Jasbir Singh nain
Jasbir Singh nain Nov 23, 2021

बुधवार को करें गणेशजी का व्रत शुभ प्रभात जी 🪔 जय श्री गणेश जी 🪔🪴🙏🙏🙏🙏🙏 हिन्दू ज्योतिषशास्त्र के अनुसार बुधवार को अगर कोई व्यक्ति व्रत रखता है तो उसके ज्ञान में वृद्धि होती है। जो लोग व्यापार से जुड़े हैं और इस क्षेत्र में आने वाली बाधाओं से बचना चाहते हैं तो ऐसे लोगों के लिए भी यह व्रत बहुत लाभकारी सिद्ध होता है। इसके अलावा जिन लोगों की कुंडली में बुध ग्रह कमजोर होता है और इसके अच्छे परिणाम उनको नहीं मिलते तो ऐसे लोगों के लिए भी बुधवार का व्रत करना बहुत फलदायी माना जाता है। अगर कुंडली में बुध अशुभ भाव का स्वामी है तो ऐसे जातकों को भी बुधवार का व्रत रखना चाहिए। बुधवार व्रत का महत्व जो लोग बुधवार को सच्चे मन से व्रत लेते हैं उनको इसके कई अच्छे फल मिलते हैं। बुधवार को व्रत रखने से मनुष्य का बौद्धिक विकास होता है और साथ ही उन्हें सोचने-समझने की क्षमता में भी वृद्धि होती है। बुधवार का व्रत बुध ग्रह के शुभ परिणाम प्राप्त करने के लिए भी रखा जाता है। इसके अलावा इस व्रत को रखने से घर में धन और सुख समृद्धि आती है। बुध एक सौम्य ग्रह है जिसके अच्छे प्रभाव इंसान को कई उपलब्धियाँ दिलाते हैं इसलिए कई लोग इस व्रत का पालन करते हैं। बुध को मजबूत करने के लिए बुध यंत्र को बुध की होरा और बुध के नक्षत्र के समय करें स्थापित। बुधवार व्रत की संपूर्ण विधि बुधवार के दिन व्रत रखें और भगवान बुध की पूजा करें। इस दिन पूजा के वक्त बुधवार व्रत कथा का पाठ करें और उसके बाद आरती करें। उपवास में दिन के वक्त न सोए व किसी से वाद-विवाद करने से बचें। सूर्यास्त के बाद पूजा करें और भगवान बुध को दीप, धूप, गुड़ और दही चढ़ाएं। पूजा समाप्ति के बाद सबको प्रसाद बांटें और अंत में खुद प्रसाद का सेवन करें। बुधवार व्रत की पूजा सामग्री बुधवार व्रत की पूजा को करने के लिए कुछ चीजें बहुत महत्वपूर्ण हैं। जिनके बिना पूजा अधूरी रहती है। ये चीजें हैं:- भगवान बुध की मूर्ति कांस्य का एक पात्र हरा वस्त्र पंचामृत (गाय का कच्चा दूध, दही, घी, शहद एवं शर्करा मिला हुआ) पान, सुपारी, लौंग, इलाइची कपूर और पूजा के पात्र गणेशजी की व्रत कथा एक बुढ़िया थी। वह बहुत ही ग़रीब और अंधी थीं। उसके एक बेटा और बहू थे। वह बुढ़िया सदैव गणेश जी की पूजा किया करती थी। एक दिन गणेश जी प्रकट होकर उस बुढ़िया से बोले- ‘बुढ़िया मां! तू जो चाहे सो मांग ले।’ बुढ़िया बोली- ‘मुझसे तो मांगना नहीं आता। कैसे और क्या मांगू?’ तब गणेशजी बोले - ‘अपने बहू-बेटे से पूछकर मांग ले।’ तब बुढ़िया ने अपने बेटे से कहा- ‘गणेशजी कहते हैं ‘तू कुछ मांग ले’ बता मैं क्या मांगू?’ पुत्र ने कहा- ‘मां! तू धन मांग ले।’ बहू से पूछा तो बहू ने कहा- ‘नाती मांग ले।’ तब बुढ़िया ने सोचा कि ये तो अपने-अपने मतलब की बात कह रहे हैं। अत: उस बुढ़िया ने पड़ोसिनों से पूछा, तो उन्होंने कहा- ‘बुढ़िया! तू तो थोड़े दिन जीएगी, क्यों तू धन मांगे और क्यों नाती मांगे। तू तो अपनी आंखों की रोशनी मांग ले, जिससे तेरी ज़िन्दगी आराम से कट जाए।’ इस पर बुढ़िया बोली- ‘यदि आप प्रसन्न हैं, तो मुझे नौ करोड़ की माया दें, निरोगी काया दें, अमर सुहाग दें, आंखों की रोशनी दें, नाती दें, पोता, दें और सब परिवार को सुख दें और अंत में मोक्ष दें।’ यह सुनकर तब गणेशजी बोले- ‘बुढ़िया मां! तुने तो हमें ठग दिया। फिर भी जो तूने मांगा है वचन के अनुसार सब तुझे मिलेगा।’ और यह कहकर गणेशजी अंतर्धान हो गए। उधर बुढ़िया माँ ने जो कुछ मांगा वह सबकुछ मिल गया। हे गणेशजी महाराज! जैसे तुमने उस बुढ़िया माँ को सबकुछ दिया, वैसे ही सबको देना।

