Jasbir Singh nain
Jasbir Singh nain Dec 1, 2019

शुभ प्रभात जी राधे राधे जी 🙏🙏🙏 व्रत-त्योहार / चंपा षष्ठी आज; इस दिन भगवान शिव और कार्तिकेय की पूजा की जाती है चंपा षष्ठी पर महाराष्ट्र और कर्नाटक में की जाती है भगवान शिव के अवतार खंडोबा की विशेष पूजा . मार्गशीर्ष माह में शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को चंपा षष्ठी का व्रत किया जाता है। ये दिन भगवान शिव को समर्पित है। इस दिन भगवान शिव के मार्कंडेय स्वरूप की पूजा की जाती है। इस बार ये व्रत 2 दिसंबर, सोमवार यानी आज किया जा रहा है। ये पर्व कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे राज्यों का प्रमुख त्यौहार है। यहां पर भगवान शिव के अवतार खंडोबा को किसानों के देवता के रूप में पूजा जाता है। स्कंदपुराण के अनुसार यह पर्व भगवान कार्तिकेय को समर्पित है। इसलिए इस पर्व को स्कंद षष्ठी भी कहा जाता है। इस दिन कई जगहों पर भगवान कार्तिकेय की पूजा और व्रत किया जाता है। कैसे मनाया जाता है ये पर्व शिव पूजा चंपा षष्ठी को छठ पर्व भी कहा जाता है क्योंकि इस दिन शिवलिंग को बैंगन और बाजरा का भोग लगाया जाता है। मुख्य रूप से ये पर्व महाराष्ट्र में बनाया जाता है, इस दिन भगवान शिव के मार्कंडेय स्वरूप को समर्पित है। इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान किया जाता है और शिव का ध्यान किया जाता है। मंदिर जाकर शिवलिंग की पूजा की जाती है। शिवलिंग पर दूध और गंगाजल चढ़ाया जाता है। इसके बाद फूल, अबीर, बेल पत्र चढ़ाते हैं और देसी खांड का भोग लगाकर बांटा जाता है। कार्तिकेय पूजा स्कंद षष्ठी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करके व्रत और पूजा का संकल्प लिया जाता है। फिर दक्षिण दिशा की तरफ मुख कर भगवान कार्तिकेय की पूजा की जाती है। घी, दही और जल से अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद भगवान कार्तिकेय को और पुष्प चढ़ाए जाते हैं। खासतौर से इस दिन भगवान कार्तिकेय को चंपा के फूल चढ़ाए जाते हैं। फिर रात्रि में भूमि पर शयन करना चाहिए। इस दिन तेल का सेवन नहीं किया जाता है और अगले दिन तक ब्रह्मचर्य का पालन किया जाता है। इस दिन व्रत और पूजा करने का महत्व इस दिन भगवान शिव की पूजा और व्रत करने से भक्तों के सारे पाप कट जाते हैं, उनकी सारी परेशानियों पर विराम लग जाता है, यही नहीं उसे सुख-शांति मिलती भी है और मोक्ष की भी प्राप्ति होती है। मान्यता है कि चंपा षष्ठी व्रत करने से जीवन में प्रसन्नता बनी रहती है। ऐसी मान्यता है कि यह व्रत करने से पिछले जन्म के सारे पाप धुल जाते हैं और जीवन सुखमय हो जाता है। भगवान कार्तिकेय मंगल ग्रह के स्वामी हैं। मंगल को मजबूत करने के लिए इस दिन भगवान कार्तिकेय का व्रत करना चाहिए। व्रत की कथाएं चंपा षष्ठी का प्रारंभ कैसे हुआ और इसकी क्या पौराणिक मान्यताएं हैं इसके बारे में अलग-अलग कथाओं का वर्णन मिलता है। माना जाता है कि जब भगवान कार्तिकेय अपने माता-पिता (शिव-पार्वती) और अनुज (छोटे भाई) श्री गणेश से रुष्ठ होकर कैलाश पर्वत को त्याग कर भगवान् शिव के ज्योतिर्लिंग मल्लिकार्जुन में जाकर निवास करने लगे थे तब मार्गशीर्ष शुक्ल षष्ठी का ही दिन था। भगवान कार्तिकेय ने दैत्य तारकासुर का वध किया और इसी तिथि को वो देवताओं की सेना के सेनापति बने और भगवान शिव को प्रसन्न कर दिया था इसी कारण इस दिन का बहुत महत्व है। एक दूसरी पौराणिक कथा के अनुसार भगवान शिव ने मणि-मल्ह दैत्य भाइयों से छह दिनों तक खंडोबा नामक स्थान पर युद्ध करके षष्ठी पर दोनों दानवों का वध किया था। इसी स्थान पर महादेव शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे। मणि-मल्ह का वध करने के लिए भगवान शिव ने भैरव व पार्वती ने शक्ति रूप लिया। इसी कारण महाराष्ट्र में रुद्रावतार भैरव को मार्तंड-मल्लहारी व खंडोबा कहा जाता है और इस दिन चंपा षष्ठी का पर्व मनाया जाता है।

शुभ प्रभात जी राधे राधे जी 🙏🙏🙏
व्रत-त्योहार / चंपा षष्ठी आज; इस दिन भगवान शिव और कार्तिकेय की पूजा की जाती है

चंपा षष्ठी पर महाराष्ट्र और कर्नाटक में की जाती है भगवान शिव के अवतार खंडोबा की विशेष पूजा


. मार्गशीर्ष माह में शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को चंपा षष्ठी का व्रत किया जाता है। ये दिन भगवान शिव को समर्पित है। इस दिन भगवान शिव के मार्कंडेय स्वरूप की पूजा की जाती है। इस बार ये व्रत 2 दिसंबर, सोमवार यानी आज किया जा रहा है। ये पर्व कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे राज्यों का प्रमुख त्यौहार है। यहां पर भगवान शिव के अवतार खंडोबा को किसानों के देवता के रूप में पूजा जाता है। स्कंदपुराण के अनुसार यह पर्व भगवान कार्तिकेय को समर्पित है। इसलिए इस पर्व को स्कंद षष्ठी भी कहा जाता है। इस दिन कई जगहों पर भगवान कार्तिकेय की पूजा और व्रत किया जाता है।

कैसे मनाया जाता है ये पर्व
शिव पूजा
चंपा षष्ठी को छठ पर्व भी कहा जाता है क्योंकि इस दिन शिवलिंग को बैंगन और बाजरा का भोग लगाया जाता है। मुख्य रूप से ये पर्व महाराष्ट्र में बनाया जाता है, इस दिन भगवान शिव के मार्कंडेय स्वरूप को समर्पित है। इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान किया जाता है और शिव का ध्यान किया जाता है। मंदिर जाकर शिवलिंग की पूजा की जाती है। शिवलिंग पर दूध और गंगाजल चढ़ाया जाता है। इसके बाद फूल, अबीर, बेल पत्र चढ़ाते हैं और देसी खांड का भोग लगाकर बांटा जाता है।
कार्तिकेय पूजा
स्कंद षष्ठी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करके व्रत और पूजा का संकल्प लिया जाता है। फिर दक्षिण दिशा की तरफ मुख कर भगवान कार्तिकेय की पूजा की जाती है। घी, दही और जल से अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद भगवान कार्तिकेय को और पुष्प चढ़ाए जाते हैं। खासतौर से इस दिन भगवान कार्तिकेय को चंपा के फूल चढ़ाए जाते हैं। फिर रात्रि में भूमि पर शयन करना चाहिए। इस दिन तेल का सेवन नहीं किया जाता है और अगले दिन तक ब्रह्मचर्य का पालन किया जाता है।
इस दिन व्रत और पूजा करने का महत्व
इस दिन भगवान शिव की पूजा और व्रत करने से भक्तों के सारे पाप कट जाते हैं, उनकी सारी परेशानियों पर विराम लग जाता है, यही नहीं उसे सुख-शांति मिलती भी है और मोक्ष की भी प्राप्ति होती है। मान्यता है कि चंपा षष्ठी व्रत करने से जीवन में प्रसन्नता बनी रहती है। ऐसी मान्यता है कि यह व्रत करने से पिछले जन्म के सारे पाप धुल जाते हैं और जीवन सुखमय हो जाता है। भगवान कार्तिकेय मंगल ग्रह के स्वामी हैं। मंगल को मजबूत करने के लिए इस दिन भगवान कार्तिकेय का व्रत करना चाहिए।

व्रत की कथाएं
चंपा षष्ठी का प्रारंभ कैसे हुआ और इसकी क्या पौराणिक मान्यताएं हैं इसके बारे में अलग-अलग कथाओं का वर्णन मिलता है।

