M S Chauhan
M S Chauhan Dec 2, 2017

माँ की आशीर्वाद जग में चारो धाम से न्यारा है...

Audio - माँ की आशीर्वाद जग में चारो धाम से न्यारा है...

माँ का आशीर्वाद जग में चारो धाम से न्यारा है.. बहुत सुन्दर भजन है ।
एक बार जरूर सुनिये जी।
और यदि आपको अच्छा लगे तो
अपनों को शेयर कीजिए जी

+299 प्रतिक्रिया 27 कॉमेंट्स • 559 शेयर

कामेंट्स

M S Chauhan Dec 3, 2017
शुभ प्रभात जी । जय माता रानी की । सादर नमन जी । बहुत धन्यबाद जी ।

M S Chauhan Dec 3, 2017
शुभ प्रभात जी । सादर नमन जी । सधन्यबाद जी ।

Swami Lokeshanand May 23, 2019

देखो, मनुष्य के तीन बड़े दुर्धर्ष शत्रु हैं, काम, क्रोध और लोभ। "तात तीन अति प्रबल खल काम क्रोध अरु लोभ" सूर्पनखा काम है, ताड़का क्रोध और मंथरा लोभ है। ताड़का पर प्रहार रामजी ने किया, मंथरा पर शत्रुघ्नजी ने, सूर्पनखा पर लक्षमणजी ने। उनका असली चेहरा पहचानते ही, किसी को मारा गया, किसी को सुधारा गया, एक को भी छोड़ा नहीं गया। संकेत है कि, सावधान साधक, कैसी भी वृत्ति उठते ही, तुरंत पहचान ले, कि कौन वृत्ति साधन मार्ग में मित्र है और कौन शत्रु। शत्रु पक्ष की वृत्ति का, विजातीय वृत्ति का, आसुरी वृत्ति का, उसे जानते ही, बिना अवसर दिए, बिना एक पल भी गंवाए, तुरंत यथा योग्य उपाय करना ही चाहिए। एक और विशेष बात है, ये कामादि प्रथम दृष्ट्या किसी आवरण में छिप कर ही वार करते हैं, कभी कर्तव्य बन कर, कभी सुंदर बन कर, सुखरूप बनकर, आवश्यकता बनकर, मजबूरी बनकर आते हैं। सबके सामने आते हैं, कच्चा साधक उलझ जाता है, सच्चा साधक सुलझ जाता है। अभी अभी लक्षमणजी के कारण सूर्पनखा का वास्तविक रूप प्रकट हुआ। अब रामजी मारीच का वास्तविक रूप प्रकट करेंगे। फिर सीताजी रावण का वास्तविक रूप प्रकट कर देंगी। भगवान खेल खेल में खेल खेलते हैं। एक तो उनकी यह लीला एक खेल है। इस खेल में तीन और खेल खेले गए। अयोध्या में खेल हुआ गेंद का, रामजी हार गए, भरतजी को जिता दिया। चित्रकूट में खेल हुआ, अयोध्या को गेंद बनाया गया, संदेह हार गया, स्नेह जीत गया। आज पंचवटी में भी एक खेल खेला जा रहा है, यहाँ सूर्पनखा को गेंद बनाया गया है, वासना हार रही है, उपासना जीत रही है। "देखो ठुकराई जाती है पंचवटी में इक बाला। भैया दो राजकुमारों ने उसको गेंद बना डाला॥ दुनिया में दुनियावालों को जो ठोकर रोज लगाती है। वो राम और रामानुज के पैरों की ठोकर खाती है॥" आप के पास भी सूर्पनखा आए तो ठोकर से ही स्वागत करना। अब विडियो देखें- सूर्पनखा निरूपण https://youtu.be/AMqSUheFr2c

