Jasbir Singh nain
Jasbir Singh nain Nov 19, 2021

रोहिणी व्रत शुभ प्रभात जी 🪔🪴🙏🙏 जय बजरंगबली 🙏🙏 20 नवम्बर, 2021 (शनिवार) जैन समुदाय का सबसे खास व्रत रोहिणी व्रत होता है। आज के दिन जैन समुदाय के लोग रोहिणी व्रत करते हैं। इस व्रत का महत्व जैन समुदाय के लिए अत्याधिक माना गया है। यह व्रत रोहिणी नक्षत्र के दिन किया जाता है। यही कारण है कि इसे रोहिणी व्रत कहा जाता है। व्रत के पारण की बात करें तो यह तब किया जाता है जब रोहिणी नक्षत्र के समाप्त होता है और मार्गशीर्ष नक्षत्र आता है। हर वर्ष 12 रोहिणी व्रत आते हैं। मान्यता है कि इस व्रत का पालन 3, 5 या 7 वर्षों तक लगातार किया जाता है। अगर उचित अवधि की बात करें तो यह 5 वर्ष और 5 महीने है। इस व्रत का समापन उद्यापन द्वारा ही किया जाता है। यह व्रत पुरुष और स्त्रियां दोनों कर सकते हैं। हालांकि, स्त्रियों के लिए यह व्रत अनिवार्य माना गया है। रोहिणी व्रत महत्व जैन समुदाय की मान्यताओं के अनुसार इस व्रत का विशेष फल प्राप्त होता है। इस व्रत को करने से आत्मा के विकार दूर होते हैं। रोहिणी व्रत कर्म बंधन से छुटकारा दिलाने में सहायक होता है। रोहिणी व्रत पूजा विधि इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठ जाना चाहिए और घर की साफ सफाई भी अच्छे से कर लेनी चाहिए। इसके बाद सभी नित्यकर्मों से निवृत्त होकर स्नानादि कर घर की साफ-सफाई करनी चाहिए। गंगाजल युक्त पानी से स्नान-ध्यान करें और फिर व्रत का संकल्प लें। फिर आमचन कर अपने आप को शुद्ध करें। इसके बाद सबसे पहले सूर्य भगवान को जल का अर्घ्य दें। इस व्रत के दौरान जैन धर्म में रात का भोजन करने की मनाही होती है। ऐसे में इस व्रत को अगर आप कर रहे हैं तो आपको फलाहार सूर्यास्त से पूर्व कर लेना चाहिए। रोहिणी व्रत की पौराणिक कथा प्राचीन समय में चंपापुरी नगर में राजा माधवा और रानी लक्ष्‍मीपति रहते थे। उनके उनके 7 पुत्र और एक पुत्री रोहिणी थी। जब राहणी बड़ी हुई तो राजा ने निमित्‍तज्ञानी से पूछा कि मेरी पुत्री का वर कौन होगा? तो उन्‍होंने बताया कि आपकी पुत्री का विवाह हस्तिनापुर के राजकुमार अशोक के साथ होगा। यह सुनकर राजा ने स्‍वयंवर का आयोजन किया, जिसमें राजकुमार अशोक भी आए और रोहणी ने राजकुमार अशोक के गले में वरमाला डाली और दोनों का विवाह हो गया। एक दिन हस्तिनापुर में चारण मुनिराज पधारे थे तब राजा अपने प्रियजनों के साथ उनके दर्शन के लिए गए और उनके धर्म उपदेश सुने। इसके पश्‍चात राजा ने मुनिराज से पूछा कि मेरी रानी इतनी शांतचित्त क्‍यों है? तब गुरुवर ने कहा कि इसी नगर में वस्‍तुपाल नाम का राजा हुआ करता था और उसका धनमित्र नामक एक मित्र था। उस धनमित्र की एक कन्या हुई जिसके शरीर से हमेशा ही दुर्गंध आती रहती थी और यह सोच कर वह चिंतित होता था कि उसकी कन्या से कौन विवाह करेगा। धनमित्र ने धन का लोभ देकर अपने मित्र के पुत्र श्रीषेण से उसका विवाह कर दिया, लेकिन अत्‍यंत दुर्गंध के कारण वह दुर्गंधा को छोड़ कर चला गया। उसी समय अमृतसेन मुनिराज विहार करते हुए नगर में आए तो धनमित्र अपनी पुत्री दुर्गंधा के साथ वंदना करने गया और मुनिराज से पुत्री के भविष्य के बारे में पूछा। उन्‍होंने बताया कि गिरनार पर्वत के निकट एक नगर में राजा भूपाल राज्‍य करते थे। उनकी सिंधुमती नाम की रानी थी। एक दिन राजा, रानी सहित वनक्रीड़ा के लिए चले, सो मार्ग में मुनिराज को देखकर राजा ने रानी से घर जाकर मुनि के लिए आहार व्यवस्था करने को कहा। राजा की आज्ञा से रानी चली तो गई, परंतु क्रोधित होकर उसने मुनिराज को कड़वी तुम्‍बी का आहार दिया जिससे मुनिराज को अत्‍यंत वेदना हुई और तत्‍काल उन्‍होंने प्राण त्‍याग दिए। जब राजा को पता चला कि उनकी रानी के कारण ऐसा हुआ है तो उन्होंने अपनी रानी को नगर से निकाल दिया और रानी को किए पाप के कारण शरीर में कोढ़ उत्‍पन्‍न हो गया। अत्‍यधिक वेदना व दु:ख को भोगते हुए वो रौद्र भावों से मरकर नर्क में गई। वहां अनंत दु:खों को भोगने के बाद पशु योनि में उत्‍पन्न और फिर तेरे घर दुर्गंधा कन्‍या हुई। तब धनमित्र ने पूछा स्वामी मुझे इससे मुक्ति का उपाय बताएं। तब स्वामी ने कहा कि यदि परिवार के सभी सदस्य रोहिणी व्रत पालन करें तो इससे मुक्ति मिल सकती है। यह व्रत पांच साल और पांच मास लगातार हर महीने करना होगा। इसके बाद सभी ने ऐसा ही किया और दुर्गंधा के शरीर से बदबू आना बंद हो गई। दुर्गंधा ने श्रद्धापूर्वक व्रत धारण किया और आयु के अंत में संन्यास सहित मरण कर प्रथम स्‍वर्ग में देवी हुई। वहां से आकर तेरी परमप्रिया रानी हुई।

रोहिणी व्रत शुभ प्रभात जी 🪔🪴🙏🙏 जय बजरंगबली 🙏🙏
20 नवम्बर, 2021 (शनिवार)
जैन समुदाय का सबसे खास व्रत रोहिणी व्रत होता है। आज के दिन जैन समुदाय के लोग रोहिणी व्रत करते हैं।



इस व्रत का महत्व जैन समुदाय के लिए अत्याधिक माना गया है। यह व्रत रोहिणी नक्षत्र के दिन किया जाता है। यही कारण है कि इसे रोहिणी व्रत कहा जाता है। व्रत के पारण की बात करें तो यह तब किया जाता है जब रोहिणी नक्षत्र के समाप्त होता है और मार्गशीर्ष नक्षत्र आता है। हर वर्ष 12 रोहिणी व्रत आते हैं। मान्यता है कि इस व्रत का पालन 3, 5 या 7 वर्षों तक लगातार किया जाता है। अगर उचित अवधि की बात करें तो यह 5 वर्ष और 5 महीने है। इस व्रत का समापन उद्यापन द्वारा ही किया जाता है। यह व्रत पुरुष और स्त्रियां दोनों कर सकते हैं। हालांकि, स्त्रियों के लिए यह व्रत अनिवार्य माना गया है।



रोहिणी व्रत महत्व
जैन समुदाय की मान्यताओं के अनुसार इस व्रत का विशेष फल प्राप्त होता है। इस व्रत को करने से आत्मा के विकार दूर होते हैं। रोहिणी व्रत कर्म बंधन से छुटकारा दिलाने में सहायक होता है।



रोहिणी व्रत पूजा विधि
इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठ जाना चाहिए और घर की साफ सफाई भी अच्छे से कर लेनी चाहिए। इसके बाद सभी नित्यकर्मों से निवृत्त होकर स्नानादि कर घर की साफ-सफाई करनी चाहिए। गंगाजल युक्त पानी से स्नान-ध्यान करें और फिर व्रत का संकल्प लें। फिर आमचन कर अपने आप को शुद्ध करें। इसके बाद सबसे पहले सूर्य भगवान को जल का अर्घ्य दें। इस व्रत के दौरान जैन धर्म में रात का भोजन करने की मनाही होती है। ऐसे में इस व्रत को अगर आप कर रहे हैं तो आपको फलाहार सूर्यास्त से पूर्व कर लेना चाहिए।

