*🌸..."जय श्री #कृष्ण"...🌸* *🌸... "श्री कृष्ण" के ६४ गुणवर्णन...🌸* *"श्री कृष

*🌸..."जय श्री #कृष्ण"...🌸*    *🌸... "श्री कृष्ण" के ६४  गुणवर्णन...🌸*                 *"श्री कृष

*🌸..."जय श्री #कृष्ण"...🌸*

*🌸... "श्री कृष्ण" के ६४ गुणवर्णन...🌸*

*"श्री कृष्ण"* भगवान ""श्री विष्णु"* के अवतार हैं. जब-जब इस पृथ्वी पर असुर एवं राक्षसों के पापों का आतंक व्याप्त होता है तब-तब भगवान "श्री विष्णु" किसी न किसी रूप में अवतरित होकर पृथ्वी के भार को कम करते हैं. अवतारों में उनका सबसे महत्वपूर्ण अवतार. "श्री कृष्ण" का ही है. यह अवतार उन्होंने वैवस्वत मन्वन्तर के अट्ठाईसवें द्वापर में "श्री कृष्ण" के रूप में देवकी के गर्भ से मथुरा के कारागर में लिया था.
*"ब्रह्मा, विष्णु तथा शिव"* -प्रभृत्ति देवता जिनके चरण कमलों का ध्यान करते थे, ऐसे "श्री कृष्ण" का गुणानुवाद अत्यंत पवित्र है। "श्री कृष्ण" से ही प्रकृति उत्पन्न हुई। सम्पूर्ण प्राकृतिक पदार्थ, प्रकृति के कार्य स्वयं श्री कृष्ण ही थे। "श्री कृष्ण" ने इस पृथ्वी से अधर्म को जड़मूल से उखाड़कर फेंक दिया और उसके स्थान पर धर्म को स्थापित किया। समस्त देवताओं में "श्री कृष्ण" ही ऐसे थे जो इस पृथ्वी पर सोलह कलाओं से पूर्ण होकर अवतरित हुए.

*🙏🏼.....गुण.....🙏🏼*

*भक्तिरसामृतसिन्धु में भगवान् "श्री कृष्ण" के ६४ गुण बताये गए हैं जो इस प्रकार हैं -*

(१) सम्पूर्ण शरीर का सुन्दर स्वरूप

(२)समस्त शुभ गुणों से अंकित

(३) अतिव रूचिर

(४)तेजवान

(५) बलवान

(६) नित्य युवा

(७) अद्भुत भाषाविद्

(८) सत्यवादी

(९) मधुर भाषी

(१०) वाक् पटु

(११) सुपण्डित

(१२)अत्यधिक बुद्धिमान्

(१३) प्रतिभावान्

(१४) विदग्ध

(१५) अतिव चतुर

(१६) दक्ष

(१७) कृतज्ञ

(१८) दृढ़संकल्प

(१९) काल तथा परिस्थियों के कुशल निर्णायक

(२०) वेदों या शास्त्रों के आधार पर देखने एवं बोलने वाले

(२१) पवित्र

(२२) आत्मसंयमी

(२३) स्थिर

(२४) सहिष्णु

(२५) क्षमावान्

(२६) गम्भीर

(२७) धैर्यवान्

(२८) समदृष्टि रखने वाले

(२९) उदार

(३०) धार्मिक

(३१) शूरवीर

(३२) दयालु

(३३) सम्मान करने वाले

(३४) भद्र

(३५) विनयी

(३६) लज्जावान्

(३७) शरणागत पालक

(३८) सुखी

(३९) भक्तों के हितैषी

(४०) प्रेमवश्य

(४१) सर्वमंगलमय

(४२) परम शक्तिमान्

(४३) परमयशस्वी

(४४) लोकप्रिय

(४५) भक्तों का पक्षपात करने वाले

(४६) समस्त स्त्रियों के लिए अत्यधिक आकर्षक

(४७) सर्व आराध्य

(४८) सर्व सम्पन्न

(४९) सर्व सम्मान्य

(५०) परम नियंता ।

भगवान् में ये पचास गुण समुद्र की अगाधता के समान पाये जाते हैं । दूसरे शब्दों , उनके गुणों की सीमा अचिंत्य है ।🙏🏼