बुधवार को करें गणेशजी का व्रत 
शुभ प्रभात जी 🪔 जय श्री गणेश जी 🪔🪴🙏🙏🙏🙏🙏
हिन्दू ज्योतिषशास्त्र के अनुसार बुधवार को अगर कोई व्यक्ति व्रत रखता है तो उसके ज्ञान में वृद्धि होती है। जो लोग व्यापार से जुड़े हैं और इस क्षेत्र में आने वाली बाधाओं से बचना चाहते हैं तो ऐसे लोगों के लिए भी यह व्रत बहुत लाभकारी सिद्ध होता है। इसके अलावा जिन लोगों की कुंडली में बुध ग्रह कमजोर होता है और इसके अच्छे परिणाम उनको नहीं मिलते तो ऐसे लोगों के लिए भी बुधवार का व्रत करना बहुत फलदायी माना जाता है। अगर कुंडली में बुध अशुभ भाव का स्वामी है तो ऐसे जातकों को भी बुधवार का व्रत रखना चाहिए।



बुधवार व्रत का महत्व

जो लोग बुधवार को सच्चे मन से व्रत लेते हैं उनको इसके कई अच्छे फल मिलते हैं। बुधवार को व्रत रखने से मनुष्य का बौद्धिक विकास होता है और साथ ही उन्हें सोचने-समझने की क्षमता में भी वृद्धि होती है। बुधवार का व्रत बुध ग्रह के शुभ परिणाम प्राप्त करने के लिए भी रखा जाता है। इसके अलावा इस व्रत को रखने से घर में धन और सुख समृद्धि आती है। बुध एक सौम्य ग्रह है जिसके अच्छे प्रभाव इंसान को कई उपलब्धियाँ दिलाते हैं इसलिए कई लोग इस व्रत का पालन करते हैं।

बुध को मजबूत करने के लिए बुध यंत्र को बुध की होरा और बुध के नक्षत्र के समय करें स्थापित।



बुधवार व्रत की संपूर्ण विधि

बुधवार के दिन व्रत रखें और भगवान बुध की पूजा करें। इस दिन पूजा के वक्त बुधवार व्रत कथा का पाठ करें और उसके बाद आरती करें। उपवास में दिन के वक्त न सोए व किसी से वाद-विवाद करने से बचें। सूर्यास्त के बाद पूजा करें और भगवान बुध को दीप, धूप, गुड़ और दही चढ़ाएं। पूजा समाप्ति के बाद सबको प्रसाद बांटें और अंत में खुद प्रसाद का सेवन करें।

बुधवार व्रत की पूजा सामग्री

बुधवार व्रत की पूजा को करने के लिए कुछ चीजें बहुत महत्वपूर्ण हैं। जिनके बिना पूजा अधूरी रहती है। ये चीजें हैं:-

