🌸 *_वर्ष 2021 में गृह प्रवेश के शुभ मुहूर्त_* 🌎 *_1.गृह प्रवेश के माह : माघ, फाल्गुन, वैशाख, ज्येष्ठ उत्तम माह है। आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद और आश्विन के साथ ही पौष माह में गृह प्रदेश नहीं करना चाहिए।_* 🛕 *_2.गृह प्रवेश की तिथि : अमावस्या, पूर्णिमा, पंचक, कृष्‍ण पक्ष और ग्रहण आदि को छोड़कर शुक्ल पक्ष की द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी और त्रयोदशी तिथि को गृह प्रवेश करना शुभ होता है।_* 🏘️ *_3.गृह प्रवेश का वार : मंगलवार और कुछ विशेष परिस्थिति में रविवार एवं शनिवार को छोड़कर सभी वारों को गृह प्रवेश किया जा सकता है।_* 🔯 *_4.स्थिर लग्न : गृह प्रवेश हमेशा स्थिर लग्न में करने से शुभ होता है। किसी पंडित से लग्न पूछकर यह कार्य करें। वैसे प्रवेश के समय आपके जन्म नक्षत्र से सूर्य की स्थिति पांचवें में अशुभ, आठवें में शुभ, नौवें में अशुभ और छठवे में शुभ होती है।_* ✡️ *_6.शुभ मुहूर्त : शुभ मुहूर्त में रुद्र, श्‍वेत, मित्र, सारभट, सावित्र, वैराज, विश्वावसु, अभिजित, रोहिण, बल, विजय, र्नेत, वरुण सौम्य और भग ये 15 मुहूर्त है। रवि के दिन 14वां, सोमवार के दिन 12वां, मंगलवार के दिन 10वां, बुधवार के दिन 8वां, गुरु के दिन 6टा, शुक्रवार के दिन 4था और शनिवार के दिन दूसरा मुहूर्त कुलिक शुभ कार्यों में वर्जित हैं।_* *_7.वर्ष 2021 के मुहूर्त : जनवरी में 5, 6, 8, 14, 17, 26 और 30 तारीख को शुभ तिथियां हैं। फरवरी में 12, 14, 16, 20, 23 और 28 तारीख को शुभ तिथियां हैं। मार्च में 8, 9, 14, 20, 21, 24 और 26 तारीख को शुभ तिथियां हैं। अप्रैल में 1, 11 और 20 तरीख को शुभ तिथियां हैं। मई में 6, 8, 10, 12, 16, 18, 20, 21 और 30 तारीख को शुभ तिथियां हैं। जून में 2, 3, 10, 12, 15, 16, 21, 22, 25 और 27 तारीख को शुभ तिथियां हैं। जुलाई को 3, 4, 13, 25, 20, 22, 25, 26 और 31 को शुभ तिथियां हैं। अगस्त में 6, 7, 8, 9, 12, 16, 20, 27 और 28 तारीख को शुभ तिथियां हैं।_* *_सितंबर में 2, 4, 8, 13, 14, 17, 19, 20, 22, 25, 26 और 29 तारीख को शुभ तिथियां हैं। अक्टूबर में 1, 9, 10, 12, 14, 15, 18, 21, 23, 25 और 26 को शुभ तिथियां। नवंबर को 2, 8, 10, 11, 12, 20, 22, 23, 24 और 26 तारीख को शुभ तिथियां हैं। दिसंबर में 4, 5, 10, 13, 15, 18, 19, 22, 25 और 31 तारीख को शुभ तिथियां हैं। परंतु गृहप्रवेश के लिए मुहूर्त और योग भी देखेंगे तो अच्छा होगा। वैसे 9 जनवरी, 13 मई, 14 मई, 21 मई, 22 मई, 24 मई, 26 मई, 4 जून, 5 जून, 10 जून, 11 जून, 19 जून, 26 जून, 1 जुलाई, 7 जुलाई, 5 नवंबर, 6 नवंबर, 10 नवंबर, 20 नवंबर, 29 नवंबर, 13 दिसंबर और 31 दिसंबर को गृह प्रवेश के खास दिन हैं। इसमें चौघड़ियां, नक्षत्र या मुहूर्त जरूर देख लें।