रोहिणी व्रत की पौराणिक कथा
प्राचीन समय में चंपापुरी नगर में राजा माधवा और रानी लक्ष्‍मीपति रहते थे। उनके उनके 7 पुत्र और एक पुत्री रोहिणी थी। जब राहणी बड़ी हुई तो राजा ने निमित्‍तज्ञानी से पूछा कि मेरी पुत्री का वर कौन होगा? तो उन्‍होंने बताया कि आपकी पुत्री का विवाह हस्तिनापुर के राजकुमार अशोक के साथ होगा। यह सुनकर राजा ने स्‍वयंवर का आयोजन किया, जिसमें राजकुमार अशोक भी आए और रोहणी ने राजकुमार अशोक के गले में वरमाला डाली और दोनों का विवाह हो गया।



एक दिन हस्तिनापुर में चारण मुनिराज पधारे थे तब राजा अपने प्रियजनों के साथ उनके दर्शन के लिए गए और उनके धर्म उपदेश सुने। इसके पश्‍चात राजा ने मुनिराज से पूछा कि मेरी रानी इतनी शांतचित्त क्‍यों है? तब गुरुवर ने कहा कि इसी नगर में वस्‍तुपाल नाम का राजा हुआ करता था और उसका धनमित्र नामक एक मित्र था। उस धनमित्र की एक कन्या हुई जिसके शरीर से हमेशा ही दुर्गंध आती रहती थी और यह सोच कर वह चिंतित होता था कि उसकी कन्या से कौन विवाह करेगा। धनमित्र ने धन का लोभ देकर अपने मित्र के पुत्र श्रीषेण से उसका विवाह कर दिया, लेकिन अत्‍यंत दुर्गंध के कारण वह दुर्गंधा को छोड़ कर चला गया। उसी समय अमृतसेन मुनिराज विहार करते हुए नगर में आए तो धनमित्र अपनी पुत्री दुर्गंधा के साथ वंदना करने गया और मुनिराज से पुत्री के भविष्य के बारे में पूछा। उन्‍होंने बताया कि गिरनार पर्वत के निकट एक नगर में राजा भूपाल राज्‍य करते थे। उनकी सिंधुमती नाम की रानी थी। एक दिन राजा, रानी सहित वनक्रीड़ा के लिए चले, सो मार्ग में मुनिराज को देखकर राजा ने रानी से घर जाकर मुनि के लिए आहार व्यवस्था करने को कहा। राजा की आज्ञा से रानी चली तो गई, परंतु क्रोधित होकर उसने मुनिराज को कड़वी तुम्‍बी का आहार दिया जिससे मुनिराज को अत्‍यंत वेदना हुई और तत्‍काल उन्‍होंने प्राण त्‍याग दिए।

जब राजा को पता चला कि उनकी रानी के कारण ऐसा हुआ है तो उन्होंने अपनी रानी को नगर से निकाल दिया और रानी को किए पाप के कारण शरीर में कोढ़ उत्‍पन्‍न हो गया। अत्‍यधिक वेदना व दु:ख को भोगते हुए वो रौद्र भावों से मरकर नर्क में गई। वहां अनंत दु:खों को भोगने के बाद पशु योनि में उत्‍पन्न और फिर तेरे घर दुर्गंधा कन्‍या हुई। तब धनमित्र ने पूछा स्वामी मुझे इससे मुक्ति का उपाय बताएं। तब स्वामी ने कहा कि यदि परिवार के सभी सदस्य रोहिणी व्रत पालन करें तो इससे मुक्ति मिल सकती है। यह व्रत पांच साल और पांच मास लगातार हर महीने करना होगा। इसके बाद सभी ने ऐसा ही किया और दुर्गंधा के शरीर से बदबू आना बंद हो गई।

दुर्गंधा ने श्रद्धापूर्वक व्रत धारण किया और आयु के अंत में संन्यास सहित मरण कर प्रथम स्‍वर्ग में देवी हुई। वहां से आकर तेरी परमप्रिया रानी हुई।

