपक अंधेरे को चीरकर प्रकाश फैला देता है वैसे ही जीवन में चाहे कितना भी अंधेरा हो जाए विवेक रूपी प्रकाश अंधकार को मिटा देता है

शत्रु को सदैव भ्रम में रखना चाहिए जो उसका अप्रिय करना...

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Milk Flower Tulsi +287 प्रतिक्रिया 90 कॉमेंट्स • 437 शेयर
geeta rathi Aug 18, 2018

हिंदू धर्म की सबसे बड़ी गाथा, महाभारत(Mahabharat) उन कहानियों से भरी है जिनके पास एक व्यक्ति का जीवन उजागर करने की क्षमता है। अपने आंतरिक अर्थ से और प्रथाओं में इसके मूल्य से, महाभारत ने समाज के बीच अपनी संस्कृति विकसित की है। हालांकि, महाभारत में...

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Pranam Like Bell +336 प्रतिक्रिया 91 कॉमेंट्स • 125 शेयर
Sapna patel Aug 18, 2018

Like Pranam Dhoop +105 प्रतिक्रिया 60 कॉमेंट्स • 261 शेयर

Like Pranam Bell +205 प्रतिक्रिया 165 कॉमेंट्स • 811 शेयर
Shri Banke Bihari Aug 19, 2018

Pranam Like Bell +12 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 113 शेयर

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