_* ➡️ *_मुहूर्तों के नाम : एक मुहूर्त 2 घड़ी अर्थात 48 मिनट के बराबर होता है। 24 घंटे में 1440 मिनट होते हैं:- मुहूर्त सुबह 6 बजे से शुरू होता है:- रुद्र, आहि, मित्र, पितॄ, वसु, वाराह, विश्वेदेवा, विधि, सतमुखी, पुरुहूत, वाहिनी, नक्तनकरा, वरुण, अर्यमा, भग, गिरीश, अजपाद, अहिर, बुध्न्य, पुष्य, अश्विनी, यम, अग्नि, विधातॄ, क्ण्ड, अदिति जीव/अमृत, विष्णु, युमिगद्युति, ब्रह्म और समुद्रम।_* 🔯 *_शुभ मुहूर्त क्या है?_* *_मुहूर्त दो तरह के होते हैं शुभ मुहूर्त और अशुभ मुहूर्त। शुभ को ग्राह्य समय और अशुभ को अग्राह्‍य समय कहते हैं। शुभ मुहूर्त में रुद्र, श्‍वेत, मित्र, सारभट, सावित्र, वैराज, विश्वावसु, अभिजित, रोहिण, बल, विजय, र्नेत, वरुण सौम्य और भग ये 15 मुहूर्त है। ...रवि के दिन 14वां, सोमवा रके दिन 12वां, मंगलवार के दिन 10वां, बुधवार के दिन 8वां, गुरु के दिन 6टा, शुक्रवार के दिन 4था और शनिवार के दिन दूसरा मुहूर्त कुलिक शुभ कार्यों में वर्जित हैं।_* ❄️ *_योग क्या है?_* *_सूर्य-चन्द्र की विशेष दूरियों की स्थितियों को योग कहते हैं। योग 27 प्रकार के होते हैं। दूरियों के आधार पर बनने वाले 27 योगों के नाम क्रमश: इस प्रकार हैं- 1.विष्कुम्भ, 2.प्रीति, 3.आयुष्मान, 4.सौभाग्य, 5.शोभन, 6.अतिगण्ड, 7.सुकर्मा, 8.धृति, 9.शूल, 10.गण्ड, 11.वृद्धि, 12.ध्रुव, 13.व्याघात, 14.हर्षण, 15.वज्र, 16.सिद्धि, 17.व्यतिपात, 18.वरीयान, 19.परिध, 20.शिव, 21.सिद्ध, 22.साध्य, 23.शुभ, 24.शुक्ल, 25.ब्रह्म, 26.इन्द्र और 27.वैधृति।_* 💫 *&27 योगों में से कुल 9 योगों को अशुभ माना जाता है तथा सभी प्रकार के शुभ कामों में इनसे बचने की सलाह दी गई है। ये 9 अशुभ योग हैं- विष्कुम्भ, अतिगण्ड, शूल, गण्ड, व्याघात, वज्र, व्यतिपात, परिध और वैधृति। इन्हें छोड़कर अन्य किसी भी योग में कोई भी कार्य मुहूर्त देखकर किया जा सकता है।_* 🧘🏻‍♀️ *_गुरु-पुष्य योग : गुरुवार और पुष्य नक्षत्र के संयोग से निर्मित होने के कारण इस योग को गुरु-पुष्य योग के नाम से जाना जाता है। यह योग गृह प्रवेश, गृह शांति, शिक्षा सम्बन्धी मामलों के लिए अत्यंत श्रेष्ठ माना जाता है। यह योग अन्य शुभ कार्यों के लिए भी शुभ मुहूर्त के रूप में जाना जाता है।_* ✍🏼 *_विशेष मुहूर्त योग : सर्वार्थसिद्धि, अमृतसिद्धि, गुरुपुष्यामृत और रविपुष्यामृत योग। यदि सोमवार के दिन रोहिणी, मृगशिरा, पुष्य, अनुराधा तथा श्रवण नक्षत्र हो तो सर्वार्थसिद्धि योग का निर्माण होता है। शुभ मुहूर्तों में सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त माना जाता है- गुरु-पुष्य योग। यदि गुरुवार को चन्द्रमा पुष्य नक्षत्र में हो तो इससे पूर्ण सिद्धिदायक योग बन जाता है। जब चतुर्दशी सोमवार को और पूर्णिमा या अमावस्या मंगलवार को हो तो सिद्धिदायक मुहूर्त होता है।

