मायमंदिर फ़्री कुंडली
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।। शुभ संध्या ।।

।। शुभ संध्या ।।

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कामेंट्स

Vinod Kumar May 26, 2019
Jai Jai Sita Ram Jai Jai Shree Ram Jai Jai Shree Ram Bhakt Hanuman Ji ki Jai Ho

Jitendra Dybey May 27, 2019
🌹🙏🌹 ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय🙏 सुबह की राम राम जी🙏🌹🌿🌷🌿🌹🌿🍁🌿🏵🌿🌹🌿🌷

,Kamala Maheshwari May 27, 2019
har har mahadev good , morning ji🌹👌🌹👌🌹👌🌹👌🌹👌🌹👌🌹👌

,Kamala Maheshwari May 27, 2019
ऊँनमःशिवाय ऊँनमःशिवाय, ऊँनमःशिवाय👌🌷👌🌷

🏵RAMESH TIRMAL🏵 May 27, 2019
🙏🌷NICE POST JI 🌷🙏HAR HAR MAHADEO 🙏🌷SHIV SHAMBHO AP KI SAB MANO KAMNA PURN KARE 🌷🙏RADHE RADHE JI 🙏🌷🕉

7seema May 29, 2019
जय बजरगबली की

Vinod Kumar May 29, 2019
Jai Jai Sita Ram Jai Jai Shree Ram Jai Jai Shree Ram Bhakt Hanuman Ji ki Jai Ho Ji

Amar Jeet Mishra Jun 24, 2019

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Gishi Harwansh Jun 24, 2019

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anita sharma Jun 24, 2019

🔔भगवान को पाने का तरीका🔔 भगवान को पाना आसान भी नहीं है और मुश्किल भी नहीं है। कितना अच्छा होता ना की जैसे संसार में हमे कुछ लेना है तो रुपये देकर खरीद लेते हैं। काश! ऐसा ही भगवान के साथ भी हो जाये। सच कहूँ तो भगवान को बिकने के लिए तैयार है लेकिन उन्हें खरीदने वाला कोई नहीं है। उनकी कीमत क्या है ? भगवान को पाने का सिर्फ एक और सिर्फ एक ही तरीका है। वो है प्रेम। जिसे आप भक्ति भी कह सकते हैं। प्रेम तीन प्रकार से होता है। व्यक्ति से, वस्तु से और परमात्मा से। व्यक्ति से तो आपने कभी ना कभी प्रेम किया होगा, और शायद करते भी होंगे। दूसरा वस्तु से, आजकल सभी करते हैं, अपने स्कूटर से, गाडी से, बाइक से और सबसे ज्यादा अपने स्मार्टफोन से। लेकिन ये सारा प्रेम बेकार हो जायेगा। आप परमात्मा से प्रेम कीजिये। आज जानते हैं प्रेम में कितनी ताकत हैं। शायद किसी भी चीज में नही हैं। श्री राधा रानी को आप देखिये। कृष्ण जी से प्रेम किया और भगवान आज राधा रानी के वश में हैं। अगर आप भगवान से प्रेम करते हैं तो आप सबसे प्रेम कीजिये। ऐसा प्रेम जिसमे कोई मांग नही हैं। जिसमे अपनी प्रेमी को सुख देना हैं सिर्फ। अपने सुख की कामना नहीं हैं। अगर अपने सुख की कामना हैं तो वह प्रेम नहीं हैं। वो स्वार्थ हैं। श्री राम चरितमानस में यही बात आती है, जो राम जी हैं ना उन्हें केवल प्रेम ही प्यारा है। जो जानना चाहता हो वो जान ले। एकदम सच बात है सबरी के बेर राम ने प्रेम में ही तो खाये थे। हमे कोई झूठे बेर खाने को दे तो क्या हम खाएंगे? कभी नही खाएंगे, लेकिन भगवान राम कुछ भी नही देखते यदि आपके अंदर प्रेमहै तो आप भगवान को आसानी से पा लोगे। एक बड़ी अच्छी बात आती है– हरि ब्यापक सर्बत्र समाना। प्रेम तें प्रगट होहिं मैं जाना॥ भगवान सब जगह समान रूप से व्यापक हैं, प्रेम से वे प्रकट हो जाते हैं। और ये बात भगवान भोले नाथ ने रामचरितमानस में देवताओं को कही है!

