Ansouya
Ansouya Feb 23, 2021

🌹🙏🌹जय श्री राधे कृष्ण 🙏🌹🙏🌹🌹🌹🌹🌹🙏ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः 🌹🙏🌹🌹🙏🙏सुख समृद्धि और खुशियों की कामना करते हुए शुभ प्रभात आप सभी भक्ततों को जी 🌷🙏🌷🙏🌹🙏🌹🌹🌹🌹🌹🙏🌹🌹🙏🙏🙏🙏🌿भक्ति स्वांसों के जीवन की स्वतंत्रता🌿 भक्ति कोई शास्त्र नहीं है। भक्ति तो सच्ची श्रद्धा के सच्चे प्रेम की एक यात्रा है जो स्वांसों के सत्य पथ पर चलते हुए परमानंद की मंजिल तक पहुंचती है। भक्ति कोई सिद्धांत भी नहीं है, भक्ति तो जीवन का अमृत रस है। भक्ति को समझकर आज तक कोई समझ नहीं पाया। भक्ति में डूबकर ही कोई भक्ति के राज को समझ पाता है। मस्तिष्क से ज्यादा करीब हृदय होता है और हृदय का भाव विचारों से कहीं ज्यादा करीब है। हृदय के समुद्र की लहरों से जो आंदोलन आता है वह रुलाता भी है, क्योंकि भक्ति आंसुओं के बहुत करीब है। जो रो न सके वह भक्त नहीं हो सकेगा। छोटे बच्चे की तरह जो असहाय होकर रो सके, वही भक्ति-मार्ग से गुजर पाता है। परतंत्रता का अर्थ है कि चित्त के ऊपर लोगों के द्वारा थोपा गया तंत्र, जिससे व्यक्ति को बांधा जाता है। यह जो बंधन है, निश्चित ही यह बंधन किसी को भी प्रीतिकर नहीं है। ऐसे बंधनों के प्रति सहज ही भीतर एक विरोध है। ऐसे बंधनों को तोड़ देने की भीतर एक तीव्र बलवती आकांक्षा है। जब भी व्यक्ति मौका पाता है, ऐसे बंधनों को तोड़ता है। ऐसे परतंत्रता को तोड़ने से, परतंत्रता के विरोध में, वह जो विद्रोही चित्त है, उससे स्वच्छंदता पैदा होती है। क्रियाओं के अभ्यास से अपने स्वांस के भीतर की शक्ति को पहचान कर स्वयं को जानने से जो जीवन उपलब्ध होता है, उसका नाम स्वतंत्रता है। स्वतंत्र होना इस जगत में सबसे दुर्लभ बात है। स्वतंत्र वही हो सकता है, जो स्वयं को जानता हो। जो स्वयं को नहीं जानता, वह परतंत्र हो सकता है या स्वच्छंद हो सकता है, लेकिन स्वतंत्र नहीं हो सकता। इसलिए सच्ची श्रद्धा के अभ्यास से स्वांसों के भीतर की शक्ति को पहचान कर स्वयं को जानें और परमात्मा के सानिध्य में शांति के अनुभव से मनुष्य जीवन सफल बनाकर स्वतंत्र बनें।🌹🙏🌹🌹🙏🙏🌹🌹🌹🌹🌹🙏🙏गुरू चरणों में कोटि कोटि प्रणाम है 🌹🙏🌹🌹🙏🌹🌹🙏🌹🌹🙏🌹🌹🙏🙏🌹🕉

🌹🙏🌹जय श्री राधे कृष्ण 🙏🌹🙏🌹🌹🌹🌹🌹🙏ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः 🌹🙏🌹🌹🙏🙏सुख समृद्धि और खुशियों की कामना करते हुए शुभ प्रभात आप सभी भक्ततों को जी 🌷🙏🌷🙏🌹🙏🌹🌹🌹🌹🌹🙏🌹🌹🙏🙏🙏🙏🌿भक्ति स्वांसों के जीवन की स्वतंत्रता🌿