🌸 *_वर्ष 2021 में गृह प्रवेश के शुभ मुहूर्त_*

🌎 *_1.गृह प्रवेश के माह : माघ, फाल्गुन, वैशाख, ज्येष्ठ उत्तम माह है। आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद और आश्विन के साथ ही पौष माह में गृह प्रदेश नहीं करना चाहिए।_*
 
🛕 *_2.गृह प्रवेश की तिथि : अमावस्या, पूर्णिमा, पंचक, कृष्‍ण पक्ष और ग्रहण आदि को छोड़कर शुक्ल पक्ष की द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी और त्रयोदशी तिथि को गृह प्रवेश करना शुभ होता है।_*
 
🏘️ *_3.गृह प्रवेश का वार : मंगलवार और कुछ विशेष परिस्थिति में रविवार एवं शनिवार को छोड़कर सभी वारों को गृह प्रवेश किया जा सकता है।_*

🔯 *_4.स्थिर लग्न : गृह प्रवेश हमेशा स्थिर लग्न में करने से शुभ होता है। किसी पंडित से लग्न पूछकर यह कार्य करें। वैसे प्रवेश के समय आपके जन्म नक्षत्र से सूर्य की स्थिति पांचवें में अशुभ, आठवें में शुभ, नौवें में अशुभ और छठवे में शुभ होती है।_*
 
✡️ *_6.शुभ मुहूर्त : शुभ मुहूर्त में रुद्र, श्‍वेत, मित्र, सारभट, सावित्र, वैराज, विश्वावसु, अभिजित, रोहिण, बल, विजय, र्नेत, वरुण सौम्य और भग ये 15 मुहूर्त है। रवि के दिन 14वां, सोमवार के दिन 12वां, मंगलवार के दिन 10वां, बुधवार के दिन 8वां, गुरु के दिन 6टा, शुक्रवार के दिन 4था और शनिवार के दिन दूसरा मुहूर्त कुलिक शुभ कार्यों में वर्जित हैं।_*

 *_7.वर्ष 2021 के मुहूर्त : जनवरी में 5, 6, 8, 14, 17, 26 और 30 तारीख को शुभ तिथियां हैं। फरवरी में 12, 14, 16, 20, 23 और 28 तारीख को शुभ तिथियां हैं। मार्च में 8, 9, 14, 20, 21, 24 और 26 तारीख को शुभ तिथियां हैं। अप्रैल में 1, 11 और 20 तरीख को शुभ तिथियां हैं। मई में 6, 8, 10, 12, 16, 18, 20, 21 और 30 तारीख को शुभ तिथियां हैं। जून में 2, 3, 10, 12, 15, 16, 21, 22, 25 और 27 तारीख को शुभ तिथियां हैं। जुलाई को 3, 4, 13, 25, 20, 22, 25, 26 और 31 को शुभ तिथियां हैं। अगस्त में 6, 7, 8, 9, 12, 16, 20, 27 और 28 तारीख को शुभ तिथियां हैं।_*
 
