Rudra sharma
Rudra sharma Mar 27, 2020

Jai mata di 🙏🏼🙏🏼

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Pappu all sharma Apr 10, 2020
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b singh Jun 1, 2020

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Sunita Pawar Jun 1, 2020

🌞 ~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~ 🌞 ⛅ *दिनांक 01 जून 2020* ⛅ *दिन - सोमवार* ⛅ *विक्रम संवत - 2077 (गुजरात - 2076)* ⛅ *शक संवत - 1942* ⛅ *अयन - उत्तरायण* ⛅ *ऋतु - ग्रीष्म* ⛅ *मास - ज्येष्ठ* ⛅ *पक्ष - शुक्ल* ⛅ *तिथि - दशमी शाम 02:57 तक तत्पश्चात एकादशी* ⛅ *नक्षत्र - हस्त 02 जून रात्रि 01:03 तक तत्पश्चात चित्रा* ⛅ *योग - सिद्धि दोपहर 01:18 तक तत्पश्चात व्यतिपात* ⛅ *राहुकाल - सुबह 07:25 से सुबह 09:05 तक* ⛅ *सूर्योदय - 05:57* ⛅ *सूर्यास्त - 19:14* *⛅वाराणसी काशी अनुसार* *⛅सूर्योदय-05:08* *⛅सूर्यास्त-18:43* ⛅ *दिशाशूल - पूर्व दिशा में* ⛅ *व्रत पर्व विवरण - गंगा दशहरा समाप्त* 💥 *विशेष - 🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞 🌷 *एकादशी व्रत के लाभ* 🌷 ➡ *01 जून 2020 सोमवार को दोपहर 02:58 से 02 जून मंगलवार को दोपहर 12:04 तक एकादशी है ।* 💥 *विशेष - 02 जून मंगलवार को एकादशी का व्रत (उपवास) रखें ।* 🙏🏻 *एकादशी व्रत के पुण्य के समान और कोई पुण्य नहीं है ।* 🙏🏻 *जो पुण्य सूर्यग्रहण में दान से होता है, उससे कई गुना अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है ।* 🙏🏻 *जो पुण्य गौ-दान सुवर्ण-दान, अश्वमेघ यज्ञ से होता है, उससे अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है ।* 🙏🏻 *एकादशी करनेवालों के पितर नीच योनि से मुक्त होते हैं और अपने परिवारवालों पर प्रसन्नता बरसाते हैं ।इसलिए यह व्रत करने वालों के घर में सुख-शांति बनी रहती है ।* 🙏🏻 *धन-धान्य, पुत्रादि की वृद्धि होती है ।* 🙏🏻 *कीर्ति बढ़ती है, श्रद्धा-भक्ति बढ़ती है, जिससे जीवन रसमय बनता है ।* 🙏🏻 *परमात्मा की प्रसन्नता प्राप्त होती है ।पूर्वकाल में राजा नहुष, अंबरीष, राजा गाधी आदि जिन्होंने भी एकादशी का व्रत किया, उन्हें इस पृथ्वी का समस्त ऐश्वर्य प्राप्त हुआ ।भगवान शिवजी ने नारद से कहा है : एकादशी का व्रत करने से मनुष्य के सात जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं, इसमे कोई संदेह नहीं है । एकादशी के दिन किये हुए व्रत, गौ-दान आदि का अनंत गुना पुण्य होता है ।* 🙏🏻 *प्रेरणामूर्ति भारती श्रीजी* 🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞 🌷 *एकादशी के दिन करने योग्य* 🌷 🙏🏻 *एकादशी को दिया जला के विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें .......विष्णु सहस्त्र नाम नहीं हो तो १० माला गुरुमंत्र का जप कर लें l अगर घर में झगडे होते हों, तो झगड़े शांत हों जायें ऐसा संकल्प करके विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें तो घर के झगड़े भी शांत होंगे l* 🙏🏻 *Sureshanandji* 🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞 🌷 *एकादशी के दिन ये सावधानी रहे* 🌷 🙏🏻 *महीने में १५-१५ दिन में एकादशी आती है एकादशी का व्रत पाप और रोगों को स्वाहा कर देता है लेकिन वृद्ध, बालक और बीमार व्यक्ति एकादशी न रख सके तभी भी उनको चावल का तो त्याग करना चाहिए एकादशी के जो दिन चावल खाता है... तो धार्मिक ग्रन्थ से एक- एक चावल एक- एक कीड़ा खाने का पाप लगता है...ऐसा डोंगरे जी महाराज के भागवत में डोंगरे जी महाराज ने कहा* 🙏🏻 *- पूज्य श्री* 🌞 *~ हिन्दू पंचाग ~* 🌞 🌷 *व्यतिपात योग* 🌷 🙏🏻 *व्यतिपात योग की ऐसी महिमा है कि उस समय जप पाठ प्राणायम, माला से जप या मानसिक जप करने से भगवान की और विशेष कर भगवान सूर्यनारायण की प्रसन्नता प्राप्त होती है जप करने वालों को, व्यतिपात योग में जो कुछ भी किया जाता है उसका १ लाख गुना फल मिलता है।* 🙏🏻 *वाराह पुराण में ये बात आती है व्यतिपात योग की।* 🙏🏻 *व्यतिपात योग माने क्या कि देवताओं के गुरु बृहस्पति की धर्मपत्नी तारा पर चन्द्र देव की गलत नजर थी जिसके कारण सूर्य देव अप्रसन्न हुऐ नाराज हुऐ, उन्होनें चन्द्रदेव को समझाया पर चन्द्रदेव ने उनकी बात को अनसुना कर दिया तो सूर्य देव को दुःख हुआ कि मैने इनको सही बात बताई फिर भी ध्यान नही दिया और सूर्यदेव को अपने गुरुदेव की याद आई कि कैसा गुरुदेव के लिये आदर प्रेम श्रद्धा होना चाहिये पर इसको इतना नही थोडा भूल रहा है ये, सूर्यदेव को गुरुदेव की याद आई और आँखों से आँसु बहे वो समय व्यतिपात योग कहलाता है। और उस समय किया हुआ जप, सुमिरन, पाठ, प्रायाणाम, गुरुदर्शन की खूब महिमा बताई है वाराह पुराण में।* 💥 *विशेष ~ व्यतिपात योग - 01 जून 2020 सोमवार को दोपहर 01:19 से 02 जून सुबह 09:53 तक व्यतीपात योग है।* 🙏🏻 *कथा स्रोत - (स्वामी सुरेशानन्द जी के सत्संग से)* 🌞 *~ हिन्दू पंचाग ~*j 🌞 🙏🍀🌻🌹🌸💐🍁🌷🌺🙏

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Swami Lokeshanand Jun 1, 2020

दो भाई थे। पर दोनों के स्वभाव में जमीन आसमान का अंतर था। एक संत सेवी था, दूसरा वेश्यागामी। एक रात वह संत सेवी भाई, संत की सेवा करके घर आ रहा था। रास्ते में उसके पैर में एक खूंटी गड़ गई। बड़ा गहरा जख्म हो गया और बहुत खून बह गया। वह बड़ी मुश्किल से घर पहुँचा। उसी रात वेश्यालय से लौट रहे, वेश्यागामी भाई को, रास्ते में लाखों रुपए का हीरों का हार पड़ा मिला। रात में वेश्यागामी भाई कहने लगा- मैं तो पहले से ही कहता था कि कुछ नहीं रखा इन संतों में। अब देख लिया? तुम यहाँ दर्द से कराह रहे हो, मैं ऐश कर रहा हूँ। दोनों ने विचार किया कि किसी जानकार के पास चलना चाहिए। और सुबह होते ही वे एक ज्योतिषी के पास गए। अपना परिचय दिए बिना ही दोनों की जन्मपत्रियाँ ज्योतिषी के आगे रख दी। ज्योतिषी ने