Sn Vyas
Sn Vyas Sep 14, 2019

*ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ* 💎💎💎💎💎💎💎💎💎💎 *"┈┉┅━❀꧁꧂❀━┅┉┈"* *꧁🙇🏻"ॐ श्री मात्रे नमः"🙇🏻꧂* *"┈┉┅━❀꧁꧂❀━┅┉┈"* *बहुचरा माता की कहानी, क्यों करते हैं किन्नर माँ की उपासना ?* बहुचरा माता का प्रसिद्ध मंदिर गुजरात के मेहसाणा जिले के बेचराजी नामक कस्बे में स्थित है। बहुचरा माता को बेचराजी भी कहा जाता है। इन्ही देवी के नाम पर इस कस्बे का नाम बेचराजी प्रसिद्ध हुआ। हर वर्ष यहाँ लाखो श्रद्धालु दूर-दूर से माँ के दर्शन के लिए आते हैं। जिन लोगों को संतान सुख प्राप्त नहीं होता वो विशेष तौर पर माँ के दरबार में माथा टेकने आते हैं जिनके आशीर्वाद से उनको संतान की प्राप्ति होती है। बहुचरा माता को कुलदेवी के रूप में पूजने वाले श्रद्धालु यहाँ जात-जडूले इत्यादि के लिए आते हैं। यह मंदिर ऊंचे प्राचीर से घिरे हुए एक विस्तृत आंगन के मध्य में स्थित है। मंदिर का मुख्य पीठ बालायंत्र है। देवी का वाहन मुर्गा है। श्रृंगार के बाद माँ बहुचराजी के दर्शन किए जाते हैं। यहां पाषाण या किसी धातु की मूर्ति नहीं है। मंदिर के पीछे की ओर एक वृक्ष के नीचे माता जी का मूल स्थान है। यहां एक स्तंभ और एक छोटा सा मंदिर है। मुख्य मंदिर के सामने एक अग्निकुंड भी बना हुआ है। *बहुचरा माता की कहानी"* कहा जाता है माँ बहुचरा चारण जाति के बापल दान देथा की पुत्री थीं। एक बार देवी बहुचरा अपनी बहनों के साथ एक काफिले में यात्रा कर रही थीं कि बीच रास्ते में एक खूंखार डाकू बपैया ने काफिले पर हमला कर दिया। वीर चारण स्त्री – पुरुष अपनी पूरी हिम्मत से इस हमले का जवाब देने लगे लेकिन इनकी संख्या कम होने की वजह से डाकू लोग इन पर हावी होने लगे। इस समय देवी बहुचरा अपनी बहनों के साथ आत्म बलिदान देने के लिये उठ खड़ी हुई। उन्होंने अपने स्तन काट डाले और डाकू बपैया को शाप दे दिया। शाप की वजह से डाकू नपुंसक हो गया और इस शाप से मुक्त होने के लिए उसे एक महिला की तरह सज – संवर कर और महिला के हाव भाव करके माँ को प्रसन्न करना पड़ा। इसलिए यह कहा जा सकता है कि यह किन्नर समुदाय के इस रूप का प्रारम्भ था। आज भी देश भर में किन्नर समुदाय द्वारा माँ बहुचरा को पूजा जाता है। गुजरात में किन्नर समुदाय के अलावा अन्य समाजो के लोग भी माँ में असीम श्रद्धा रखते हैं। माँ का वाहन एक मुर्गा है जो कि बेगुनाही का प्रतीक है। क्यों करते हैं किन्नर माँ की उपासना ? कहा जाता है कि एक निःसंतान राजा ने पुत्र प्राप्ति के लिए माँ की आराधना की। माँ के आशीर्वाद से उनको एक पुत्र की प्राप्ति तो हुई लेकिन वह नपुंसक निकला। राजकुमार का नाम जेथो रख गया। एक रात राजकुमार के सपने में माँ बहुचरी आयीं और उनको अपना भक्त बनने का निर्देश दिया। इसके लिए उनको अपने गुप्तांगो को समर्पित करना था। इसके बाद जितने भी लोग नपुंसक थे उन्होंने अपने गुप्तांगो की बलि देकर माँ की आराधना में अपना जीवन समर्पित करना शुरू कर दिया और माँ उनकी रक्षा और उनकी खुशियों का पूरा ख्याल रखती थीं। इस तरह से माँ बहुचरी किन्नर समुदाय की कुल देवी बन गयी। *"┈┉┅━❀꧁꧂❀━┅┉┈"*

*ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ*

💎💎💎💎💎💎💎💎💎💎

 *"┈┉┅━❀꧁꧂❀━┅┉┈"*

 *꧁🙇🏻"ॐ श्री मात्रे नमः"🙇🏻꧂*

 *"┈┉┅━❀꧁꧂❀━┅┉┈"*

*बहुचरा माता की कहानी, क्यों करते हैं किन्नर माँ की उपासना ?*


 बहुचरा माता का प्रसिद्ध मंदिर गुजरात के मेहसाणा जिले के बेचराजी नामक कस्बे में स्थित है। बहुचरा माता को बेचराजी भी कहा जाता है। इन्ही देवी के नाम पर इस कस्बे का नाम बेचराजी प्रसिद्ध हुआ। हर वर्ष यहाँ लाखो श्रद्धालु दूर-दूर से माँ के दर्शन के लिए आते हैं। जिन लोगों को संतान सुख प्राप्त नहीं होता वो विशेष तौर पर माँ के दरबार में माथा टेकने आते हैं जिनके आशीर्वाद से उनको संतान की प्राप्ति होती है। बहुचरा माता को कुलदेवी के रूप में पूजने वाले श्रद्धालु यहाँ जात-जडूले इत्यादि के लिए आते हैं।

यह मंदिर ऊंचे प्राचीर से घिरे हुए एक विस्तृत आंगन के मध्य में स्थित है। मंदिर का मुख्य पीठ बालायंत्र है। देवी का वाहन मुर्गा है। श्रृंगार के बाद माँ बहुचराजी के दर्शन किए जाते हैं। यहां पाषाण या किसी धातु की मूर्ति नहीं है। मंदिर के पीछे की ओर एक वृक्ष के नीचे माता जी का मूल स्थान है। यहां एक स्तंभ और एक छोटा सा मंदिर है। मुख्य मंदिर के सामने एक अग्निकुंड भी बना हुआ है।

*बहुचरा माता की कहानी"*

कहा जाता है माँ बहुचरा चारण जाति के बापल दान देथा की पुत्री थीं। एक बार देवी बहुचरा अपनी बहनों के साथ एक काफिले में यात्रा कर रही थीं कि बीच रास्ते में एक खूंखार डाकू बपैया ने काफिले पर हमला कर दिया। वीर चारण स्त्री – पुरुष अपनी पूरी हिम्मत से इस हमले का जवाब देने लगे लेकिन इनकी संख्या कम होने की वजह से डाकू लोग इन पर हावी होने लगे।

इस समय देवी बहुचरा अपनी बहनों के साथ आत्म बलिदान देने के लिये उठ खड़ी हुई। उन्होंने अपने स्तन काट डाले और डाकू बपैया को शाप दे दिया। शाप की वजह से डाकू नपुंसक हो गया और इस शाप से मुक्त होने के लिए उसे एक महिला की तरह सज – संवर कर और महिला के हाव भाव करके माँ को प्रसन्न करना पड़ा। इसलिए यह कहा जा सकता है कि यह किन्नर समुदाय के इस रूप का प्रारम्भ था।

आज भी देश भर में किन्नर समुदाय द्वारा माँ बहुचरा को पूजा जाता है।  गुजरात में किन्नर समुदाय के अलावा अन्य समाजो  के लोग भी माँ में असीम श्रद्धा रखते हैं।  माँ का वाहन एक मुर्गा है जो कि बेगुनाही का प्रतीक है।

क्यों करते हैं किन्नर माँ की उपासना ?

कहा जाता है कि एक निःसंतान राजा ने पुत्र प्राप्ति के लिए माँ की आराधना की। माँ के आशीर्वाद से उनको एक पुत्र की प्राप्ति तो हुई लेकिन वह नपुंसक निकला। राजकुमार का नाम जेथो रख गया।  एक रात राजकुमार के सपने में माँ बहुचरी आयीं और उनको अपना भक्त बनने का निर्देश दिया। इसके लिए उनको अपने गुप्तांगो को समर्पित करना था।  इसके बाद जितने भी लोग नपुंसक थे उन्होंने अपने गुप्तांगो की बलि देकर माँ की आराधना में अपना जीवन समर्पित करना शुरू कर दिया और माँ उनकी रक्षा और उनकी खुशियों का पूरा ख्याल रखती थीं। इस तरह से माँ बहुचरी किन्नर समुदाय की कुल देवी बन गयी।
 *"┈┉┅━❀꧁꧂❀━┅┉┈"*

+20 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 8 शेयर

कामेंट्स

B R Raj Sep 15, 2019
🌹 जय हो माँ जीण भवानी की 🙏🏽🙏🏽 जय माताजी 🌹जय हो माँ जीणभवानी की 🌹 जय हो माँ जीण भवानी की 🙏🏽🙏🏽 जय हो महालक्ष्मी माताजी की

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB