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Jay Shree Krishna
Jay Shree Krishna Jun 13, 2019

🚩🙏 ॐ आइए जानते हैं निर्जला एकादशी के विषय में निर्जला एकादशी/ भीम एकादशी जल झूलनी एकादशी 13 जून 2019 आज गुरुवार को / सालभर की सभी एकादशियों से ज्यादा महत्व है निर्जला एकादशी का, इस दिन व्रत करने वाले पानी भी ग्रहण नहीं करते हैं ।। आज गुरुवार, 13 जून को साल की सबसे बड़ी निर्जला एकादशी है। हिन्दी पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का काफी अधिक महत्व है। मान्यता है कि महाभारत काल में पांडव पुत्र भीम ने भी ये व्रत किया था, ज्योतिषियों के अनुसार भगवान विष्णु के लिए विशेष पूजा पाठ की जाती है। व्रत रखा जाता है। इस एकादशी पर व्रत करने वाले भक्त को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। व्रत करने वाले व्यक्ति को निर्जला एकादशी की तैयारियां एक दिन पहले से ही कर लेनी चाहिए। दशमी तिथि पर सात्विक भोजन करना चाहिए। भक्त को ब्रह्मचर्य का पालन अनिवार्य रूप से करना चाहिए। साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। स्नान के समय सभी पवित्र नदियों के नामों का जाप करें। ऐसा करने से घर पर ही गंगा स्नान का पुण्य मिल सकता है। स्नान के बाद भगवान विष्णु के सामने व्रत करने का संकल्प करें। भगवान के सामने कहें कि आप ये व्रत करना चाहते हैं और इसे पूरा करने की शक्ति प्रदान करें। भगवान विष्णु को पीले फल, पीले फूल, पीले पकवान का भोग लगाएं। गाय की घी का दीपक जलाकर आरती करें। ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें। विधिवत पूजा करें। इस एकादशी पर पानी का दान करें। किसी प्याऊ में मटकी का दान करें। अगर संभव हो सके तो किसी गौशाला में धन का दान करें। इस एकादशी की शाम तुलसी की भी विशेष पूजा जरूर करनी चाहिए। शाम को तुलसी के पास दीपक जलाएं और परिक्रमा करें। अगले दिन यानी द्वादशी तिथि पर ब्राह्मण और जरूरतमंद लोगों को खाना खिलाएं। पूजा-पाठ करें। इसके बाद ही भोजन ग्रहण करना चाहिए। निर्जला एकादशी पर व्रत करने वाले अधिकतर लोग पानी भी नहीं पीते हैं। अगर आपके लिए ये संभव न हो तो फलों का रस, पानी, दूध, फलाहार का सेवन कर सकते हैं। अपने शक्ति के अनुसार व्रत किया जा सकता है। भक्त को एकादशी पर धार्मिक आचरण रखना चाहिए। क्रोध न करें। घर में शांति का वातावरण रखें। माता-पिता से आशीर्वाद लें और जीवन साथी का सम्मान करें। निर्जला एकादशी के दिन दान-पुण्य और गंगा स्नान का विशेष महत्त्व होता है । द्वादशी को तुलसी के पत्तों आदि से भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। पूजा- पाठ के बाद ब्राह्मण को भोजन करवाकर दक्षिणा तथा कलश सहित विदा करना चाहिए। अंत में भगवान विष्णु तथा कृष्ण का स्मरण करते हुए स्वयं भोजन ग्रहण करना चाहिए। निर्जला एकादशी 2019 १३ वाँ जून २०१९ (बृहस्पतिवार) एकादशी तिथि प्रारम्भ = १२/जून/२०१९ को १८:२७ बजे एकादशी तिथि समाप्त = १३/जून/२०१९ को १६:४९ ब निर्जला एकादशी व्रत कथा पाण्डवों में दूसरा भाई भीमसेन खाने-पीने का अत्यधिक शौक़ीन था और अपनी भूख को नियन्त्रित करने में सक्षम नहीं था इसी कारण वह एकादशी व्रत को नही कर पाता था। भीम के अलावा बाकि पाण्डव भाई और द्रौपदी साल की सभी एकादशी व्रतों को पूरी श्रद्धा भक्ति से किया करते थे। भीमसेन अपनी इस लाचारी और कमजोरी को लेकर परेशान था। भीमसेन को लगता था कि वह एकादशी व्रत न करके भगवान विष्णु का अनादर कर रहा है। इस दुविधा से उभरने के लिए भीमसेन महर्षि व्यास के पास गया तब महर्षि व्यास कहने लगे कि वृषभ और मिथुन की संक्रां‍‍ति के बीच ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की जो एकादशी आती है, उसका नाम निर्जला है। तुम उस एकादशी का व्रत करो। इस एकादशी के व्रत में स्नान और आचमन के सिवा जल वर्जित है। आचमन में छ: मासे से अधिक जल नहीं होना चाहिए अन्यथा वह मद्यपान के सदृश हो जाता है। इस दिन भोजन नहीं करना चाहिए, क्योंकि भोजन करने से व्रत नष्ट हो जाता है। यदि एकादशी को सूर्योदय से लेकर द्वादशी के सूर्योदय तक जल ग्रहण न करे तो उसे सारी एकादशियों के व्रत का फल प्राप्त होता है। द्वादशी को सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि करके ब्राह्मणों का दान आदि देना चाहिए। इसके पश्चात भूखे और सत्पात्र ब्राह्मण को भोजन कराकर फिर आप भोजन कर लेना चाहिए। इसका फल पूरे एक वर्ष की संपूर्ण एकादशियों के बराबर होता है। व्यासजी कहने लगे कि हे भीमसेन! यह मुझको स्वयं भगवान ने बताया है। इस एकादशी का पुण्य समस्त तीर्थों और दानों से अधिक है। केवल एक दिन मनुष्य निर्जल रहने से पुण्य फलों की प्राप्ति होती है जो मनुष्य निर्जला एकादशी का व्रत करते हैं उनकी मृत्यु के समय यमदूत आकर नहीं घेरते वरन भगवान के पार्षद उसे पुष्पक विमान में बिठाकर स्वर्ग को ले जाते हैं। अत: संसार में सबसे श्रेष्ठ निर्जला एकादशी का व्रत है। इसलिए यत्न के साथ इस व्रत को करना चाहिए। उस दिन ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का उच्चारण करना चाहिए और गौदान करना चाहिए। इस प्रकार व्यासजी की आज्ञानुसार भीमसेन ने इस व्रत को किया। इसलिए इस एकादशी को भीमसेनी या पांडव एकादशी भी कहते हैं। जो मनुष्य इस व्रत को करते हैं उनको व्रत करने का फल मिलता है और जो इस दिन यज्ञादिक करते हैं उनका फल तो वर्णन ही नहीं किया जा सकता। इस एकादशी के व्रत से मनुष्य विष्णुलोक को प्राप्त होता है। हे कुंतीपुत्र! जो पुरुष या स्त्री श्रद्धापूर्वक इस व्रत को करते हैं उन्हें अग्रलिखित कर्म करने चाहिए। प्रथम भगवान का पूजन, फिर गौदान, ब्राह्मणों को मिष्ठान्न व दक्षिणा देनी चाहिए तथा जल से भरे कलश का दान अवश्य करना चाहिए। निर्जला के दिन अन्न, वस्त्र, उपाहन (जूती) आदि का दान भी करना चाहिए। जो मनुष्य भक्तिपूर्वक इस कथा को पढ़ते या सुनते हैं, उन्हें निश्चय ही स्वर्ग की प्राप्ति होती है🚩 🙏 ओम नमो नारायणाय 🙏 🚩👏💐🌹🌷🌺🌸🌼