पहले संतसेवी की पत्री उठाई। उसे पढ़कर पत्री एक तरफ रख दी, और बोले- ये पत्री मेरे पास क्यों ले आए हो? यह तो कल रात मर गया होगा। और वेश्यागामी की पत्री देखी तो बोले- यह किस देश के राजा की पत्री है? मेरा सौभाग्य है जो ऐसी पत्री मेरे पास आई। लोकेशानन्द कहता है कि यही सत्कर्म और दुष्कर्म का फल है। वर्तमान का सत्कर्म, पूर्वजन्म के पाप को काट कर, सूली का सूल बना देता है। और वर्तमान का दुष्कर्म, पूर्वजन्म के पुण्य को नष्ट कर, सम्राट को भी सामान्य मनुष्य बना देता है। हमें समझना होगा कि अपनी वर्तमान अवस्था के जिम्मेदार हम स्वयं ही हैं। आपकी परिस्थिति आपके कर्म का ही फल है। अपनी भूल दूसरे पर मत लादो, न तो ईश्वर पर, न ही भाग्य पर। आपका ही पाप चक्रवृद्धि ब्याज सहित आप पर आ गिरता है। तब कोई ताकत उसे रोक नहीं पाती। वायु तो निरंतर बहती है, जिस जहाज का पाल खुला हो, वह वायु का उपयोग कर आगे बढ़ जाए। पर जिसका पाल खुला नहीं है, वह वायु को दोष क्यों दे? योंही ईश्वर की कृपा तो निरंतर बरसती है, जिसके पास सत्कर्म हो, वह कृपा का उपयोग कर आगे बढ़ जाए। पर जिसके पास सत्कर्म नहीं है, वह ईश्वर को दोष क्यों दे? सदा भगवान और संत की सेवा करते रहो। यही एकमात्र सत्कर्म है।

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Swami Lokeshanand Jun 1, 2020

अब भरतजी ने माँ सीताजी के चरणों में प्रणाम किया, जैसे चरण वैसा माथा। आज भरतजी अयोध्या को अस्वीकार करके आए हैं, कल सीताजी लंका को ठोकर मार देंगी। कंठ अवरुद्ध होने से, सीताजी भरतजी को आशीर्वाद वाणी से तो नहीं दे पाईं, पर आँखों के पानी से दे दिया। आँसू भरतजी की पीठ पर पड़े। भरतजी ने सिर उठा कर देखा, सजल नेत्रों से सजल नेत्रों में करुणा देखी, तो भरतजी निश्चिंत हो गए। देखो, माँ का स्थान तो पिता से भी बड़ा है। पिता से मिलकर इतने निश्चिंत नहीं हुए थे जितने माँ से मिलकर हो गए। स्वामी राजेश्वरानंदजी का भाव है, कि माँ कहने भर से ही मुंह खुल जाता है, बाप कहें तो बंद होता है, तो बालक माँ के सामने जितना खुलकर बात कह पाता है, पिता के सामने नहीं ही कह पाता। हमारे यहाँ कितनी चर्चा चलती है, हम कहते ही हैं- "त्वमेव माता च पिता त्वमेव" "राम हैं मात पिता गुरु बंधु" "तुम्हीं हो माता पिता तुम्हीं हो" माँ सदा पहले है। सत्य भी है, अन्त:करण में भक्ति हो, तो भगवान भगवान हैं, भीतर भक्ति ही न हो तो सामने खड़ा परमात्मा भी परमात्मा नहीं। सूर्य तो सबके लिए एक समान है, पर लाख निकला रहे, उल्लू जिसके भीतर प्रकाश नहीं, उसके लिए तो अंधकार की ही सत्ता है। तो भक्ति पहले, भगवान बाद में। इसीलिए सबमें माँ पहले कहा है, पिता बाद में। तभी तो जब भक्तों की रक्षा की बात आती है, तब भगवान स्वयं भी माँ ही बनकर रक्षा करते हैं, पिता बनकर नहीं। "करहूँ सदा तिन्ह के रखवारी। जिमि बालक राखहि महतारी॥" गजब बात है, भारत ही एकमात्र ऐसा देश है, जहाँ "भारत माता" कहा जाता है। और सब जगह तो पितृभूमि कहते हैं, हमारे यहाँ ही "मातृभूमि" है। सीताजी हमारी माँ हैं, सीताजी वो शक्ति हैं जो इसी धरती से ही प्रकट होती हैं, और रामराज्य की स्थापना का लक्ष्य पूरा कर, पुनः इसी धरती में ही समा जाती हैं। लोकेशानन्द कहता है, ऐसी पावन धरती पर जन्म लेकर और सीताजी जैसी माँ पाकर हम धन्य हो गए।

