क्यों मनाएं हम श्राद्ध ?

क्यों मनाएं हम श्राद्ध ?

क्यों मनाएं हम श्राद्ध ???

जन्म एवं मृ्त्यु का रहस्य अत्यन्त गूढ है। वेदों में,दर्शन शास्त्रों में,उपनिषदों एवं पुराण आदि में हमारे पुर्वाचार्यों नें इस विषय पर विस्तृ्त विचार किया है। श्रीमदभागवत में भी स्पष्ठ रूप से बताया गया है कि जन्म लेने वाले की मृ्त्यु और मृ्त्यु को प्राप्त होने वाले का जन्म निश्चित है। भगवान श्री कृ्ष्ण ने स्वयं जन्म-मरण के चक्र को एक ध्रुव सत्य माना है।
मनुष्य योनि त्रिगुणात्मक है और इसमें जो गुण हो,उसके अनुसार ही उसका कर्म और स्वभाव निर्मित होता है। जिन मनुष्यों में सत्वगुण की प्रधानता रहती है--वे अपने आराध्य के प्रति श्रद्धा भाव रखते हुए,धर्म का आश्रय लिए जीवनपथ पर बढते चले जाते हैं। रजोगुण प्रधान मनुष्य भूत-प्रेत,पीरों-फकीरों के चक्कर उलझा रहता है और तमोगुणी व्यक्ति को तो भौतिक सुखों के अतिरिक्त कुछ ओर दिखाई ही नहीं देता। नास्तिक भाव का प्रादुर्भाव सिर्फ तमोगुणी व्यक्ति में ही होता है।
श्रीमदभागवत गीता भी कहती है----साथ ही पूर्वजन्म संबंधी अनेक बातें अनेक सामयिकों में भी यदा कदा पढने को मिल ही जाती है। जिसमें कि किसी मनुष्य को अपने पूर्वजन्म की बातों का स्मरण रहता है। इस प्रकार की एक घटना का प्रत्यक्षदर्शी या कहें कि भुक्तभोगी तो मैं स्वयं हूँ। ऎसी ही एक घटना मेरे परिवार में घट चुकी है,जिसके कि आज भी सैकंडों की संख्या में प्रत्यक्षदर्शी मौजूद हैं। खैर...कभी समय मिला तो उस घटना के बारे में फिर कभी लिखूँगा। बहरहाल हम मूल विषय पर बात करते हैं।
इस पूर्वजन्म के आधार पर ही कर्मकाँड में श्राद्धादि कर्म का विधान निर्मित किया गया है। अपने पूर्वजों के निमित दी गई वस्तुएँ/पदार्थ सचमुच उन्हे प्राप्त हो जाते हैं--------इस विषय में अधिकतर लोगों को संदेह है। हमारे पूर्वज अपने कर्मानुसार किस योनि में उत्पन हुए हैं,जब हमें इतना ही नहीं मालूम तो फिर उनके लिए दिए गये पदार्थ उन तक कैसे पहुँच सकते हैं? क्या एक ब्राह्मण को भोजन खिलाने से हमारे पूर्वजों का पेट भर सकता है? वैसे इन प्रश्नों का सीधे सीधे उत्तर देना तो शायद किसी के लिए भी संभव न होगा,क्यों कि वैज्ञानिक मापदंडों को इस सृ्ष्टि की प्रत्येक विषयवस्तु पर लागू नहीं किया जा सकता। दुनियाँ में कईं बातें ऎसी हैं जिनका कोई प्रमाण न मिलते हुए भी उन पर विश्वास करना पडता है। यहाँ इसके लिए हम एक व्यवहारिक उदाहरण ले सकते है---जैसे कि दवाईयाँ । अमूमन दवा के किसी भी पैक पर उसका फार्मूला या कंटेन्ट् लिखा रहता है। किन्तु हमारे पास इस बात का कोई सबूत नहीं है कि जो दवा हम खा रहे हैं;वास्तव में उसमें उसके पैक पर लिखे सभी कंटैन्स होंगे ही!!! यहाँ हम सिर्फ श्रद्धा से काम लेते हैं। यही सोच हमें कर्मकाँड के विषय में भी रखनी चाहिए। श्रद्धा रखकर ही हम फलप्राप्ति की अपेक्षा करें। मान लीजिए यदि कुछ नहीं भी हुआ तो कोई नुक्सान तो नहीं है न ? अब ये तो बात हुई सिर्फ श्रद्धा की, लेकिन इस विषय में शास्त्रों का कथन है कि--जिस प्रकार मानव शरीर पंचतत्वों से निर्मित है,उसी प्रकार से जो देव और पितर इत्यादि योनियों हैं; प्रकृ्ति द्वारा उनकी रचना नौ तत्वों द्वारा की गई है। जो कि गंध तथा रस तत्व से तृ्प्त होते हैं,शब्द तत्व में निवास करते हैं और स्पर्श तत्व को ग्रहण करते हैं। जैसे मनुष्यों का आहार अन्न है,पशुओं का आहार तृ्णादि,ठीक उसी प्रकार इन योनियों का आहार अन्न का सार-त्तत्व है। वे सिर्फ अन्न और जल का सार-त्तत्व ही ग्रहण करते हैं,शेष जो स्थूल वस्तुएं/पदार्थ हैं,वह तो यहीं स्थित रह जाते हैं।

(श्राद्ध पक्ष 5 सितंबर से 19 सितंबर तक)

#श्राद्ध #ज्योतिष #Panditastro #Pt_D_K_Sharma_Vatsa

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Pt Vinod Pandey 🚩 Jan 26, 2020