*_सितंबर में 2, 4, 8, 13, 14, 17, 19, 20, 22, 25, 26 और 29 तारीख को शुभ तिथियां हैं। अक्टूबर में 1, 9, 10, 12, 14, 15, 18, 21, 23, 25 और 26 को शुभ तिथियां। नवंबर को 2, 8, 10, 11, 12, 20, 22, 23, 24 और 26 तारीख को शुभ तिथियां हैं। दिसंबर में 4, 5, 10, 13, 15, 18, 19, 22, 25 और 31 तारीख को शुभ तिथियां हैं। परंतु गृहप्रवेश के लिए मुहूर्त और योग भी देखेंगे तो अच्छा होगा। वैसे 9 जनवरी, 13 मई, 14 मई, 21 मई, 22 मई, 24 मई, 26 मई, 4 जून, 5 जून, 10 जून, 11 जून, 19 जून, 26 जून, 1 जुलाई, 7 जुलाई, 5 नवंबर, 6 नवंबर, 10 नवंबर, 20 नवंबर, 29 नवंबर, 13 दिसंबर और 31 दिसंबर को गृह प्रवेश के खास दिन हैं। इसमें चौघड़ियां, नक्षत्र या मुहूर्त जरूर देख लें।_*
 
➡️ *_मुहूर्तों के नाम : एक मुहूर्त 2 घड़ी अर्थात 48 मिनट के बराबर होता है। 24 घंटे में 1440 मिनट होते हैं:- मुहूर्त सुबह 6 बजे से शुरू होता है:- रुद्र, आहि, मित्र, पितॄ, वसु, वाराह, विश्वेदेवा, विधि, सतमुखी, पुरुहूत, वाहिनी, नक्तनकरा, वरुण, अर्यमा, भग, गिरीश, अजपाद, अहिर, बुध्न्य, पुष्य, अश्विनी, यम, अग्नि, विधातॄ, क्ण्ड, अदिति जीव/अमृत, विष्णु, युमिगद्युति, ब्रह्म और समुद्रम।_*
 
🔯 *_शुभ मुहूर्त क्या है?_*

*_मुहूर्त दो तरह के होते हैं शुभ मुहूर्त और अशुभ मुहूर्त। शुभ को ग्राह्य समय और अशुभ को अग्राह्‍य समय कहते हैं। शुभ मुहूर्त में रुद्र, श्‍वेत, मित्र, सारभट, सावित्र, वैराज, विश्वावसु, अभिजित, रोहिण, बल, विजय, र्नेत, वरुण सौम्य और भग ये 15 मुहूर्त है। ...रवि के दिन 14वां, सोमवा रके दिन 12वां, मंगलवार के दिन 10वां, बुधवार के दिन 8वां, गुरु के दिन 6टा, शुक्रवार के दिन 4था और शनिवार के दिन दूसरा मुहूर्त कुलिक शुभ कार्यों में वर्जित हैं।_*
 
❄️ *_योग क्या है?_*

*_सूर्य-चन्द्र की विशेष दूरियों की स्थितियों को योग कहते हैं। योग 27 प्रकार के होते हैं। दूरियों के आधार पर बनने वाले 27 योगों के नाम क्रमश: इस प्रकार हैं- 1.विष्कुम्भ, 2.प्रीति, 3.आयुष्मान, 4.सौभाग्य, 5.शोभन, 6.अतिगण्ड, 7.सुकर्मा, 8.धृति, 9.शूल, 10.गण्ड, 11.वृद्धि, 12.ध्रुव, 13.व्याघात, 14.हर्षण, 15.वज्र, 16.सिद्धि, 17.व्यतिपात, 18.वरीयान, 19.परिध, 20.शिव, 21.सिद्ध, 22.साध्य, 23.शुभ, 24.शुक्ल, 25.ब्रह्म, 26.इन्द्र और 27.वैधृति।_*
 
💫 *&27 योगों में से कुल 9 योगों को अशुभ माना जाता है तथा सभी प्रकार के शुभ कामों में इनसे बचने की सलाह दी गई है। ये 9 अशुभ योग हैं- विष्कुम्भ, अतिगण्ड, शूल, गण्ड, व्याघात, वज्र, व्यतिपात, परिध और वैधृति। इन्हें छोड़कर अन्य किसी भी योग में कोई भी कार्य मुहूर्त देखकर किया जा सकता है।_*
 
🧘🏻‍♀️ *_गुरु-पुष्य योग : गुरुवार और पुष्य नक्षत्र के संयोग से निर्मित होने के कारण इस योग को गुरु-पुष्य योग के नाम से जाना जाता है। यह योग गृह प्रवेश, गृह शांति, शिक्षा सम्बन्धी मामलों के लिए अत्यंत श्रेष्ठ माना जाता है। यह योग अन्य शुभ कार्यों के लिए भी शुभ मुहूर्त के रूप में जाना जाता है।_*
 