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Sunita Pawar May 31, 2020

*गोमती चक्र प्रयोग विशेष 〰️〰️🌸〰️🌸〰️〰️ क्या है गोमती चक्र..? 〰️〰️🌸🌸〰️〰️ गोमती चक्र कम कीमत वाला एक ऐसा पत्थर है जो गोमती नदी मे मिलता है। दक्षिण भारत में इसे गोमथी चक्र तथा संस्कृत में धेनुपदी कहा जाता है। पौराणिक काल में यह यज्ञवेदी के चारों ओर लगाया जाता था। राज तिलक के समय इसे सिंहासन के ऊपर छत्र में लगाया जाता था। गोमती चक्र की बनावट अनूठी होती है। गौर से देखने पर इसमें हिन्दी का सात अंक लिखा दिखाई देता है जो राहु का अंक होता है। जल में पाये जाने के कारण यह चंद्र गुणों से भी परिपूर्ण होता है तथा उसके ऊपर सात लिखा होने के कारण राहु संबंधी समस्या दूर करता है। कुंडली में राहु-चंद्र की युति हो तो यह चमत्कारी प्रभाव डालता है। इसके चमत्कारी गुणों से प्राचीन भारत के सभी आम लोग परिचित थे। विभिन्न तांत्रिक कार्यो तथा असाध्य रोगों में इसका प्रयोग होता है। असाध्य रोगों को दुर करने तथा मानसिक शान्ति प्राप्त करने के लिये लगभग 11 गोमती चक्र लेकर रात को पानी में डाल देना चाहिऐ। सुबह उस पानी को पी जाना चाहिऐ । इससे पेट संबंध के विभिन्न रोग दूर होते है। धन लाभ के लिऐ 21 गोमती चक्र अपने पुजा स्थान मे रखना चाहिऐ उनके सामने ॐ श्री नमः का जाप करना चाहिऐ। इससे आप जो भी कार्य करेंगे उसमे आपका मन लगेगा और सफलता प्राप्त होगी। किसी भी कार्य को उत्साह के साथ करने की प्रेरणा मिलेगी। गोमती चक्रों को यदि चांदी अथवा किसी अन्य धातु की डिब्बी में सिंदुर तथा अक्षत डालकर रखें तो ये शीघ्र फलदायक होते है। होली, दीवाली, तथा नवरात्रों आदि पर गोमती चक्रों की विशेष पुजा की जाति है। अन्य विभिन्न मुहुर्तों के अवसर पर भी इनकी पुजा लाभदायक मानी जाती है। सर्वसिद्धि योग तथा रविपुष्य योग आदि के समय पुजा करने पर ये बहुत फलदायक है। कब करें गोमती चक्र की पूजा 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ होली, दिवाली और नव रात्रों आदिपर गोमती चक्र की विशेष पूजा होती है। सर्वसिद्धि योग, अमृत योग और रविपुष्य योग आदि विभिन्न मुहूर्तों पर गोमती चक्र की पूजा बहुत फलदायक होती है। धन लाभ के लिए 11 या 21 गोमती चक्र अपने पूजा स्थान में लाल आसान देकर रखें तथा उनके सामने ॐ श्रींनमः का काम से कम 51 माला जाप करें। जाप यदि रात्रि काल मे किया जाए तो अधिक उत्तम है। ऊपरी बाधाओं से मुक्ति के लिये गोमती चक्र प्रयोग 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ गोमती चक्र कम कीमत वाला एक ऐसा पत्थर है जो गोमती नदी में मिलता है। विभिन्न तांत्रिक कार्यों तथा असाध्य रोगों में इसका प्रयोग होता है। इसका तांत्रिक उपयोग बहुत ही सरल होता है। किसी भी प्रकार की समस्या के निदान के लिए यह बहुत ही कारगर उपाय है। 