भक्ति कोई शास्त्र नहीं है। भक्ति तो सच्ची श्रद्धा के सच्चे प्रेम की एक यात्रा है जो स्वांसों के सत्य पथ पर चलते हुए परमानंद की मंजिल तक पहुंचती है। भक्ति कोई सिद्धांत भी नहीं है, भक्ति तो जीवन का अमृत रस है। भक्ति को समझकर आज तक कोई समझ नहीं पाया। भक्ति में डूबकर ही कोई भक्ति के राज को समझ पाता है। मस्तिष्क से ज्यादा करीब हृदय होता है और हृदय का भाव विचारों से कहीं ज्यादा करीब है। हृदय के समुद्र की लहरों से जो आंदोलन आता है वह रुलाता भी है, क्योंकि भक्ति आंसुओं के बहुत करीब है। जो रो न सके वह भक्त नहीं हो सकेगा। छोटे बच्चे की तरह जो असहाय होकर रो सके, वही भक्ति-मार्ग से गुजर पाता है। परतंत्रता का अर्थ है कि चित्त के ऊपर लोगों के द्वारा थोपा गया तंत्र, जिससे व्यक्ति को बांधा जाता है। यह जो बंधन है, निश्चित ही यह बंधन किसी को भी प्रीतिकर नहीं है। 

ऐसे बंधनों के प्रति सहज ही भीतर एक विरोध है। ऐसे बंधनों को तोड़ देने की भीतर एक तीव्र बलवती आकांक्षा है। जब भी व्यक्ति मौका पाता है, ऐसे बंधनों को तोड़ता है। ऐसे परतंत्रता को तोड़ने से, परतंत्रता के विरोध में, वह जो विद्रोही चित्त है, उससे स्वच्छंदता पैदा होती है। क्रियाओं के अभ्यास से अपने स्वांस के भीतर की शक्ति को पहचान कर स्वयं को जानने से जो जीवन उपलब्ध होता है, उसका नाम स्वतंत्रता है। स्वतंत्र होना इस जगत में सबसे दुर्लभ बात है। स्वतंत्र वही हो सकता है, जो स्वयं को जानता हो। जो स्वयं को नहीं जानता, वह परतंत्र हो सकता है या स्वच्छंद हो सकता है, लेकिन स्वतंत्र नहीं हो सकता। इसलिए सच्ची श्रद्धा के अभ्यास से स्वांसों के भीतर की शक्ति को पहचान कर स्वयं को जानें और परमात्मा के सानिध्य में शांति के अनुभव से मनुष्य जीवन सफल बनाकर स्वतंत्र बनें।🌹🙏🌹🌹🙏🙏🌹🌹🌹🌹🌹🙏🙏गुरू चरणों में कोटि कोटि प्रणाम है 🌹🙏🌹🌹🙏🌹🌹🙏🌹🌹🙏🌹🌹🙏🙏🌹🕉
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भक्ति कोई शास्त्र नहीं है। भक्ति तो सच्ची श्रद्धा के सच्चे प्रेम की एक यात्रा है जो स्वांसों के सत्य पथ पर चलते हुए परमानंद की मंजिल तक पहुंचती है। भक्ति कोई सिद्धांत भी नहीं है, भक्ति तो जीवन का अमृत रस है। भक्ति को समझकर आज तक कोई समझ नहीं पाया। भक्ति में डूबकर ही कोई भक्ति के राज को समझ पाता है। मस्तिष्क से ज्यादा करीब हृदय होता है और हृदय का भाव विचारों से कहीं ज्यादा करीब है। हृदय के समुद्र की लहरों से जो आंदोलन आता है वह रुलाता भी है, क्योंकि भक्ति आंसुओं के बहुत करीब है। जो रो न सके वह भक्त नहीं हो सकेगा। छोटे बच्चे की तरह जो असहाय होकर रो सके, वही भक्ति-मार्ग से गुजर पाता है। परतंत्रता का अर्थ है कि चित्त के ऊपर लोगों के द्वारा थोपा गया तंत्र, जिससे व्यक्ति को बांधा जाता है। यह जो बंधन है, निश्चित ही यह बंधन किसी को भी प्रीतिकर नहीं है। 