🚩🙏 ॐ आइए जानते हैं निर्जला एकादशी के विषय में

निर्जला एकादशी/ भीम एकादशी जल झूलनी एकादशी

 13 जून 2019 आज गुरुवार को / सालभर की सभी एकादशियों से ज्यादा महत्व है 

निर्जला एकादशी का, इस दिन व्रत करने वाले पानी भी ग्रहण नहीं करते हैं ।।

 आज गुरुवार, 13 जून को साल की सबसे बड़ी निर्जला एकादशी है। हिन्दी पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का काफी अधिक महत्व है। 

मान्यता है कि महाभारत काल में पांडव पुत्र भीम ने भी ये व्रत किया था, ज्योतिषियों के अनुसार भगवान विष्णु के लिए विशेष पूजा पाठ की जाती है। व्रत रखा जाता है। इस एकादशी पर व्रत करने वाले भक्त को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए।

व्रत करने वाले व्यक्ति को निर्जला एकादशी की तैयारियां एक दिन पहले से ही कर लेनी चाहिए। दशमी तिथि पर सात्विक भोजन करना चाहिए।

भक्त को ब्रह्मचर्य का पालन अनिवार्य रूप से करना चाहिए। साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।

स्नान के समय सभी पवित्र नदियों के नामों का जाप करें। ऐसा करने से घर पर ही गंगा स्नान का पुण्य मिल सकता है।

स्नान के बाद भगवान विष्णु के सामने व्रत करने का संकल्प करें। भगवान के सामने कहें कि आप ये व्रत करना चाहते हैं और इसे पूरा करने की शक्ति प्रदान करें।

भगवान विष्णु को पीले फल, पीले फूल, पीले पकवान का भोग लगाएं। गाय की घी का दीपक जलाकर आरती करें। ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें। विधिवत पूजा करें।

इस एकादशी पर पानी का दान करें। किसी प्याऊ में मटकी का दान करें। अगर संभव हो सके तो किसी गौशाला में धन का दान करें।

इस एकादशी की शाम तुलसी की भी विशेष पूजा जरूर करनी चाहिए। शाम को तुलसी के पास दीपक जलाएं और परिक्रमा करें।

अगले दिन यानी द्वादशी तिथि पर ब्राह्मण और जरूरतमंद लोगों को खाना खिलाएं। पूजा-पाठ करें। इसके बाद ही भोजन ग्रहण करना चाहिए।

निर्जला एकादशी पर व्रत करने वाले अधिकतर लोग पानी भी नहीं पीते हैं। अगर आपके लिए ये संभव न हो तो फलों का रस, पानी, दूध, फलाहार का सेवन कर सकते हैं। अपने शक्ति के अनुसार व्रत किया जा सकता है।

भक्त को एकादशी पर धार्मिक आचरण रखना चाहिए। क्रोध न करें। घर में शांति का वातावरण रखें। माता-पिता से आशीर्वाद लें और जीवन साथी का सम्मान करें। 

निर्जला एकादशी के दिन दान-पुण्य और गंगा स्नान का विशेष महत्त्व होता है ।

द्वादशी को तुलसी के पत्तों आदि से भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। पूजा- पाठ के बाद ब्राह्मण को भोजन करवाकर दक्षिणा तथा कलश सहित विदा करना चाहिए। अंत में भगवान विष्णु तथा कृष्ण का स्मरण करते हुए स्वयं भोजन ग्रहण करना चाहिए।

निर्जला एकादशी 2019
१३ वाँ जून २०१९
(बृहस्पतिवार)
एकादशी तिथि प्रारम्भ = १२/जून/२०१९ को १८:२७ बजे
एकादशी तिथि समाप्त = १३/जून/२०१९ को १६:४९ ब