भगवान बुध की मूर्ति

कांस्य का एक पात्र

हरा वस्त्र

पंचामृत (गाय का कच्चा दूध, दही, घी, शहद एवं शर्करा मिला हुआ)

पान, सुपारी, लौंग, इलाइची

कपूर और पूजा के पात्र

गणेशजी की व्रत कथा

एक बुढ़िया थी। वह बहुत ही ग़रीब और अंधी थीं। उसके एक बेटा और बहू थे। वह बुढ़िया सदैव गणेश जी की पूजा किया करती थी। एक दिन गणेश जी प्रकट होकर उस बुढ़िया से बोले-
‘बुढ़िया मां! तू जो चाहे सो मांग ले।’
बुढ़िया बोली- ‘मुझसे तो मांगना नहीं आता। कैसे और क्या मांगू?’
तब गणेशजी बोले - ‘अपने बहू-बेटे से पूछकर मांग ले।’
तब बुढ़िया ने अपने बेटे से कहा- ‘गणेशजी कहते हैं ‘तू कुछ मांग ले’ बता मैं क्या मांगू?’
पुत्र ने कहा- ‘मां! तू धन मांग ले।’
बहू से पूछा तो बहू ने कहा- ‘नाती मांग ले।’
तब बुढ़िया ने सोचा कि ये तो अपने-अपने मतलब की बात कह रहे हैं। अत: उस बुढ़िया ने पड़ोसिनों से पूछा, तो उन्होंने कहा- ‘बुढ़िया! तू तो थोड़े दिन जीएगी, क्यों तू धन मांगे और क्यों नाती मांगे। तू तो अपनी आंखों की रोशनी मांग ले, जिससे तेरी ज़िन्दगी आराम से कट जाए।’

इस पर बुढ़िया बोली- ‘यदि आप प्रसन्न हैं, तो मुझे नौ करोड़ की माया दें, निरोगी काया दें, अमर सुहाग दें, आंखों की रोशनी दें, नाती दें, पोता, दें और सब परिवार को सुख दें और अंत में मोक्ष दें।’
यह सुनकर तब गणेशजी बोले- ‘बुढ़िया मां! तुने तो हमें ठग दिया। फिर भी जो तूने मांगा है वचन के अनुसार सब तुझे मिलेगा।’ और यह कहकर गणेशजी अंतर्धान हो गए। उधर बुढ़िया माँ ने जो कुछ मांगा वह सबकुछ मिल गया। हे गणेशजी महाराज! जैसे तुमने उस बुढ़िया माँ को सबकुछ दिया, वैसे ही सबको देना।

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कामेंट्स

Anup Kumar Sinha Nov 24, 2021
जय श्री राधे कृष्ण 🙏🏻🙏🏻 शुभ रात्रि वंदन, भाई जी 🙏🏻🍁

Renu Singh Nov 25, 2021
Om Namo Narayana 🌹🙏 Good Morning Bhai Ji Hari Ji ki kripa Aap aur Aàpke Pariwar Pr Sadaiv Bani Rahe Aàpka Din Shubh Avam Mangalmay ho 🙏🌹

Renu Singh Nov 25, 2021
Om Namo Narayana 🌹🙏 Good Morning Bhai Ji Hari Ji ki kripa Aap aur Aàpke Pariwar Pr Sadaiv Bani Rahe Aàpka Din Shubh Avam Mangalmay ho 🙏🌹

N K Pandey Nov 25, 2021
Jai shree Radhe Krishna Subh Prabhat Ji

Shivsanker Shukla Nov 25, 2021
सप्रेम सुप्रभात भैया जी राधे-राधे

Anup Kumar Sinha Nov 25, 2021
जय श्री हरि विष्णु🙏🏻🙏🏻 शुभ संध्या वंदन, भाई जी । माता लक्ष्मी एवं भगवान विष्णु की कृपा आप पर सदैव बनी रहे।आपका हर पल शुभ और मंगलमय हो 🙏🏻💐

dhruvwadhwani Nov 26, 2021
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dhruvwadhwani Nov 26, 2021
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dhruvwadhwani Nov 26, 2021
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dhruvwadhwani Nov 26, 2021
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dhruvwadhwani Nov 26, 2021
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Jasbir Singh nain Jan 27, 2022