🕉श्री हरिहरो विजयतेतराम🕉 🌄सुप्रभातम🌄 🗓आज का पञ्चाङ्ग🗓 🌻सोमवार, २७ जनवरी २०२०🌻 सूर्योदय: 🌄 ०७:१६ सूर्यास्त: 🌅 ०५:५१ चन्द्रोदय: 🌝 ०८:५० चन्द्रास्त: 🌜२०:०४ अयन 🌕 उत्तरायणे (दक्षिणगोलीय) ऋतु: ❄️ शिशिर शक सम्वत: 👉 १९४१ (विकारी) विक्रम सम्वत: 👉 २०७६ (परिधावी) मास 👉 माघ पक्ष 👉 शुक्ल तिथि: 👉 तृतीया (पूर्ण रात्रि) नक्षत्र: 👉 शतभिषा (पूर्ण रात्रि) योग: 👉 वरीयान् (२६:५२ तक) प्रथम करण: 👉 तैतिल (१९:१६ तक) द्वितीय करण: 👉 गर (पूर्ण रात्रि) 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰️〰️ ॥ गोचर ग्रहा: ॥ 🌖🌗🌖🌗 सूर्य 🌟 मकर चंद्र 🌟 कुम्भ मंगल 🌟 वृश्चिक (उदित, पूर्व) बुध 🌟 मकर (उदय, पूर्व) गुरु 🌟 धनु (अस्त, पश्चिम, मार्गी) शुक्र 🌟 कुम्भ (उदित, पश्चिम) शनि 🌟 मकर (अस्त, पश्चिम, मार्गी) राहु 🌟 मिथुन केतु 🌟 धनु 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 शुभाशुभ मुहूर्त विचार ⏳⏲⏳⏲⏳⏲⏳ 〰〰〰〰〰〰〰 अभिजित मुहूर्त: 👉 १२:०९ से १२:५१ अमृत काल: 👉 २५:२५ से २७:११ होमाहुति: 👉 सूर्य अग्निवास: 👉 पाताल दिशा शूल: 👉 पूर्व नक्षत्र शूल: 👉 ❌❌❌ चन्द्र वास: 👉 पश्चिम दुर्मुहूर्त: 👉 १२:५१ से १३:३३ राहुकाल: 👉 ०८:३३ से ०९:५२ राहु काल वास: 👉 उत्तर-पश्चिम यमगण्ड: 👉 ११:११ से १२:३० 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ ☄चौघड़िया विचार☄ 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ ॥ दिन का चौघड़िया ॥ १ - अमृत २ - काल ३ - शुभ ४ - रोग ५ - उद्वेग ६ - चर ७ - लाभ ८ - अमृत ॥रात्रि का चौघड़िया॥ १ - चर २ - रोग ३ - काल ४ - लाभ ५ - उद्वेग ६ - शुभ ७ - अमृत ८ - चर नोट-- दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है। प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है। 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 शुभ यात्रा दिशा 🚌🚈🚗⛵🛫 पश्चिम-दक्षिण (दर्पण देखकर अथवा खीर का सेवन कर यात्रा करें) 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 तिथि विशेष 🗓📆🗓📆 〰️〰️〰️〰️ चूड़ाकर्म एवं गृहारम्भ+सर्वदेव प्रतिष्ठा मुहूर्त आदि। 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 आज जन्मे शिशुओं का नामकरण 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 आज ३१:१५ तक जन्मे शिशुओ का नाम शतभिषा नक्षत्र के प्रथम, द्वितीय, तृतीय, चतुर्थ चरण अनुसार क्रमशः (गो, सा, सी, सू) नामाक्षर से रखना शास्त्र सम्मत है। 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 उदय-लग्न मुहूर्त: ०७:१५ - ०८:१० मकर ०८:१० - ०९:३६ कुम्भ ०९:३६ - ११:०० मीन ११:०० - १२:३३ मेष १२:३३ - १४:२८ वृषभ १४:२८ - १६:४३ मिथुन १६:४३ - १९:०५ कर्क १९:०५ - २१:२३ सिंह २१:२३ - २३:४१ कन्या २३:४१ - २६:०२ तुला २६:०२ - २८:२२ वृश्चिक २८:२२ - ३०:२५ धनु ३०:२५ - ३१:१४ मकर 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 पञ्चक रहित मुहूर्त: ०७:१५ - ०८:१० शुभ मुहूर्त ०८:१० - ०९:३६ रज पञ्चक ०९:३६ - ११:०० शुभ मुहूर्त ११:०० - १२:३३ शुभ मुहूर्त १२:३३ - १४:२८ रज पञ्चक १४:२८ - १६:४३ शुभ मुहूर्त १६:४३ - १९:०५ चोर पञ्चक १९:०५ - २१:२३ शुभ मुहूर्त २१:२३ - २३:४१ रोग पञ्चक २३:४१ - २६:०२ शुभ मुहूर्त २६:०२ - २८:२२ मृत्यु पञ्चक २८:२२ - ३०:२५ अग्नि पञ्चक ३०:२५ - ३१:१४ शुभ मुहूर्त 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 आज का राशिफल 🐐🐂💏💮🐅👩 〰️〰️〰️〰️〰️〰️ मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ) आज का दिन आपको यश दिलाएगा। शारीरिक एवं मानसिक रूप से भी तंदुरुस्त रहेंगे। कार्य व्यवसाय में कई महत्त्वपूर्ण फैसले निकट भविष्य में लाभदायक सिद्ध होंगे। आज एक साथ अधिक कार्य करना पसंद करेंगे इससे व्यवसाय वृद्धि के साथ ही धन लाभ भी उचित मात्रा में हो सकेगा। विरोधी भी मुह ताकते रह जाएंगे। आज प्रेम प्रसंगों में समय बर्बाद ना करे इसकी जगह कार्य क्षेत्र पर समय दें अन्यथा लाभ की स्थिति ज्यादा देर नही टिकेगी। घरेलू एवं व्यक्तिगत सुख के साधनों पर आज अधिक खर्च होगा महिलाये महंगे सौंदर्य प्रसाधन पर खर्च करेंगी। छोटी मोटी बातो को छोड़ परिवार में सुख शांति बनी रहेगी। वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो) आज का दिन कार्यो में सफलता दिलाने वाला रहेगा फिर भी अतिआवश्यक कार्यो को आज ही पूर्ण करने का प्रयास करें बाद में स्थिति प्रतिकूल बनने वाली है। दिन का आरंभ किसी शुभ समाचार की प्राप्ति से होगा। महिलाये आज पुरुषों की अपेक्षा अधिक शांत रहेंगी घरेलू वातावरण को क्लेश मुक्त रखने में महत्त्वपूर्ण योगदान देंगी। आज आपको पैतृक व्यवसाय से अधिक लाभ होगा लेकिन आर्थिक लाभ में विलंब होने से कुछ समय के लिए परेशानी रहेगी संध्या का समय अधिक व्यस्त रहेगा रिश्तेदारी के व्यवहार निभाने में समय देना पड़ेगा। घर के बड़े लोग आपसे प्रसन्न रहेंगे रात्रि के समय अचानक अशुभ समाचार मिलने से बेचैनी रहेगी। मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा) आज आप प्रातः काल से ही अधूरे कामो को पूर्ण करने में जुट जाएंगे लेकिन फिर भी अपने किये कार्यो से पूरी तरह आश्वस्त नही होंगे अधिक बेहतर करने मनोवृति कार्यो में विलंब करेगी आज आप जैसा भी करेंगे वह अन्य लोगो की अपेक्षा पहले ही बेहतर रहेगा। भ्रम में पड़कर स्वयं का नुकसान कर लेंगे लेकिन फिर भी आज का दिन आर्थिक रूप से हर हाल में संतोषजनक रहेगा पूर्व नियोजित खर्च भी होंगे महिलाये दिखावे के कारण आवश्यकता से अधिक खर्च करेंगी जिससे घरेलू कलह का कारण बन सकती है। संध्या के समय मनोरंजन के अवसर मिलने से मानसिक थकान मिटेगी। आज कुछ ऐसी घटनाएं घटेंगी जिनकी निकट भविष्य में पुनरावृति होगी। कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो) आज आपकी समस्त दिनचर्या अस्त-व्यस्त रहेगी। जिस भी कार्य मे हाथ डालेंगे उसमे असफलता मिलेगी अथवा विलंब होगा। आज लोभ अथवा किसी दुर्व्यसन के कारण सामाजिक क्षेत्र पर मान भंग हो सकता है घर परिवार में भाई बंधुओ से मतांतर के कारण तीखी झड़प होगी। आज आपका पक्ष लेने वाला कोई नही मिलेगा ना ही व्यवसाय में ही किसी का उचित सहयोग मिल सकेगा। महिलाये घरेलू कार्यो से परेशानी अनुभव करेंगी इसके विपरीत मनोरंजन पर अधिक ध्यान देंगी जिससे कुछ हानि भी हो सकती है। बाहर घूमने अथवा किसी समारोह के निमंत्रण में जाने की योजना बनाएंगे परन्तु यहां भी वैर विरोध का सामना करना पड़ेगा। सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे) आज का दिन आशा से कुछ कम लाभ देगा फिर भी आवश्यकताओं की पूर्ति आसानी से कर लेंगे। नौकरी पेशा एवं व्यवसायी वर्ग को आज अतिरिक्त कार्य करना पड़ेगा इसका लाभ भी जल्द ही मिल जाएगा। व्यापार में वृद्धि होगी लेकिन आर्थिक लाभ के लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा। आज आपसे या किसी निकटस्थ से कुछ नुकसान भी हो सकता है जिसका सीधा असर धन और व्यवसाय पर भी पड़ेगा। सामाजिक व्यवहार पहले से अधिक बनेंगे परन्तु इनमें से अधिकांश लाभ की जगह खर्च ही करवाएंगे। परिवार में सुख शांति रहेगी बीच मे किसी गलतफहमी के कारण मामूली नारजगी रह सकती है। संध्या का समय थकान वाला रहेगा फिर भी सुख से बिताएंगे। कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो) आज का दिन भी आपकी कीर्ति में वृद्धि करने वाला रहेगा। दिन के आरंभ में पुराने कार्य निपटाने में व्यस्त रहेंगे शीघ्र ही अन्य अनुबंध मिलने से आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। सामाजिक व्यवहारों से भी आज जम कर लाभ उठाएंगे। मध्यान के समय कार्य क्षेत्र पर सुस्ती रहेगी परन्तु संध्या से व्यस्तता बढ़ जाएगी। आज किसी अपरिचित को उधार ना दें निश्चित ही डूबेगा। सरकारी अथवा अन्य महत्त्वपूर्ण कार्य ले देकरआज पूर्ण करने का प्रयास करें लाभदायक रहेगा इसके बाद परिस्तितियो में बदलाव आने से कार्य सफलता में संदेह रहेगा। पारिवारिक वातावरण में आनंद मंगल रहेगा आज मांगलिक कार्यकर्मो में भी व्यस्त रहेंगे इनपर खर्च भी करना पड़ेगा। 🌐 http://www.vkjpandey.in तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते) आज का दिन अधिक थकान वाला रहेगा आप आज आवश्यक कार्यो को प्रातः काल मे ही पूर्ण करने का प्रयास करेंगे लेकिन कुछ कार्य फिर भी अधूरे रह सकते है। दैनिक कार्य आज अस्त-व्यस्त रहेंगे। व्यवसायी लोग थकान एवं उन्माद के कारण बेमन से कार्य करेंगे परन्तु आर्थिक रूप से दिन बेहतर रहेगा। पुराने आश्वासन आज फलीभूत होने से धन आगमन सुनिश्चित होगा। भविष्य की योजनाओं पर खर्च होगा। कार्य क्षेत्र पर सहयोगियों का बर्ताव कुछ समय के लिए क्रोध दिलाएगा। मांगलिक कार्यो पर खर्च अधिक होगा धर्म कर्म के लिए भी समय निकाल लेंगे। घर का वातावरण लगभग सामान्य ही रहेगा। विपरीत लिंगीय के कारण दुख होगा। वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू) आज के दिन आप अतिआत्मविश्वास की भावना से ग्रसित रहेंगे यह घरेलू कलह एवं व्यवसाय में हानि का कारण बन सकती है।आज आप स्वयं को हर कार्य मे श्रेष्ठ दिखाने का प्रयास करेंगे जिस कारण किसी से वर्चस्व को लेकर तकरार होने की संभावना है। मन इच्छित कार्य ना होने से क्रोध आएगा। व्यवसायी वर्ग को पूर्व में किये निवेश का लाभ दुगना होकर मिलेगा परन्तु नवीन कार्यो में धन उलझ सकता है। धार्मिक कार्यो में दिखावे अथवा स्वार्थवश सहभागिता देंगे। सामाजिक क्षेत्र पर सम्मान में कमी आ सकती है बोलचाल में संयम रखें। विद्यार्थ वर्ग आज मानसिक दुविधा में रहने से श्रेष्ठ प्रदर्शन से चूकेंगे। घर मे मन कम ही लगेगा। धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे) आपके लिए आज का दिन मिश्रित फलदायी रहेगा। आज आपके लगभग सभी कार्य अंत में जाकर आर्थिक अथवा किसी अन्य कारण से अटक सकते है। आर्थिक मामलों को सुलझाने में किसी की चापलूसी करनी पड़ेगी अन्यथा उलझने ज्यादा बढ़ सकती है। सेहत भी नरम-गरम रहेगी इसकी अनदेखी कर कार्यो में जुटे रहेंगे जिससे बाद में तकलीफ बढ़ने की संभावना है। सभी प्रकार के जमीन अथवा सरकारी कार्य आज निरस्त रखें व्यर्थ भागदौड़ के बाद भी हासिल कुछ नही होगा। व्यर्थ के खर्च अधिक परेशान करेंगे धन कोष में कमी का कारण बनेंगे। घर के सदस्य आपसी विचारो से असहमत रहेंगे। बुजुर्गो के स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें। मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी) आज के दिन कार्य क्षेत्र एवं गृहस्थ में उठापटक वाली स्थिति रहेगी। व्यवसायी वर्ग भी एक साथ कई काम हाथ मे लेने पर उलझन की स्थिति से गुजरेंगे। मध्यान तक अधिक परिश्रम करना पड़ेगा परन्तु लाभ आशानुकूल नही रहने से निराशा होगी। अधिक कमाने की लालसा अनैतिक प्रवृतियों की ओर खींचेंगी जिसका आरंभ में लाभ मिलेगा परन्तु बाद में हानि दिखती नजर आएगी। नकारात्मक विचार मन पर हावी रहेंगे संध्या के बाद किसी बुजुर्ग के सहयोग से कामचलाऊ स्थिति बन सकेगी धन लाभ होने से कार्य चलते रहेंगे। किसी मांगलिक कार्यक्रम को लेकर अधिक खर्च करना पड़ेगा। महिलाओ का व्यवहार अटपटा रहेगा। कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)आज के दिन धन लाभ आपके व्यवहार के ऊपर काफी हद तक निर्भर रहेगा स्वभाव में चंचलता ना आने दे लक्ष्य के प्रति दृढ़ रहें आशा से अधिक लाभ हो सकता है। व्यवसायी वर्ग व्यवसाय में तेजी रहने से उत्साहित रहेंगे व्यस्तता भी अन्य दिनों की अपेक्षा अधिक रहेगी। नए कार्यो का विचार बना कर रखें जल्द ही इस पर काम करना पड़ेगा। कार्य क्षेत्र पर अधीनस्थों के कारण थोड़ी असुविधा बनेगी फिर भी स्थिति संभाल लेंगे। दाम्पत्य जीवन मे खुशिया बढ़ेंगी महिलाये मानसिक रूप से चंचल फिर भी आर्थिक एवं अन्य कारणों से सहयोगी रहेंगी। आकस्मिक यात्रा के योग बन सकते है संभव हो तो टालें वरना उचित लाभ से वंचित रह सकते है। मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची) आज का दिन भी सावधानी से व्यतीत करें। कार्य क्षेत्र पर प्रतिस्पर्धी आपको क्षति पहुचाने के लिए कुछ भी कर सकते है। घर मे भी किसी की चुगली का शिकार बनना पड़ेगा जिससे कुछ समय के लिए माहौल खराब होगा लेकिन शीघ्र ही स्थिति स्पष्ट होने से शांति स्थापित हो जाएगी। आध्यात्म में रुचि रहेगी साथ ही आडम्बर भी रहने से प्राप्ति न्यून रहेगी। आज अपने कार्य छोड़ अन्य की समस्या सुलझाने में स्वयं का नुकसान कर लेंगे जिसकी भरपाई बाद में असंभव ही रहेगी। परिवार अथवा रिश्तेदारी में विवाह अथवा अन्य मांगलिक आयोजन पर खर्च करने पड़ेंगे। महिलाये किसी ना किसी कारण से नाराज रहेंगी। 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰

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Sn Vyas Jan 26, 2020

अमावस्या और पूर्णिमा का रहस्य "!!!!!!!!!!! *बंदऊँ गुरु पद पदुम परागा। सुरुचि सुबास सरस अनुरागा॥ अमिअ मूरिमय चूरन चारू। समन सकल भव रुज परिवारू॥ भावार्थ:-मैं गुरु महाराज के चरण कमलों की रज की वन्दना करता हूँ, जो सुरुचि (सुंदर स्वाद), सुगंध तथा अनुराग रूपी रस से पूर्ण है। वह अमर मूल (संजीवनी जड़ी) का सुंदर चूर्ण है, जो सम्पूर्ण भव रोगों के परिवार को नाश करने वाला है॥ हिन्दू धर्म में पूर्णिमा, अमावस्या और ग्रहण के रहस्य को उजागर किया गया है। इसके अलावा वर्ष में ऐसे कई महत्वपूर्ण दिन और रात हैं,जिनका धरती और मानव मन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। उनमें से ही माह में पड़ने वाले 2 दिन सबसे महत्वपूर्ण हैं ~ पूर्णिमा और अमावस्या। पूर्णिमा और अमावस्या के प्रति बहुत से लोगों में डर है। खासकर अमावस्या के प्रति ज्यादा डर है। वर्ष में 12 पूर्णिमा और 12 अमावस्या होती हैं। सभी का अलग-अलग महत्व है। माह के 30 दिन को चन्द्र कला के आधार पर 15-15 दिन के 2 पक्षों में बांटा गया है ~ *'शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष'*। शुक्ल पक्ष के अंतिम दिन को पूर्णिमा कहते हैं और कृष्ण पक्ष के अंतिम दिन को अमावस्या। यदि शुरुआत से गिनें तो 30 तिथियों के नाम निम्न हैं~पूर्णिमा(पुरणमासी), प्रतिपदा (पड़वा), द्वितीया (दूज), तृतीया (तीज), चतुर्थी (चौथ), पंचमी (पंचमी), षष्ठी (छठ), सप्तमी (सातम), अष्टमी (आठम), नवमी (नौमी), दशमी (दसम), एकादशी (ग्यारस), द्वादशी (बारस), त्रयोदशी (तेरस), चतुर्दशी (चौदस) और अमावस्या (अमावस)। अमावस्या पंचांग के अनुसार माह की 30वीं और कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि है, जिस दिन कि चंद्रमा आकाश में दिखाई नहीं देता। हर माह की पूर्णिमा और अमावस्या को कोई न कोई पर्व अवश्य मनाया जाता, ताकि इन दिनों व्यक्ति का ध्यान धर्म की ओर लगा रहे..!! *'लेकिन इसके पीछे आखिर रहस्य क्या है'..??* नकारात्मक और सकारात्मक शक्तियां :धरती के मान से 2 तरह की शक्तियां होती हैं- 'सकारात्मक और नकारात्मक', दिन और रात, अच्छा और बुरा आदि। हिन्दू धर्म के अनुसार धरती पर उक्त दोनों तरह की शक्तियों का वर्चस्व सदा से रहता आया है। हालांकि कुछ मिश्रित शक्तियां भी होती हैं, जैसे संध्या होती है तथा जो दिन और रात के बीच होती है। उसमें दिन के गुण भी होते हैं और रात के गुण भी। इन प्राकृतिक और दैवीय शक्तियों के कारण ही धरती पर भांति-भांति के जीव-जंतु, पशु-पक्षी और पेड़-पौधों, निशाचरों आदि का जन्म और विकास हुआ है। इन शक्तियों के कारण ही मनुष्यों में देवगुण और दैत्य गुण होते हैं। हिन्दुओं ने सूर्य और चन्द्र की गति और कला को जानकर वर्ष का निर्धारण किया गया। 1 वर्ष में सूर्य पर आधारित 2 अयन होते हैं- पहला उत्तरायण और दूसरा दक्षिणायन। इसी तरह चंद्र पर आधारित 1 माह के 2 पक्ष होते हैं ~ शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष। इनमें से वर्ष के मान से उत्तरायण में और माह के मान से शुक्ल पक्ष में देव आत्माएं सक्रिय रहती हैं, तो दक्षिणायन और कृष्ण पक्ष में दैत्य और पितर आत्माएं ज्यादा सक्रिय रहती हैं। अच्छे लोग किसी भी प्रकार का धार्मिक और मांगलिक कार्य रात में नहीं करते जबकि दूसरे लोग अपने सभी धार्मिक और मांगलिक कार्य सहित सभी सांसारिक कार्य रात में ही करते हैं। पूर्णिमा का विज्ञान :पूर्णिमा की रात मन ज्यादा बेचैन रहता है और नींद कम ही आती है। कमजोर दिमाग वाले लोगों के मन में आत्महत्या या हत्या करने के विचार बढ़ जाते हैं। चांद का धरती के जल से संबंध है। जब पूर्णिमा आती है तो समुद्र में ज्वार-भाटा उत्पन्न होता है, क्योंकि चंद्रमा समुद्र के जल को ऊपर की ओर खींचता है। मानव के शरीर में भी लगभग 85 प्रतिशत जल रहता है। पूर्णिमा के दिन इस जल की गति और गुण बदल जाते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार इस दिन चन्द्रमा का प्रभाव काफी तेज होता है इन कारणों से शरीर के अंदर रक्त में न्यूरॉन सेल्स क्रियाशील हो जाते हैं और ऐसी स्थिति में इंसान ज्यादा उत्तेजित या भावुक रहता है। एक बार नहीं, प्रत्येक पूर्णिमा को ऐसा होता रहता है तो व्यक्ति का भविष्य भी उसी अनुसार बनता और बिगड़ता रहता है। जिन्हें मंदाग्नि रोग होता है या जिनके पेट में चय-उपचय की क्रिया शिथिल होती है, तब अक्सर सुनने में आता है कि ऐसे व्यक्ति भोजन करने के बाद नशा जैसा महसूस करते हैं और नशे में न्यूरॉन सेल्स शिथिल हो जाते हैं जिससे दिमाग का नियंत्रण शरीर पर कम, भावनाओं पर ज्यादा केंद्रित हो जाता है। ऐसे व्यक्तियों पर चन्द्रमा का प्रभाव गलत दिशा लेने लगता है। इस कारण पूर्णिमा व्रत का पालन रखने की सलाह दी जाती है। कुछ मुख्य पूर्णिमा :कार्तिक पूर्णिमा, माघ पूर्णिमा, शरद पूर्णिमा, गुरु पूर्णिमा, बुद्ध पूर्णिमा आदि। चेतावनी :~ इस दिन किसी भी प्रकार की तामसिक वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन शराब आदि नशे से भी दूर रहना चाहिए। इसके शरीर पर ही नहीं, आपके भविष्य पर भी दुष्परिणाम हो सकते हैं। जानकार लोग तो यह कहते हैं कि चौदस, पूर्णिमा और प्रतिपदा उक्त 3 दिन पवित्र बने रहने में ही भलाई है। अमावस्या' :~ वर्ष के मान से उत्तरायण में और माह के मान से शुक्ल पक्ष में देव आत्माएं सक्रिय रहती हैं तो दक्षिणायन और कृष्ण पक्ष में दैत्य आत्माएं ज्यादा सक्रिय रहती हैं। जब दानवी आत्माएं ज्यादा सक्रिय रहती हैं, तब मनुष्यों में भी दानवी प्रवृत्ति का असर बढ़ जाता है इसीलिए उक्त दिनों के महत्वपूर्ण दिन में व्यक्ति के मन-मस्तिष्क को धर्म की ओर मोड़ दिया जाता है। अमावस्या के दिन भूत-प्रेत, पितृ, पिशाच, निशाचर जीव-जंतु और दैत्य ज्यादा सक्रिय और उन्मुक्त रहते हैं। ऐसे दिन की प्रकृति को जानकर विशेष सावधानी रखनी चाहिए। प्रेत के शरीर की रचना में 25 प्रतिशत फिजिकल एटम और 75 प्रतिशत ईथरिक एटम होता है। इसी प्रकार पितृ शरीर के निर्माण में 25 प्रतिशत ईथरिक एटम और 75 प्रतिशत एस्ट्रल एटम होता है। अगर ईथरिक एटम सघन हो जाए तो प्रेतों का छायाचित्र लिया जा सकता है और इसी प्रकार यदि एस्ट्रल एटम सघन हो जाए तो पितरों का भी छायाचित्र लिया जा सकता है। ज्योतिष में चन्द्र को मन का देवता माना गया है। अमावस्या के दिन चन्द्रमा दिखाई नहीं देता। ऐसे में जो लोग अति भावुक होते हैं, उन पर इस बात का सर्वाधिक प्रभाव पड़ता है। लड़कियां मन से बहुत ही भावुक होती हैं। इस दिन चन्द्रमा नहीं दिखाई देता तो ऐसे में हमारे शरीर में हलचल अधिक बढ़ जाती है। जो व्यक्ति नकारात्मक सोच वाला होता है उसे नकारात्मक शक्ति अपने प्रभाव में ले लेती है। धर्मग्रंथों में चन्द्रमा की 16वीं कला को 'अमा' कहा गया है। चन्द्रमंडल की 'अमा' नाम की महाकला है जिसमें चन्द्रमा की 16 कलाओं की शक्ति शामिल है। शास्त्रों में अमा के अनेक नाम आए हैं, जैसे अमावस्या, सूर्य-चन्द्र संगम, पंचदशी, अमावसी, अमावासी या अमामासी। अमावस्या के दिन चन्द्र नहीं दिखाई देता अर्थात जिसका क्षय और उदय नहीं होता है उसे अमावस्या कहा गया है, तब इसे 'कुहू अमावस्या' भी कहा जाता है। अमावस्या माह में एक बार ही आती है। शास्त्रों में अमावस्या तिथि का स्वामी पितृदेव को माना जाता है। अमावस्या सूर्य और चन्द्र के मिलन का काल है। इस दिन दोनों ही एक ही राशि में रहते हैं। कुछ मुख्य अमावस्या :भौमवती अमावस्या, मौनी अमावस्या, शनि अमावस्या, हरियाली अमावस्या, दिवाली अमावस्या, सोमवती अमावस्या, सर्वपितृ अमावस्या। चेतावनी :इस दिन किसी भी प्रकार की तामसिक वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन शराब आदि नशे से भी दूर रहना चाहिए। इसके शरीर पर ही नहीं, आपके भविष्य पर भी दुष्परिणाम हो सकते हैं। जानकार लोग तो यह कहते हैं कि चौदस, अमावस्या और प्रतिपदा उक्त 3 दिन पवित्र बने रहने में ही भलाई है..! आचार्य डॉ0 विजय शंकर मिश्र

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Pt Vinod Pandey 🚩 Jan 25, 2020