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कामेंट्स

dhruvwadhwani Nov 20, 2021
jai shree Ram jai shree Ram jai shree Ram jai shree Ram jai shree Ram jai shree Ram jai shree Ram jai shree Ram jai shree Ram jai shree Ram

dhruvwadhwani Nov 20, 2021
jai Bajrangbali jai bajrangbali jai bajrangbali jai bajrangbali jai bajrangbali jai bajrangbali jai bajrangbali jai bajrangbali jai bajrangbali jai bajrangbali

dhruvwadhwani Nov 20, 2021
om shanidevay namah om shanidevay namah om shanidevay namah om shanidevay namah om shanidevay namah

dhruvwadhwani Nov 20, 2021
Ram Bhakr Hanuman aur surya putar shanidev ki kripa se aapka din shubh mangalmai Ho

Janardan Mishra Nov 20, 2021
जय श्रीशनिदेव,जय बजरंगबली

Brajesh Sharma Nov 20, 2021
💥💘🙏🇮🇳🚩🌞🙏🇮🇳❤🙏🎋 राम सिया राम सिया राम जय जय राम श्री राम भक्त हनुमान लाल जी की जय ॐ नमः शिवाय.. हर हर महादेव 🚩🌞🎋💥❤🇮🇳🙏🚩🎋❤🇮🇳

Jasbir Singh nain Jan 17, 2022

पौष पूर्णिमा व्रत 17 जनवरी, 2022 (सोमवार) शुभ प्रभात जी 🪔🪴🙏🙏 हर माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि के अगले दिन पूर्णिमा मनाई जाती है। इस प्रकार पौष माह की पूर्णिमा 17 जनवरी 2022 को मनाई जाएगी। पूर्णिमा के दिन चन्द्रदेव पूर्ण आकार में होते हैं। इस दिन पूजा, जप, तप, स्नान, सूर्य अर्घ्य और दान से न केवल चंद्रदेव ही नहीं बल्कि भगवान श्रीहरि की भी कृपा बरसती है। पूर्णिमा और अमावस्या को पूजा और दान करने से व्यक्ति के समस्त पाप कट जाते हैं। सनातन शास्त्रों में पूर्णिमा के दिन पूर्णिमा व्रत और सत्यनारायण पूजा का विधान है। इस दिन साधक पवित्र नदियों में स्नान कर तिल तर्पण करते हैं, इससे पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन काशी, प्रयागराज और हरिद्वार में गंगा स्नान करना बेहद शुभ बताया जाता है। आइए अब जानते है पूर्णिमा तिथि का शुभ समय पौष पूर्णिमा तिथि - 17 जनवरी, 2022 पौष पूर्णिमा तिथि आरंभ - 17 जनवरी को रात 3:18 मिनट से। पौष पूर्णिमा तिथि समाप्त - 18 जनवरी सुबह 5:17 मिनट तक। उदया तिथि मान्य होती है, इसलिए पौष पूर्णिमा 17 जनवरी को ही मनाई जाएगी। वैदिक मान्यताओं अनुसार, पौष सूर्य देव का माह कहलाता है और इस मास सूर्य देव की आराधना करने से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है और पूर्णिमा चंद्रमा की तिथि है। अतः सूर्य और चंद्रमा का यह अद्भूत संगम पौष पूर्णिमा की तिथि को होता है। इस दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों के पूजन से मनोकामनाएं पूर्ण होती है और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती है। ऐसा कहा जाता है कि पौष मास के समय में किए जाने वाले धार्मिक कर्मकांड की पूर्णता पूर्णिमा पर स्नान करने से सार्थक होती है। आइए अब जानते है पौष पूर्णिमा के दिन की जाने वाली पूजा विधि के बारे में इस दिन प्रात: जल्दी उठकर घर की साफ़-सफाई करें। उसके बाद स्नान आदि करके व्रत का संकल्प लें। सर्वप्रथम भगवान सूर्य को ॐ नमो नारायणाय मंत्र का जाप करते हुए अर्घ्य और तिलांजलि दें। इसके लिए सूर्य के सामने खड़े होकर जल में तिल डालकर उसका तर्पण करें। फिर ठाकुर और नारायण जी की पूजा करें। भगवान को भोग में चरणामृत, पान, तिल, मोली, रोली, कुमकुम, फल, फूल, पंचगव्य, सुपारी, दूर्वा आदि अर्पित करें। अंत में आरती-प्रार्थना कर पूजा संपन्न करें। इसके बाद जरूरतमंदों और ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा दें। दान में तिल, गुड़, कंबल और ऊनी वस्त्र विशेष रूप से देने चाहिए। तो दोस्तो ये थी पूर्णिमा के दिन की जाने वाली पूजा विधि, आइए अब जानते है इस दिन किए जाने वाले धार्मिक आयोजन के बारे में संपूर्ण जानकारी। पौष पूर्णिमा पर देश के विभिन्न तीर्थ स्थलों पर स्नान और धार्मिक आयोजन होते हैं। पौष पूर्णिमा से तीर्थराज प्रयाग में माघ मेले का आयोजन शुरू होता है। इस धार्मिक उत्सव में स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक विद्वानों के अनुसार माघ माह के स्नान का संकल्प पौष पूर्णिमा पर लेना चाहिए। आइए जानते है कि इस दिन क्या करें और क्या नहीं पूर्णिमा के दिन चावल का दान करना शुभ होता है। चावल का संबंध चंद्रमा से होता है और पूर्णिमा के दिन चावल का दान करने से चंद्रमा की स्थिति कुंडली में मजबूत होती है। पूर्णिमा के दिन सफेद रंग की चीजों का दान करना चाहिए। इस दिन सत्यनारायण की कथा सुननी चाहिए और भगवान शिव की पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। आज के दिन महालक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए पीपल के पेड़ की पूजा करनी चाहिए। कहते हैं कि पीपल में मां लक्ष्मी का वास होता है। इसी के साथ इस दिन लहसुन, प्याज, मांस-मदिरा आदि का सेवन नहीं ना करें। इस दिन परिवार में सुख-शांति बनाकर रखें और घर पर आने वाले गरीब या जरुरतमंद को दान दें।