निर्जला एकादशी व्रत कथा
पाण्डवों में दूसरा भाई भीमसेन खाने-पीने का अत्यधिक शौक़ीन था और अपनी भूख को नियन्त्रित करने में सक्षम नहीं था इसी कारण वह एकादशी व्रत को नही कर पाता था। भीम के अलावा बाकि पाण्डव भाई और द्रौपदी साल की सभी एकादशी व्रतों को पूरी श्रद्धा भक्ति से किया करते थे। भीमसेन अपनी इस लाचारी और कमजोरी को लेकर परेशान था। भीमसेन को लगता था कि वह एकादशी व्रत न करके भगवान विष्णु का अनादर कर रहा है। इस दुविधा से उभरने के लिए भीमसेन महर्षि व्यास के पास गया तब महर्षि व्यास कहने लगे कि वृषभ और मिथुन की संक्रां‍‍ति के बीच ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की जो एकादशी आती है, उसका नाम निर्जला है। तुम उस एकादशी का व्रत करो। इस एकादशी के व्रत में स्नान और आचमन के सिवा जल वर्जित है। आचमन में छ: मासे से अधिक जल नहीं होना चाहिए अन्यथा वह मद्यपान के सदृश हो जाता है। इस दिन भोजन नहीं करना चाहिए, क्योंकि भोजन करने से व्रत नष्ट हो जाता है।
यदि एकादशी को सूर्योदय से लेकर द्वादशी के सूर्योदय तक जल ग्रहण न करे तो उसे सारी एकादशियों के व्रत का फल प्राप्त होता है। द्वादशी को सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि करके ब्राह्मणों का दान आदि देना चाहिए। इसके पश्चात भूखे और सत्पात्र ब्राह्मण को भोजन कराकर फिर आप भोजन कर लेना चाहिए। इसका फल पूरे एक वर्ष की संपूर्ण एकादशियों के बराबर होता है।
व्यासजी कहने लगे कि हे भीमसेन! यह मुझको स्वयं भगवान ने बताया है। इस एकादशी का पुण्य समस्त तीर्थों और दानों से अधिक है। केवल एक दिन मनुष्य निर्जल रहने से पुण्य फलों की प्राप्ति होती है

जो मनुष्य निर्जला एकादशी का व्रत करते हैं उनकी मृत्यु के समय यमदूत आकर नहीं घेरते वरन भगवान के पार्षद उसे पुष्पक विमान में बिठाकर स्वर्ग को ले जाते हैं। अत: संसार में सबसे श्रेष्ठ निर्जला एकादशी का व्रत है। इसलिए यत्न के साथ इस व्रत को करना चाहिए। उस दिन ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का उच्चारण करना चाहिए और गौदान करना चाहिए।
इस प्रकार व्यासजी की आज्ञानुसार भीमसेन ने इस व्रत को किया। इसलिए इस एकादशी को भीमसेनी या पांडव एकादशी भी कहते हैं।

जो मनुष्य इस व्रत को करते हैं उनको व्रत करने का फल मिलता है और जो इस दिन यज्ञादिक करते हैं उनका फल तो वर्णन ही नहीं किया जा सकता। इस एकादशी के व्रत से मनुष्य विष्णुलोक को प्राप्त होता है। 

हे कुंतीपुत्र! जो पुरुष या स्त्री श्रद्धापूर्वक इस व्रत को करते हैं उन्हें अग्रलिखित कर्म करने चाहिए। प्रथम भगवान का पूजन, फिर गौदान, ब्राह्मणों को मिष्ठान्न व दक्षिणा देनी चाहिए तथा जल से भरे कलश का दान अवश्य करना चाहिए। निर्जला के दिन अन्न, वस्त्र, उपाहन (जूती) आदि का दान भी करना चाहिए। जो मनुष्य भक्तिपूर्वक इस कथा को पढ़ते या सुनते हैं, उन्हें निश्चय ही स्वर्ग की प्राप्ति होती है🚩

🙏 ओम नमो नारायणाय 🙏
🚩👏💐🌹🌷🌺🌸🌼

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कामेंट्स

matalalratod Jun 13, 2019
ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः ओम साईं राम जय बाबा री सुप्रभात

Kshitish Seth Jun 13, 2019
Om Namah Bhagwate Bashudevaya 🙏Hare Krishna ji 🙏

sonu tomar Jun 13, 2019
*🌹🌷जय श्री कृष्णा🌷🌹* *जिंदगी 🤷🏻‍♂की आधी 😏शिकायते* *ऐसे 🤷🏻‍♂ही ठीक✅ हो जाये,* *अगर 👥लोग...-* *एक ☝🏻दूसरे✌🏻 के बारे में "बोलने" 🗣की जगह* *एक☝🏻 दूसरे से 💁🏻‍♂"बोलना" सीख जाए...!*। 💯 📈 ⛎ ✝🅾 ♏ 🅰 ♈ *🙏🏻ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः 🙏🏻* *🙏🌹शुभ प्रभात 🌹🙏* 🌹 *आपका दिन शुभ हो*🌹

Raj Jun 16, 2019

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