1👉 यदि घर में भूत-प्रेतों का उपद्रव हो तो दो गोमती चक्र लेकर घर के मुखिया के ऊपर घुमाकर आग में डाल दें तो घर से भूत-प्रेत का उपद्रव समाप्त हो जाता है। 2👉 यदि घर में बीमारी हो या किसी का रोग शांत नहीं हो रहा हो तो एक गोमती चक्र लेकर उसे चांदी में पिरोकर रोगी के पलंग के पाये पर बांध दें। उसी दिन से रोगी को आराम मिलने लगता है। 3👉 प्रमोशन नहीं हो रहा हो तो एक गोमती चक्र लेकर शिव मंदिर में शिवलिंग पर चढ़ा दें और सच्चे ह्रदय से प्रार्थना करें। निश्चय ही प्रमोशन के रास्ते खुल जाएंगे। 4👉 व्यापार वृद्धि के लिए दो गोमती चक्र लेकर उसे बांधकर ऊपर चौखट पर लटका दें और ग्राहक उसके नीचे से निकले तो निश्चय ही व्यापार में वृद्धि होती है। 5👉 यदि इस गोमती चक्र को लाल सिंदूर के डिब्बी में घर में रखें तो घर में सुख-शांति बनी रहती है। प्रमोशन के लिए टोटका 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ प्रमोशन के लिए प्रत्येक सोमवार को शिवजी पर 11 गोमती चक्र कामना बोलते हुए चढाये। व्यापार बढ़ाने के लिए कुछ टोटके 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ गोमती चक्र लक्ष्मी का स्वरुप है। 11 अभिमंत्रित गोमती चक्र एक लाल पोटली में बाँध कर दूकान में रखने से व्यापार अच्छा चलेगा। बीमारी में गोमती चक्र 〰️〰️〰️〰️〰️〰️ यदि बीमार व्यक्ति ठीक नही हो पा रहा हो अथवा दवाइया नही लग रही हो तो उसके सिरहाने पाँच गोमती चक्र “ॐ जूं सः” मंत्र की 41 माला से अभिमंत्रित करके रखे , रोगी को शीघ्र ही स्वाथ्य लाभ होगा। बीमारी के लिये अभिमंत्रित करने की विधि 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ साफ पानी से गोमती चक्र को धो कर साफ़ कर लें इसके बाद पूजा स्थल पर विधिवत स्थापित करें। धूप-दीप नेवेद्य अर्पित करें तथा निम्न मंत्र की माला का 108 बार जाप करें – ओम् वाॅ आरोग्यानिकारी रोगानशेषानंम। जाप के बाद गोमती चक्र अभिमंत्रित हो जाता है, इसे किसी सुरक्षित स्थान पर रख दें तथा नित्य धूप-दीप दिखाते रहें। स्वास्थ्य संबंधी समस्या आने पर एक ग्लास गंगाजल में गोमती चक्र डाल दें तथा उपर्युक्त मंत्र का जाप 21 बार करते हुए रोगी को पिला दें। अभिमंत्रण का प्रभाव तीन वर्ष तक रहता है, इसलिए एक वर्ष बाद दुबारा अभिमंत्रित करें। गोमती चक्र के अन्य अनुभूत प्रयोग 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ 1👉 यदि इस गोमती चक्र को लाल सिन्दूर की डिब्बी में घर में रखे, तो घर में सुख-शान्ति बनी रहती है । 2👉 यदि घर में भूत-प्रेतों का उपद्रव हो, तो दो गोमती चक्र लेकर घर के मुखिया के ऊपर से घुमाकर आग में डाल दे, तो घर से भूत-प्रेत का उपद्रव समाप्त हो जाता है । 