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*━━━━━━━ꕥ❈ꕥ❈ꕥ━━━━━━━* ┌──────────────────┐ █▓░ *༺श्रीगणेशाय नम:༻*░▓█ └──────────────────┘ *━━━━━━━ꕥ❈ꕥ❈ꕥ━━━━━━* *༺⚜❝दैनिक-पंचांग ❞⚜༻* *━━━━━━━ꕥ❈ꕥ❈ꕥ━━━━━━* _*🌷ꕥ❈दिनांक:-20-01-2022❈ꕥ🌷*_ *ꕥ श्रीमाधोपुर-पंचांग ꕥ* 🫐🫐🫐🫐🫐🫐🫐🫐🫐 🥎 तिथि द्वितीया 08:07:42 🥎 नक्षत्र आश्लेषा 08:24:44 🥎 करण : गर 08:07:42 वणिज 20:34:15 🥎 पक्ष कृष्ण 🥎 योग आयुष्मान 15:42:58 🥎 वार गुरूवार *🏀 सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ* 🥎 सूर्योदय 07:18:36 🥎 चन्द्रोदय 20:10:00 🥎 चन्द्र राशि कर्क - 08:24:44 तक 🥎 सूर्यास्त 17:58:49 🥎 चन्द्रास्त 09:01:59 🥎 ऋतु शिशिर *🏀 हिन्दू मास एवं वर्ष* 🥎 शक सम्वत 1943 प्लव 🥎 कलि सम्वत 5123 🥎 दिन काल 10:40:12 🥎 विक्रम सम्वत 2078 🥎 मास अमांत पौष 🥎 मास पूर्णिमांत माघ *🏀 शुभ समय* 🥎 अभिजित 12:17:22 - 13:00:03 *🏀 अशुभ समय* 🥎 दुष्टमुहूर्त : 10:52:01 - 11:34:41 15:08:05 - 15:50:46 🥎 कंटक 15:08:05 - 15:50:46 🥎 यमघण्ट 08:01:17 - 08:43:58 🥎 राहु काल 13:58:44 - 15:18:46 🥎 कुलिक 10:52:01 - 11:34:41 🥎 कालवेला या अर्द्धयाम 16:33:27 - 17:16:08 🥎 यमगण्ड 07:18:36 - 08:38:38 🥎 गुलिक काल 09:58:40 - 11:18:41 *🏀 दिशा शूल दक्षिण* *🏀 चौघड़िया मुहूर्त* 🥎शुभ 07:18:36 - 08:38:38 🥎रोग 08:38:38 - 09:58:40 🥎उद्वेग 09:58:40 - 11:18:41 🥎चल 11:18:41 - 12:38:43 🥎लाभ 12:38:43 - 13:58:44 🥎अमृत 13:58:44 - 15:18:46 🥎काल 15:18:46 - 16:38:47 🥎शुभ 16:38:47 - 17:58:49 🥎अमृत 17:58:49 - 19:38:45 🥎चल 19:38:45 - 21:18:42 🥎रोग 21:18:42 - 22:58:39 🥎काल 22:58:39 - 24:38:36 🥎लाभ 24:38:36 - 26:18:32 🥎उद्वेग 26:18:32 - 27:58:29 🥎शुभ 27:58:29 - 29:38:26 🥎अमृत 29:38:26 - 31:18:23 🫐🫐🫐🫐🫐🫐🫐🫐🫐 *पंचांग को फॉरवर्ड नहीं, शेयर करें।* 🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴 li.▬▭▬▭▬--▭▬▭▬▭▬.li 2️⃣0️⃣🕋0️⃣1️⃣🕋2️⃣2️⃣ li.▬▭▬▭▬--▭▬▭▬▭▬.li 🫐🫐🫐🫐🫐🫐🫐🫐🫐 ━━━━━━━ꕥ❈ꕥ❈ꕥ━━━━━━━ _*🪴🎀 📿जयश्री कृष्णा📿🎀🪴*_ ━━━━━━━ꕥ❈ꕥ❈ꕥ━━━━━━━ *ज्योतिषशास्त्री-सुरेन्द्र कुमार चेजारा व्याख्याता राउमावि होल्याकाबास निवास-श्रीमाधोपुर* 🫐🫐🫐🫐🫐🫐🫐🫐🫐 *━━━━━━━ꕥ❈ꕥ❈ꕥ━━━━━━━*