🌞 *~ आज का हिन्दू #पंचांग ~* 🌞 ⛅ *दिनांक 26 जनवरी 2020* ⛅ *दिन - रविवार* ⛅ *विक्रम संवत - 2076* ⛅ *शक संवत - 1941* ⛅ *अयन - उत्तरायण* ⛅ *ऋतु - शिशिर* ⛅ *मास - माघ* ⛅ *पक्ष - शुक्ल* ⛅ *तिथि - द्वितीया 27 जनवरी प्रातः 06:15 तक तत्पश्चात तृतीया* ⛅ *नक्षत्र - धनिष्ठा 27 जनवरी प्रातः 06:49 तत्पश्चात शतभिषा* ⛅ *योग - व्यतिपात 27 जनवरी रात्रि 02:26 तक तत्पश्चात वरीयान्* ⛅ *राहुकाल - शाम 04:44 से शाम 06:06 तक* ⛅ *सूर्योदय - 07:19* ⛅ *सूर्यास्त - 18:22* ⛅ *दिशाशूल - पश्चिम दिशा में* ⛅ *व्रत पर्व विवरण - चन्द्र-दर्शन, गणतंत्र दिवस* 💥 *विशेष - द्वितीया को बृहती (छोटा बैंगन या कटेहरी) खाना निषिद्ध है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)* 🌷 *माघ शुक्ल तृतीया (गौरी तृतीया)* 🌷 ➡ *27 जनवरी 2020 सोमवार को प्रातः 06:16 से 28 जनवरी मंगलवार को सुबह 08:21 तक माघ शुक्ल तृतीया है ।* 🙏🏻 *तृतीया तिथि को सार्वत्रिक रूप से गौरी की पूजा का निर्देश है, चाहे किसी भी मास की तृतीया तिथि हो। भविष्यपुराण के अनुसार माघ मास की शुक्ल तृतीया अन्य मासों की तृतीया से अधिक उत्तम है | माघ मास की तृतीया स्त्रियों को विशेष फल देती है | माघ मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया को सौभाग्य वृद्धिदायक गौरी तृतीया व्रत किया जाता है। भविष्यपुराण उत्तरपर्व में आज से शुरू होने वाले ललितातृतीया व्रत की विधि का वर्णन है जिसके करने से नारी को सौभाग्य, धन, सुख, पुत्र, रूप, लक्ष्मी, दीर्घायु तथा आरोग्य प्राप्त होता है और स्वर्ग की भी प्राप्ति होती है |* 🌷 *सौभाग्यं लभते येन धनं पुत्रान्पशून्सुखम् । नारी स्वर्गं शुभं रूपमारोग्यं श्रियमुत्तमाम् ।।* 🙏🏻 *भविष्यपुराण, ब्राह्मपर्व में भगवती गौरी ने धर्मराज से कहा :- माघ मास की तृतीया को गुड़ और लवण (नमक) का दान स्त्रियों एवं पुरुषों के लिए अत्यंत श्रेयस्कर है भगवन शंकर की प्रिये उस दिन मोदक एवं जल का दान करें .* 🌷 *माघमासे तृतीयायां गुडस्य लवणस्य च । दानं श्रेयस्करं राजन्स्त्रीणां च पुरुषस्य च ।।* *तृतीयायां तु माघस्य वामदेवस्य प्रीतये । वारिदानं प्रशस्तं स्यान्मोदकानां च भारत ।।* 🙏🏻 *पद्मपुराण, सृष्टि खंड के अनुसार माघ मास के शुक्ल पक्ष तृतीया मन्वंतर तिथि है। उस दिन जो कुछ दान दिया जाता है उसका फल अक्षय बताया गया है।* 🙏🏻 *धर्मसिंधु के अनुसार माघ मास में ईंधन, कंबल, वस्त्र, जूता, तेल, रूई से भरी रजाई, सुवर्ण, अन्न आदि के दान का बड़ा भारी फल मिलता है।* 🙏🏻 *माघ में तिलों का दान जरूर जरूर करना चाहिए। विशेषतः तिलों से भरकर ताम्बे का पात्र दान देना चाहिए।* 🌐 http://www.vkjpandey.in 🌷 *ससुराल मे कोई तकलीफ* 🌷 👩🏻 *किसी सुहागन बहन को ससुराल मे कोई तकलीफ हो तो शुक्ल पक्ष की तृतीया को उपवास रखें …उपवास माने एक बार बिना नमक का भोजन कर के उपवास रखें ..भोजन में दाल चावल सब्जी रोटी नहीं खाए, दूध रोटी खा लें..शुक्ल पक्ष की तृतीया को..अमावस्या से पूनम तक की शुक्ल पक्ष में जो तृतीया आती है उसको ऐसा उपवास रखें …नमक बिना का भोजन(दूध रोटी) , एक बार खाए बस……अगर किसी बहन से वो भी नहीं हो सकता पूरे साल का तो केवल* 👉🏻 *माघ महीने की शुक्ल पक्ष की तृतीया,* 👉🏻 *वैशाख शुक्ल तृतीया और* 👉🏻 *भाद्रपद मास की शुक्ल तृतीया* *जरुर ऐसे ३ तृतीया का उपवास जरुर करें …नमक बिना करें ….जरुर लाभ होगा…* 🙏🏻 *..ऐसा व्रत वशिष्ठ जी की पत्नी अरुंधती ने किया था…. ऐसा आहार नमक बिना का भोजन…. वशिष्ठ और अरुंधती का वैवाहिक जीवन इतना सुंदर था कि आज भी सप्त ऋषियों में से वशिष्ठ जी का तारा होता है , उन के साथ अरुंधती का तारा होता है…आज भी आकाश में रात को हम उनका दर्शन करते हैं …* 🙏🏻 *..शास्त्रो के अनुसार शादी होती तो उनका दर्शन करते है….. जो जानकर पंडित होता है वो बोलता है…शादी के समय वर-वधु को अरुंधती का तारा दिखाया जाता है और प्रार्थना करते है कि , “जैसा वशिष्ठ जी और अरुंधती का साथ रहा ऐसा हम दोनों पति पत्नी का साथ रहेगा..” ऐसा नियम है….* 🙏🏻 *चन्द्रमा की पत्नी ने इस व्रत के द्वारा चन्द्रमा की २७ पत्नियों में से प्रधान हुई….चन्द्रमा की पत्नी ने तृतीया के व्रत के द्वारा ही वो स्थान प्राप्त किया था…तो अगर किसी सुहागन बहन को कोई तकलीफ है तो ये व्रत करें ….उस दिन गाय को चंदन से तिलक करें … कुम -कुम का तिलक ख़ुद को भी करें उत्तर दिशा में मुख करके …. उस दिन गाय को भी रोटी गुड़ खिलाये॥* 🌐 http://www.vkjpandey.in 🙏🏻🌷💐🌸🌼🌹🍀🌺💐🙏🏻

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शुभ संध्या मित्रों🙏😊🙏 👉ग्रहों से संबंधित श्राप जो ग्रह पीड़ित हो उसी के कारकत्व के अनुसार वही ऋण समझना चाहिए जैसे शुक्र पीड़ित तो स्त्री (पत्नी) ऋण। पितृऋण का कारक ग्रह सूर्य; भ्रातृ ऋण का कारक ग्रह मंगल; मातुल ऋण का कारक ग्रह बुध; ब्रह्माऋण का कारक ग्रह बृहस्पति; प्रेतऋण (श्राप) का कारक ग्रह शनि; यक्षिणी साध्वी स्त्रीऋण का कारक केतु; मातृ ऋण का कारक चंद्रमा; स्त्री (पत्नी ऋण) का कारक ग्रह शुक्र; देवऋण का कारक ग्रह बुध; पीपल ऋण का कारक ग्रह शनि; सर्पऋण का कारक ग्रह राहु है।   कुछ अन्य ऋण स्वऋण : पूर्व जन्मों में जातक की स्वयं की भूलों का परिणाम स्वऋण होता है, जैसे नास्तिकता के मद में अधर्म के कार्य, धार्मिक कार्य एवं ईश्वरवाद की खिल्ली उड़ाना।   जन्म कुंडली में स्वऋण की पहचान : कुंडली के 5वें भाव में शुक्र या पाप ग्रह स्थित हो तो स्वऋण समझना चाहिए।   प्रत्यक्ष लक्षण :  जातक के मकान में छत से उतरने के एक से अधिक मार्ग हों अथवा छत के किसी छेद से नीचे रोशनी आती हो।   स्वऋण के अशुभ फल : किसी मुकद्दमे, कानूनी मामले में उलझना, रोग से शरीर दुर्बल होना।   मुक्ति के उपाय : परिवार के सभी सदस्यों से बराबर-बराबर चंदा लेकर सूर्य ग्रह की शांति के लिए यज्ञ करें।   मातृऋण : कुंडली के 4 भाव में केतु के बैठने से चंद्रमा पीड़ित हो जाता है तथा मातृऋण दोष प्रकट होता है।   कारण : माता, दादी, चाची, सास, गुरुमाता या अन्य स्त्री का अकारण अपमान करना, उन्हें सताना, मारपीट कर उनका सब कुछ हड़प लेना, उनकी हत्या कर देना मातृऋण के कारण बनते हैं।   प्रत्यक्ष लक्षण : जातक के घर के पास, कुआं, नदी, नाला, तालाब या कोई, पूजा-स्थल हो और लोग उसके जल में गंदगी बहा-फैंक कर उसे प्रदूषित करते हों।   मातृऋण के अशुभ फल : जमा पूंजी समाप्त हो जाना, जातक की सहायता करने वाले का अहित हो जाना, बीमारी की चिकित्सा का खर्च न पूरा होना, सरकारी कर या जुर्माना भरना, कुसंगति से गंदी आदतें पडऩा, पास-पड़ोस में झगड़ा, अशांति।   मुक्ति के उपाय : परिवार के सभी सदस्य बराबर-बराबर चांदी लेकर एक ही दिन, एक समय, एक साथ नदी में बहा दें।   कुंडली में पितृऋण की पहचान : कुंडली के 2, 5, 9, 12 भाव में शुक्र-बुध-राहु स्थित हों तथा सूर्य 1, 11 भाव में न हो तो पितृऋण समझना चाहिए।   प्रत्यक्ष लक्षण : जातक की यौवनावस्था एक घर में सम्पन्नता रहे, वृद्धावस्था में निर्धनता, सभी कामों में रुकावट, दुख, निराशा, अपमान सहना पड़े, आर्थिक दशा खराब होना, राजयोग कारक शुभफलदायक ग्रह भी अपना शुभ फल नहीं दे पाते।   मुक्ति के उपाय : परिवार के सभी सदस्यों से चंदे का समान पैसा इकट्ठा कर पड़ोस के मंदिर में दान दें। यदि यह उपाय सफल न हो तो कुछ समय बाद पीपल के पेड़ में जल चढ़ाएं।   नोट : पितृदोष ऋण आदि के कारण उत्पन्न अशुभफल संबंधित उपाय करने से ही शांत हो सकता है अत: संबंधित ग्रहदोष के लिए निर्धारित पूजा-पाठ  आदि अवश्य करें। इसमें श्राद्ध का उपाय भी बहुत प्रभावशाली है। शिवजी का पूजन अर्चन, रुद्राभिषेक, दान आदि उपाय सभी प्रभावशाली हैं।

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शनि का मकर में गोचर 24 जनवरी 2020 〰️〰️🌼〰️〰️🌼🌼🌼〰️〰️🌼〰️〰️ फलित ज्योतिष में शनि ग्रह सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला विषय है और ज्यादातर हम लोगों के मन में शनि को लेकर एक डर की स्थिति तो बनी रहती है पर असल में हमारी कुंडली में स्थित शनि ग्रह का हमारे जीवन में कितना विशेष महत्त्व है इस पर हम ध्यान नहीं देते...! दंडाधिकारी शनिदेव को कर्म के प्रतीक व सहयोग से जुड़ी लोकतांत्रिक समूह का कारक ग्रह माना जाता है। ये मानव के जीवन को काफी प्रभावित करता है , और ये भी है कि शनि  गोचर की गति बहुत ही धीमी मानी जाती है। जिसके कारण इसका परिणाम मजबूत और स्थित होता है , और  शनि महिमा का कोई मुकाबला नहीं है क्यूकि शनि की दया दृष्टि जिस पर पड़ती है वह धन्य हो जाता है। ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को अनेक नामों से जाना जाता है। जैसे सूर्य पुत्र, शनिश्चर, छाया पुत्र और मंद और भी अनेकों नाम से जाने जाते है ये माना जाता है, की सूर्य पुत्र शनि देव पूरे ब्रह्मांड के न्याय के देवता माने जाते है। शनि का गोचर , साढ़े सती और महा दशा का हमारे जीवन में बहुत बहुत महत्व माना जाता है। शनि के परिवर्तन सुखद व दुखद दोनों ही हो सकते है। ज्योतिष शास्त्र में शनि को मकर और कुम्भ राशि का स्वामी माना जाता है , और सूर्य , मंगल और चंद्रमा व मंगल को शनि गोचर का शत्रु माना जाता है। शनि तुला राशि में उच्च और मेष राशि में नीच का होता है । सप्तम भाव में शनि गोचर दिगबली गोचर कहलता है क्यूकि शनि सप्तम भाव में दिगबली होता है।  शनि गोचर में बुध व शुक्र को मित्र और बृहस्पति के साथ सम भाव रखता है। चलिये जानते है की आपके जीवन पर शनि गोचर का क्या प्रभाव पड़ेगा कैसा रहेगा आपकी राशियों पर शनि गोचर का प्रभाव। शनि गोचर वर्ष  2019 पर्यन्त में धनु राशि में ही स्थित रहा है और इस वर्ष शनि और 30 जनवरी 2020 तक अस्त रहेगा। शनि ग्रह का गोचर 24 जनवरी 2020 शुक्रवार के दिन प्रातःकाल 09:31 बजे धनु से स्वराशि मकर में प्रवेश कर रहे हैं, और शनि 17 जनवरी 2023 को कुम्भ राशि में गोचर करेगा। आइये जानते है सूर्य पुत्र शनि का अन्य राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा ।  मकरे च यदा सौरिः दुर्भिक्षं तत्र दारुणम्। कामार्ताश्च विनश्यन्ति हि अन्यदेशे शुभं भवेत्।। साढ़ेसाती👉 धनु, मकर व कुम्भ राशि वाले जातक/जातिकाओं को शनि-साढ़ेसाती का प्रभाव रहेगा। (1) धनु राशि वाले जातक/जातिकाओं को साढ़ेसाती पाँव पर उतरती हुई अर्थात् अन्तिम चरण में होगी। (2) मकर राशि वालों को शनि-साढ़ेसाती हृदय पर चढ़ती हुई अर्थात् मध्य अवस्था में होगी । (3) कुम्भ राशि वालों को शनि-साढ़ेसाती सिर पर चढ़ती अर्थात् प्रारम्भिक अवस्था में होगी। धनु एवं मकर राशि वालों को प्रारम्भ के अढ़ाई वर्ष तथा कुम्भ राशि वालों को अन्त के अढ़ाई वर्ष विशेषत: अशुभकारक रहते हैं। ढैय्या विचार👉 मिथुन व तुला राशि वाले जातकों को शनि की ढैय्या का अशुभ प्रभाव रहेगा। सुवर्णादि पाया निर्णय 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ गत वर्ष 24 जनवरी, सन् 2020 ई. को शनि मकर राशिस्थ चन्द्रमा, उत्तराषाढ़ा नक्षत्रकालीन मकर राशि में प्रवेश कर रहा है। तद्नुसार मेषादि राशियों पर सुवर्णादि पाया वही रहेगा। यथा- (1) मेष, कर्क तथा वृश्चिक राशियों पर ताम्र का पाया (पाद) शुभ होगा। (2) वृष, कन्या तथा धनु राशियों पर रजत का पाद (पाया) शुभ होगा। (3) मिथुन, तुला तथा कुम्भ राशियों पर लौह-पाद अशुभ फलदायक होगा। (4) कर्क, मकर तथा मीन राशियों पर सुवर्ण-पाद (पाया) मिश्रित फलदायक होगा। राशि अनुसार शनि के गोचर का फल 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ) राशि से शनि दशमस्थ होने से संघर्ष एवं विघ्नों के बावजूद निर्वाह योग्य आय के साधन बनते रहेंगे। पाया ताम्र होने तथा 30 जून से 19 नवम्बर के मध्य गुरु की दृष्टि रहने से मेष राशि के लोगों के लिए शनि का राशि परिवर्तन अत्यधिक लाभकारी  व शुभ रहेगा। शनि का परिवर्तन आपके कर्म को प्रभावित कर सकता है , इसलिए आपको इस बात से सचेत रहना होगा । मेष राशि के लोगों को शनि के परिवर्तन से नौकरी करने वाले लोगों को अत्यंत लाभ मिलेगा और खुशी की बात ये है की आप लोगों को इस समय में प्रमोशन भी मिल सकता है। मेष राशि के जो लोग काफी समय से शादी का सोच रहे थे उनके  लिए यह समय बहुत अच्छा रहेगा। और जो लोग काफी समय से अच्छी नौकरी की तलाश में भटक रहे थे , उन लोगों को अच्छी नौकरी मिलने का अच्छा योग बन रहा है। परंतु इस समय आपको आपने माता-पिता का ख्याल रखना होगा, तथा अपने जीवनसाथी की भी सेहत की देखरेख करनी पद सकती है। इसलिए शनि का गोचर आपके लिए अत्यंत लाभकारी है। वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो) राशि को शनि नवमस्थ होने से एवं पाया रजत होने से शनि का राशि परिवर्तन आपके लिए बहुत ही लाभकारी होने वाला है। शनि गोचर का परिवर्तन आपके भाग्य में काफी लाभकारी होने वाला है इस परिवर्तन से आपके रुके हुए कामों में बहुत बरकत मिलेगी और इस राशि के किसी भी लोगों का काफी समय से नौकरी का प्रमोशन भी हो सकता है। इस समय आपको अपने जीवनसाथी से सहयोग भी मिल सकता है लोग नौकरी की तलाश में भटक रहे है उनके लिए ये समय बहुत शुभ है। परंतु आपके माता से थोड़ा मन मुटाव हो सकता है। इस राशि के लोगों किसी धार्मिक जगह पर जा सकते है । मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा) राशि से अष्टमस्थ ढैय्या, पाया भी लौह होने तथा 22 सितम्बर तक राहु का संचार रहने से वृथा दौड़-धूप एवं खर्च अधिक रहेंगे। मिथुन राशि के लिए यह शनि परिवर्तन बहुत ही अशुभ रहेगा, ये समय आपके लिए अच्छा नहीं है । आपका अपने परिवार से झगड़ा भी हो सकता है। राशि परिवर्तन से आपकी परेशानियाँ और भी बड़ सकती है इसलिए आपको अपनी वाणी पर संयम रखना होगा । और आपके दोस्त से धोखा भी मिल सकता है । ये समय आपके लिए अच्छा नहीं है इसलिए आपको बहुत सचेत रहना होगा। आपको किसी भी कार्य क्षेत्र में उच्च अधिकारियों के साथ मतभेद भी हो सकता है। शनि की राशि परिवर्तन में आपको बहुत ही सोच-समझ कर चलना होगा ताकि आपको कोई हानि न हो सके। कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो) कर्क राशि में शनि का गोचर सप्तम् भाव में हो रहा है। एवं इसका पाया ताम्र रहने से कर्क राशि के जातकों के लिए शनि का राशि परिवर्तन बहुत ही शुभ रहेगा । राशि परिवर्तन में जो जातक विवाह के लिए इच्छुक है उनके लिए ये समय अच्छा संदेश लाने वाला है। कर्क राशि में जो शनि का राशि परिवर्तन है उससे इन जातकों को बहुत ही शुभ समाचार मिलने वाला है जो लोग वैवाहिक जीवन जीना चाह रहे है उनके विवाह के लिए ये समय बहुत ही शुभ है। राशि के जातक किसी धार्मिक स्थल पर भी जा सकते है उनके लिए भी ये समय बहुत अच्छा रहेगा। अगर कोई अपनी नौकरी के लिए प्रयास कर रहा है उन्हें नौकरी मिल सकती है। इसलिए आपको बहुत सोच-समझ कर अपना कार्य करना होगा। सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे) सिंह राशि में शनि का गोचर छठवें भाव में हो रहा है एवं सुवर्ण पाद होने से अत्यन्त कठिन एवं विपरीत परिस्थितियों के पश्चात् निर्वाह योग्य धन प्राप्ति के साधन बनेंगे। शनि का राशि परिवर्तन आपके लिए मुख्य रूप से सामान्य रहेगा ,अगर आपके  लिए ज्यादा अच्छा नहीं है ,तो बुरा भी नहीं है। आपको इस राशि परिवर्तन से किसी रोग से छुटकारा मिलने की संभावना हो रही है। आपका कोई खास दोस्त जो किसी कारण से आपका सच्चा साथी बन सकता है उसके लिए  आपको अपनी वाणी पर संयम रखना होगा,ताकि आपको पूर्ण रूप से लाभ मिल सके। इस राशि परिवर्तन से आपको कोट कचहरी के क्षेत्र में सफलता मिल सकती है। लेकिन ये समय आपके ससुराल पक्ष से परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है, और आपके खर्चे भी बहुत ज्यादा बड़ सकते है। अगर आप किसी यात्रा पर जाना चाहते है.। तो आपका योग बन रहा है आपको यात्रा पर जाने में सफलता प्राप्त होगी पर कुछ रुकावटों के बाद।  कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो) कन्या राशि में शनि का गोचर पाँचवें भाव में हो रहा है। शनि पूज्य होगा। पूर्वार्द्ध भाग में घरेलु एवं कारोबारी उलझनों के कारण संघर्ष एवं मानसिक तनाव अधिक रहेगा। अनावश्यक मतभेद उभरेंगे। परन्तु शनि का रजत-पाद होने से शनि गोचर का राशि फल कन्या राशि के जातकों के लिया बहुत ही शुभ व लाभकारी रहेगा, और इस राशि परिवर्तन से आपको संतान की प्राप्ति होगी। ये समय आपके करोबार में वृद्धि करेगा। आपका रुके हुए अधिकांश काम बनेंगे। इस समय विद्यार्थियों को भी अनेक लाभ मिलने का योग है। अगर कोई भी विद्यार्थी अपने मनपसंद कालेज में एडमिशन लेना चाहते है ,तो उन विद्यार्थियों के लिए ये समय बहुत ही शुभ और अच्छा है। लेकिन इस समय आपको आपने बड़ो से नोकझोंक होने की संभावना हो सकती है। आपको अपने वैवाहिक जीवन में भी कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। आपका यात्रा पर जाने का योग बन सकता है मगर सफर के दौरान अपने  समान का ध्यान ज़रूर रखे। तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते) तुला राशि में शनि का गोचर चौथे भाव में हो रहा है। शनि चतुर्थस्थ होने एवं पाया लौह का होने से शनि की ढैय्या का अशुभ प्रभाव रहेगा। इस राशि परिवर्तन से आपकी माता जी की सेहत में काफी सुधार आयेगा ,और आपके ऊपर शनि की बुरी दृष्टि का आरंभ हो जाएगा । लेकिन इस राशि परिवर्तन से आपको भूमि लेने या फिर कोई वाहन लेने में सुख की प्राप्ति होगी। लेकिन इस समय आपको अपने शत्रु से बचकर रहना होगा क्योंकि इससे आपको हानि भी हो सकती है। अगर आपको अपने कार्य में अत्यधिक रुचि है तो आपको उस पर ध्यान देना होगा क्योंकि ये योग आपके कार्य के लिए सक्षम नहीं है और आपको कोट कचहरी के मामलों में भी जोखिम उठाना  पड़ सकता है। आपको शारीरिक समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है। डाक्टर से संपर्क में ज़रूर रहें। इसलिए आपको अपने सभी कामों पर सोच-समझ कर निर्णय लेना होगा। ताकि आपको किसी भी तरह से हानि न पहुँच सके, आपको सावधान रहना होगा। वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू) शनि तृतीयस्थ होने से भूमि, मकान, वाहनादि सुख-सुविधाओं में वृद्धिकारक होगा। पाया भी ताम्र होने से वृश्चिक राशि के जातकों के लिए शनि का राशि परिवर्तन शुभ रहने वाला है। व्यवसाय में लाभ व उन्नति के अवसर प्राप्त होंगे। क्योकि तीसरे भाव में शनि अच्छा फल देता है। इसलिए शनि का परिवर्तन आपके पराक्रम में उन्नति करेगा,और साथ ही साथ आपका भाग्य आपके कार्यक्षेत्र में साथ देगा।  ये समय आपके सारे रुके हुए कामों को पूरा करने में आपकी बहुत मदद करेगा तथा यह समय आपके लिए बहुत ही शुभ है। परंतु इस समय आपका अपने संतान के प्रति कुछ समस्याओं का सामना करना पद सकता है। धार्मिक कार्यों के लिए ये समय आपके लिए अति आवश्यक है। आपकी आय में भी अत्यधिक उतार चढ़ाव आ सकते है। धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे) धनु राशि में शनि का गोचर दूसरे भाव में हो रहा है। शनि द्वितीयस्थ होने से साढ़ेसाती का अशुभ प्रभाव अभी रहेगा। आय कम व खर्च बढ़ेंगे। आर्थिक उलझनों के कारण अशान्ति रहे, परन्तु शनि का पाया रजत (चान्दी) होने से कुछ निर्वाह योग्य आय के स्रोत बनते रहेंगे। कुंडली में दूसरे भाव में कुटुंभ व धन संपत्ति का मत किया जाता है। इसलिए शनि का राशि परिवर्तन धनु राशि के जातकों के लिए मध्यम रहेगा। लेकिन शनि का राशि परिवर्तन आपके धन में आपको उन्नति देगा और इसी समय आप पर शनि की आखिरी साढ़ेसाती शुरू हो जाएगी परंतु आपका परिवार आपका इस समय पूरा साथ देगा पर फिर भी आपको इस समय कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है इसलिए घबराए नहीं बल्कि उन कठिन परेशानियों का डट कर सामना करें। शनि गोचर के प्रभाव से आपको अपने ससुराल पक्ष से भी कुछ दुखद समाचार मिल सकते है और आपकी माता जी का स्वास्थय भी इस समय खराब हो सकता है इसलिए आपको बहुत सोच समझ कर कदम उठाना है नहीं तो आपको हानि भी हो सकती है। मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी) मकर राशि में शनि का गोचर लगन भाव में हो रहा है। लग्न भाव पर ही शनि-साढ़ेसाती होने से मानसिक तथा पारिवारिक उलझनें रहेंगी, परन्तु इस राशि पर शनि स्वराशिगत, 30 मार्च से 29 जून तक, पुन: 20 नवं. से 5 अप्रैल, 2021 ई. तक गुरु का संचार होने, पाया सुवर्ण होने से शनि का राशि परिवर्तन बहुत ही अच्छा रहेगा । इस गोचर से आपकी ढाईया या फिर कह लो साढ़े साती का दूसरा चरण शुरू हो रहा है। आपको इस राशि परिवर्तन में लाभ ही लाभ मिलने वाला है आपको अपने सारे रुके हुए कामों में उन्नति मिलेगी। अगर कोई नौकरी के लिए प्रयास कर रहा है तो उसकी नौकरी लग सकती है यह समय आपके  लिए बहुत अच्छा है।  लेकिन इस समय आपमें आलस्य की अधिकता रहेगी।आपका इस समय में अपने जीवन साथी से झगड़ा भी होने की  संभावना  रहेगी। आप अपने कार्यों को बहुत ही सोच समझ कर करें। आपके लिए अगर आप व्यापार करते है तो आपको बहुत संभल कर चलना चाहिए। आप अगर सही तरीके से अपना कार्य करेंगे तो आप को सफलता जरूर प्राप्त होगी और आय में वृद्धि भी होगी। कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा) कुम्भ राशि में शनि का गोचर बारहवें भाव में हो रहा है। ज्योतिष के अनुसार कुंडली में बारहवें भाव से खर्च का मत दिया जाता है। शनि का पाया भी लौह होने से कुम्भ राशि के जातकों के लिए शनि का राशि परिवर्तन अशुभ ही रहेगा। शनि गोचर खर्चो को बढ़ावा देगा और आपको व्यापार से संबन्धित कार्यों में हानि होने का डर सता सकता है। इसलिए आपको बहुत सोच समझ कर कदम उठाना होगा। इस राशि परिवर्तन के साथ ही आप पर शनि की साढ़े साती की  पहली  शुरू ढाईया होगी । आपको कोई भी पुराना रोग भी फिर से परेशान कर सकता है। आपके परिवार के साथ भी किसी से झगड़ा हो सकता है इस समय आपको शत्रुओं  सावधान रहना होगा । आपको अपना कोई भी कार्य आपने भाग्य पर नहीं छोडना है। मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची) मीन राशि में शनि का गोचर ग्यारहवें भाव में हो रहा है। ज्योतिष के अनुसार ग्यारहवें भाव से आय का विचार किया जाता है। मीन राशि के जातकों के लिए शनि राशि परिवर्तन एवं पाया सुवर्ण होने से आपके धन यानी आय में वृद्धि करेगा। जिससे आपके करोबार में उन्नति होगी । आपके लिए ये राशि परिवर्तन ( शनि गोचर 2020) आपकी सभी इच्छायों को पूरा होने में मदद करेगी । इस समय आपको कोई शुभ समाचार भी मिल सकता है।  आपकी सैलरी भी बढ़ सकती है। आपको आपने कार्यक्षेत्र में भी काफी मन सम्मान मिलेगा। आप इस समय इतने व्यस्त रहेंगे जिसके कारण आप आपने पार्टनर को भी समय नहीं दे पाएंगे और आप अगर शादीशुदा है तो आपके रिश्ते में कुछ दरार पड़ सकती है। आप दोनों का झगड़ा भी हो सकता है। इसलिए आपको सोच समझ कर कदम उठाना होगा। शनि गोचर और राशि परिवर्तन से आपको किसी भी प्रकार से हानि न हो इसके लिए आप हर कदम सोच समझ कर उठाएँ।    〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️