3👉 यदि घर में बिमारी हो या किसी का रोग शान्त नहीं हो रहा हो तो एक गोमती चक्र लेकर उसे चाँदी में पिरोकर रोगी के पलंग के पाये पर बाँध दें, तो उसी दिन से रोगी का रोग समाप्त होने लगता है । 4👉 व्यापार वृद्धि के लिए दो गोमती चक्र लेकर उसे बाँधकर ऊपर चौखट पर लटका दें, और ग्राहक उसके नीचे से निकले, तो निश्चय ही व्यापार में वृद्धि होती है । 5👉 प्रमोशन नहीं हो रहा हो, तो एक गोमती चक्र लेकर शिव मन्दिर में शिवलिंग पर चढ़ा दें, और सच्चे मन से प्रार्थना करें । निश्चय ही प्रमोशन के रास्ते खुल जायेंगे। 6👉 पति-पत्नी में मतभेद हो तो तीन गोमती चक्र लेकर घर के दक्षिण में “हलूं बलजाद” कहकर फेंक दें, मतभेद समाप्त हो जायेगा । 7👉 पुत्र प्राप्ति के लिए पाँच गोमती चक्र लेकर किसी नदी या तालाब में “हिलि हिलि मिलि मिलि चिलि चिलि हुं ” पाँच बार बोलकर विसर्जित करें। 8👉 यदि बार-बार गर्भ नष्ट हो रहा हो, तो दो गोमती चक्र लाल कपड़े में बाँधकर कमर में बाँध दें। 9👉 यदि शत्रु अधिक हो तथा परेशान कर रहे हो, तो तीन गोमती चक्र लेकर उन पर शत्रु का नाम लिखकर जमीन में गाड़ दें। 10👉 कोर्ट-कचहरी में सफलता पाने के लिये, कचहरी जाते समय घर के बाहर गोमती चक्र रखकर उस पर अपना दाहिना पैर रखकर जावें । 12👉 भाग्योदय के लिए तीन गोमती चक्र का चूर्ण बनाकर घर के बाहर छिड़क दें । 13👉 राज्य-सम्मान-प्राप्ति के लिये दो गोमती चक्र किसी ब्राह्मण को दान में दें । 14👉 तांत्रिक प्रभाव की निवृत्ति के लिये बुधवार को चार गोमती चक्र अपने सिर के ऊपर से उबार कर चारों दिशाओं में फेंक दें । 15👉 चाँदी में जड़वाकर बच्चे के गले में पहना देने से बच्चे को नजर नहीं लगती तथा बच्चा स्वस्थ बना रहता है । 16👉 दीपावली के दिन पाँच गोमती चक्र पूजा-घर में स्थापित कर नित्य उनका पूजन करने से निरन्तर उन्नति होती रहती है । 17👉 रोग-शमन तथा स्वास्थ्य-प्राप्ति हेतु सात गोमती चक्र अपने ऊपर से उतार कर किसी ब्राह्मण या फकीर को दें। 18👉 11 गोमती चक्रों को लाल पोटली में बाँधकर तिजोरी में अथवा किसी सुरक्षित स्थान पर सख दें, तो व्यापार उन्नति करता जायेगा। 19👉 किसी भी महीने के पहले सोमवार को 21 गोमती चक्र लाल या पीले रेशमी कपड़े में बांधकर रूपया-पैसा रखने वाले स्थान पर रख दें। हल्दी से उस पर तिलक करें। इसके बाद मन ही मन देवी लक्ष्मी से अपने घर में वास करने हेतु याचना करते हुए कपड़े में बंधे गोमती चक्र लेकर पूरे घर में घूमें इसके बाद घर से बाहर निकलकर किसी मंदिर में रख दें। 20👉यदि पैसा हाथ में नहीं ठहरता हो तो शुक्रवार को 21 गोमती चक्र लेकर लाल कपड़े में बांध कर पूजा स्थल पर रखें तथा पूजा करें। अगली सुबह उसमें से चार गोमती चक्र लेकर घर के चारो कोनो में गाड़ दें, 11 पूजा स्थल में रखें तथा बाकि 10 निकट के मंदिर में रख दें। 21 👉यदि अत्यधिक परिश्रम के बाद भी आर्थिक स्थिति में सुधार न हो रहा हो तो शुक्ल पक्ष के पहले गुरूवार को घर के पूजा स्थल में लक्ष्मी-नारायण के चित्र या मूर्ति के आगे 21 गोेमती चक्र पीले या लाल कपड़े में बांध कर रख दें । व लक्ष्मी-नारायण जी से अपने ऊपर कृपा करने की याचना करें तथा ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र की तीन माला का रोजाना जाप करें। लगातार सवा महीने तक जाप करने के बाद एक वृद्ध तथा एक कन्या को भोजन करवाएं और दक्षिणा देकर विदा करें। 22👉 आमदनी कम हो गई हो तो 8 कौड़ी, 8 गोमती चक्र, 8 लाल गुुुंजा दक्षिणावर्ती शंख में डालकर अपने पूजा स्थल पर स्थापित करें। विधिवत पूजन के बाद ओम श्रीं नमः मंत्र की 51 माला का जाप करें तथा पूजा के बाद लाल कपड़े में बांध कर गल्ला अथवा धन रखने वाले स्थान पर रख दें। आमदनी के नए रस्ते बनेंगे व पुराने कारोबार में वृद्धि होने लगेगी। 👉 शत्रुओं से परेशान हैं तो दीपावली के दिन अर्ध रात्रि में पूजा स्थल पर 6 गोमती चक्रों पर अपने शत्रु का नाम बोलते हुए सिंदुर लगाएं तथा किसी सुनसान जगह पर ले जाकर गाड़ दें। अथवा 👉 होलिका दहन के समय सिर्फ 1 गोमती चक्र चक्र हाथ में लेकर अपने दुश्मन का नाम बोलकर जलती हुई होलिका में डाल दें। 👉 घर गृह कलह की चपेट में हो तो किसी डिब्बी में पहले सिंदूर भर दें तथा उसके ऊपर 3 गोमती चक्र रखकर ढक्कन बंद कर दें। अब इसे कहीं छुपाकर रख दें। गोमती चक्र को प्रयोग ने लेने से पहले अभिमंत्रित करना अत्यंत आवश्यक है इन्हें अभीमंत्रित करने में संबंधित कामना का जप ही एकमात्र विकल्प है। इसलिये इन्हें अभिमंत्रित करने के समय शुद्धता एकांत का विशेष ध्यान रखें। जप काल मे मन को एकाग्र रखें। संकलन पं देवशर्मा 〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️*

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*🚩🙏गंगा दशहरा विशेष* *कोरोना वायरस और लॉकडाउन के बीच इस बार 01 जून को गंगा दशहरा मनाया जा रहा है।* सनातन वैदिक धर्म में गंगा दशहरा का विशेष महत्व है। गंगा दशहरा का पर्व हर साल जेष्ठ शुक्ल दशमी को मनाया जाता है जोकि इस बार 1 जून 2020, सोमवार को मनाया जाएगा! आइए जानते हैं इसके बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातें-—– *गंगा दशहरा का महत्त्व* कहा जाता है कि जिस दिन माँ गंगा पृथ्वी पर अवतरित हुई उस दिन एक बहुत ही अनूठा और भाग्यशाली मुहूर्त था। उस दिन ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथी और वार बुधवार था, हस्त नक्षत्र, व्यतिपात योग, गर योग, आनंद योग, कन्या राशि में चंद्रमा और वृषभ में सूर्य। इस प्रकार दस शुभ योग उस दिन बन रहे थे। माना जाता है कि इन सभी दस शुभ योगों के प्रभाव से गंगा दशहरा के पर्व में जो भी व्यक्ति गंगा में स्नान करता है उसके अज्ञान या आवेश मे आकर किए हुए ये दस प्रकार के पाप नष्ट हो जाते हैं इसके लिए पश्चाताप भी जरूरी है। 