ऐसे बंधनों के प्रति सहज ही भीतर एक विरोध है। ऐसे बंधनों को तोड़ देने की भीतर एक तीव्र बलवती आकांक्षा है। जब भी व्यक्ति मौका पाता है, ऐसे बंधनों को तोड़ता है। ऐसे परतंत्रता को तोड़ने से, परतंत्रता के विरोध में, वह जो विद्रोही चित्त है, उससे स्वच्छंदता पैदा होती है। क्रियाओं के अभ्यास से अपने स्वांस के भीतर की शक्ति को पहचान कर स्वयं को जानने से जो जीवन उपलब्ध होता है, उसका नाम स्वतंत्रता है। स्वतंत्र होना इस जगत में सबसे दुर्लभ बात है। स्वतंत्र वही हो सकता है, जो स्वयं को जानता हो। जो स्वयं को नहीं जानता, वह परतंत्र हो सकता है या स्वच्छंद हो सकता है, लेकिन स्वतंत्र नहीं हो सकता। इसलिए सच्ची श्रद्धा के अभ्यास से स्वांसों के भीतर की शक्ति को पहचान कर स्वयं को जानें और परमात्मा के सानिध्य में शांति के अनुभव से मनुष्य जीवन सफल बनाकर स्वतंत्र बनें।🌹🙏🌹🌹🙏🙏🌹🌹🌹🌹🌹🙏🙏गुरू चरणों में कोटि कोटि प्रणाम है 🌹🙏🌹🌹🙏🌹🌹🙏🌹🌹🙏🌹🌹🙏🙏🌹🕉
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भक्ति कोई शास्त्र नहीं है। भक्ति तो सच्ची श्रद्धा के सच्चे प्रेम की एक यात्रा है जो स्वांसों के सत्य पथ पर चलते हुए परमानंद की मंजिल तक पहुंचती है। भक्ति कोई सिद्धांत भी नहीं है, भक्ति तो जीवन का अमृत रस है। भक्ति को समझकर आज तक कोई समझ नहीं पाया। भक्ति में डूबकर ही कोई भक्ति के राज को समझ पाता है। मस्तिष्क से ज्यादा करीब हृदय होता है और हृदय का भाव विचारों से कहीं ज्यादा करीब है। हृदय के समुद्र की लहरों से जो आंदोलन आता है वह रुलाता भी है, क्योंकि भक्ति आंसुओं के बहुत करीब है। जो रो न सके वह भक्त नहीं हो सकेगा। छोटे बच्चे की तरह जो असहाय होकर रो सके, वही भक्ति-मार्ग से गुजर पाता है। परतंत्रता का अर्थ है कि चित्त के ऊपर लोगों के द्वारा थोपा गया तंत्र, जिससे व्यक्ति को बांधा जाता है। यह जो बंधन है, निश्चित ही यह बंधन किसी को भी प्रीतिकर नहीं है। 

ऐसे बंधनों के प्रति सहज ही भीतर एक विरोध है। ऐसे बंधनों को तोड़ देने की भीतर एक तीव्र बलवती आकांक्षा है। जब भी व्यक्ति मौका पाता है, ऐसे बंधनों को तोड़ता है। ऐसे परतंत्रता को तोड़ने से, परतंत्रता के विरोध में, वह जो विद्रोही चित्त है, उससे स्वच्छंदता पैदा होती है। क्रियाओं के अभ्यास से अपने स्वांस के भीतर की शक्ति को पहचान कर स्वयं को जानने से जो जीवन उपलब्ध होता है, उसका नाम स्वतंत्रता है। स्वतंत्र होना इस जगत में सबसे दुर्लभ बात है। स्वतंत्र वही हो सकता है, जो स्वयं को जानता हो। जो स्वयं को नहीं जानता, वह परतंत्र हो सकता है या स्वच्छंद हो सकता है, लेकिन स्वतंत्र नहीं हो सकता। इसलिए सच्ची श्रद्धा के अभ्यास से स्वांसों के भीतर की शक्ति को पहचान कर स्वयं को जानें और परमात्मा के सानिध्य में शांति के अनुभव से मनुष्य जीवन सफल बनाकर स्वतंत्र बनें।🌹🙏🌹🌹🙏🙏🌹🌹🌹🌹🌹🙏🙏गुरू चरणों में कोटि कोटि प्रणाम है 🌹🙏🌹🌹🙏🌹🌹🙏🌹🌹🙏🌹🌹🙏🙏🌹🕉
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भक्ति कोई शास्त्र नहीं है। भक्ति तो सच्ची श्रद्धा के सच्चे प्रेम की एक यात्रा है जो स्वांसों के सत्य पथ पर चलते हुए परमानंद की मंजिल तक पहुंचती है। भक्ति कोई सिद्धांत भी नहीं है, भक्ति तो जीवन का अमृत रस है। भक्ति को समझकर आज तक कोई समझ नहीं पाया। भक्ति में डूबकर ही कोई भक्ति के राज को समझ पाता है। मस्तिष्क से ज्यादा करीब हृदय होता है और हृदय का भाव विचारों से कहीं ज्यादा करीब है। हृदय के समुद्र की लहरों से जो आंदोलन आता है वह रुलाता भी है, क्योंकि भक्ति आंसुओं के बहुत करीब है। जो रो न सके वह भक्त नहीं हो सकेगा। छोटे बच्चे की तरह जो असहाय होकर रो सके, वही भक्ति-मार्ग से गुजर पाता है। परतंत्रता का अर्थ है कि चित्त के ऊपर लोगों के द्वारा थोपा गया तंत्र, जिससे व्यक्ति को बांधा जाता है। यह जो बंधन है, निश्चित ही यह बंधन किसी को भी प्रीतिकर नहीं है। 

ऐसे बंधनों के प्रति सहज ही भीतर एक विरोध है। ऐसे बंधनों को तोड़ देने की भीतर एक तीव्र बलवती आकांक्षा है। जब भी व्यक्ति मौका पाता है, ऐसे बंधनों को तोड़ता है। ऐसे परतंत्रता को तोड़ने से, परतंत्रता के विरोध में, वह जो विद्रोही चित्त है, उससे स्वच्छंदता पैदा होती है। क्रियाओं के अभ्यास से अपने स्वांस के भीतर की शक्ति को पहचान कर स्वयं को जानने से जो जीवन उपलब्ध होता है, उसका नाम स्वतंत्रता है। स्वतंत्र होना इस जगत में सबसे दुर्लभ बात है। स्वतंत्र वही हो सकता है, जो स्वयं को जानता हो। जो स्वयं को नहीं जानता, वह परतंत्र हो सकता है या स्वच्छंद हो सकता है, लेकिन स्वतंत्र नहीं हो सकता। इसलिए सच्ची श्रद्धा के अभ्यास से स्वांसों के भीतर की शक्ति को पहचान कर स्वयं को जानें और परमात्मा के सानिध्य में शांति के अनुभव से मनुष्य जीवन सफल बनाकर स्वतंत्र बनें।🌹🙏🌹🌹🙏🙏🌹🌹🌹🌹🌹🙏🙏गुरू चरणों में कोटि कोटि प्रणाम है 🌹🙏🌹🌹🙏🌹🌹🙏🌹🌹🙏🌹🌹🙏🙏🌹🕉