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🌷।। हर हर महादेव शम्भो काशी विश्वनाथ वन्दे।।🌷 आमदनी के चाहे कितने भी अच्छे योग क्यों न हो यदि कुंडली में द्वितीय भाव कमजोर या पीड़ित हो जाता है तो धन का संग्रह नहीं हो पाता है । लाखों कमाने के बाद भी पैसे की समस्या बनी रहती है । इस जन्म कुंडली में द्वितीय भाव का स्वामी मंगल 00 अंश का है बिल्कुल कमजोर है नीच राशि में विराजमान है ( यदि कोई ग्रह नीच राशि में विराजमान होता है एवं उस राशि का स्वामी केंद्र में विराजमान हो जाए तो नीचभंग राजयोग का निर्माण होता है । ) यहां चंद्रमा केंद्र में विराजमान है परंतु वह स्वयं कमजोर एवं अस्त हैं जिसके कारण इस नीच भंग राजयोग का भी कोई फल प्राप्त नहीं हुआ । द्वितीय भाव पर राहु विराजमान है एवं केतु की दृष्टि है जिसके कारण अच्छी आमदनी होने के बावजूद भी इन्हें हमेशा धन की समस्या बनी रही एवं कई बार किसी न किसी कारण से आर्थिक नुकसान भी सहना पड़ा । ▪️विशेष जानकारी या कुण्डली विश्लेषण हस्तरेखा विश्लेषण या किसी भी प्रकार की समस्याओं के समाधान हेतु ज्योतिषीय एवं तांत्रिकीय सहायता एवं परामर्श हेतु हमारे प्रोफाइल नम्बर पर संपर्क कर सकते हैं। आचर्य सत्यानन्द पाण्डेय ज्योतिषाचार्य एवं तंत्राचार्य दिव्य ज्योतिष केंद्र वाराणसी उत्तर प्रदेश वाट्स्अप👉9450786998 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷

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अमावस्या जन्म – विश्लेषण और उपाय 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️ अमावस्या अथवा कृष्णपक्ष की चतुर्दशी को हुआ जन्म , अशुभ जन्म समझा जाता हैं । अमावस्या पर हुआ जन्म , कुण्डली में उपस्थित अनेकों शुभयोगों (जैसे राजयोग , धनयोग आदि) का नाश करने वाला होता हैं। शास्त्रज्ञों ने अमावस्या पर हुए जन्म के अनेकानेक दुष्परिणाम गिनाये हैं । जब तुलाराशी के नक्षत्र/नवांशों में सूर्य-चन्द्र की युति हों तब तो यह दोष और भी अधिक विषाक्त और अशुभ फलप्रद हों जाता हैं । ऐसी स्थिति अधिकांशतः दीपावली को बनती हैं । महर्षि पाराशर अपनी “बृहत् पाराशर होराशास्त्रम्” के 88वें अध्याय के प्रथम 4 श्लोकों में जिन 17 अशुभ जन्मों का उल्लेख किया हैं उनमें “दर्श जन्म” (अमावस्या का जन्म) प्रमुख और सर्वप्रथम हैं। आज अमावस्या जन्म के विभिन्न पहलुओं की पड़ताल करेंगे :- 1👉 अमावस्या जन्म किसे कहेंगे ? 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ जब सूर्य और चन्द्र एक नक्षत्र में हों तब अमावस्या जन्म समझा जाता हैं । जब सूर्य और चन्द्र , एक नक्षत्र के साथ साथ एक ही नवांश में भी हों उस समय अमावस्या जन्म के अधिकाँश दुष्परिणाम देखने में आते हैं और जब एक नक्षत्र , एक नवांश और एक ही षष्ठ्यांश में हों तब तो अशुभ फल पूर्ण रूप से अपना रंग दिखाता हैं । जब-जब ऐसे जातकों के (जिनका जन्म अमावस्या को हुआ हैं) जन्म-नक्षत्रों पर ग्रहण आया करता हैं तब तब ग्रहण से लगाकर छः महीने उनके लिए भयंकर कष्ट देने वाले होते हैं। यदि जन्म नक्षत्र के साथ ही साथ जन्मकालिक नवांश भी ग्रहण की चपेट में हुआ (जब सूर्य और चन्द्र एक ही नवांश में हों तो) तब तो जातक को मृत्यतुल्य कष्ट प्राप्त होता हैं । 2👉 अमावस्या पर हुआ जन्म अशुभ क्यों हैं ? 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ ज्योतिष-शास्त्रों में सबसे प्रमुख सूर्य और चन्द्र को माना गया हैं । सूर्य को जहां जातक की आत्मा वहीँ चन्द्र को जातक का मन/मस्तिष्क माना जाता हैं । सूर्य और चन्द्र को सदैव शुभ माना जाता हैं , यहाँ तक की अष्टमेश के दोष से भी यह दोनों मुक्त हैं। अमावस्या को चन्द्र पूर्ण-अस्त समझा जाता हैं। चन्द्र के पूर्णतः अस्त होने से चन्द्र का शुभत्व जातक के लिए गौण हों जाता हैं वहीँ चन्द्र के साथ होने से सूर्य के शुभ फलों का भी महत्त्वपूर्ण ह्रास होता हैं । मोटे तौर पर कुछ यों समझ लें की सूर्य और चन्द्र के शुभफल जातक को नगण्य अनुपात में प्राप्त होते हैं । चूँकि सारे शुभ-राज-धन योगों की पूर्णता में सूर्य और चन्द्र के शुभत्व का योगदान रहता हैं अतएव बड़े-बड़े योग कुंडली में उपस्थित होने पर भी उनका प्रभाव निष्फल हों जाता हैं। 3👉 उपाय 〰️〰️〰️〰️ जिस नक्षत्र में सूर्य और चन्द्र हैं , उस नक्षत्र के मन्त्रों से (उसी नक्षत्र के आने पर) हवनात्मक अनुष्ठान करवाना चाहिए (जन्म के दो वर्षों के भीतर)। सदैव (जीवनभर) ऐसे नक्षत्र के प्राप्त होने पर व्रत करना चाहिए और नक्षत्र के अनुरूप सामग्री का दान देना चाहिए। नक्षत्र की शान्ति और रवि-चन्द्र योग के अशुभ्त्व के नाश के लिए अपने इष्ट के अनुष्ठान जीवन भर करना चाहिए। अमावस्या जन्म शान्ति वैदिक उपाय 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ अमावस्या में उत्पन्न जातक माता-पिता को दरिद्र बनाता है। अत: दोष शमन के लिए यत्न पूर्वक शान्ति करानी चाहिए। सर्वप्रथम जल पूर्ण घड़़े में गूलर, बड़, आम, निम्ब तथा पीपल के छाल, जड़, पल्लवों और पंच रत्न को रखकर रक्त वस्त्र द्वय आच्छादित कर घट स्थापन करें। पुन आपोहिष्ठेत्यादि 'सर्वे समुद्र'इन तीन मन्त्रों से अभिमन्त्रित करें। अमावस्या के देव चन्द्र, सूर्य, की स्वर्णमयी मूर्ति अथवा सूर्य की ताम्रमयी और चन्द्रमा की चाँदी की मूर्ति बनाकर विधिवत उसकी स्थापना करें। फिर सवितेत्यादि तथा आप्यास्वेत्यादि मन्त्रों से दोनों मूर्तियों की पञ्चोपचार या षोडशोपचार विधि से पूजा कर 'सवितृ' मन्त्र सोमो धेनुः इत्यादि मन्त्र से अष्टोत्तर शत संख्यक वा अष्टाविंशति प्रमित हवन करें। हवनान्तर पुत्र सहित दम्पति को कलश के जल से अभिषिक्त कर ब्राह्माणों को भोजन करावें तथा उन्हें सदक्षिणा विदा करें। इस प्रकार अमावस्योत्पन्न जातक निश्चय ही कल्याण का भागी होता है। कोई भी अशुभत्व ऐसा नहीं जो प्रभुकृपा से शांत न हों सके। अतएव सदैव प्रभु का ध्यान एवम् भगवद्भक्ति श्रेयस्कर हैं । 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️

