Jagdish Kumar
Jagdish Kumar Aug 13, 2017

कल की सोच रखने वाले ही कुछ बड़ा करते हैं.

कल की सोच रखने वाले ही कुछ बड़ा करते हैं.

कल की सोच रखने वाले ही कुछ बड़ा करते हैं.

कुंतालपुर का राजा बड़ा ही न्याय प्रिय था| वह अपनी प्रजा के दुख-दर्द में बराबर काम आता था| प्रजा भी उसका बहुत आदर करती थी| एक दिन राजा गुप्त वेष में अपने राज्य में घूमने निकला तब रास्ते में देखता है कि एक वृद्ध एक छोटा सा पौधा रोप रहा है|

राजा कौतूहलवश उसके पास गया और बोला, ‘‘यह आप किस चीज का पौधा लगा रहे हैं ?’’ वृद्ध ने धीमें स्वर में कहा, ‘‘आम का|’’

राजा ने हिसाब लगाया कि उसके बड़े होने और उस पर फल आने में कितना समय लगेगा| हिसाब लगाकर उसने अचरज से वृद्ध की ओर देखा और कहा, ‘‘सुनो दादा इस पौधै के बड़े होने और उस पर फल आने मे कई साल लग जाएंगे, तब तक तुम क्या जीवित रहोगे?’’ वृद्ध ने राजा की ओर देखा| राजा की आँखों में मायूसी थी| उसे लग रहा था कि वह वृद्ध ऐसा काम कर रहा है, जिसका फल उसे नहीं मिलेगा|

यह देखकर वृद्ध ने कहा, ‘‘आप सोच रहें होंगे कि मैं पागलपन का काम कर रहा हूँ| जिस चीज से आदमी को फायदा नहीं पहुँचता, उस पर मेहनत करना बेकार है, लेकिन यह भी तो सोचिए कि इस बूढ़े ने दूसरों की मेहनत का कितना फायदा उठाया है ? दूसरों के लगाए पेड़ों के कितने फल अपनी जिंदगी में खाए हैं ? क्या उस कर्ज को उतारने के लिए मुझे कुछ नहीं करना चाहिए? क्या मुझे इस भावना से पेड़ नहीं लगाने चाहिए कि उनके फल दूसरे लोग खा सकें? जो केवल अपने लाभ के लिए ही काम करता है, वह तो स्वार्थी वृत्ति का मनुष्य होता है|’’

वृद्ध की यह दलील सुनकर राजा प्रसन्न हो गया , आज उसे भी कुछ बड़ा सीखने को मिला था !

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Soni Mishra Jan 19, 2021

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Soni Mishra Jan 18, 2021

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Soni Mishra Jan 18, 2021

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Jai Mata Di Jan 21, 2021

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**जय श्री राधे कृष्णा जी** **शुभरात्रि वंदन** *शाश्वत सबंध* एक समय की बात है एक सेठ जी थे वे बड़े ही अमीर व्यक्ति थे। *उनकी भगवान में बहुत श्रद्धा थी। *उनकी कोई संतान नहीं थी।* लोगों ने उन्हें सुझाव दिया कि वो एक बालक को गोद ले ले ताकि अंत समय में उन्हें अग्नि देने के लिए उनका बेटा हो। हिन्दू रीति के अनुसार बेटा ही पिता को अग्नि देता है। *सेठ जी* ने ये सुझाव सुनने के बाद कहा कि, मुझे शारीरिक बेटे की आवश्यकता नहीं है। *कृष्ण ही मेरे बेटे हैं*। सेठ जी के पास *कुंजबिहारी जी विग्रह रूप में थे* जिन्हें वो प्यार से कुंजी बुलाते थे क्योंकि वो उन्हें अपना बेटा मानते थे। कुछ वर्षों बाद *सेठ जी का अंतिम समय आ गया और उन्होंने शरीर छोड़ दिया।* जब उन्हें अग्नि देने का समय आया तो लोग आपस में *एक-दूसरे से पुछने लगे कि, सेठ जी को अग्नि कौन देगा?* तभी वहां एक बालक आया। *उसने पीले रंग के वस्त्र पहने हुए थे।* उसने कहा कि, सेठ जी को अग्नि वो देगा। सभी उसे अग्नि देनी की सहमति दे देते हैं। अग्नि देने के बाद स्नान 🚿करना होता है तो *बालक वस्त्र पहन कर ही नदी में गोता लगाने कूद जाता है।* जब सभी लोग सेठ जी के घर आते हैं तो *वो देखते हैं कि, सेठ जी के कुंजबिहारी जी के वस्त्र भी पीले रंग के हैं जैसे वस्त्र वो बालक पहनकर आया था।* कुंज बिहारी जी के वस्त्र भी गीले हैं क्योंकि वो बालक भी वस्त्र पहनकर नदी में स्नान करने गया था तो *सब समझ जाते हैं कि कुंजबिहारी जी ही सेठ जी को अग्नि देने स्वयं आये थे।* *जब हमारा कृष्ण से शाश्वत सबंध स्थापित हो जाता है तब अन्य किसी सबंध की आवश्यकता ही नहीं पड़ती है।* ‌ ‌ जय श्री कुंजबिहारी ‌ 🌷जय श्री राधे राधे।🌷 🙏🙏

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Jai Mata Di Jan 20, 2021

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Amar jeet mishra Jan 21, 2021

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