भगवान् के अंश रुप में , व्यष्टि जीवात्माओं में भी ये सभी गुण पाये जाते हैं , इसके अतिरिक़्त कुछ अन्य दिव्य गुण भी हैं जिनका वर्णन पद्म-पुराण में "शिवजी ने पार्वती" से किया है और कुछ श्रीमद्भागवातम् के प्रथम स्कन्ध में पृथ्वी देवी तथा धर्म की वार्ता के प्रसंग में आये हैं । उसमें कहा गया है कि " जो लोग महापुरुष बनना चाहते हैं उन्हें निम्न लिखित गुणों से विभूषित होना चाहिये
सत्यवादिता ,स्वच्छता , दया ,दृढ़ - प्रतिज्ञता , त्याग , शांतिप्रियता , सरलता , इन्द्रिय निग्रह , मानसिक संतुलन , तप, समता, सहनशीलता,शांती,विद्वत्ता, ज्ञान, विरक्ति , ऐश्वर्य,वीरता प्रभाव , शक्ति. स्मृति, स्वतन्त्रता, चातुर्य ,कांती धीरज , कोमलता, विदग्धता, भद्रता , शालीनता , संकल्प ,सर्वज्ञान सम्पन्नता , समुचित कार्यान्वयन , भोग की सारी वस्तुओं का स्वामित्व, गम्भीरता, स्थिरता, आज्ञाकारिता, यश , आदरशीलता तथा मिथ्या अंहकार का अभाव ।
जो लोग महान बनना चाहते हैं वे इन गुणों के बिना नहीं बन सकते , अतएव यह निश्चित है कि ये गुण भगवान् "श्री कृष्ण" में अवश्य पाये जाते हैं ।

उपर्युक्त पचास गुणों के अतिरिक्त "भगवान् कृष्ण" में पांच गुण और भी गुण पाये जाते जाते हैं जो कभी-कभी साक्षात् ब्रह्मा और शिवजी में भी अंशत: प्रकट होते हैं ये दिव्यगुण हैं....🙏🏼

(५१) परिवर्तन रहित

(५२) सर्वज्ञ

(५३) चिर नूतन

(५४) सच्चिदानंद(सदैव नित्यआनन्दमय शरीरवाले)

(५५)समस्त योग सिद्धियों से युक्त ।

"श्री कृष्ण" में पांच गुण और भी होते हैं जो नारयण के शरीर में प्रकट होते हैं और ये हैं....🙏🏼

(५६) वे अचिंत्य शक्तिमय हैं..

(५७) उनके शरीर से असंख्य ब्रह्माण्ड उत्पन्न होते हैं..

(५८) समस्त अवतारों के उद्गम वे ही हैं..

(५९) वे अपने द्वारा मारे हुए शत्रुओं को भी मुक्ति देंने वाले हैं..

(६०) वे मुक्तात्माओं के लिए आकर्षक हैं ।

ये सारे गुण भगवान् "श्री कृष्ण" के साकार स्वरूप में अद्भूत ढंग से प्रकट होते हैं । इन साठ दिव्य गुणों के अतिरिक्त "श्री कृष्ण"में चार और भी गुण पाये जाते हैं जो देवताओं या जीवों में तो क्या ,स्वयं नारायण रूप में भी नहीं होते । ये गुण हैं.....

(६१) वे अद्भुत लीलाओं के कर्ता हैं ( विषेकर उनकी बाल लीलाएं )

(६२) वे अद्भुत भगवत् से युक्त भक्तों द्वारा घिरे रहते हैं

(६३) वे अपनी वंशी से सारे ब्रह्माण्डों से सारे जीवों को आकृष्ट कर सकते हैं

(६५) उनका रूप सौंन्दर्य अद्भुत है जो सारी सृष्टि में अद्वितिय है।

इन चार असाधारण गुणों को उपर्युक्त साठ गुणों में जोडने पर "कृष्ण" में कुल चौसठ गुण हो जाते हैं......🙏🏼

*🙏🏼🌸..श्री कृष्ण: शरणं मम्:..🌸🙏🏼*
*🙏🏼🌸।। कृष्णम् वन्दे जगद्गुरू।। 🌸🙏🏼*

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कामेंट्स

Bhomaram Panwar May 21, 2017
एक तरफ आप कह रहे की कृष्ण विष्णु अवतार है।दूसरी तरफ आप कहते है की ब्रह्म विष्णु शिव इनके चरणों में ध्यान लगाते है।विष्णु अवतार यानि विष्णु की शक्ति लेकर कृष्ण वाली आत्मा आई।तो विष्णु बड़े हुए ।फिर विष्णु कृष्ण के चरणों में ध्यान कैसे लगाते है।दूसरी बात आपजी कहते हो सारी सर्ष्टि की रचनाकार कृष्ण है जबकि वेद और गीताजी के अनुसार इस सर्ष्टि के रचियता परमात्मा अविनाशी हैअजर अमर है।जो कभी जन्म व् मरता नही है।जबकि आपके अनुसार कृष्ण देवकिंके गर्भ से पैदा हुए। आपका ज्ञान अधूरा है इस असख्य ब्रमांड के रचयता कौन है।प्रमाण सहित जानने के लियें देखे साधना चैनल पर शाम 7:40 से8:40 तक ईश्वर टीवी पर 9:40 से सतलोक आश्रम न्यूज चैनल पर जरूर देखे

