Narayan Giri
Narayan Giri Oct 5, 2017

व्यसन विराम पूर्ण प्रयास बाड़मेर राजस्थान में

व्यसन विराम पूर्ण प्रयास बाड़मेर राजस्थान में
व्यसन विराम पूर्ण प्रयास बाड़मेर राजस्थान में
व्यसन विराम पूर्ण प्रयास बाड़मेर राजस्थान में
व्यसन विराम पूर्ण प्रयास बाड़मेर राजस्थान में

जय दूधेश्वर महादेव

आज श्रीमहन्त नारायण गिरी जी महाराज श्री दुधेश्वर पीठाधीश्वर गाजियाबाद अंतरराष्ट्रीय मंत्री श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा वाराणसी उत्तर प्रदेश का कार्यक्रम बाड़मेर जैसलमेर देव दर्शन भक्तो का जन सम्पर्क विशेष रूप से नशा से मुक्ति के लिये महाराज श्री एवं स्वामी आर के शिवानन्द जी ने दोनो जिलो काफी भक्तो से सम्पर्क करके नशा से मुक्त होने के लिये प्रेरणा दिया कि अफीम जीवन मे एक प्रकार का जहर है अफीम डोडा सभी नशो से दूर रहिये व्यसन विराम एक प्रयास के तहत लोगो को जागरूक किया हिन्दू तत्व जागरण अभियान के तहत हिन्दूओ मे धर्म चेतना भावना व अपने धर्म के प्रति जागरूक होना प्रेरणा लेना है भोला गिरि जी का धूना गुलामलानी दूधेश्वर मन्दिर बाडमेर मे सभी उपस्थित सन्तो की उपस्थिति मे प्रस्ताव रखा कि सन्त समाज भक्तो को प्रेरणा दे कि वो लोग नशो से दूर रहे क्योंकि नशे से सर्वनाश हो जाता है दहेज लेन देन की प्रथा भी समाप्त हो छूआ छुत जाति पाति को छोड़कर ह्रदय रूपए मंच पर आकर सभी को वैदिक हिन्दू सनातन धर्म का संरक्षण करना है आज के समय में संतों के ऊपर कुछ मुसीबतें आई हुई हैं उन मुसीबतों में संत को सत्य मार्ग पर चलते हुए सतर्क रहते हुए भक्तों को प्रेरणा देना है जिस से कि हमारा भारत विश्व गुरु बन सके

हर हर महादेव

विश्व संवाद संपर्क सचि
अमित कुमार शर्मा
श्री दूधेश्वर नाथ मंदिर गाजियाबाद उत्तर प्रदेश

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कामेंट्स

Gopal Krishna Oct 6, 2017
गो धन गज धन बाजिधन और रतन धन खान । जब आवै संतोष धन, सब धन धूरि समान ।। श्री राम राज राजेश्वर की जय श्री हनुमान जी महाराज की जय हर हर महादेव शुभ प्रभात वंदन

Rakesh Jha Mar 27, 2020

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Pawan Saini Mar 27, 2020

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[email protected] Mar 25, 2020

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[email protected] Mar 25, 2020

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shyam Singh tanwal Mar 27, 2020