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कामेंट्स

Ashwinrchauhan Feb 23, 2021
जया एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएं ॐ नमौ भगवते वासुदेवाय नमः ॐ नमौ नारायणे नमः शुभ मंगलवार राम भक्त हनुमान जी की कृपा आप पर आप के पुरे परिवार पर सदेव बनी रहे मेरी आदरणीय बहना जी आप का हर पल मंगल एवं शुभ रहे भगवान श्री लक्ष्मी नारायण देव आप की हर मनोकामना पूरी करे आप का आने वाला दिन शुभ रहे शुभ दोपहर वंदन बहना जी

Shivsanker Shukla Feb 23, 2021
जय बजरंगबली हनुमान शुभ दोपहर रागनी अनु जी जय श्री राम

Ansouya Feb 23, 2021
@shivsankershukla जय श्री कृष्ण 🙏🌷🌷 कितने नामकरण करते है आप हमारे

Ansouya Feb 23, 2021
@shivsankershukla शुभ मंगलवार माननीय शिव जी 🙏 शुभ एकादशी व्रत 🌹🙏 हरि जी आप को सदा यश और कीर्ति से संपन्न रक्खे शिव जी 🙏🌹

Shivsanker Shukla Feb 23, 2021
@ansouyamundram मुंह में पान भरा रहता है तो कुछ आवाज बदल जाती है हम कहते कुछ हैं गूगल सुनता कुछ है और लिखता कुछ है हमने आदरणीय कहा था अन्नू ही आपका नाम रखा है और दूसरा कुछ नहीं

r h Bhatt Feb 23, 2021
Jai Ram ji ki Ram ram ji Shubh dophar ji Vandana ji Jai Shri Krishna

Shivsanker Shukla Feb 23, 2021
शुभ संध्या आदरणीय अन्नू जी

Ansouya Feb 23, 2021
@naresh1928nareshdodia जय श्री राधे कृष्ण शुभ संध्या भइया जी 🙏🌹 यह जो हमारा जीवन है। इस जीवन के अंदर कम से कम कुछ तो अच्छा करें कि इस जीवन में भी आशा का दीपक जल उठे और यह तभी संभव है जब ऐसा मार्गदर्शक मिले जो हमारे अंधेरे जीवन में प्रकाश लेकर आएं और हमारी समस्त निराशाओं को आशाओं में बदल दें। 🌹कृष्णं वंदे गुरुम 🙏🙏

Manoj manu Feb 23, 2021
🚩🌺जय श्री कृष्णा जी राधे राधे जी शुभ संध्या मधुर मंगल जी दीदी 🌿🌹🌹🌿🙏

madan pal 🌷🙏🏼 Feb 23, 2021
जय श्री राधे राधे कृष्णा ज़ी शूभ रात्रि वंदन ज़ी आपका हर पल शूभ मंगल हों ज़ी 🌷 🙏🏼🌷🙏🏼🌷🙏🏼🌷🙏🏼🌷

Ansouya Feb 23, 2021
@madanpalsingh धन्यवाद भईया जी 🙏 जय श्री राधे कृष्ण शुभ और मंगल की कामना करते हुए शुभ रात्रि वनदन भइया जी 🙏

🙋ANJALI 😊MISHRA🙏 Feb 23, 2021
🙏राम राम जी 🌷😴शुभ रात्रि वंदन दीदी जी🙏 आपका हर दिन ,हर पल शुभ और सुखद हो आप और आपका परिवार स्वस्थ रहेंं सदा सुखी रहें मेरी प्यारी दीदी जी 🙌🙏🌹🙏📿जय श्री राम📿🙏🚩💐💐💐💐💐💐

Gd Bansal Mar 1, 2021

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Gd Bansal Mar 1, 2021

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shri niwash pandey Mar 1, 2021

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shri niwash pandey Mar 1, 2021

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Maya Rathore Mar 1, 2021

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Gopal Jalan Mar 1, 2021

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