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Deepak Jan 25, 2020

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Madan Kaushik Jan 25, 2020

***अपना पोस्ट*** **नक्षत्रवाणी** *༺⊰०║|। ॐ ।|║०⊱༻*  गजाननं भूतगनादि सेवितम, कपित्थजम्बू फलचारु भक्षणम। उमासुतं शोकविनाशकारकम, नमामि विघ्नेश्वर पादपंकजम।। श्रीमते रघुवीराय सेतूल्लङ्घितसिन्धवे। जितराक्षसराजाय रणधीराय मङ्गलम्।। भुजगतल्पगतं घनसुन्दरं गरुडवाहनमम्बुजलोचनम् । नलिनचक्रगदाकरमव्ययं भजत रे मनुजाः कमलापतिम् ।।  क्यों भटके मन बावरा, दर-दर ठोकर खाये...! शरण श्याम की ले ले प्यारे, जनम सफल हो जाये...!! 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 ~~~~~~~~~~~~~~~~~~ मित्रों...! इसके बाद सबसे पहले तो अभी भी कई व्यस्तताओं के चलते आपकी नक्षत्रवाणी की पोस्टिंग आगे पीछे होने या कहें कि आपको समय पर हस्तगत ना हो पाने के लिए आप सभी से हृदयपूर्वक क्षमा प्रार्थना सहित.....🙏🙏 आप सभी परम प्रिय धर्मपारायण, ज्योतिषविद्या प्रेमी विद्वतजनों को आचार्य/पं.मदन तुलसीराम जी कौशिक मुंबई (सिरसा-हरियाणा वाले) की ओर से सादर-सप्रेम 🌸 जय गणेश 🌸 जय अंबे 🌸 *जय श्री कृष्ण*🌷मंगल प्रभात🌷इसी के साथ आप सभी परम भागवत सनातनी मित्र-बन्धुओं को आज वांछा कल्पतरु *माघ शुक्लपक्ष व गुप्त नवरात्र प्रारम्भ होने, श्री वल्लभ जयन्ती, भारतीय पर्यटन दिवस, राष्ट्रीय मतदाता दिवस व हिमाचल प्रदेश स्थापना दिवस* की भी बहुत-बहुत हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं...!!! 💐💐 ※══❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖══※ आइये...! अब चलें आपके प्रिय पोस्ट 'नक्षत्रवाणी' के अंतर्गत आज कुछ विशेष महत्वपूर्ण जानकारी, दृकपंचांग, चन्द्र राशिफल' एवं 'आरोग्य मंत्र' की ज्ञानयात्रा पर...🙏 ```༺⊰🕉⊱༻ ``` *༺⊰०║|। ॐ ।|║०⊱༻* ☘️🌸.!! ॐ श्री गणेशाय नमः !!.🌸☘️ ********************************** 𴀽𴀊🕉श्री हरिहरौविजयतेतराम्🕉 🇬🇧 *आंग्ल मतानुसार* :- आज दिनांक 25 जनवरी सन 2020 शनिवार/सैटरडे प्रस्तुत है ««« *आज का दृकपंचांग:««« (दिनमान को छोड़ कर यहां दिए गए सभी तिथि, नक्षत्र आदि के समय समाप्ति काल हैं।). कलियुगाब्द........................5120 विक्रम संवत (चैत्रादि)-----------2076 विक्रम संवत (कार्तिकादि)-------2076 वि. संवत्सर (उत्तर)--------परिधावी शक सम्वंत ............1941(विकारी) मास..............माघ/मा 🌗 पक्ष.................शुक्ल/सुदी//चाणन पछ/उतरतो मा तिथी...............................प्रतिपदा दुसरे दिन प्रातः 04.31 पर्यंत पश्चात द्वितीया रवि................................उत्तरायण सूर्योदय.............प्रातः 07.18.00 पर सूर्यास्त.............संध्या 06.23.00पर सूर्य राशि.............................मकर चन्द्र राशि............................मकर नक्षत्र.................................श्रवण दुसरे दिन प्रातः 04.36 पर्यंत पश्चात धनिष्ठा योग...................................सिद्धि रात्रि 02.10 पर्यंत पश्चात व्यतिपात करण..............................किस्तुघ्न दोप 03.51 पर्यंत पश्चात बव ऋतु..................................शिशिर *दिन............................शनिवार* 🔯 शुभ रंग.................काला/नीला अभिजित काल/मुहूर्त.....मध्यान्ह 12.29 से 01.13 तक राहुकाल................पूर्वान्ह 10.04 से 11.28 तक गुलिक काल............प्रातः 07.18 से 08.41 तक 🚦 *दिशाशूल :-* पूर्वदिशा - यदि आवश्यक हो तो अदरक या लौंग, कालीमिर्च या उड़द का सेवन कर यात्रा प्रारंभ करें । 🌞 *उदय लग्न मुहूर्त :-* *मकर* 06:36:08 08:23:04 *कुम्भ* 08:23:04 09:56:49 *मीन* 09:56:49 11:28:01 *मेष* 11:28:01 13:08:44 *वृषभ* 13:08:44 15:07:20 *मिथुन* 15:07:20 17:21:01 *कर्क* 17:21:01 19:37:12 *सिंह* 19:37:12 21:49:01 *कन्या* 21:49:01 23:59:40 *तुला* 23:59:40 26:14:18 *वृश्चिक* 26:14:18 28:30:28 *धनु* 28:30:28 30:36:08 ✡ *चौघडिया :-* प्रात: 08.33 से 09.54 तक शुभ दोप. 12.38 से 01.59 तक चर दोप. 01.59 से 03.21 तक लाभ दोप. 03.21 से 04.43 तक अमृत संध्या 06.04 से 07.43 तक लाभ रात्रि 09.21 से 10.59 तक शुभ । ************************* ✍ आज के विशेष योगायोग/युति संयोग, वेध, ग्रहचार (ग्रहचाल), व्रत/पर्व/प्रकटोत्सव, जयंती/जन्मोत्सव व मोक्ष दिवस/स्मृतिदिवस/पुण्यतिथि आदि 🙏👇:- 👉आज माघ शुक्ल पक्ष शनिवार को वर्ष का 294 वां दिन 👉 माघ सुदी प्रतिपदा 28:31 तक पश्चात् द्वितीया शुरु, माघ शुक्लपक्ष प्रारम्भ, शुक्र पूर्वभाद्रपद में 17:07 पर, गुप्त नवरात्र प्रारम्भ, सूर्य की अभिजित निवृत्ति 18:20 पर, सर्वार्थसिद्धियोग/कार्यसिद्धियोग 28:35 तक, द्विपुष्कर योग 28:35 से, श्री वल्लभ जयन्ती, भारतीय पर्यटन दिवस, राष्ट्रीय मतदाता दिवस व हिमाचल प्रदेश स्थापना दिवस। 💥 *विशेष ध्यातव्य 👉 आज प्रतिपदा/पड़वा के दिन कुष्मांड (कुम्हड़ा/पेठा) खाना पूरी तरह निषिद्ध है, इससे धन का नाश भी होता है। *(वैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27-29-34)*। 📿 *आज का उपासना मंत्र* *🚩 🎪 ‼️ 🕉️ शं शनैश्चराय नमः ‼️ 🎪 🚩* *🚩 🌀🕉️।। ॐ विशालाक्षाय नमः ।।️ 🌀 🚩* 🏡आज का वास्तु टिप्स जिस घर में कांटेदार व दूध वाले पेड़-पौधे/झाड़ होते हैं, उस घर में सुख शांति का वास कभी भी नहीं होता। 📢 *संस्कृत सुभाषितानि -* सुकरं मलधारित्वं सुकरं दुस्तपं तपः । सुकरोक्षनिरोधश्र्च दुष्करं चित्तरोधनम् ॥ अर्थात :- मलधारित्व, दुष्कर तप, इन्द्रियों का निरोध करना ये सब आसान है, लेकिन चित्त का निरोध करना मुश्किल है । 🍃 *आरोग्य मंत्र:-* *तैलीय बालों की समस्या से निजात -* 1. सिर की तैलीय ग्र‍ंथि‍यां ज्यादा सक्रिय होने के कारण सीरम के सिर की त्वचा पर जमने से बाल चिपचिपे हो जाते हैं । ऐसे में सिर की सफाई पर विशेष ध्यान दें और हर दूसरे दिन शैंपू करते रहें। 2. बालों के लिए माइल्ड शैंपू का इस्तेमाल करें। इसके अलावा आप घर पर नींबू के रस को एक मग में लेकर शैंपू करने के बाद बालों में लगाएं। इससे बालों की चमक बनी रहेगी और डेंड्रफ की समस्या नहीं होगी। ⚜ *आज का चन्द्र राशिफल :-* 🐏 *राशि फलादेश मेष :-* *(चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, आ)* व्यापार-व्यवसाय में नए प्रयोग किए जा सकते हैं। समय की अनुकूलता का लाभ लें। धन प्राप्ति सुगम होगी। रचनात्मक कार्य सफल रहेंगे। कार्य की प्रशंसा होगी। प्रसन्नता तथा संतुष्टि रहेगी। यात्रा मनोरंजक हो सकती है। नौकरी में अनुकूलता रहेगी। कार्यभार व अधिकार में वृद्धि हो सकती है। 🐂 *राशि फलादेश वृष :-* *(ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)* व्यापार-व्यवसाय में धीमापन रह सकता है। आय में निश्चितता रहेगी। समय शीघ्र सुधरेगा। विवाद को बढ़ावा न दें। बेवजह कहासुनी हो सकती है। स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। थकान व कमजोरी रह सकते हैं। लेन-देन में जल्दबाजी न करें। धनहानि की आशंका है। 👫 *राशि फलादेश मिथुन :-* *(का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह)* व्यापार-व्यवसाय मनोनुकूल चलेगा। शेयर मार्केट व म्युचुअल फंड से लाभ होगा। यात्रा सफल रहेगी। शत्रु सक्रिय रहेंगे। चिंता तथा तनाव रहेंगे। किसी दूसरे व्यक्ति के काम में हस्तक्षेप न करें। विवाद होगा। मित्रों का सहयोग करने का अवसर प्राप्त हो सकता है। सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। 🦀 *राशि फलादेश कर्क :-* *(ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)* कारोबार में अनुकूलता रहेगी। स्वास्थ्य कमजोर रह सकता है। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। बुद्धि का प्रयोग लाभ में वृद्धि करेगा। प्रसन्नता बनी रहेगी। प्रमाद न करें। आत्मसम्मान बना रहेगा। उत्साहवर्धक सूचना प्राप्त होगी। भूले-बिसरे साथियों व संबंधियों से मुलाकात होगी। 🦁 *राशि फलादेश सिंह :-* *(मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)* शेयर मार्केट व म्युचुअल फंड मनोनुकूल लाभ देगा। प्रसन्नता का वातावरण रहेगा। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें। बेरोजगारी दूर करने के प्रयास सफल रहेंगे। नवीन वस्त्राभूषण की प्राप्ति हो सकती है। नौकरी में प्रभाव बढ़ेगा। यात्रा लाभदायक रहेगी। 👩🏻‍🦰 *राशि फलादेश कन्या :-* *(ढो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)* व्यापार-व्यवसाय ठीक चलेगा। बेकार बातों पर बिलकुल ध्यान न दें। स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। कोई भी महत्वपूर्ण निर्णय लेने में जल्दबाजी न करें। फालतू खर्च होगा। कर्ज लेना पड़ सकता है। आय में कमी होगी। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। ⚖ *राशि फलादेश तुला :-* *(रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)* कारोबार में वृद्धि होगी। नौकरी में प्रभाव बढ़ेगा। समय की अनुकूलता रहेगी, लाभ लें। जोखिम उठाने का साहस कर पाएंगे। आय में वृद्धि होगी। जल्दबाजी न करें। यात्रा मनोनुकूल रहेगी। नया काम मिलेगा। नए अनुबंध होंगे। डूबी हुई रकम प्राप्त हो सकती है। 🦂 *राशि फलादेश वृश्चिक :-* *(तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)* निवेश में जल्दबाजी न करें। आय के नए स्रोत प्राप्त हो सकते हैं। रुके कार्यों में गति आएगी। जोखिम उठाने का साहस कर पाएंगे। प्रमाद न करें। कार्यस्थल पर सुधार व परिवर्तन हो सकता है। योजना फलीभूत होगी। तत्काल लाभ नहीं होगा। 🏹 *राशि फलादेश धनु :-* *(ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे)* कारोबार में वृद्धि होगी। आसपास का वातावरण सुखद रहेगा। पार्टनरों तथा भाइयों का सहयोग प्राप्त होगा। विवाद को बढ़ावा न दें। विवेक का प्रयोग करें। प्रमाद न करें। अध्यात्म में रुझान रहेगा। सत्संग का लाभ प्राप्त होगा। राजकीय बाधा दूर होकर स्थिति लाभदायक बनेगी। 🐊 *राशि फलादेश मकर :-* *(भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी)* व्यापार-व्यवसाय की गति धीमी रहेगी। लेन-देन में जल्दबाजी से बचें। आय बनी रहेगी। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। क्रोध व उत्तेजना पर नियंत्रण रखें। चोट व दुर्घटना से बड़ी हानि की आशंका बनती है, सावधानी आवश्यक है। 🏺 *राशि फलादेश कुंभ :-* *(गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)* कारोबार लाभदायक रहेगा। नौकरी में प्रभाव बढ़ेगा। जीवनसाथी से सहयोग प्राप्त होगा। घर-बाहर प्रसन्नता का वातावरण रहेगा। लेन-देन में सावधानी रखें। धनहानि भी आशंका है। कोर्ट व कचहरी के कार्य अनुकूल रहेंगे। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। 🐡 *राशि फलादेश मीन :-* *(दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)* आय के नए स्रोत प्राप्त हो सकते हैं। भाग्य का साथ मिलेगा। चारों तरफ से सफलता मिलेगी। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी। उत्साह बना रहेगा। चिंता तथा तनाव कम होंगे। भूमि-भवन व मकान-दुकान इत्यादि की खरीद-फरोख्त मनोनुकूल लाभ देगी। बेरोजगारी दूर होगी। ***************************** *🎊🎉🎁 आज जिनका जन्मदिवस या विवाह की वर्षगांठ हैं, उन सभी प्रिय मित्रो को कोटिशः शुभकामनायें🎁🎊🎉* ※══❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖══※ और ज़रा इन बातों पर भी ज़रूर ध्यान दें मित्रों...! अगर...??? 1) खूब मेहनत के बाद भी या व्यापार-व्यवसाय में पर्याप्त इन्वेस्टमेंट करने के बाद भी आप अकारण आर्थिक दृष्टी से निरंतर पिछड़ते ही जा रहे हैं....? 2) एक ही नौकरी में लम्बे समय तक कार्य नहीं कर पाते हैं या वहां दिल से काम करते हुए भी आपको कोई पूछता ही नहीं है...? आपकी प्रमोशन ड्यू है कब से लेकिन आप बस दूसरों को आगे बढ़ते देख कर अपने नसीब को कोस रहे हैं...? आपके प्रतिद्वंदी अलग से परेशान करते रहते हैं...? 3) आपस में निरंतर अकारण क्लेश होता रहता है..? 4) शेयर मार्किट से कमाना चाहते हैं पर हर बार नुकसान उठा बैठते हैं...? 5) बिमारी आपको छोड़ ही रही है...? घर का हरएक व्यक्ति किसी न किसी बीमारी से त्रस्त है...? आमदनी का एक बड़ा हिस्सा हमेशां इसी पर खर्च हो जाता है...? 6) अकारण ही विवाह योग्य बच्चों के विवाह में दिक्कतें आ रही हैं...? 7) शत्रुओं ने आपकी रात की नींद और दिन का चैन हराम किया हुआ है...? 8) पैतृक सम्पति विवाद सुलझ ही नहीं रहा है...? और संपति केवास्तविक हकदार आप हैं तथा आप इसे अपने हक में सुलझना चाहते हैं...? 9) विदेश यात्रा या विदेश में सेटलमेंट को लेकर बहुत समय से परेशान हैं...? 10) आपको डरावने सपने आते हैं..? सपने में सांप या भूत-प्रेत या ऐसे ही नींद उड़ाने वाले दृश्य दीखते हैं...? 11) फिल्म या मीडिया में बहुत समय से संघर्ष के बाद भी सफलता​ नहीं मिल रही...? 12) राजनीति को ही आप अपना कैरियर बनाना चाहते हैं पर आपको कुछ भी समझ नहीं आ रहा...? यदि हाँ...??? तो यह सब अकारण ही नहीं है...! इसके पीछे बहुत ठोस कारण हैं जो कि आपकी जन्म कुंडली या आपके घर-आफिस का वास्तु देखकर या आपकी जन्मकुंडली भी ना होने की स्थिति में हमारे दीर्घ अध्ययन और प्रैक्टिकल ज्योतिषीय अनुभव के आधार पर अन्य विधियों से जाने जा सकते हैं...? तो अब आप और देरी ना करें और तुरंत हमें फोन करें...! आपकी उन्नति निश्चित है और आपकी मंजिल अब दूर नहीं...! ※══❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖══※ प्रस्तुति: आचार्य मदन टी.कौशिक मुंबई (सिरसा-हरियाणा वाले, मूल निकास: गौड़ बंगाल एवं तत्पश्चात ढाणी भालोट-झुंझनूँ-राज.) (चयनित/Appointed/) ज्योतिष एवं वास्तु शोध वैज्ञानिक एवं पूर्व विभागाध्यक्ष: TARF, Dadar-Mumbai साभार: बाँके बिहारी (धुरंधर वैदिक विद्वानों का अद्वितीय वैश्विकमंच) कार्यकारी अध्यक्ष: एस्ट्रो-वर्ल्ड मुंबई व सिरसा (सभी दैहिक दैविक भौतिक समस्याओं का एक ही जगह सटीक निदान व स्थायी समाधान) अध्यक्ष: सातफेरे डॉट कॉम मुंबई व सिरसा (आपके अपनों के दिव्य एवं सुसंस्कारी वैवाहिक जीवन की झटपट शुरूआत हेतु अनूठा संस्थान) नोट: हमारी या हमारे संस्थान 'एस्ट्रो-वर्ल्ड' तथा आपके अपनों के वैवाहिक जीवन सम्बन्धी सभी समस्याओं का एकमात्र हल एवं विश्व के इस सबसे अनूठे मंच 'सातफेरे डॉट कॉम' मुंबई या सिरसा की किसी भी प्रकार की गरिमापूर्ण सेवा जैसे वैज्ञानिकतापूर्ण ज्योतिष-वास्तु मार्गदर्शन, सभी प्रकार के मुहूर्त शोधन, नामकरण संस्कार, विवाह संस्कार या अन्य कोई भी वैदिक पूजा-अनुष्ठान आयोजित करवाने, रत्न अभिमन्त्रण, सभी राशिरत्न-उपरत्न, मणि-माणिक्य, सियारसिंगी, हत्थाजोड़ी, नागकेसर, विविध प्रकार के वास्तु पिरामिडज एवं अन्य कई प्रकार की सौभाग्यवर्धक वस्तुओं की प्राप्ति हेतु हमारे... सम्पर्क सूत्र: 9987815015 / 9991610514 ईमेल आई डी: [email protected] 🌺आपका सप्ताहांत ईशकृपा से परम मंगलमय हो मित्रो! *🚩जयतु जयतु हिन्दुराष्ट्रम🚩* 🇮🇳🇮🇳 *भारत माता की जय* 🚩🚩 ।। 🐚 *शुभम भवतु* 🐚 ।। ※══❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖══※

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