कहानी----- #तिरस्कार_या_मजबूरी ................................. गोपाल किशन जी एक सेवानिवृत अध्यापक हैं । सुबह दस बजे तक ये एकदम स्वस्थ प्रतीत हो रहे थे । शाम के सात बजते-बजते तेज बुखार के साथ-साथ वे सारे लक्षण दिखायी देने लगे जो एक कोरोना पॉजीटिव मरीज के अंदर दिखाई देते हैं । परिवार के सदस्यों के चेहरों पर खौफ़ साफ़ दिखाई पड़ रहा था । उनकी चारपाई घर के एक पुराने बड़े से बाहरी कमरे में डाल दी गयी जिसमें इनके पालतू कुत्ते *मार्शल* का बसेरा है । गोपाल किशन जी कुछ साल पहले एक छोटा सा घायल पिल्ला सड़क से उठाकर लाये थे और अपने बच्चे की तरह पालकर इसको नाम दिया *मार्शल* । इस कमरे में अब गोपाल किशन जी , उनकी चारपाई और उनका प्यारा मार्शल हैं ।दोनों बेटों -बहुओं ने दूरी बना ली और बच्चों को भी पास ना जानें के निर्देश दे दिए गये । सरकार द्वारा जारी किये गये नंबर पर फोन करके सूचना दे दी गयी । खबर मुहल्ले भर में फैल चुकी थी लेकिन मिलने कोई नहीं आया । साड़ी के पल्ले से मुँह लपेटे हुए, हाथ में छड़ी लिये पड़ोस की कोई एक बूढी अम्मा आई और गोपाल किशन जी की पत्नी से बोली -"अरे कोई इसके पास दूर से खाना भी सरका दो , वे अस्पताल वाले तो इसे भूखे को ही ले जाएँगे उठा के" । अब प्रश्न ये था कि उनको खाना देनें के लिये कौन जाए । बहुओं ने खाना अपनी सास को पकड़ा दिया अब गोपाल किशन जी की पत्नी के हाथ , थाली पकड़ते ही काँपने लगे , पैर मानो खूँटे से बाँध दिये गए हों । इतना देखकर वह पड़ोसन बूढ़ी अम्मा बोली "अरी तेरा तो पति है तू भी ........। मुँह बाँध के चली जा और दूर से थाली सरका दे वो अपने आप उठाकर खा लेगा" । सारा वार्तालाप गोपाल किशन जी चुपचाप सुन रहे थे , उनकी आँखें नम थी और काँपते होठों से उन्होंने कहा कि "कोई मेरे पास ना आये तो बेहतर है , मुझे भूख भी नहीं है" । इसी बीच एम्बुलेंस आ जाती है और गोपाल किशन जी को एम्बुलेंस में बैठने के लिये बोला जाता है । गोपाल किशन जी घर के दरवाजे पर आकर एक बार पलटकर अपने घर की तरफ देखते हैं । पोती -पोते First floor की खिड़की से मास्क लगाए दादा को निहारते हुए और उन बच्चों के पीछे सर पर पल्लू रखे उनकी दोनों बहुएँ दिखाई पड़ती हैं । Ground floor पर, दोनों बेटे काफी दूर, अपनी माँ के साथ खड़े थे । विचारों का तूफान गोपाल किशन जी के अंदर उमड़ रहा था । उनकी पोती ने उनकी तरफ देखकर उसने bye bye कहा। एक क्षण को उन्हें लगा कि 'जिंदगी ने अलविदा कह दिया' गोपाल किशन जी की आँखें लबलबा उठी । उन्होंने बैठकर अपने घर की देहरी को चूमा और एम्बुलेंस में जाकर बैठ गये । उनकी पत्नी ने तुरंत पानी से भरी बाल्टी घर की उस देहरी पर उलेड दी जिसको गोपाल किशन चूमकर एम्बुलेंस में बैठे थे । इसे तिरस्कार कहो या मजबूरी , लेकिन ये दृश्य देखकर कुत्ता भी रो पड़ा और उसी एम्बुलेंस के पीछे - पीछे हो लिया जो गोपाल किशन जी को अस्पताल लेकर जा रही थी । गोपाल किशन जी अस्पताल में 14 दिनों के अब्ज़र्वेशन पीरियड में रहे । उनकी सभी जाँच सामान्य थी । उन्हें पूर्णतः स्वस्थ घोषित करके छुट्टी दे दी गयी । जब वह अस्पताल से बाहर निकले तो उनको अस्पताल के गेट पर उनका कुत्ता मार्शल बैठा दिखाई दिया । दोनों एक दूसरे से लिपट गये । एक की आँखों से गंगा तो एक की आँखों से यमुना बहे जा रही थी । जब तक उनके बेटों की लम्बी गाड़ी उन्हें लेने पहुँचती तब तक वो अपने कुत्ते को लेकर किसी दूसरी दिशा की ओर निकल चुके थे । उसके बाद वो कभी दिखाई नहीं दिये । आज उनके फोटो के साथ उनकी गुमशुदगी की खबर छपी है अखबार में लिखा है कि सूचना देने वाले को 40 हजार का ईनाम दिया जायेगा । 40 हजार - हाँ पढ़कर ध्यान आया कि इतनी ही तो मासिक पेंशन आती थी उनकी जिसको वो परिवार के ऊपर हँसते गाते उड़ा दिया करते थे । ...........................................🌹🌹shubh ratri 🌹🌹

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Jai Gupta Mar 25, 2020

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