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netaji Jun 24, 2019

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Amar Jeet Mishra Jun 24, 2019

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Anju Mishra Jun 24, 2019

🚩🙏हर हर महादेव 🚩🙏 भारतीय की परंपराओं के वैज्ञानिक कारण 👉हाथ जोड़ना या नमस्ते करना - हमारे यहां किसी से मिलते समय या अभि‍वादन करते समय हाथ जोड़कर प्रणाम किया जाता है। इसे नमस्कार या नमस्ते करना कहते हैं जो सम्मान का प्रतीक होता है। लेकिन अभि‍वादन का यह तरीका भी वैज्ञानिक तर्कसंगत है।   हाथ जोड़कर अभि‍वादन करने के पीछे वैज्ञानिक तर्क है कि जब सभी उंगलियों के शीर्ष एक दूसरे के संपर्क में आते हैं तो उन पर दबाव पड़ता है। इस तरह से यह दबाव एक्यूप्रेशर का काम करता है। एक्यूप्रेशर पद्धति के अनुसार यह दबाव आंखों, कानों और दिमाग के लिए प्रभावकारी होता है। इस तरह से अभि‍वादन कर हम व्यक्त‍ि को हम लंबे समय तक याद रख सकते हैं। इसके साथ ही हाथ मिलाने के बजाय हाथ जोड़ने से हम कई तरह के संक्रमण से बच जाते हैं।  👉 चरण स्पर्श - हिन्दू धर्म में ईश्वर से लेकर बड़े-बुजुर्गों के पैर छूकर आशर्वाद लेने की परंपरा है, जिसे चरण स्पर्श करना कहते हैं। हर हिन्दू परिवार में संस्कार के रूप में बड़ों के पैर छूना सिखाया जाता है। दरअसल पैर छूना या चरण स्पर्श करना केवल झुककर अपनी कमर दुखाना नहीं है, बल्कि इसका संबंध ऊर्जा से है। वैज्ञानिक तर्क के अनुसार प्रत्येक मनुष्य के शरीर में मस्तिष्क से लेकर पैरों तक लगातार उर्जा का संचार होता है। इसे कॉस्मिक ऊर्जा कहा जाता है। इस तरह से जब हम किसी व्यक्ति के पैर छूते हैं, तो हम उससे ऊर्जा ले रहे होते हैं। सामने वाले के पैरों से ऊर्जा का प्रवाह हाथों के जरिए हमारे शरीर में होता है 👉 माथे पर तिलक लगाना - हिन्दू परंपरा अनुसार विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा-पाठ में माथे पर तिलक लगाया जाता है। माथे पर तिलक लगाना बहुत शुभ माना जाता है और इसके लिए खास तौर से कुमकुम अथवा सिंदूर का उपयोग किया जाता है। सुहागन महिलाओं के लिए तो कुमकुम सुहाग और सौंदर्य के प्रतीक के रूप में जीवन का अभि‍न्न अंग होता है। लेकिन इसके पीछे सशक्त वैज्ञानिक कारण भी है। वैज्ञानिक तर्क के अनुसार मानव शरीर में आंखों के मध्य से लेकर माथे तक एक नस होती है। जब भी माथे पर तिलक या कुमकुम लगाया जाता है, तो उस नस पर दबाव पड़ता है जिससे वह अधि‍क साक्रिय हो जाती है, और पूरे चेहरे की मांसपेशि‍यों तक रक्तसंचार बेहतर तरीके से होता है। इससे उर्जा का संचार होता है और सौंदर्य में भी वृद्धि होती है।

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