Mukesh Kumar May 22, 2017
जय श्री राधेकृष्ण

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Ragni Dhiwar Apr 6, 2020

#25_दिन... #25_सबक़ वास्तव में वह सत्य जो मैंने लॉकडाऊन के दौरान सीखा। 1. आज अमेरिका अग्रणी देश नहीं है। 2. चीन कभी विश्व कल्याण की नहीं सोच सकता 3. यूरोपीय उतने शिक्षित नहीं जितना उन्हें समझा जाता था। 4. हम अपनी छुट्टियॉ बिना यूरोप या अमेरिका गये भी आनन्द के साथ बिता सकते हैं। 5. भारतीयों की रोग प्रतिरोधक क्षमता शेष विश्व के लोगों से बहुत ज्यादा है। 6. कोई पादरी, पुजारी, ग्रन्थी,मौलवी या ज्योतिषी एक भी रोगी से नहीं बचा सका। 7. स्वास्थ्य कर्मी,पुलिस कर्मी, प्रशासन कर्मी ही असली हीरो हैं ना कि क्रिकेटर ,फिल्मी सितारे व फुटबाल प्लेयर । 8. बिना उपभोग के विश्व में सोना-चॉदी व डीज़ल-पेट्रोल का कोई महत्व नही है । 9. पहली बार पशुओं व परिन्दों को लगा कि यह संसार उनका भी है। 10. तारे वास्तव में टिमटिमाते हैं,यह विश्वास महानगरों के बच्चों को पहली बार हुआ। 11. विश्व के अधिकतर लोग अपना कार्य घर से भी कर सकते हैं। 12. हम और हमारी सन्तान बिना 'जंक फूड' के भी जिन्दा रह सकते है। 13. एक साफ-सुथरा-श्रेष्ठ व स्वच्छ-सहज-सरल जीवन जीना कोई कठिन कार्य नहीं है। 14. भोजन पकाना केवल स्त्रियां ही नहीं जानती,मौक़ा या मजबूरी पुरुषों को भी रसोई तक ले आती है । 15. मीडिया भी सकारात्मक भूमिका निभा सकता है और वाकई में लोकतंत्र का चौथा स्तंभ अभी मजबूती से खड़ा है जो सरकार और देश के नागरिकों को अच्छे बुरे का आईना दिखाता हैं, समय समय पर। 16. अभिनेता केवल मनोरंजनकर्ता हैं,जीवन में वास्तविक नायक नहीं। इनको फॉलो करना समझदारी नहीं बेवकूफी हैं। 17.भारतीय नारी कि वजह से ही घर मंदिर बनता है। 18. पैसे की कोई वैल्यू नही है क्योंकि आज दाल-रोटी के अलावा क्या कर सकते हैं 19. कुछ भारतीय अमीरों मे मानवता कूट-कूट कर भरी हुई है , कुछ कृतग्नो को छोड़कर आज देश का उद्योगपति देश के साथ खड़ा हैं। 20. विकट और संकटकालीन परिस्थिति को सही तरीक़े से भारतीय ही संभाल सकता है, ये क्षमता पुराने तरीके से की गई परवरिश का ही नतीजा है, जिसमे समय समय पर कुटाई और हर मांग को पूरी ना करना भी जिंदगी का पाठ सीखाने का एक तरीका था। 21. सामूहिक परिवार एकल परिवार से अच्छा होता है, आज सामूहिक परिवार ज्यादा आंनद से रह रहे हैं पारिवारिक मूल्यों के साथ। 22. गरीब तबके के लोग भी मदद के लिए जो कुछ है लुटाने को तैयार है, यह उनके राष्ट्र प्रेम को दर्शाता है। 23. आज सम्पूर्ण भारतवर्ष एकजुट होकर लड़ रहा है (कुछ जमाती जाहिलो को छोड़कर) 24. बहुत से अभिभावकों को पहली बार अपने बच्चो की छुपी हुई प्रतिभाओ का अहसाह हुआ है । 25. प्रकृति एवम प्राकृतिक संसाधनों का महत्व ज्यादातर लोगों को इस समय समझ आया है । 🌹🌹🌹 बुरा वक्त मानव और मानवता को और निखारता है।। कोरोना के दौर में कोई पैसे की बात नहीं कर रहा है, बल्कि लोग एक दूसरे की मदद के लिए आगे आ रहे हैं एक तरह से देखा जाए तो कोरोना ने हमें इंसानियत का पाठ पढ़ाया है, और पैसे के पीछे ना भागने की सलाह दी है। 🙏🙏🙏🙏🙏

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krishna Apr 6, 2020

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Komal dagar Apr 6, 2020

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Harish K Sharma Apr 6, 2020

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sunita Sharma Apr 6, 2020

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Arun Vishwakarma Apr 6, 2020

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chandarkala Apr 6, 2020

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