1.बिना आज्ञा या जबरन किसी की वस्तु लेना 2.हिंसा 3.पराई स्त्री के साथ समागम 4.कटुवचन का प्रयोग 5.असत्य वचन बोलना 6.किसी की शिकायत करना 7.असंबद्ध प्रलाप 8.दूसरें की संपत्ति हड़पना या हड़पने की इच्छा 9.दूसरें को हानि पहुँचाना या ऐसे इच्छा रखना 10.व्यर्थ बातो पर परिचर्चा कहने का तात्पर्य है जिस किसी ने भी उपरोक्त पापकर्म किये हैं और जिसे अपने किये का पश्चाताप है और इससे मुक्ति पाना चाहता है तो उसे सच्चे मन से मां गंगा में डूबकी अवश्य लगानी चाहिये। यदि आप मां गंगा तक नहीं जा सकते हैं तो गंगा जल में स्वच्छ जल मिलाकर मां गंगा का स्मरण कर उससे भी स्नान कर सकते हैं। *कैसे करें गंगा की पूजा* इस दिन यदि संभव हो तो गंगा मैया के दर्शन कर उनके पवित्र जल में स्नान करें अन्यथा स्वच्छ जल में ही मां गंगा को स्मरण करते हुए स्नान करें यदि गंगाजल हो तो उसमें जल मिला लें। स्नानादि के पश्चात मां गंगा की प्रतिमा की पूजा करें। इनके साथ राजा भागीरथ और हिमालय देव की भी पूजा-अर्चना करनी चाहिए। गंगा पूजा के समय प्रभु शिव की आराधना विशेष रूप से करनी चाहिए क्योंकि भगवान शिव ने ही गंगा जी के वेग को अपनी जटाओं पर धारण किया। पुराणों के अनुसार राजा भागीरथ ने माँ गंगा को स्वर्ग से पृथ्वी पर लाने के लिए बहुत तपस्या की थी। भागीरथ के ताप से प्रसन्न होकर माँ गंगा ने भागीरथ की प्रार्थना स्वीकार की किन्तु गंगा मैया ने भागीरथ से कहा – “पृथ्वी पर अवतरण के समय मेरे वेग को रोकने वाला कोई चाहिए अन्यथा मैं धरातल को फाड़ कर रसातल में चली जाऊँगी और ऐसे में पृथ्वीवासी अपने पाप कैसे धो पाएंगे। राजा भागीरथ ने माँ गंगा की बात सुनकर प्रभु शिव को प्रसन्न करने के लिए तपस्या की। भागीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर प्रभु शिव ने गंगा माँ को अपने जटाओं में धारण किया। पृथ्वी पर अवतरण से पूर्व माँ गंगा ब्रहमदेव के कमंडल में विराजमान थी अतः गंगा मैया पृथ्वी पर स्वर्ग की पवित्रता साथ लेकर आई थी। इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं को माँ गंगा की पूजा-अर्चना के साथ मंदिर में दान भी करना चाहिए। सत्तू , मटका और हाथ का पंखा दान करने से दुगुना फल की प्राप्ति होती है। *गंगा मैया के मंत्र* ‘नमो भगवते दशपापहराये गंगाये नारायण्ये रेवत्ये शिवाये दक्षाये अमृताये विश्वरुपिण्ये नंदिन्ये ते नमो नम:’ भावार्थ हे भगवती, दसपाप हरने वाली गंगा, नारायणी, रेवती, शिव, दक्षा, अमृता, विश्वरूपिणी, नंदनी को नमन।। ‘ॐ नमो भगवति हिलि हिलि मिलि मिलि गंगे माँ पावय पावय स्वाहा’ भावार्थ हे भगवती गंगे! मुझे बार-बार मिल और पवित्र कर।। गंगा दशहरा के पावन पर्व की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। 🚩🙏 💐💐💐💐💐👏

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white beauty May 31, 2020

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