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PRABHAT KUMAR Jan 19, 2022

✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️ ✡️✡️✡️✡️✡️ *#ऊँ__गं__गणपते__नमः* ✡️✡️✡️✡️✡️ ✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️ *#सभी_आदरणीय_साथियों_को_नमस्कार_शुभ_रात्री* 🙏 ✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️ *हिन्दू संस्कृति में हर शुभ कार्य गणेशजी की पूजा के साथ प्रारम्भ होता है। इसके पीछे वास्तु भी काम करता है। क्योंकि कई वास्तु दोषों का ईलाज गणपति पूजा से ही हो जाता है ।* ✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️ *वास्तु पुरुष की प्रार्थना पर ब्रह्मजी ने वास्तुशास्त्र के नियमों की रचना की थी। यह मानव कल्याण के लिए बनाया गया था, इसलिए इनकी अनदेखी करने पर घर के सदस्यों को शारीरिक, मानसिक, आर्थिक हानि भी उठानी पड़ती है ।* ✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️ *अत: वास्तु देवता की संतुष्टि के लिए भगवान गणेश जी को पूजना बेहतर लाभ देगा। इनकी आराधना के बिना वास्तुदेवता को संतुष्ट नहीं किया जा सकता। बिना तोड़-फोड़ अगर वास्तु दोष को दूर करना चाहते हैं तो इन्हें आजमाएं ।* ✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️ *गणपति जी का वंदन कर वास्तुदोषों को शांत किए जाने में किसी प्रकार का संदेह नहीं होता है। मान्यता यह है कि नियमित गणेश जी की आराधना से वास्तु दोष उत्पन्न होने की संभावना बहुत कम होती है। इससे घर में खुशहाली आती है और तरक्की होती है ।* ✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️ *यदि घर के मुख्य द्वार पर एकदंत की प्रतिमा या चित्र लगाया गया हो तो उसके दूसरी तरफ ठीक उसी जगह पर गणेश जी की प्रतिमा इस प्रकार लगाए कि दोनों गणेशजी की पीठ मिली रहे। इस प्रकार से दूसरी प्रतिमा या चित्र लगाने से वास्तु दोषों का शमन होता है. भवन के जिस भाग में वास्तु दोष हो उस स्थान पर घी मिश्रित सिंदूर से स्वास्तिक दीवार पर बनाने से वास्तु दोष का प्रभाव कम होता है ।* ✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️ *घर या कार्यस्थल के किसी भी भाग में वक्रतुण्ड की प्रतिमा अथवा चित्र लगाए जा सकते हैं। किंतु प्रतिमा लगाते समय यह ध्यान अवश्य रखना चाहिए कि किसी भी स्थिति में इनका मुंह दक्षिण दिशा या नैर्ऋ त्य कोण में नहीं हो। इसका विपरीत प्रभाव होता है ।* ✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️ *घर में बैठे हुए गणेश जी तथा कार्यस्थल पर खड़े गणपति जी का चित्र लगाना चाहिए, किंतु यह ध्यान रखें कि खड़े गणेश जी के दोनों पैर जमीन का स्पर्श करते हुए हों। इससे कार्य में स्थिरता आने की संभावना रहती है ।* ✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️ *भवन के ब्रह्म स्थान अर्थात् केंद्र में, ईशान कोण एवं पूर्व दिशा में सुखकर्ता की मूर्ति अथवा चित्र लगाना शुभ रहता है। किंतु टॉयलेट अथवा ऐसे स्थान पर गणेशजी का चित्र नहीं लगाना चाहिए जहां लोगों को थूकने आदि से रोकना हो। यह गणेशजी के चित्र का अपमान होगा। सुख, शांति, समृद्धि की चाह रखने वालों के लिए घर में सफेद रंग के विनायक की मूर्ति, चित्र लगाना चाहिए ।* ✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️ *सर्व मंगल की कामना करने वालों के लिए सिंदूरी रंग के गणपति की आराधना अनुकूल रहती है। इससे शीघ्र फल की प्राप्ति होती है। विघ्नहर्ता की मूर्ति अथवा चित्र में उनके बाएं हाथ की ओर सूंड घुमी हुई हो इस बात का ध्यान रखना चाहिए। दाएं हाथ की ओर घुमी हुई सूंड वाले गणेश जी हठी होते हैं तथा उनकी साधना-आराधना कठिन होती है। शास्त्रों में कहा गाया है कि दाएं सूंड वाले गणपति देर से भक्तों पर प्रसन्न होते हैं ।* ✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️ *मंगल मूर्ति भगवान को मोदक एवं उनका वाहन मूषक अतिप्रिय है। अत: घर में चित्र लगाते समय ध्यान रखें कि चित्र में मोदक या लड्डू और चूहा अवश्य होना चाहिए। इससे घर में बरकत होती है। इस तरह आप भी बिना तोड़-फोड़ के गणपति पूजन के द्वारा से घर के वास्तुदोष को दूर कर सकते हैं ।* ✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️✡️ *#नोट : उक्त जानकारी सोशल मीडिया से ली गई है ।* 📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰 *( इस आलेख में दी गई जानकारियाँ धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित है, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है। )* 🎈🎈🎈🎈🎈🎈🎈🎈🎈🎈🎈🎈🎈🎈🎈🎈🎈🎈🎈