शुभ प्रभात जी🙏🙏🙏🙏 षटतिला एकादशी 2022: तिल के प्रयोग से कटेंगे दुख, जानिए शुभ मुहुर्त, पूजा विधि और व्रत कथा - माघ कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि यानी 28 जनवरी, दिन शुक्रवार को षटतिला एकादशी व्रत रखा जाएगा। सनातन धर्म के लिहाज से षटलिता एकादशी के दिन तिल के उपयोग के साथ साथ व्रत और दान का बहुत महत्व है। कहा जाता है कि इस दिन व्रत रखने से भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। साथ ही आरोग्यता तथा सम्पन्नता आती है। षटतिला एकादशी पर तिल का ऐस करें प्रयोग षटतिला एकादशी के दिन तिल का छह तरीकों से प्रयोग किया जाता है। आपको बता दें कि इस दिन तिल मिश्रित जल से स्नान करने, तिल का उबटन लगाने, तिल से हवन करने, तिल मिश्रित जल का सेवन करने, तिल का भोजन करने और तिल का दान करने का विधान है। इस दिन तिल का मुख्य रूप से इन छः तरीकों से उपयोग करने पर ही माघ कृष्ण पक्ष की एकादशी को षट्तिला एकादशी कहते हैं। आज के दिन भगवान विष्णु की पूजा में भी विशेष रूप से तिल का इस्तेमाल किया जाता है। आज के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति की हर मनोकामना पूरी होती है और उसे जीवन में वैभव प्राप्त होता है। साथ ही सुख-सौभाग्य, धन-धान्य में वृद्धि होती है और आरोग्यता की प्राप्ति होती है। जानें षटतिला एकादशी का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत कथा। इस दिन जो व्यक्ति श्रद्धा भाव से षटतिला एकादशी का व्रत रखते हैं, उनके सभी पापों का नाश होता है। इसलिए माघ मास में पूरे माह व्यक्ति को अपनी समस्त इन्द्रियों पर काबू रखना चाहिए। काम, क्रोध, अहंकार, बुराई तथा चुगली का त्याग कर भगवान की शरण में जाना चाहिए। माघ माह की कृष्ण पक्ष की एकादशी को व्रत रखना चाहिए। इससे मनुष्य के सभी पाप समाप्त हो जाएंगे तथा उसे स्वर्ग की प्राप्ति होगी। षटतिला एकादशी व्रत शुभ मुहूर्त पंचांग के अनुसार षटतिला एकादशी तिथि 27 जनवरी की रात 02 बजकर 16 मिनट से प्रारंभ होगी और 28 जनवरी की रात 11 बजकर 35 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में एकादशी व्रत उदया तिथि में 28 जनवरी को रखा जाएगा। षटतिला एकादशी व्रत की पूजा विधि इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर भगवान का मनन करते हुए सबसे पहले व्रत का संकल्प करें। इसके बाद सभी कामों से निवृत्त होकर स्नान करें। इसके बाद पूजा स्थल में जाकर भगवान श्री कृष्ण की पूजा विधि-विधान से करें। इसके लिए धूप, दीप, नैवेद्य आदि सोलह चीजों से करने के साथ रात को दीपदान करें। इस दिन रात को सोए नहीं। व्रत के दिन व्रत के सामान्य नियमों का पालन करना चाहिए। इसके साथ ही साथ जहां तक हो सके व्रत के दिन सात्विक भोजन करना चाहिए। भोजन में उसे नमक का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करना चाहिए। इससे आपको हजारों यज्ञों के बराबर फल मिलेगा। षटतिला एकादशी की व्रत कथा एक बार भगवान विष्णु ने नारद जी को एक सत्य घटना से अवगत कराया