माना जाता है कि जब भगवान कार्तिकेय अपने माता-पिता (शिव-पार्वती) और अनुज (छोटे भाई) श्री गणेश से रुष्ठ होकर कैलाश पर्वत को त्याग कर भगवान् शिव के ज्योतिर्लिंग मल्लिकार्जुन में जाकर निवास करने लगे थे तब मार्गशीर्ष शुक्ल षष्ठी का ही दिन था। भगवान कार्तिकेय ने दैत्य तारकासुर का वध किया और इसी तिथि को वो देवताओं की सेना के सेनापति बने और भगवान शिव को प्रसन्न कर दिया था इसी कारण इस दिन का बहुत महत्व है।
एक दूसरी पौराणिक कथा के अनुसार भगवान शिव ने मणि-मल्ह दैत्य भाइयों से छह दिनों तक खंडोबा नामक स्थान पर युद्ध करके षष्ठी पर दोनों दानवों का वध किया था। इसी स्थान पर महादेव शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे। मणि-मल्ह का वध करने के लिए भगवान शिव ने भैरव व पार्वती ने शक्ति रूप लिया। इसी कारण महाराष्ट्र में रुद्रावतार भैरव को मार्तंड-मल्लहारी व खंडोबा कहा जाता है और इस दिन चंपा षष्ठी का पर्व मनाया जाता है।

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कामेंट्स

K N Padshala🙏 Dec 2, 2019
ॐ त्रयम्बकम् यजामहे सुगंन्धिम्पुष्टिवर्धनम उर्वारूकमिव बन्धनात् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॐनमो शिवाय नमः सुंदर दिवसाच्या सुंदर शुभेच्छा 🌹🙏🙏👌👌👌👌👌🕉

sumitra Dec 2, 2019
ओम नमः शिवाय 🙏भाई जी भोलेनाथ आपकी हर मनोकामना पूरी करें आपको हमेशा खुश रखे स्वस्थ रखें आपका दिन शुभ व मंगलमय हो भाई जी🌹🚩🙏

Ⓜ@Nisha Dec 2, 2019
🌷💐🌷💐🌷💐🌷💐🌷 🌷🌷 शुभ सोमवार 🌷🌷 *🌷 सुप्रभात नमस्कार भाई 🌷* *वो कांटे भी देता है,* *गुलाब भी देता है.....* *वो अन्धी आंखों को,* *सुनहरे ख्वाब भी देता है....* *माँगू अगर चिराग तो,* *वो आफताब भी देता है....* *कैसे शुक्र करुं,उस सांवरिया का* *मैं थोडा माँगू,वो बे-हिसाब देता है......।।* ***🌷 हर हर महादेव 🌷*** 🙏🌹 *सुप्रभात* 🌹🙏

Dr.ratan Singh Dec 2, 2019
🚩ॐ नमः शिवाय वन्दन भाई🚩 🙏आपऔरआपके पूरे परिवार पर काशी विश्वनाथ जी की कृपा दृष्टि सदा बनी रहे और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होजी🍑 🎭आपका सोमवार का दिन शुभ अतिसुन्दर शिवमय और मंगलमय व्यतीत हो जी🍑

preeti Gidwani Dec 2, 2019
🎎जय श्री राधे कृष्ण जी 🎎 🌹जय श्री राधे राधे जी 🌹 🌹राधे 🌹राधे🌹 राधे 🌹राधे 🌹राधे 🌹राधे🌹 राधे 🌹राधे 🌹राधे🌹 राधे 🌹राधे 🌹राधे 🌹राधे 🌹राधे 🌹राधे🌹 राधे🌹 राधे🌹 राधे 🌹राधे 🌹राधे🌹 राधे 🌹राधे 🌹राधे 🌹राधे 🌹राधे 🌹राधे 🌹राधे 🌹राधे🌹 राधे🌹 राधे 🌹राधे 🌹राधे 🌹राधे🌹 राधे 🌹राधे🌹 राधे 🌹राधे🌹 राधे 🌹राधे🌹 राधे 🌹राधे🌹 राधे 🌹राधे🌹 राधे🌹 जी 🌹🙏🙏🌷🌷🌹🌹👏👏👏👏🌹🌹🌹🌹 हमेशा बहुत खुश हंसते मुस्कराते रहिए आप अपने पूरे परिवार के साथ जी🌹 भगवान जी🌹 की कृपा से जी भगवान जी की कृपा से जी 🙏🙏🌹🌹 शुभ रात्रि जी भैया जी 🙏🙏🌹🌹🌷🌷

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Pt Vinod Pandey 🚩 Jan 26, 2020