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Deepak Jan 19, 2022

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Ramesh agrawal Jan 19, 2022

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👍जीने की राह पुस्तक बिल्कुल निशुल्क मंगवाने के लिए नाम:- ...... पता, पिनकोड:- ....... मोबाइल नम्बर :-....... पुस्तक किस भाषा में चाहिए...... comment box में दें या इस whatsaap no. पर दीजिये 7509250415 कोई चार्ज नहीं है बिल्कुल #फ्री पुस्तक प्राप्त करें. नाम पता मोबाइल नंबर अगर आपका सही है तो इस पुस्तक को हम आप तक पहुंचाने की गारंटी लेते हैं. इस पुस्तक की डिलीवरी 30 दिन के अंदर अंदर कर दी जाती है, 1 से ज्यादा बार ओर्डर डालने वालों का ओर्डर केंसल हो जाता है हमको जन्म देने व मारने में किस प्रभु का स्वार्थ? हम सभी देवी- देवताओं की इतनी भक्ति करते हैं फिर भी दुखी क्यों हैं इन अनसुलझे सवालों का जवाब पाने के लिए पढ़िए पुस्तक "जीने की राह" यह धार्मिक पुस्तक 100% निशुल्क है कोई डिलीवरी चार्ज भी नहीं लगेगा । क्यों जिंदगी में दुख आता है?? हम न चाह कर में नशे में लिप्त रहते है।??? क्यों हमे नशे की लत लगती है?? क्यों परेशानी आती है हँसते खेलते परिवार में?? और भी बहुत से प्रश्नों को उत्तर जानना चाहोगे तो पढिये संत रामपाल जी महाराज जी द्वारा लिखित पुस्तक "जीने की राह" जिसमे है हर समस्या का समाधान तो देर किस बात की जल्दी अपना आर्डर कीजिये यदि आप अपना नाम पता मोबाइल नंबर गुप्त रखना चाहते हैं तो इस व्हाट्सएप नंबर- 7509250415 पर पुस्तक आर्डर करें. Free book with free Home dilevry

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Dheeraj Shukla Jan 19, 2022

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