और नारदजी को एक षटतिला एकादशी के व्रत का महत्व बताया। इस एकादशी को रखने की जो कथा भगवान विष्णु जी ने नारद जी को सुनाई वह इस प्रकार से है प्राचीन काल में पृथ्वी लोक में एक ब्राह्मणी रहती थी। वह हमेशा व्रत करती थी लेकिन किसी ब्राह्मण अथवा साधु को कभी दान आदि नहीं देती थी। एक बार उसने एक माह तक लगातार व्रत रखा। इससे उस ब्राह्मणी का शरीर बहुत कमजोर हो गया था। तब भगवान विष्णु ने सोचा कि इस ब्राह्मणी ने व्रत रख कर अपना शरीर शुद्ध कर लिया है अत: इसे विष्णु लोक में स्थान तो मिल जाएगा परन्तु इसने कभी अन्न का दान नहीं किया। इससे ब्राह्मणी की तृप्ति होना कठिन है। इसलिए भगवान विष्णु ने सोचा कि वह भिखारी का वेश धारण करके उस ब्राह्मणी के पास जाएंगें और उससे भिक्षा मांगेगे। यदि वह भिक्षा दे देती है तब उसकी तृप्ति अवश्य हो जाएगी और भगवान विष्णु भिखारी के वेश में पृथ्वी लोक पर उस ब्राह्मणी के पास जाते हैं और उससे भिक्षा मांगते हैं। वह ब्राह्मणी विष्णु जी से पूछती है - महाराज किसलिए आए हो? विष्णु जी बोले मुझे भिक्षा चाहिए। यह सुनते ही उस ब्राह्मणी ने मिट्टी का एक ढे़ला विष्णु जी के भिक्षापात्र में डाल दिया। विष्णु जी उस मिट्टी के ढेले को लेकर स्वर्गलोक में लौट आये। कुछ समय के बाद ब्राह्मणी ने अपना शरीर त्याग दिया और स्वर्ग लोक में आ गई। मिट्टी का ढेला दान करने से उस ब्राह्मणी को स्वर्ग में सुंदर महल तो मिल गया परन्तु उसने कभी अन्न का दान नहीं किया था इसलिए महल में अन्न आदि से बनी कोई सामग्री नहीं थी। वह घबराकर विष्णु जी के पास गई और कहने लगी कि हे भगवन मैंने आपके लिए व्रत आदि रखकर आपकी बहुत पूजा की उसके बावजूद भी मेरे घर में अन्नादि वस्तुओं का अभाव है। ऐसा क्यों है? तब विष्णु जी बोले कि तुम पहले अपने घर जाओ। तुम्हें मिलने और देखने के लिए देवस्त्रियां आएगी, तुम अपना द्वार खोलने से पहले उनसे षटतिला एकादशी की विधि और उसके महात्म्य के बारे में सुनना तब द्वार खोलना। ब्राह्मणी ने वैसे ही किया। द्वार खोलने से पहले षटतिला एकादशी व्रत के महात्म्य के बारे में पूछा। एक देवस्त्री ने ब्राह्मणी की बात सुनकर उसे षटतिला एकादशी व्रत के महात्म्य के बारे में जानकारी दी। उस जानकारी के बाद ब्राह्मणी ने द्वार खोल दिए। देवस्त्रियों ने देखा कि वह ब्राह्मणी न तो गांधर्वी है और ना ही आसुरी है। वह पहले जैसे मनुष्य रुप में ही थी। अब उस ब्राह्मणी को दान ना देने का पता चला। अब उस ब्राह्मणी ने देवस्त्री के कहे अनुसार षटतिला एकादशी का व्रत किया। इससे उसके समस्त पापों का नाश हो गया। वह सुंदर तथा रुपवति हो गई। अब उसका घर अन्नादि सभी प्रकार की वस्तुओं से भर गया। इस प्रकार सभी मनुष्यों को लालच का त्याग करना चाहिए। किसी प्रकार का लोभ नहीं करना चाहिए।

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🌷JK🌷 Jan 26, 2022

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my mandir Jan 26, 2022

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