+6 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 30 शेयर

+250 प्रतिक्रिया 21 कॉमेंट्स • 167 शेयर

+48 प्रतिक्रिया 7 कॉमेंट्स • 75 शेयर

+591 प्रतिक्रिया 106 कॉमेंट्स • 1052 शेयर

🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉 *ऊँ की ध्वनि का महत्व जानिये* एक घडी,आधी घडी,आधी में पुनि आध,,,,,,, तुलसी चरचा राम की, हरै कोटि अपराध,,,,,,।। 1 घड़ी= 24मिनट 1/2घडी़=12मिनट 1/4घडी़=6 मिनट *क्या ऐसा हो सकता है कि 6 मि. में किसी साधन से करोडों विकार दूर हो सकते हैं।* उत्तर है *हाँ हो सकते हैं* वैज्ञानिक शोध करके पता चला है कि...... 👉सिर्फ 6 मिनट *ऊँ* का उच्चारण करने से सैकडौं रोग ठीक हो जाते हैं जो दवा से भी इतनी जल्दी ठीक नहीं होते......... 👉 छः मिनट ऊँ का उच्चारण करने से मस्तिष्क मै विषेश वाइब्रेशन (कम्पन) होता है.... और औक्सीजन का प्रवाह पर्याप्त होने लगता है। 👉कई मस्तिष्क रोग दूर होते हैं.. स्ट्रेस और टेन्शन दूर होती है,,,, मैमोरी पावर बढती है..। 👉लगातार सुबह शाम 6 मिनट ॐ के तीन माह तक उच्चारण से रक्त संचार संतुलित होता है और रक्त में औक्सीजन लेबल बढता है। 👉रक्त चाप , हृदय रोग, कोलस्ट्रोल जैसे रोग ठीक हो जाते हैं....। 👉विशेष ऊर्जा का संचार होता है ......... मात्र 2 सप्ताह दोनों समय ॐ के उच्चारण से 👉घबराहट, बेचैनी, भय, एंग्जाइटी जैसे रोग दूर होते हैं। 👉कंठ में विशेष कंपन होता है मांसपेशियों को शक्ति मिलती है..। 👉थाइराइड, गले की सूजन दूर होती है और स्वर दोष दूर होने लगते हैं..। 👉पेट में भी विशेष वाइब्रेशन और दबाव होता है....। एक माह तक दिन में तीन बार 6 मिनट तक ॐ के उच्चारण से। 👉पाचन तन्त्र , लीवर, आँतों को शक्ति प्राप्त होती है, और डाइजेशन सही होता है, सैकडौं उदर रोग दूर होते हैं..। 👉उच्च स्तर का प्राणायाम होता है, और फेफड़ों में विशेष कंपन होता है..। 👉फेफड़े मजबूत होते हैं, स्वसनतंत्र की शक्ति बढती है, 6 माह में अस्थमा, राजयक्ष्मा (T.B.) जैसे रोगों में लाभ होता है। 👉आयु बढती है। ये सारे रिसर्च (शोध) विश्व स्तर के वैज्ञानिक स्वीकार कर चुके हैं। *👉जरूरत है छः मिनट रोज करने की....।* *🙏नोट:- ॐ का उच्चारण लम्बे स्वर में करें ।।* हर हर महादेव जय शिव शंकर 🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉

+29 प्रतिक्रिया 12 कॉमेंट्स • 94 शेयर
Geeta Sharma May 22, 2019

+267 प्रतिक्रिया 76 कॉमेंट्स • 170 शेयर

+73 प्रतिक्रिया 11 कॉमेंट्स • 60 शेयर

+281 प्रतिक्रिया 25 कॉमेंट्स • 611 शेयर

*" मंदिर का घंट* *"स्टॅटिक डिस्चार्ज यंत्र"* किसी भी मंदिर में प्रवेश करते समय आरम्भ में ही एक बड़ा घंटा बंधा होता है। मंदिर में प्रवेश करने वाला प्रत्येक भक्त पहले घंटानाद करता है और मंदिर में प्रवेश करता है। क्या कारण है इसके पीछे? इसका एक वैज्ञानिक कारण है.. जब हम बृहद घंटे के नीचे खड़े होकर सर ऊँचा करके हाथ उठाकर घंटा बजाते हैं, तब प्रचंड घंटानाद होता है। यह ध्वनि 330 मीटर प्रति सेकंड के वेग से अपने उद्गम स्थान से दूर जाती है, ध्वनि की यही शक्ति कंपन के माध्यम से प्रवास करती है। आप उस वक्त घंटे के नीचे खडे़ होते हैं। अतः ध्वनि का नाद आपके सहस्रारचक्र (ब्रम्हरंध्र,सिर के ठीक ऊपर) में प्रवेश कर शरीरमार्ग से भूमि में प्रवेश करता है। यह ध्वनि प्रवास करते समय आपके मन में (मस्तिष्क में) चलने वाले असंख्य विचार, चिंता, तनाव, उदासी, मनोविकार.. इन समस्त नकारात्मक विचारों को अपने साथ ले जाती हैं, और आप निर्विकार अवस्था में परमेश्वर के सामने जाते हैं। तब आपके भाव शुद्धतापूर्वक परमेश्वर को समर्पित होते हैं। व घंटे के नाद की तरंगों के अत्यंत तीव्र के आघात से आस-पास के वातावरण के व हमारे शरीर के सूक्ष्म कीटाणुओं का नाश होता है, जिससे वातावरण मे शुद्धता रहती है, हमें स्वास्थ्य लाभ होता है। इसीलिए मंदिर मे प्रवेश करते समय घंटानाद अवश्य करें, और थोड़ा समय घंटे के नीचे खडे़ रह कर घंटानाद का आनंद अवश्य लें। आप चिंतामुक्त व शुचिर्भूत बनेगें। आप का मस्तिष्क ईश्वर की दिव्य ऊर्जा ग्रहण करने हेतु तैयार होगा। ईश्वर की दिव्य ऊर्जा व मंदिर गर्भ की दिव्य ऊर्जाशक्ति आपका मस्तिष्क ग्रहण करेगा। आप प्रसन्न होंगे और शांति मिलेगी, आत्म जागरण,आत्म ज्ञान और दिव्यजीवन के परम आनंद की अनुभूति के लिये घंटानाद अवश्य करें । 🙏🙏 राधे राधे राधे राधे राधे राधे 🙏🙏 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

+9 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 41 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB