Rajeev Pathak
Rajeev Pathak Dec 25, 2016

श्री सिद्धेश्वर भगवान , ग्वालियर रोड झाँसी के पावन दर्शन ।।

श्री सिद्धेश्वर भगवान , ग्वालियर रोड झाँसी के पावन दर्शन ।।

श्री सिद्धेश्वर भगवान , ग्वालियर रोड झाँसी के पावन दर्शन ।।

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simran Sep 27, 2020

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Babita Sharma Sep 27, 2020

सुख, समृद्धि एवं स्वास्थ्य संजोए शुभ दिवस मंगलमय होए🙏🙏प्रात: नमन जय श्री राधे कृष्ण श्री हरि सर्व जगत का कल्याण करें 🌹🙏🙏 तीन सालों में एक बार आती है पद्मिनी एकादशी, व्रत करने से मिलेगी सुख-समृद्धि तीन सालों में एक बार लगने वाले पुरुषोत्तम मास में पड़ने वाली एकादशी को पद्मिनी एकादशी कहते हैं। पुरुषोत्तम मास भगवान विष्णु की आराधना का माह माना जाता है। तीन साल में एक बार पड़ने वाली इस एकादशी का महत्व और भी बढ़ जाता है। ऐसी मान्यता है कि, पद्मिनी एकादशी का व्रत करने वाले श्रद्धालुओं को सालभर की सभी एकादशी व्रतों के बराबर फल मिल जाता है साथ ही व्रती को विष्णु लोक की प्राप्ति होती है। : पद्मिनी एकादशी या कमला एकादशी की पौराणिक कहानी भगवान कृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को सुनाई थी. युधिष्ठिर ने भगवान कृष्ण से कहा कि हे जनार्दन मुझे मलमास में आने वाली पद्मिनी एकादशी के बारे में विस्तृत से बताएं और उसकी विधि समझाने की कृपा करें। भगवान कृष्ण ने युधिष्ठिर से कहा कि मलमास के शुक्ल पक्ष में जो एकादशी आती है वह पद्मिनी (कमला) एकादशी कहलाती है. साल में वैसे तो प्रत्येक वर्ष 24 एकादशियां होती हैं, लेकिन जब मलमास आता है, तब इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है. मलमास के महीने में दो एकादशियां होती हैं. जो पद्मिनी एकादशी (शुक्ल पक्ष) और परमा एकादशी (कृष्ण पक्ष) के नाम से जानी जाती हैं. रविवार को एकादशी उपाय से मिलेंगे विशेष फल- माना जाता है कि एकादशी यदि रविवार को पड़ जाए तो उसके व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है क्योंकि एकदशी के व्रत के साथ ही इस दिन सूर्य का भी व्रत हो जाता है। पंडितों और ज्योतिषाचार्यों का मानना है भगवान विष्णु और सूर्य देव की पूजा एक साथ करने से बुरा से बुरा समय भी अच्छा हो जाता है। इस व्रत से किस्मत तो आपका साथ देती ही है साथ ही परिस्थितियां भी आपके अनुकूल हो जाती हैं। पद्मिनी एकादशी का व्रत मनुष्‍यों के लिए दुर्लभ है. भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को इस व्रत की कथा बताई थी. हे मुनिवर! पूर्वकाल में त्रेयायुग में हैहय नामक राजा के वंश में कृतवीर्य नाम का राजा महिष्मती पुरी में राज्य करता था. उस राजा की 1,000 परम प्रिय स्त्रियां थीं, परंतु उनमें से किसी को भी पुत्र नहीं था, जो कि उनके राज्यभार को संभाल सके. देव‍ता, पितृ, सिद्ध तथा अनेक चिकि‍त्सकों आदि से राजा ने पुत्र प्राप्ति के लिए काफी प्रयत्न किए, लेकिन सब असफल रहे. तब राजा ने तपस्या करने का निश्चय किया. महाराज के साथ उनकी परम प्रिय रानी, जो इक्ष्वाकु वंश में उत्पन्न हुए राजा हरिश्चंद्र की पद्मिनी नाम वाली कन्या थीं, राजा के साथ वन में जाने को तैयार हो गई. दोनों अपने मंत्री को राज्यभार सौंपकर राजसी वेष त्यागकर गंधमादन पर्वत पर तपस्या करने चले गए. राजा ने उस पर्वत पर 10 हजार वर्ष तक तप किया, परंतु फिर भी पुत्र प्राप्ति नहीं हुई. तब पतिव्रता रानी कमलनयनी पद्मिनी से अनुसूया ने कहा- 12 मास से अधिक महत्वपूर्ण मलमास होता है, जो 32 मास पश्चात आता है. उसमें द्वादशीयुक्त पद्मिनी शुक्ल पक्ष की एकादशी का जागरण समेत व्रत करने से तुम्हारी सारी मनोकामना पूर्ण होगी. इस व्रत के करने से भगवान तुम पर प्रसन्न होकर तुम्हें शीघ्र ही पुत्र देंगे। रानी पद्मिनी ने पुत्र प्राप्ति की इच्छा से एकादशी का व्रत किया. वह एकादशी को निराहार रहकर रात्रि जागरण कर‍ती. इस व्रत से प्रसन्न होकर भगवान विष्‍णु ने उन्हें पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया. इसी के प्रभाव से पद्मिनी के घर कार्तवीर्य उत्पन्न हुए. जो बलवान थे और उनके समान तीनों लोकों में कोई बलवान नहीं था. तीनों लोकों में भगवान के सिवा उनको जीतने का सामर्थ्य किसी में नहीं था. सो हे नारद! जिन मनुष्यों ने मलमास शुक्ल पक्ष एकादशी का व्रत किया है, जो संपूर्ण कथा को पढ़ते या सुनते हैं, वे भी यश के भागी होकर विष्‍णुलोक को प्राप्त होते हैं. पद्मिनी एकादशी व्रत की विधि 1. इस दिन निर्जल उपवास किया जाता है. 2. इस दिन उपवास करने वाले को सुबह जल्दी उठकर नहा-धोकर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए. 3. तत्पश्चात् एक शुद्ध व स्वच्छ चौकी पर प्रभु विष्णु जी की तस्वीर या प्रतिमा को भक्तिभाव से स्थापित करना चाहिए. 4. फिर भगवान विष्णु जी को पीले पुष्प, पीले वस्त्र और नैवेद्य अर्पण करने चाहिए. 5. अब विष्णु जी के समक्ष धूप व दीपक जलाएं. 6. इसके बाद विधिवत पूजा व आरती करें. 7. अब विष्णु जी को पीले रंग की मिठाई का भोग लगाकर विष्णु पुराण और शिव पुराण का जाप करें. 'एकादश्यां निराहार: स्थित्वाहमपरेअहनि, भोक्ष्यामि पुण्डरीकाक्ष शरणं मे भवाच्युत' मन्त्र का उच्चारण करें। हरि ॐ नमो भगवते वासुदेवाय 🙏 जय श्री कृष्ण 🙏

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Kamla Rawat Sep 27, 2020

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simran Sep 27, 2020

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