✍🏼 *_विशेष मुहूर्त योग : सर्वार्थसिद्धि, अमृतसिद्धि, गुरुपुष्यामृत और रविपुष्यामृत योग। यदि सोमवार के दिन रोहिणी, मृगशिरा, पुष्य, अनुराधा तथा श्रवण नक्षत्र हो तो सर्वार्थसिद्धि योग का निर्माण होता है। शुभ मुहूर्तों में सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त माना जाता है- गुरु-पुष्य योग। यदि गुरुवार को चन्द्रमा पुष्य नक्षत्र में हो तो इससे पूर्ण सिद्धिदायक योग बन जाता है। जब चतुर्दशी सोमवार को और पूर्णिमा या अमावस्या मंगलवार को हो तो सिद्धिदायक मुहूर्त होता है।

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Vandana Singh Jan 27, 2021

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Radhe Krishna Jan 27, 2021

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PDJOSHI Jan 27, 2021

_श्रीहरिः_ 🙏🏽🌷श्रीभक्तमाल🌷 🙏🏽 *श्री लक्ष्मण भक्त जी* *एक बड़े प्रेमी महात्मा थे जिनकी संतो में बड़ी श्रद्धा थी ।उनस नाम था श्री लक्ष्मण जी । भक्त लक्ष्मण जी बडे सद्भाव से साधुओं की सेवा करते थे। बिना किसी रोक टोक के लक्ष्मण जी के यहां संतो का दिन रात आवागमन रहता था । संतो के वेष मात्र का आदर लक्ष्मण जी करते थे ।इनकी इस उदारता को देखकर एक दुष्ट ने भी सन्तवेष धारण कर लिया और कई दिनतक लक्ष्मण भक्त के यहां रहा । लक्ष्मण जी उसकी भी सेवा करते रहे क्योंकि लक्ष्मीन जी वेषनिष्ठ सन्त थे । एक दिन मौका पाकर वह वेषधारी भगवान् के मंदिर में घुस गया । भगवां के आभूषण – पार्षदों को लेकर भाग गया । यह देखकर भगवान ने एक सिपाही का रूप धारणकर उसे जा पकडा और उसे श्रीलक्ष्मण भक्त के पास लाये और बोले – देखो, यह तुम्हरे मंदिर का सामान चुराकर ले जा रहा है ।* *श्री लक्ष्मण जी ने कहा – इन संत को सामान की आवश्यकता होगी । इसलिये ले जा रहे हैं । मेरे मास जो कुछ है , इन्ही का है । इनहें ले जाने दो । अब वे सिपाही भगवान् क्या करते ? वह सामान लेकर गया तो भगवान भी साथ साथ चले । फिर उसके आगे- आगे चलने लगे इसके बाद अन्तर्धान हो गये । इधर-उधर बहुत निगाह दौडानेपर भी नहीं दीखे । इस तरह कभी प्रकट कभी अप्रकट होते देखकर उसे भय हुआ । भगवान् की कृपा से उसकी बुद्धि निर्मल हो गयी ।उसने मन मे अनुमान कर लिया कि भक्तों के हितकारी भगवान् की यह लीला है । मैं भक्त की चोरी करके दुख पाउँगा । श्रीलक्ष्मण जी की सहज सरलता का स्मरण करता हुआ वापस लौट आया । उसने सब सामान देकर हृदय के दुष्ट भाव को खोलकर रख दिया और चरणो मे पडकर क्षमा मांगने लगा । भक्त के प्रताप से वह सच्चा संत बन गया। इस तरह संत वेष में अपार निष्ठा के कारण भगवान् ने श्री लक्ष्मण जी पर कृपा की।* _क्रमशः_......... 🌷🙏🏽 *हरिः शरणम्* 🌷🙏🏽

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vandana Jan 27, 2021

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ramkumarverma Jan 27, 2021

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sarita Jan 27, 2021

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