🌞 *~ आज का हिन्दू #पंचांग* ~ 🌞 ⛅ *दिनांक 27 जनवरी 2020* ⛅ *दिन - सोमवार* ⛅ *विक्रम संवत - 2076* ⛅ *शक संवत - 1941* ⛅ *अयन - उत्तरायण* ⛅ *ऋतु - शिशिर* ⛅ *मास - माघ* ⛅ *पक्ष - शुक्ल* ⛅ *तिथि - तृतीया पूर्ण रात्रि तक* ⛅ *नक्षत्र - शतभिषा पूर्ण रात्रि तक* ⛅ *योग - वरीयान् 28 जनवरी रात्रि 02:52 तक तत्पश्चात परिघ* ⛅ *राहुकाल - सुबह 08:34 से सुबह 09:56 तक* ⛅ *सूर्योदय - 07:18* ⛅ *सूर्यास्त - 18:24* ⛅ *दिशाशूल - पूर्व दिशा में* ⛅ *व्रत पर्व विवरण - तृतीया क्षय तिथि* 💥 *विशेष - तृतीया को परवल खाना शत्रुओं की वृद्धि करने वाला है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)* 🌷 *मंगलवारी चतुर्थी* 🌷 ➡ *28 जनवरी 2020 (सुबह 08:23 से 29 जनवरी सूर्योदय तक )* 🌷 *मंत्र जप व शुभ संकल्प की सिद्धि के लिए विशेष योग* 🙏🏻 *मंगलवारी चतुर्थी को किये गए जप-संकल्प, मौन व यज्ञ का फल अक्षय होता है ।* 👉🏻 *मंगलवार चतुर्थी को सब काम छोड़ कर जप-ध्यान करना ... जप, ध्यान, तप सूर्य-ग्रहण जितना फलदायी है...* 🌷 *मंगलवारी चतुर्थी* 🌷 🙏 *अंगार चतुर्थी को सब काम छोड़ कर जप-ध्यान करना …जप, ध्यान, तप सूर्य-ग्रहण जितना फलदायी है…* 🌷 *> बिना नमक का भोजन करें* 🌷 *> मंगल देव का मानसिक आह्वान करो* 🌷 *> चन्द्रमा में गणपति की भावना करके अर्घ्य दें* 💵 *कितना भी कर्ज़दार हो ..काम धंधे से बेरोजगार हो ..रोज़ी रोटी तो मिलेगी और कर्जे से छुटकारा मिलेगा |* 🌐 http://www.vkjpandey.in 🌷 *मंगलवार चतुर्थी* 🌷 👉 *भारतीय समय के अनुसार 28 जनवरी 2020 (सुबह 08:23 से 29 जनवरी सूर्योदय तक) चतुर्थी है, इस महा योग पर अगर मंगल ग्रह देव के 21 नामों से सुमिरन करें और धरती पर अर्घ्य देकर प्रार्थना करें,शुभ संकल्प करें तो आप सकल ऋण से मुक्त हो सकते हैं..* *👉🏻मंगल देव के 21 नाम इस प्रकार हैं :-* 🌷 *1) ॐ मंगलाय नमः* 🌷 *2) ॐ भूमि पुत्राय नमः* 🌷 *3 ) ॐ ऋण हर्त्रे नमः* 🌷 *4) ॐ धन प्रदाय नमः* 🌷 *5 ) ॐ स्थिर आसनाय नमः* 🌷 *6) ॐ महा कायाय नमः* 🌷 *7) ॐ सर्व कामार्थ साधकाय नमः* 🌷 *8) ॐ लोहिताय नमः* 🌷 *9) ॐ लोहिताक्षाय नमः* 🌷 *10) ॐ साम गानाम कृपा करे नमः* 🌷 *11) ॐ धरात्मजाय नमः* 🌷 *12) ॐ भुजाय नमः* 🌷 *13) ॐ भौमाय नमः* 🌷 *14) ॐ भुमिजाय नमः* 🌷 *15) ॐ भूमि नन्दनाय नमः* 🌷 *16) ॐ अंगारकाय नमः* 🌷 *17) ॐ यमाय नमः* 🌷 *18) ॐ सर्व रोग प्रहाराकाय नमः* 🌷 *19) ॐ वृष्टि कर्ते नमः* 🌷 *20) ॐ वृष्टि हराते नमः* 🌷 *21) ॐ सर्व कामा फल प्रदाय नमः* 🙏 *ये 21 मन्त्र से भगवान मंगल देव को नमन करें ..फिर धरती पर अर्घ्य देना चाहिए..अर्घ्य देते समय ये मन्त्र बोले :-* 🌷 *भूमि पुत्रो महा तेजा* 🌷 *कुमारो रक्त वस्त्रका* 🌷 *ग्रहणअर्घ्यं मया दत्तम* 🌷 *ऋणम शांतिम प्रयाक्ष्मे* 🙏 *हे भूमि पुत्र!..महा क्यातेजस्वी,रक्त वस्त्र धारण करने वाले देव मेरा अर्घ्य स्वीकार करो और मुझे ऋण से शांति प्राप्त कराओ..* 🌐 http://www.vkjpandey.in 🙏🏻🌹🌻☘🌷🌺🌸🌼💐🙏

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Kalpana bist Jan 26, 2020

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